बहन को बाँधकर चोदा

माँ-बाप नौकरों से चुदवा रहे थे। भाई ने बहन को बाँधकर चाबुक मारे, गांड फाड़ी, चूत में लोहा घुसाया। पूरा परिवार मिलकर उसे तोड़ता रहा। दर्द और वीर्य की रातें।

यह कहानी एक ऐसे परिवार की है जहाँ रिश्ते सिर्फ कागज़ पर थे। शरीर की भूख ने हर सीमा तोड़ दी थी। कोई शर्म नहीं, कोई रोक नहीं, सिर्फ कच्ची हवस और दर्द में मिलने वाला मज़ा।

शहर के बाहरी इलाके में एक पुराना बंगला था। वहाँ रहती थी अरेब परिवार। पिता का नाम था रहीम खान, उम्र 52 साल। माँ थी नर्गिस, 45 साल की। बेटा आमिर 19 साल का और बेटी सना 22 साल की। घर में दो नौकर भी थे। काला, हट्टा-कट्टा चालक जमाल 32 साल का और गोरी, मोटी गांड वाली नौकरानी रेहाना 28 साल की।

रहीम और नर्गिस सालों से खुले विचारों वाले थे। स्वैपिंग, नौकरों से चुदाई, सब कुछ चलता था। रहीम की बीवी को देखकर उसका लंड कभी नहीं बैठता था। नर्गिस की 38 डी चूचियाँ, मोटी जाँघें और गोल गांड देखकर वह सोचता था कि इस माल को सिर्फ अपना रखने में मज़ा नहीं। उसे दूसरों से भी चुदवाकर देखना अच्छा लगता था। नर्गिस खुद भी अधूरी रहती थी। रहीम का मोटा लेकिन औसत लंड उसे कभी संतुष्ट नहीं कर पाता था। इसलिए जमाल का काला, 9 इंच लंबा और मोटा लंड उसके अंदर रात-रात भर घूमता रहता था।

आमिर लंबा, तगड़ा युवक था। उसका लंड 8.5 इंच का था, अभी तक कुँवारा। लेकिन घर की औरतों को देखकर वह पागल हो जाता था। खासकर अपनी बहन सना को। सना 5 फुट 4 इंच की गोरी लड़की थी। भरे हुए जिस्म, नुकीले निप्पल, सपाट पेट, मोटी जाँघें और उभरे हुए कूल्हे। घर में वह छोटे स्कर्ट और टाइट टॉप पहनती थी।

जब चलती तो उसके कूल्हे इधर-उधर हिलते और आमिर का लंड तंबू बना लेता।
एक शाम आमिर के जन्मदिन पर दोस्तों के साथ पार्टी थी। सना ने जिद की कि वह भी जाएगी। आमिर मना नहीं कर सका। सना ने काली टाइट जीन्स और लाल बिना आस्तीन वाली टॉप पहनी। चूचियाँ बाहर आने को तैयार थीं।

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आमिर की नजर बार-बार वहाँ जाती। कार में पीछे बैठे तो सना ने जानबूझकर अपना हाथ भाई की जाँघ पर रखा।
“आज रात कुछ अलग होगा,” सना ने फुसफुसाया।

पार्टी में बीयर का दौर चला। दोस्तों की गर्लफ्रेंड्स और एक दोस्त की माँ भी थी। नशे में सबकी नजर सना पर थी। आमिर की भी। वह अपनी बहन को डांस करते देख रहा था। अचानक बारिश शुरू हो गई और शहर में दंगे की खबर आई। कर्फ्यू लग गया। सब बिखर गए। आमिर और सना को घर वापस आना पड़ा।

घर पहुँचे तो लाइट अभी जल रही थी। दोनों भीगे हुए थे। सना के कपड़े शरीर से चिपक गए थे। चूचियों के निप्पल साफ दिख रहे थे। आमिर का लंड दर्द कर रहा था। दोनों पिछले दरवाजे से अंदर गए ताकि माँ-बाप को परेशान न करें।
आमिर बाथरूम गया। डोर आधा खुला छोड़ दिया। पास वाले कमरे से आवाजें आ रही थीं। उसने झाँका।

नर्गिस पूरी नंगी बिस्तर पर लेटी थी। जमाल उसके ऊपर था। काला लंड नर्गिस की चूत में पूरा धंसा हुआ था। रहीम पास में बैठा था। रेहाना उसके लंड पर बैठकर उछल रही थी। रहीम की उँगलियाँ रेहाना की गांड में घुसी हुई थीं।
“साली रंडी, जोर से बैठ,” रहीम गुर्राया। “आज तेरी गांड भी फाड़ूँगा।”

नर्गिस चीख रही थी। “जमाल… और गहरा… मेरी चूत फाड़ दे… रहीम देख रहा है… उसे दिखा कि असली मर्द कैसे चोदता है।”
जमाल ने नर्गिस के बाल पकड़कर उसके मुँह में लंड ठूंस दिया। फिर पलटकर डोगी स्टाइल में पेलने लगा। एक हाथ से उसकी गांड के छेद में उँगली घुसा दी। नर्गिस की चीखें दब गईं।

आमिर का मुँह खुला रह गया। उसका लंड फटने को तैयार था। तभी सना पीछे आ गई। उसने भी वही दृश्य देखा।
“अम्मी… अब्बू… यह क्या…” सना की आवाज काँप गई।
आमिर ने पलटी और बहन का मुँह पकड़ लिया। उसके होंठ सना के होंठों पर चिपक गए।

जीभ अंदर घुस गई। एक हाथ सना की गीली टॉप के अंदर घुसकर चूची मसलने लगा। निप्पल को जोर से मरोड़ा।
सना पहले झिझकी, फिर जवाब देने लगी। उसकी जीभ भी आमिर की जीभ से लड़ने लगी। आमिर ने उसे खींचकर अपने कमरे में ले गया। दरवाजा बंद किया।
“आज रात सब कुछ चोदेगा,” आमिर ने कहा। उसकी आवाज में पागलपन था।

“माँ नौकर से चुद रही है। बाप नौकरानी को चोद रहा है। मैं अपनी बहन को छोड़ दूँ?”
सना की साँसें तेज थीं। नशे और दृश्य ने उसकी चूत भीगी कर दी थी। उसने खुद अपनी टॉप उतारी। ब्रा खोल दी। 34 साइज की सख्त चूचियाँ बाहर आ गईं। फिर जीन्स और पैंटी एक साथ नीचे सरका दी। बिना बाल वाली चूत चमक रही थी।

आमिर नंगा हो गया। उसका लंड सीधा खड़ा था। सना ने घुटनों के बल बैठकर उसे मुँह में ले लिया। पहले सिर्फ सुपाड़ा, फिर पूरा अंदर तक। गला भर गया। आँखों से आँसू निकल आए लेकिन उसने रोका नहीं। आमिर ने उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदना शुरू कर दिया।
“चूस… और गहरा… गला फाड़,” आमिर गुर्राया।

सना की आँखें लाल हो गईं। थूक लार से लंड तर हो गया। आमिर ने उसे खींचकर बिस्तर पर लिटाया। टाँगें चौड़ी कीं। पहले चूत चाटी। जीभ अंदर तक घुसाई। सना की कमर उछलने लगी।
“भाई… अब मत तड़पा… डाल दे…”

आमिर ने सुपाड़ा चूत के मुँह पर रखा और एक जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड एक ही बार में घुस गया। सना चीख पड़ी। कुँवारी चूत फटने का दर्द हुआ लेकिन उसने पैर भाई की कमर पर लपेट लिए।

आमिर ने बिना रुके पेलना शुरू किया। तेज, गहरा, क्रूर। हर धक्के पर सना की चूचियाँ काँपतीं। उसने दोनों निप्पल मुँह में लेकर काटे। सना की चीखें दबाने के लिए आमिर ने अपना हाथ उसके मुँह पर रख दिया।
“चुप… नहीं तो माँ-बाप सुन लेंगे… लेकिन तू चीख… मुझे सुनना है।”

उसने उँगली सना की गांड के छेद में घुसा दी। पहले एक, फिर दो। सना तड़पने लगी। आमिर ने पोजीशन बदली। सना को घुटनों के बल किया। पीछे से लंड चूत में घुसाया और दोनों हाथों से उसकी गांड के गालों को फैलाकर उँगली अंदर-बाहर करने लगा।
“गांड भी दूँगा आज,” आमिर ने कहा। “तेरी गांड भी मेरी है।”

सना ने सिर घुमाकर देखा। आँखों में दर्द और मस्ती दोनों थे। “कर… जो करना है… फाड़ दे…”
आमिर ने लंड चूत से निकाला और गांड के छेद पर लगाया। थूक लगाया। फिर धीरे-धीरे लेकिन बिना रुकें धकेलना शुरू किया। सना की चीख निकल गई। आमिर ने उसका मुँह दबाया और पूरा लंड गांड में धंसा दिया। फिर जोर-जोर से पेलने लगा। एक हाथ से सना की चूत मसल रहा था। उँगली क्लिट पर घुमा रहा था।

सना का शरीर काँप रहा था। दर्द और सुकून एक साथ। आमिर ने बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। कमर जोर से पेल रहा था। हर धक्के पर सना की गांड की मांसपेशियाँ लंड को कस रही थीं।
इतने में बाथरूम का दूसरा दरवाजा खुला। नर्गिस और जमाल दोनों नंगे खड़े थे। पीछे रहीम और रेहाना भी। सबने देखा।
नर्गिस मुस्कुराई। “देखा… बच्चों ने भी शुरू कर दिया।”

रहीम का लंड फिर से खड़ा हो गया। “आमिर… बहन की गांड फाड़ रहा है। अच्छा कर रहा है।”
जमाल ने नर्गिस को खींचकर आमिर के बिस्तर पर लिटा दिया। “माँ-बेटे का खेल भी चलता है।”
नर्गिस ने आमिर के लंड को सना की गांड से निकाला और मुँह में ले लिया। सना की गांड से निकला लंड अभी भी चमक रहा था। नर्गिस ने उसे साफ किया फिर सना की तरफ देखा।

“बेटी… अपनी माँ की चूत चाट।”
सना झिझकी लेकिन आमिर ने उसके सिर को नर्गिस की चूत पर दबा दिया। सना ने जीभ निकाली। नर्गिस की भीगी चूत चाटने लगी। जमाल ने पीछे से सना की चूत में लंड डाल दिया। काला मोटा लंड एक ही धक्के में पूरा घुस गया। सना की चीख नर्गिस की चूत में दब गई।
रहीम ने रेहाना को सना के पास लाया। “रेहाना… इन दोनों की गांड चाट।”

रेहाना ने घुटने टेके और सना और नर्गिस दोनों की गांड चाटने लगी। रहीम ने रेहाना की गांड में लंड डाल दिया और जोर से पेलने लगा।
कमरे में सिर्फ मांस की आवाजें थीं। थप्पड़, चीख, कराह। आमिर ने सना को पलटकर ऊपर बैठाया। खुद नीचे लेट गया। सना का मुँह उसकी चूत पर था और वह आमिर का लंड चूस रही थी। जमाल ने सना की गांड में फिर से लंड डाल दिया। नर्गिस आमिर के चेहरे पर बैठ गई। रहीम ने रेहाना को खींचकर सना के मुँह के पास लाया और दोनों को एक-दूसरे की चूत चाटने को कहा।

रात भर यही सिलसिला चला। पोजीशन बदलती रहीं। सना की चूत और गांड दोनों लाल हो चुकी थीं। आमिर ने उसे बाँध दिया। हाथ पीछे, टाँगें फैलीं। रस्सी से बिस्तर के खंभों से बाँधा। फिर बारी-बारी से सबने उसे चोदा। पहले आमिर, फिर जमाल, फिर रहीम। नर्गिस और रेहाना उसकी चूचियाँ काटतीं, चूत पर थप्पड़ मारतीं।

सना बार-बार पानी छोड़ती। शरीर काँपता। लेकिन कोई नहीं रुका। आमिर ने आखिर में उसकी गांड में झड़ा। जमाल ने चूत में। रहीम ने मुँह में। नर्गिस ने सना के चेहरे पर बैठकर पानी छोड़ा। रेहाना ने भी।
सुबह होने को थी। सब थककर बिस्तर पर गिरे हुए थे। सना के शरीर पर निशान थे। चूत और गांड दोनों सूजी हुईं। लेकिन उसकी आँखों में अभी भी भूख बाकी थी।

आमिर ने उसके बाल सहलाए। “अब हर रात यही होगा। माँ, बाप, नौकर, बहन… सब एक बिस्तर पर।”
सना ने कमजोर मुस्कान दी। “भाई… अगली बार और जोर से बाँधना। और दर्द दो।”
नर्गिस ने आँखें खोलीं। “घर अब सिर्फ परिवार का नहीं। यह हवस का अड्डा है।”

रहीम हँसा। “और कोई शिकायत नहीं।”
बारिश अभी भी हो रही थी। बंगले के बाहर सन्नाटा था। अंदर सिर्फ साँसें और कभी-कभी कराहें। रिश्ते खत्म हो चुके थे। बची थी सिर्फ शरीर की भूख। और वह भूख कभी नहीं मरने वाली थी।

सुबह की रोशनी कमरे में घुस चुकी थी लेकिन किसी ने पर्दे नहीं खोले। बिस्तर पर फैली लाश जैसी देहें अभी भी एक-दूसरे से चिपकी हुई थीं। सना के हाथ-पैर रस्सियों से बँधे थे। उसकी चूत और गांड दोनों सूजी हुई, लाल और खुली पड़ी थीं। आमिर ने उठते ही उसकी जाँघों के बीच उँगली घुसाई। सना कराह उठी।

“अभी तो सिर्फ शुरुआत है,” आमिर ने धीरे से कहा। उसने रस्सी और कसी। सना की कलाईयाँ और भी जकड़ गईं। फिर उसने बिस्तर के नीचे से चमड़े का चाबुक निकाला। पहले हल्के से चूचियों पर मारा। निप्पल तुरंत सख्त हो गए। दूसरा वार जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर। सना की कमर उछली।

नर्गिस उठ बैठी। उसकी आँखों में नींद नहीं, भूख थी। उसने जमाल का आधा सोया लंड मुँह में ले लिया और जोर से चूसा। जमाल जाग गया। उसने नर्गिस के बाल पकड़कर उसके मुँह में पूरा लंड ठूंस दिया। गला भर गया। नर्गिस की आँखों से आँसू बहने लगे लेकिन उसने विरोध नहीं किया।

रहीम ने रेहाना को खींचा। “आज तेरी गांड में कुछ नया डालूँगा।” उसने रेहाना को घुटनों के बल किया, गांड के गाल फैलाए और पहले थूक लगाया। फिर मोटी मोमबत्ती का सिरा अंदर धकेल दिया। रेहाना चीखी। रहीम ने मोमबत्ती को अंदर-बाहर करना शुरू किया। साथ में उसकी चूत में उँगली घुमाई।

आमिर ने सना को घसीटकर फर्श पर गिराया। रस्सियाँ अभी भी बँधी थीं। उसने सना के मुँह में अपना लंड ठूंस दिया और गले तक पेलने लगा। सना का चेहरा लाल हो गया। साँस नहीं आ रही थी। आमिर ने उसके बाल पकड़कर और जोर से धकेला। “गला फाड़… आज पूरा निगल।”
जब सना की आँखें लगभग बंद होने लगीं तो उसने लंड निकाला।

सना खाँसने लगी। आमिर ने उसे पलट दिया। गांड ऊपर। चाबुक से दोनों गालों पर लगातार वार किए। लाल निशान उभर आए। फिर उसने अपनी उँगली गांड में घुसाई, दो, तीन। सना तड़प रही थी लेकिन रस्सियों की वजह से हिल नहीं पा रही थी।

नर्गिस पास आई। उसने सना की चूत पर बैठकर अपनी चूत रगड़नी शुरू की। “बेटी… माँ की चूत चाट जबकि तेरा भाई तेरी गांड फाड़ रहा है।” सना ने जीभ निकाली। नर्गिस की भीगी चूत चाटने लगी। आमिर ने उसी समय अपना लंड सना की गांड में धंसा दिया। एक ही धक्के में पूरा। सना की चीख नर्गिस की चूत में दब गई।

जमाल ने नर्गिस को खींचा और उसके मुँह में लंड डाल दिया। रहीम ने रेहाना की मोमबत्ती निकाली और अपनी जगह लंड घुसा दिया। रेहाना की गांड से खून की हल्की धार बहने लगी लेकिन रहीम रुका नहीं। उसने उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से पेलना शुरू किया।
कमरे में अब सिर्फ आवाजें थीं—चाबुक की चटचटाहट, मांस की थपथपाहट, दबी चीखें और गले में लंड धँसने की आवाज।

आमिर ने सना की रस्सियाँ खोलीं लेकिन सिर्फ इसलिए कि उसे नई पोजीशन में बाँध सके। उसने सना के हाथ पीठ के पीछे बाँधे, टाँगें चौड़ी करके घुटनों से बाँधीं। फिर एक लोहे की छड़ ली जो बिस्तर के पास पड़ी थी। छड़ को सना की चूत में धीरे-धीरे धकेला। सना की आँखें फटी की फटी रह गईं। आमिर ने छड़ को अंदर तक पहुँचाया फिर बाहर निकाला और फिर से धकेला।

“देख… तेरी चूत कितनी फैल गई,” आमिर ने कहा। उसने छड़ निकाली और अपनी जगह जमाल को बुलाया। जमाल ने काला लंड सना की खुली चूत में धंसाया। साथ में आमिर ने गांड में उँगली घुमाई। नर्गिस सना के मुँह पर बैठ गई। रहीम ने रेहाना को सना के चेहरे के पास लाया और दोनों को एक-दूसरे की लार और पानी चाटने को कहा।

घंटों यही सिलसिला चला। सना कई बार बेहोश होने के करीब पहुँची लेकिन हर बार किसी ने उसके चेहरे पर थप्पड़ मारकर जगाया। आमिर ने उसके निप्पल पर क्लिप लगा दी। क्लिप इतनी कसी थी कि खून रुकने लगा। सना चीखती रही। आमिर ने क्लिप हटाई तो खून की बूँदें टपकीं। उसने उन बूँदों को चाटा और सना के मुँह में डाल दिया।

दोपहर हो चुकी थी। सब थक चुके थे लेकिन भूख खत्म नहीं हुई थी। रहीम ने फैसला किया। “आज रात एक नया खेल। सना को पूरी तरह बाँधकर रखेंगे। कोई उसे छुएगा तो चाबुक से। वह खुद माँगगी तभी छूएँगे।”
सना की आँखों में डर और उत्तेजना दोनों थे। उसके शरीर पर नीले-लाल निशान थे। चूत और गांड दोनों इतनी सूजी हुई थीं कि चलना मुश्किल था। फिर भी जब आमिर ने उसे फिर से बिस्तर पर लिटाया और नई रस्सियाँ बाँधीं तो उसने विरोध नहीं किया।

शाम ढलते-ढलते कमरा फिर अँधेरा हो गया। मोमबत्तियाँ जलाई गईं। सना बीच में बँधी पड़ी थी। उसके मुँह में गैग था। आँखों पर पट्टी। शरीर पर सिर्फ निशान और पसीना। आमिर ने सबसे पहले चाबुक उठाया। एक-एक वार चूचियों पर, जाँघों पर, चूत पर। सना की चीख गैग में दब गई। नर्गिस ने चाबुक लिया और गांड पर मारा। जमाल ने मोटी मोमबत्ती जलाई और पिघला हुआ मोम सना की पीठ पर टपकाया। सना का शरीर अकड़ गया।

फिर एक-एक करके सबने उसका इस्तेमाल किया। पहले मुँह, फिर चूत, फिर गांड। कोई भी जल्दी में नहीं था। हर कोई लंबे समय तक अंदर रहा, घुमाया, मरोड़ा, थप्पड़ मारे। जब कोई झड़ता तो दूसरे की बारी आती। सना का शरीर अब सिर्फ एक वस्तु बन चुका था। दर्द और मस्ती का मिश्रण इतना गहरा था कि वह खुद नहीं जानती थी कि रोना है या और माँगना है।

रात के आखिरी पहर में आमिर ने गैग हटाया। सना की आवाज कटी-फटी थी। “और… और दर्द दो… मुझे तोड़ो…”
आमिर मुस्कुराया। उसने नई रस्सी निकाली और सना के स्तनों को कसकर बाँध दिया। खून का प्रवाह लगभग रुक गया। फिर उसने लंड सना की गांड में धंसाया और पूरी ताकत से पेलने लगा। नर्गिस और रेहाना दोनों सना की चूचियाँ काट रही थीं। जमाल और रहीम बारी-बारी से उसके मुँह में लंड ठूँस रहे थे।

जब आखिरकार सब झड़ चुके तो कमरा शांत हो गया। सिर्फ भारी साँसें बची थीं। सना अभी भी बँधी पड़ी थी। उसके शरीर से पसीना, लार, वीर्य और हल्के खून की धार बह रही थी। आमिर ने उसके बाल सहलाए।
“कल और नया खेल होगा,” उसने फुसफुसाया। “आज तू बच गई। कल हम तुझे और नीचे ले जाएँगे।”
सना की आँखें बंद थीं लेकिन होंठ हिल रहे थे। “मैं तैयार हूँ… भाई…”

बाहर बारिश थम चुकी थी। बंगले के अंदर हवस की एक नई सुबह का इंतजार कर रही थी। रिश्ते अब सिर्फ नाम के रह गए थे। बची थी सिर्फ दर्द में मिलने वाली आजादी और वह आजादी हर रात और गहरी होती जा रही थी।

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