पड़ोसी रोहित को रस्सी से बाँधकर सीमा आंटी चाबुक, मुट्ठी और डिल्डो से उसकी गांड-चूत फाड़ती हैं। दर्द, गला घोंटना, दोहरा छेद और बर्बर वीर्य-स्नान वाली क्रूर बीडीएसएम रात जो पढ़ते ही साँस रोक दे।
रोहित 24 साल का था। मुंबई के अंधेरी वेस्ट इलाके में एक छोटी सी बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर अपने माता-पिता के साथ रहता था। सीमा आंटी उसके बगल वाले फ्लैट में रहती थीं। उम्र 35, शरीर 36-28-38, गोरा-चिट्टा रंग, लंबे काले बाल, और आँखें जो किसी को भी पागल बना दें। पति सुबह 5 बजे निकल जाते थे फैक्ट्री की शिफ्ट पर और रात 10 बजे लौटते थे। चार साल का बेटा स्कूल जाता था। घर अक्सर खाली रहता था।
जनवरी की ठंडी सुबह थी। रोहित छत पर घूम रहा था। अचानक उसकी नज़र सीमा आंटी के बाथरूम की खिड़की पर पड़ी। खिड़की आधी खुली थी। आंटी नंगी खड़ी थीं। पानी की बौछारें उनके बड़े-बड़े स्तनों पर गिर रही थीं। गुलाबी निप्पल कड़े हो चुके थे। पेट सपाट, कमर पतली, और नीचे घनी काली झाड़ियों के बीच गुलाबी चूत चमक रही थी। रोहित का लंड एकदम खड़ा हो गया।
उसने पैंट के ऊपर से ही मसलना शुरू कर दिया। आंटी ने सिर घुमाया और उसकी ओर देखा। मुस्कुराईं नहीं, बस नज़रें गड़ाए रखीं। फिर धीरे-धीरे अपने दोनों स्तनों को दबाया, निप्पल को उंगलियों से घुमाया और एक उंगली अपनी चूत में डालकर अंदर-बाहर करने लगीं। रोहित की साँसें तेज़ हो गईं। उसने जल्दी से अपना लंड निकाला और छत पर ही मूठ मार ली। वीर्य छत पर गिर गया।
उस दिन पूरा दिमाग आंटी के नंगे शरीर से भरा रहा। शाम को उसने व्हाट्सऐप पर मैसेज किया।
“हेलो आंटी।”
जवाब आया, “कौन?”
“रोहित… बगल वाला।”
“हाँ बोल।”
“आज सुबह… बाथरूम में… बहुत अच्छी लग रही थीं आप।”
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कुछ देर चुप्पी। फिर मैसेज आया, “तू देख रहा था ना? अपना लंड निकालकर?”
रोहित का दिल जोर से धड़का। “हाँ।”
“कल सुबह 5:30 बजे मेरे घर आ। गेट खुला रहेगा। अंदर आ जाना। कोई शोर मत करना।”
रात भर नींद नहीं आई। सुबह 5:15 पर रोहित उनके फ्लैट के बाहर खड़ा था। गेट हल्का धक्का दिया तो खुल गया। अंदर अंधेरा था। सीमा आंटी बेडरूम में खड़ी थीं। सिर्फ एक काला लेस वाला ब्रा और मैचिंग पैंटी पहने हुए। स्तन ब्रा से बाहर निकलने को बेताब थे। उन्होंने दरवाज़ा बंद किया और ताला लगाया।
“कपड़े उतार,” उन्होंने ठंडे स्वर में कहा।
रोहित ने जल्दी से टी-शर्ट और पैंट उतार दी। अंडरवियर भी। उसका 7.5 इंच का मोटा लंड सीधा खड़ा था। सीमा ने उसके पास आकर लंड को हाथ में लिया। कसकर दबाया।
“इतना सख्त… सुबह से ही?” उन्होंने थूक लगाकर ऊपर-नीचे करना शुरू किया। फिर घुटनों के बल बैठ गईं और मुँह में ले लिया। गले तक। रोहित की कमर आगे झुक गई। आंटी ने बाल पकड़कर उसके सिर को अपनी ओर खींचा और और गहरा निगला। लार टपकने लगी। उन्होंने दाँत हल्के से गड़ाए। दर्द और मज़ा एक साथ।
“आंटी… धीरे…”
उन्होंने लंड मुँह से निकाला। “धीरे? तूने मेरी चूत देखी थी ना? अब धीरे नहीं चलेगा।”
वे खड़ी हुईं और ब्रा खोल दी। बड़े-बड़े स्तन बाहर आ गए। निप्पल कड़े। रोहित ने मुँह लगाया और जोर से चूसा। दाँत से काटा। आंटी की साँस तेज़ हो गई। उन्होंने उसके बाल पकड़कर और जोर से दबाया। “काट… और जोर से।”
रोहित ने दोनों स्तनों को मुट्ठी में भरकर मसला। निप्पल को दाँतों के बीच दबाया और खींचा। आंटी कराह उठीं। फिर उन्होंने खुद पैंटी उतार दी। चूत पहले से गीली थी। रोहित को धक्का देकर बिस्तर पर गिराया और ऊपर चढ़ गईं। अपनी चूत उसके मुँह पर रख दी।
“चाट। गंदी चूत चाट।”
रोहित की जीभ अंदर घुसी। क्लिट को चूसा। आंटी ने कमर घुमाई और उसके चेहरे पर बैठकर रगड़ने लगीं। “और गहरा… जीभ अंदर डाल।” उन्होंने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़ रखा था। रोहित की नाक चूत में धँसी हुई थी। साँस लेने की जगह नहीं। आंटी जोर-जोर से हिल रही थीं। अचानक उनके शरीर में कंपकंपी हुई। पानी की धार उसके मुँह में आ गिरी। उन्होंने चेहरा नहीं हटाया। पूरा पानी निगल लिया।
आंटी उतर गईं। “अब मेरी बारी।” वे चारपाई पर लेट गईं। पैर फैलाए। “अपना मोटा लंड निकाल और अंदर डाल। धीरे नहीं। एक झटके में।”
रोहित ने लंड पर थूक लगाया और सीधा चूत के मुँह पर रखा। एक जोरदार धक्का। पूरा लंड अंदर समा गया। आंटी चिल्लाईं, “आह्ह… भोसड़ी के… इतना मोटा…” लेकिन उन्होंने पैर उसके कमर के पीछे लॉक कर दिए। “चल… जोर से मार। मेरी चूत फाड़ दे।”
रोहित ने कमर झटके मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ आंटी का शरीर ऊपर उठता। स्तन हिल रहे थे। उन्होंने अपने दोनों स्तनों को पकड़कर मसला। “और तेज़… और गहरा।” रोहित ने उनके पैर कंधों पर चढ़ाए और पूरा वजन डालकर चोदने लगा। बिस्तर चरमरा रहा था। आंटी की चीखें कमरे में गूँज रही थीं।
“गाली दे मुझे,” उन्होंने कहा। “गंदी औरत बोल… रंडी बोल।”
रोहित ने गला दबाया। “साली रंडी… अपने पड़ोसी के लंड की भूखी… तेरा पति तुझे ऐसे नहीं चोदता ना?”
“नहीं… वह कमजोर है… तू मार… और जोर से मार।”
रोहित ने गला और कस दिया। आंटी का चेहरा लाल हो गया। आँखों में पानी आ गया लेकिन उन्होंने सिर हिलाकर इशारा किया कि और कस। उसने एक हाथ से गला दबाए रखा और दूसरे से उनके स्तन को जोर से मसला। निप्पल को मोड़ा।
आंटी के शरीर में फिर से कंपन हुआ। चूत सिकुड़कर लंड को निचोड़ने लगी। पानी फिर से निकला।
रोहित ने लंड बाहर निकाला। “मुँह खोल।”
आंटी ने मुँह खोला। उसने पूरा लंड गले में ठूंस दिया। आंटी की आँखों से आँसू बहने लगे।
लार और चूत का पानी मिलकर उसके गले से बाहर आ रहा था। रोहित ने बाल पकड़कर सिर आगे-पीछे किया। गला पूरी तरह भरा हुआ था। जब साँस फूलने लगी तो उसने लंड निकाला। आंटी खांसने लगीं लेकिन मुस्कुराईं।
“अब गांड मार,” उन्होंने कहा। “तेल ला… ड्रॉयर में है।”
रोहित ने तेल निकाला। आंटी ने खुद घुटनों के बल होकर गांड ऊपर कर ली। दोनों हाथों से गांड के लोथड़े फैलाए। गुदा का छेद सिकुड़ा हुआ था। रोहित ने उंगली पर तेल लगाया और अंदर डाली। आंटी कराह उठीं। दो उंगलियाँ। तीन। फिर लंड पर तेल लगाया और सिर रखा। धीरे-धीरे धक्का दिया। आंटी चिल्लाईं, “आह्ह… फट रही है…” लेकिन पीछे नहीं हटीं।
रोहित ने कमर दबाई और पूरा लंड अंदर धकेल दिया।
गांड बहुत टाइट थी। हर धक्के के साथ आंटी की चीख निकलती। रोहित ने उनके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और जोर-जोर से गांड मारने लगा। एक हाथ से गला दबाया। आंटी का शरीर काँप रहा था। “साली… तेरी गांड भी चूत जैसी फैल जाएगी आज।”
उन्होंने पीछे मुड़कर देखा। आँखें लाल। “मार… और क्रूरता से मार… मुझे अपनी रंडी बना।”
रोहित ने उन्हें पलटा। अब आंटी पीठ के बल थीं। उसने उनके दोनों पैर फैलाए और फिर से गांड में लंड डाल दिया। इस पोजीशन में और गहरा जा रहा था। उसने उनके स्तनों को मुट्ठी में भरकर मसला। निप्पल को दाँतों से काटा। खून की एक बूँद निकली। आंटी चिल्लाईं लेकिन कराह के साथ। “और काट… मुझे दर्द दो।”
रोहित ने उनकी चूत पर थप्पड़ मारा। जोर का। लाल हो गई। फिर और थप्पड़। आंटी के शरीर पर लाल निशान पड़ने लगे। उसने कमर के नीचे तकिया रखा ताकि गांड और ऊपर उठ जाए और फिर पूरी ताकत से धक्के मारने लगा। बिस्तर की चरचराहट और आंटी की चीखें एक हो गई थीं।
अचानक आंटी के शरीर में तेज़ कंपन हुआ। चूत और गांड दोनों सिकुड़ गईं। पानी की धार फिर निकली। रोहित रुक नहीं पाया। उसने लंड बाहर निकाला और उनके चेहरे पर रख दिया। “मुँह खोल… पूरा निगल।”
आंटी ने मुँह खोला। उसने गले में ठूंसकर वीर्य छोड़ना शुरू किया। गाढ़ा वीर्य गले में भर गया। आंटी निगल रही थीं। कुछ बाहर निकलकर उनके स्तनों पर गिर गया। रोहित ने बाकी वीर्य उनके स्तनों और मुँह पर मला।
दोनों हाँफ रहे थे। आंटी की आँखों में अभी भी भूख थी। उन्होंने रोहित के लंड को फिर से हाथ में लिया। “अभी थका नहीं… फिर से खड़ा कर।”
रोहित का लंड धीरे-धीरे फिर सख्त होने लगा। आंटी ने उसे चाटा, चूसा, और फिर खुद ऊपर चढ़ गईं। इस बार चूत में। वे खुद कमर घुमा रही थीं। जोर-जोर से। स्तन उसके चेहरे पर झूल रहे थे। रोहित ने दोनों स्तनों को मुँह में भर लिया और काटने लगा। आंटी की रफ्तार और तेज़ हो गई। “मेरे अंदर छोड़… इस बार अंदर।”
रोहित ने कमर ऊपर उठाई और जोरदार धक्कों के साथ वीर्य उनकी चूत के अंदर छोड़ दिया। आंटी चीखते हुए ऊपर गिर पड़ीं। दोनों लंबे समय तक वैसे ही पड़े रहे।
थोड़ी देर बाद आंटी ने सिर उठाया। चेहरा पसीने और वीर्य से सना हुआ। “कल फिर आना। इस बार रस्सी लेकर आना। मैं तुझे बाँधूँगी… और तू मुझे।”
रोहित ने उनकी ओर देखा। आँखों में वही पागलपन था। “आऊँगा आंटी। और अगली बार तुम्हारी गांड और चूत दोनों एक साथ फाड़ दूँगा।”
सीमा मुस्कुराईं। “करके दिखा… मेरी जान।”
उस सुबह रोहित जब अपने फ्लैट में वापस आया तो शरीर पर खरोंचें और दाँत के निशान थे। लेकिन मन में एक ही बात घूम रही थी—अगली मुलाकात। सीमा आंटी अब सिर्फ पड़ोस की औरत नहीं रह गई थीं।
वे उसकी सबसे गंदी, सबसे क्रूर इच्छाओं की मालकिन बन चुकी थीं। और वह उनकी सबसे कठोर, सबसे निर्दयी लंड की गुलाम।
कहानी यहीं खत्म नहीं हुई थी। वह तो बस शुरुआत थी।
अगली सुबह रोहित के हाथ में मोटी रस्सी थी। काली, खुरदरी, और इतनी मजबूत कि कोई भी छटपटाए तो भी न टूटे। उसने दरवाज़ा धीरे से खोला। सीमा आंटी बेडरूम में इंतज़ार कर रही थीं। पूरी नंगी। हाथों में एक काला चमड़े का चाबुक और गर्दन में लोहे की कॉलर। आँखों में वही भूखी क्रूरता।
“आ गया मेरा गुलाम,” उन्होंने ठंडे स्वर में कहा। “रस्सी दे।”
रोहित ने रस्सी सौंपी। सीमा ने उसे बिस्तर के चारों कोनों से बाँधा। फिर रोहित को बीच में लिटाया। हाथ-पैर चारों दिशाओं में खींचकर कसकर बाँध दिए। इतनी जोर से कि कलाईयाँ तुरंत लाल हो गईं। लंड पहले से तना हुआ था। सीमा ने चाबुक उठाया और उसकी जाँघ पर जोर का वार किया। लाल निशान उभर आया।
“चिल्ला मत,” उन्होंने चेतावनी दी। “वरना गला दबाकर साँस रोक दूँगी।”
दूसरा वार। तीसरा। जाँघों, पेट, छाती पर चाबुक की लकीरें पड़ने लगीं। रोहित के दाँत भींच लिए। दर्द तेज़ था लेकिन लंड और सख्त होता जा रहा था। सीमा ने झुककर उसके लंड को मुँह में लिया। गले तक। फिर अचानक दाँत गड़ा दिए। रोहित की कमर उछली लेकिन रस्सियाँ खींच गईं। आंटी ने लंड को मुँह से निकाला और चाबुक से उसके अंडकोष पर हल्का वार किया।
“साली… इतना मज़ा आ रहा है न?” उन्होंने गाली दी। “आज मैं तुझे रंडी की तरह इस्तेमाल करूँगी।”
वे उसके चेहरे पर बैठ गईं। गीली चूत उसके मुँह पर दबा दी। “चाट। और अगर ठीक से नहीं चाटा तो चाबुक से गांड फाड़ दूँगी।”
रोहित की जीभ अंदर घुसी। क्लिट को जोर से चूसा। सीमा ने बाल पकड़कर उसके सिर को और दबाया। नाक पूरी तरह चूत में धँस गई।
साँस नहीं आ रही थी। आंटी कमर घुमा-घुमाकर उसके चेहरे पर रगड़ रही थीं। पानी टपकने लगा। अचानक उन्होंने जोर से दबाया और पानी की धार उसके गले में उतार दी। रोहित ने निगला। पूरा।
सीमा उतर गईं। उन्होंने रस्सी खोली लेकिन सिर्फ पैरों की। हाथ बँधे रहे। फिर रोहित को घुटनों के बल करवाया। गांड ऊपर। चाबुक फिर से उठा। इस बार गांड पर। एक… दो… पाँच वार। गांड लाल हो गई। जलन इतनी तेज़ कि रोहित की आँखों से पानी आ गया। सीमा ने तेल निकाला। दो उंगलियाँ गांड में धकेल दीं। फिर तीन। फिर पूरा हाथ।
“आह्ह… आंटी… फट जाएगी…”
“फटने दे,” उन्होंने कहा और मुट्ठी अंदर तक ठूंस दी। रोहित चीख पड़ा। सीमा ने मुट्ठी घुमाई। अंदर-बाहर। दर्द और अजीब मज़े का मिश्रण। फिर मुट्ठी निकाली और अपना मोटा डildo निकाला—काला, नसों वाला, 9 इंच। तेल लगाकर सीधा गांड में धकेल दिया। एक झटके में पूरा।
रोहित की चीख कमरे में गूँज उठी। सीमा ने डildo को जोर-जोर से अंदर-बाहर करना शुरू किया। दूसरी हाथ से उसके लंड को मसल रही थीं। “चिल्ला… और चिल्ला… तेरी आवाज़ सुनकर मेरी चूत और गीली हो रही है।”
डildo पूरी तरह अंदर था। सीमा ने उसे वहीं छोड़ दिया और खुद रोहित के नीचे लेट गईं। “अब मेरी चूत में डाल। रस्सी खोले बिना।”
रोहित ने कमर आगे की। लंड चूत के मुँह पर लगा। सीमा ने अपने पैर उसके कंधों पर चढ़ाए और जोर से खींचा। पूरा लंड एक झटके में अंदर। आंटी चिल्लाईं लेकिन मुस्कुराईं। “मार… फाड़ दे मेरी चूत… अपने पड़ोसी की रंडी को।”
रोहित ने धक्के शुरू किए। हर धक्के के साथ डildo गांड में और गहरा धँस रहा था। दोहरा दर्द। दोहरा मज़ा। सीमा ने उसके गले में कॉलर की चेन पकड़कर खींची। साँस रुकने लगी। चेहरा लाल। आँखें उभरीं। फिर भी कमर नहीं रुकी। आंटी की चूत पानी छोड़ रही थी। बिस्तर गीला हो चुका था।
“गाली दे,” सीमा ने घुटते हुए कहा। “मुझे गंदी रंडी बोल… अपने लंड की कुतिया बोल।”
“साली भोसड़ी… तेरी चूत और गांड दोनों मेरी हैं… आज दोनों फाड़कर रख दूँगा…”
सीमा की आँखें पलट गईं। शरीर में तेज़ कंपन। पानी की तेज़ धार। रोहित रुक नहीं पाया।
उसने लंड बाहर निकाला और उनके मुँह में ठूंस दिया। गले तक। वीर्य की पहली धार सीधे पेट में गई। आंटी निगल रही थीं। कुछ बाहर निकलकर उनके स्तनों पर बहने लगा। रोहित ने बाकी वीर्य उनके चेहरे, बालों और खुली हुई छाती पर मला।
लेकिन सीमा अभी थमी नहीं थीं। उन्होंने डildo निकाला। गांड का छेद खुला और लाल था। “अब अपनी मुट्ठी डाल। पूरा हाथ।”
रोहित के हाथ अभी भी बँधे थे। सीमा ने एक हाथ की रस्सी खोली। रोहित ने तेल लगाया और मुट्ठी बनाकर गांड के छेद पर रखी। धीरे-धीरे दबाव दिया। आंटी की चीखें तेज़ हो गईं। “जोर से… पूरा अंदर कर!”
मुट्ठी अंदर चली गई। कलाई तक। सीमा का शरीर काँप रहा था। रोहित ने मुट्ठी घुमाई। अंदर की दीवारें महसूस हो रही थीं। आंटी पागलों की तरह कराह रही थीं। “और गहरा… मेरी गांड को अपना मुट्ठी का घर बना दे।”
रोहित ने दूसरी उंगलियाँ भी चूत में डाल दीं। एक साथ दोनों छेद भरे हुए। सीमा चिल्लाते हुए झटके लेने लगीं। पानी की धार बार-बार निकल रही थी। उनका शरीर नियंत्रित नहीं हो रहा था। आँखों से आँसू बह रहे थे लेकिन मुँह पर मुस्कान थी।
अंत में वे थककर गिर पड़ीं। रोहित ने मुट्ठी निकाली। गांड का छेद खुला रह गया था। वीर्य और तेल मिला हुआ बह रहा था। सीमा ने उसे अपनी ओर खींचा और गले लगा लिया। दोनों पसीने, वीर्य और लार से लथ-पथ थे।
“कल रात को आना,” उन्होंने फुसफुसाते हुए कहा। “इस बार मैं तुझे पूरी रात बाँधकर रखूँगी। चाबुक, क्लैंप, और मोमबत्ती… सब तैयार रहेगा। तेरे लंड को इतना तड़पाऊँगी कि तू रोएगा। और फिर मैं खुद तेरे ऊपर बैठकर अपनी चूत और गांड दोनों तुझसे फड़वाऊँगी।”
रोहित ने उनके बालों में उंगलियाँ फेरते हुए जवाब दिया, “आऊँगा आंटी। और अगली बार तुम्हारे बेटे के सोने के बाद तुम्हें रसोई की टेबल पर लिटाकर चोदूँगा। इतनी जोर से कि टेबल टूट जाए।”
सीमा की आँखों में फिर से वही आग जल उठी। उन्होंने उसके लंड को हाथ में लिया। अभी भी आधा सख्त था। “फिर से खड़ा कर… अभी। मैं थकी नहीं हूँ।”
रोहित का लंड धीरे-धीरे फिर तनने लगा। सीमा मुस्कुराईं। काली रात अभी खत्म नहीं हुई थी। वह तो बस और गहरी, और क्रूर, और गंदी होती जा रही थी।
रुचि की बंधी गाँड को पानवाले ने चोदा