देवर अर्जुन ने अपनी सेक्सी भाभी मीरा को बेडरूम से लेकर बालकनी तक बर्बर BDSM चुदाई में तोड़ा। रस्सी, कोड़े, गांड फाड़ना और पूरी गुलाम रंडी बनाकर की गई क्रूर हॉट चुदाई की अनोखी सच्ची कहानी।
मेरा नाम अर्जुन है। उम्र 25 साल। मैं बैंगलोर के एक व्यस्त इलाके, इंडिरानगर में रहता हूं। मेरा भाई विदेश में जॉब करता है, इसलिए घर पर अक्सर सिर्फ मैं और मेरी भाभी मेरा रहते हैं। भाभी का नाम मीरा है। उम्र 34 साल।
उनका फिगर 42DD-36-44 है। उनके दूध इतने विशाल और भरे हुए हैं कि कोई भी एक बार देख ले तो रात भर नींद नहीं आती। उनकी गांड तो ऐसी है कि साड़ी में भी लहराती हुई नजर आती है – गोल, मोटी, निचली और पूरी तरह चोदने लायक। चेहरे पर वो मासूमियत है, लेकिन अंदर से वो आग है, जिसे मैंने खुद भड़काया।
ये घटना करीब 3 साल पहले की है। तब मैं कॉलेज खत्म करके घर पर ही रहता था। भाभी घर संभालती थीं। शुरू में हमारा रिश्ता सामान्य देवर-भाभी वाला था, लेकिन धीरे-धीरे मैं उनके करीब आने लगा। वो मुझे अपनी हर छोटी-बड़ी बात बतातीं – पति की कमी, अकेलापन, और कभी-कभी अपनी शारीरिक इच्छाओं के बारे में भी इशारा करतीं। मैं उनके सपनों में उन्हें बर्बर तरीके से चोदता, उनके दूधों को मसलता, गांड पर थप्पड़ मारता और उनकी चूत को फाड़ता हुआ देखता।
एक दिन घर में सिर्फ हम दोनों थे। भाई का फोन आया था कि वो अगले हफ्ते तक नहीं आ पाएगा। शाम के 7 बजे थे। मीरा भाभी रसोई में खाना बना रही थीं। वो हल्की सी ट्रांसपेरेंट नाइट सूट पहने हुए थीं, जिसमें उनके भारी दूध और मोटी गांड का आकार साफ दिख रहा था। मैं उनके पीछे खड़ा हो गया।
“भाभी, आज बहुत अकेले लग रहे हो,” मैंने कहा।
उन्होंने मुड़कर देखा और मुस्कुराई, “अर्जुन, तू तो जानता है, तेरे भाई की कमी खलती है।”
मैंने हिम्मत करके उनके कंधे पर हाथ रखा और सीधे कहा, “भाभी, मैं आपको बहुत पसंद करता हूं। सिर्फ पसंद नहीं, मैं आपको अपनी बनाना चाहता हूं। आपकी इस मोटी गांड को, इन बड़े-बड़े दूधों को रोज चोदना चाहता हूं।”
मीरा भाभी चौंक गईं। उनका चेहरा लाल हो गया। “अर्जुन! ये क्या कह रहे हो? हम देवर-भाभी हैं। ये गलत है। मैं शादीशुदा हूं!”
लेकिन मैंने पीछे नहीं हटा। मैंने उन्हें दीवार से सटा दिया। मेरा एक हाथ उनकी कमर पर, दूसरा उनके भारी दूध पर रख दिया। “गलत तो बहुत कुछ है भाभी, लेकिन दिल की बात गलत नहीं होती। आज सिर्फ हम दोनों हैं। कोई नहीं आएगा। मैं आपको वो सुख दूंगा जो भाई कभी नहीं दे पाया।”
उन्होंने विरोध किया, मुझे धक्का दिया, लेकिन मैं मजबूत था। मैंने उनकी दोनों कलाइयां पकड़ लीं और ऊपर उठाकर उनके सिर के ऊपर दीवार से लगा दी। “बस आज एक बार। अगर आप नहीं चाहोगी तो कभी नहीं करूंगा। लेकिन मुझे लगता है आप भी चाहती हो।”
मीरा की सांसें तेज हो गईं। मैंने झुककर उनकी गर्दन पर किस किया, फिर काटा। वो सिहर गईं। मैंने उनकी नाइट सूट की जिप खोली और उनके विशाल 42DD वाले दूध बाहर निकाल लिए। ब्रा को एक झटके में ऊपर किया। उनके गुलाबी-भूरे निप्पल सख्त हो चुके थे। मैंने एक दूध को जोर से मसलते हुए मुंह में ले लिया और काटने लगा। “आह्ह्ह… अर्जुन… नहीं… दर्द हो रहा है…” लेकिन उनकी आवाज में दर्द के साथ ललक भी थी।
मैंने दूसरे हाथ से उनका दूसरा दूध मसलना शुरू किया। निप्पल को उंगलियों में दबाकर खींचा। वो तड़प रही थीं। मैंने उन्हें घसीटकर बेडरूम ले जाया। वहां मैंने उन्हें बेड पर धकेल दिया। उनकी नाइट सूट पूरी उतार दी। वो सिर्फ पैंटी में थीं। उनकी मोटी गांड बेड पर लहरा रही थी।
“भाभी, आज मैं आपको पूरी तरह अपना बना लूंगा। आप मेरी रंडी बनोगी आज।”
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मैंने उनकी पैंटी भी खींचकर उतार दी। उनकी चूत पहले से गीली थी। साफ मुंडी हुई गुलाबी चूत, जिसमें से रस टपक रहा था। मैंने उनकी टांगें फैलाकर जोर से थप्पड़ मारा उनकी जांघों पर। “चूत गीली हो गई है रंडी। अब मना मत कर।”
मीरा ने शरमाते हुए आंखें बंद कर लीं। मैंने अपना मुंह उनकी चूत पर रख दिया। जीभ से क्लिटोरिस को चाटा, फिर अंदर डालकर चूसने लगा।
वो जोर-जोर से कराह रही थीं – “आह्ह्ह… उफ्फ… अर्जुन… ये गलत है… आह्ह्ह… और जोर से…” मैंने दो उंगलियां अंदर डाल दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। उनकी चूत कसकर मेरी उंगलियों को दबा रही थी।
कुछ ही मिनटों में वो पहली बार झड़ गईं। उनका पूरा शरीर अकड़ गया। “मैं आ गई… आह्ह्ह!” मैंने उनका सारा रस पी लिया।
अब मेरी बारी थी। मैंने अपना 8 इंच का मोटा लंड बाहर निकाला। मीरा की आंखें फैल गईं। “इतना बड़ा… नहीं अर्जुन… दर्द होगा…”
मैंने उनकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और एक ही झटके में पूरा लंड उनकी चूत में घुसा दिया। “आआआह्ह्ह्ह!!! फट जाएगी… निकालो…” वो चीखीं। लेकिन मैंने रुका नहीं। जोर-जोर से धक्के लगाने लगा। हर धक्के पर उनके विशाल दूध हिल रहे थे। मैंने उनके निप्पल काटे, दूधों पर थप्पड़ मारे। उनकी चूत मेरे लंड को चूस रही थी।
मैंने उन्हें घोड़ी बनाया। उनकी मोटी गांड ऊपर थी। मैंने गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा – चटाक! चटाक! उनकी गोरी गांड लाल हो गई। “ये लो भाभी, तेरी मोटी गांड के लिए।” फिर मैंने लंड फिर से चूत में डाला और पागलों की तरह चोदने लगा। उनका मुंह तकिए में दबा हुआ था, लेकिन हर धक्के पर वो “आह्ह्ह… मारो… और जोर से…” बोल रही थीं।
मैंने उनके बाल पकड़े, गर्दन पीछे खींची और चोदते हुए उनके कान में फुसफुसाया, “आज तेरी गांड भी मारूंगा रंडी।”
उन्होंने डरते हुए कहा, “नहीं… वो बहुत दर्द होगा…”
लेकिन मैंने सुना नहीं। मैंने लंड पर थूक लगाया और उनकी गांड के छेद पर रख दिया। धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया। मीरा चीखीं – “आआआह्ह्ह… फट रही है… निकालो अर्जुन!!” लेकिन मैंने पूरा लंड अंदर ठेल दिया। उनकी टाइट गांड मेरे मोटे लंड को निचोड़ रही थी। मैंने तेजी से गांड मारना शुरू किया। हर धक्के पर वो पूरी तरह कांप रही थीं। मैंने एक हाथ से उनकी चूत में उंगलियां डाल दीं और दोनों जगहों पर हमला बोल दिया।
मीरा पूरी तरह टूट चुकी थीं। वो बार-बार झड़ रही थीं। “मैं तेरी रंडी हूं अर्जुन… जो चाहे करो… आह्ह्ह… चोदो मुझे…”
मैंने उन्हें बेड से उठाकर खड़ा किया। दीवार से सटाकर खड़े-खड़े चोदा। फिर उन्हें घुटनों पर बैठाकर मुंह में लंड ठूंसा। वो गला तक चूस रही थीं। आंसू निकल आए थे, लेकिन वो रुक नहीं रही थीं।
दूसरी राउंड में मैंने उन्हें बांध दिया। उनके हाथों को स्कार्फ से बेड के सिरहाने बांधा। टांगें फैलाकर उन्हें पूरी तरह खुला रखा। फिर मैंने बेल्ट निकाली और उनकी दूधों पर, जांघों पर, गांड पर हल्के-हल्के प्रहार किए। हर प्रहार के साथ वो चीखतीं और उनकी चूत से रस बहता। “और मारो… मुझे सजा दो…”
मैंने उन्हें तीन बार चोदा – चूत, गांड और फिर मुंह में। आखिरी बार जब मैं झड़ने वाला था, तो उनकी गांड में पूरा माल भर दिया। वो थककर बेड पर पड़ी थीं। शरीर पर लाल निशान, चूत और गांड से मेरा और उनका रस बह रहा था।
उसके बाद हम दोनों नहाए। मैंने उन्हें गले लगाया। “भाभी, अब तुम मेरी हो। जब चाहूं, तुम्हें इसी तरह चोदूंगा।”
मीरा ने शरमाते हुए सिर हिलाया, “हां अर्जुन… तुमने मुझे वो सुख दिया जो मैंने कभी सोचा भी नहीं था। अब मैं तुम्हारी हूं।”
उस रात के बाद मीरा भाभी पूरी तरह बदल चुकी थीं। नहाते वक्त भी वो मेरे सीने से चिपकी रही, उनके भारी 42DD वाले दूध मेरी छाती पर दब रहे थे। मैंने उनके निप्पल को हल्के से चुटकी ली और फुसफुसाया, “कल से तुम मेरी पूरी गुलाम रंडी हो। समझीं?”
मीरा ने आंखें झुकाकर सिर हिला दिया, “हां अर्जुन… जो सजा दो, जो चोदो… मैं सह लूंगी।”
अगले दिन सुबह ही खेल शुरू हो गया। भाभी रसोई में चाय बना रही थीं। मैं चुपके से पीछे आया और उनकी नाइट सूट ऊपर करके उनकी मोटी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा। चटाक! “आह्ह्ह!” वो चौंककर मुड़ीं। मैंने उन्हें काउंटर पर झुका दिया, पैंटी खींचकर नीचे की और सीधा अपना सुबह का खड़ा लंड उनकी चूत में ठेल दिया। बिना किसी तैयारी के। “उफ्फ… अर्जुन… सुबह-सुबह इतना जोर से… फट जाएगी!”
“चुप रंडी! तेरी चूत तो हमेशा मेरे लंड के लिए तरसती रहती है।”
मैंने उनके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और पागलों की तरह धक्के लगाने लगा। हर धक्के पर उनके विशाल दूध काउंटर पर रगड़ खा रहे थे। मैंने एक हाथ से उनका गला दबाया, दूसरे से क्लिट पर उंगलियां घुमाईं। वो 5 मिनट में ही पहली बार झड़ गईं, लेकिन मैं रुका नहीं। लंड निकाला, घुटनों पर बैठाया और मुंह में ठूस दिया। “चूस अच्छे से, गला तक ले अंदर!”
उस दिन दोपहर में मैंने उन्हें बेडरूम में बुलाया। मैंने पहले से तैयार किया था – स्कार्फ, बेल्ट, क्लॉथ पिन्स और एक छोटा वाइब्रेटर। मीरा को देखते ही उनकी आंखों में डर और उत्तेजना दोनों थे। मैंने उन्हें पूरी नंगी किया। उनके हाथ पीछे बांध दिए। फिर दोनों निप्पल पर क्लॉथ पिन्स लगा दिए। “आआआह्ह्ह… दर्द हो रहा है अर्जुन!”
“ये तो शुरुआत है।” मैंने उन्हें फर्श पर घुटनों के बल बैठाया, मुंह खोलकर लंड मुंह में डाला और गले तक धकेला। वो उल्टी जैसा महसूस कर रही थीं, आंसू बह रहे थे, लेकिन मैंने बाल पकड़कर जबरन चुदवाया। फिर उन्हें बेड पर लिटाया, टांगें फैलाकर बांध दीं। वाइब्रेटर उनकी चूत में ऑन करके तेज सेट पर रख दिया। “अब तक सहना, झड़ना मना है!”
मीरा तड़पने लगीं। उनका शरीर अकड़-अकड़कर उठ रहा था। “प्लीज अर्जुन… निकाल दो… मैं झड़ जाऊंगी… आह्ह्ह!” मैंने उनकी गांड पर बेल्ट से 10 जोरदार कोड़े मारे। हर कोड़े पर उनकी मोटी गोरी गांड लाल-नीली हो गई। “रंडी, सह! तेरी सजा है ये।”
जब वो किनारे पर पहुंच गई, मैंने वाइब्रेटर निकाला और अपना मोटा 8 इंच लंड एक झटके में गांड में ठेल दिया। बिना ज्यादा लुब्रिकेंट। मीरा चीख पड़ीं – “नहीं… फट गई… मार डाला… आआआह्ह्ह!!!” मैंने उनकी कमर पकड़कर बर्बर तरीके से गांड चोदना शुरू कर दिया। पूरा लंड बाहर निकालकर फिर पूरी ताकत से अंदर। उनकी गांड के छेद फूल गए थे। मैंने एक हाथ से गला दबाया, दूसरे से दूध मसलते हुए निप्पल खींचे। वो बार-बार झड़ रही थीं, चूत से रस की धार बह रही थी।
“बोल रंडी, तू किसकी है?” “तेरी… तेरी गुलाम… चोदो मुझे… फाड़ दो मेरी गांड!”
उस शाम मैं उन्हें बालकनी में ले गया। रात के अंधेरे में, पड़ोसियों के घर पास थे। मैंने उन्हें रेलिंग पर झुकाया, साड़ी ऊपर की और पीछे से चोदा। “अगर कोई देख लिया तो क्या होगा भाभी?” वो डर के मारे कांप रही थीं, लेकिन उत्तेजना से उनकी चूत और गीली हो गई। मैंने जोर-जोर से धक्के मारे, एक हाथ से मुंह दबाए रखा ताकि उनकी आहें बाहर न निकलें।
अगले कुछ हफ्तों में हमारा खेल और खतरनाक हो गया। एक दिन मैंने उन्हें पूरा दिन घर में नंगी घुमाया। उनके निप्पल पर क्लिप्स लगाए, चूत में छोटा बट प्लग डाला। वो घर के काम करतीं तो प्लग से उनकी गांड हिलती, वो तड़पतीं। “अर्जुन… निकाल दो… सह नहीं पा रही…” मैं हर घंटे उन्हें बुलाकर मुंह में या चूत में लंड ठूस देता।
एक खास रात मैंने उन्हें पूरे BDSM सेशन के लिए तैयार किया। बेड पर उन्हें एक्स पोजिशन में बांध दिया – हाथ-पैर चारों तरफ फैलाकर। आंखों पर पट्टी बांध दी। मुंह में बॉल गैग। फिर मैंने कैंडल जलाकर उनके दूधों, पेट और जांघों पर मोम टपकाया। “आह्ह्ह… जल रहा है!” लेकिन मोम गिरते ही मैंने बेल्ट से प्रहार शुरू किए। उनकी पूरी बॉडी लाल निशानों से भर गई।
फिर मैंने दो उंगलियां चूत में, दो गांड में डालकर तेजी से फिंगर फक किया। वो बॉल गैग के कारण सिर्फ “म्म्म… म्म्म…” कर पा रही थीं। जब वो थक गईं, मैंने गैग निकाला और अपना लंड मुंह में ठूसा। गला फक किया, थूक निकल रहा था। फिर लंड निकालकर उनकी चूत और गांड दोनों में बारी-बारी से चोदा।
“आज मैं तेरी चूत और गांड दोनों को फाड़ दूंगा रंडी।” मैंने उन्हें डबल पेनेट्रेशन दिया – लंड गांड में, उंगलियां चूत में। मीरा पागल हो गई थीं। उनका शरीर बार-बार ऑर्गेज्म से कांप रहा था। मैंने अंत में उनके मुंह, चूत और गांड तीनों जगह अपना माल भर दिया। वो बेड पर बेहोश जैसी पड़ी थीं, शरीर पर मोम, लाल निशान, चूसने के निशान और हमारा रस।
इसके बाद हमने और भी क्रूर खेल खेले। एक बार मैंने उन्हें कार में घुमाते हुए हाईवे पर उनकी साड़ी ऊपर करके चोदा। एक बार ऑफिस से लौटकर सीधा उन्हें किचन में झुकाकर इतना बर्बर चोदा कि उनकी टांगें कांपने लगीं। मैंने उनके दूधों को रस्सी से बांधकर लटकाया, फिर उन पर चढ़कर चोदा।
मीरा अब पूरी तरह ब्रोकन और एडिक्ट हो चुकी थीं। वो खुद कहतीं, “अर्जुन, आज मेरी गांड फाड़ दो… मुझे सजा दो… मैं तेरी पिटने वाली रंडी हूं।” उनकी चूत और गांड अब इतनी ट्रेंड हो गई थी कि वो घंटों तक बर्बर चुदाई सह लेतीं।
एक रात मैंने उन्हें आखिरी बार और भी खतरनाक तरीके से आजमाया। पूरे घर में रोशनी बंद करके, सिर्फ मोमबत्ती जलाकर। उन्हें कुर्सी पर बांधा, पैर ऊपर करके। फिर व्हिप, क्लैम्प्स, और मेरे लंड का इस्तेमाल करके उन्हें 7 बार झड़वाया। आखिर में जब मैं झड़ा, तो उनका पूरा चेहरा, दूध और चूत मेरे गाढ़े वीर्य से लथपथ था।
“अब बोल, तू किसकी रंडी है हमेशा के लिए?” मीरा ने थकी हुई लेकिन संतुष्ट आवाज में कहा, “तेरी… सिर्फ तेरी अर्जुन… जितनी मर्जी बर्बर चोदो मुझे।”
इस तरह हमारी ये गुप्त, क्रूर और बेहद हॉट चुदाई का सिलसिला सालों तक चलता रहा। बैंगलोर की उन रातों में मीरा भाभी मेरी सबसे प्राइवेट, सबसे आज्ञाकारी और सबसे ज्यादा चोदी जाने वाली रंडी बनकर रह गईं।