खून से सनी गुलामी

धमकी की काली रात में निशा ने राहुल की सील फाड़ी, चाबुक से पीटा, गला दबाया और गांड में लौह डाला। तीन साल तक दर्द, अपमान और बर्बर चुदाई की सबसे क्रूर दास्तान।

राहुल वर्मा की उम्र उस समय उन्नीस साल थी। वह दिल्ली के बाहरी इलाके गाजियाबाद के एक मध्यमवर्गीय कॉलोनी में रहता था। कॉलेज की पहली साल का छात्र। उसका दोस्त अमित शर्मा उसी कॉलेज में पढ़ता था। अमित का घर कॉलोनी के आखिरी ब्लॉक में था, जहाँ उसके माता-पिता अक्सर गाँव चले जाते थे। अमित की बड़ी बहन का नाम निशा शर्मा था। उम्र पच्चीस साल। शरीर भरा-भरा, कसी हुई कमर, भारी स्तन और चौड़ी कूल्हे। निशा कॉलेज में लेक्चरर थी, लेकिन घर में जब अकेले होती तो उसका असली रूप निकल आता।


एक शनिवार दोपहर राहुल अमित के घर पहुँचा। दरवाजा खोला निशा ने। उसने नीली जींस और ढीली टी-शर्ट पहनी हुई थी। आँखों में कुछ ऐसा चमक रहा था जो राहुल ने पहले कभी नहीं देखा था।
“अमित नहीं है,” निशा ने सीधा कहा। “माँ-बाप के साथ मेरठ गया है। एक हफ्ते बाद आएगा।”
राहुल मुड़ने वाला था कि निशा ने दरवाजा बंद कर लिया और कुंडी लगा दी।


“इधर आ।”
राहुल ड्राइंग रूम में खड़ा रहा। निशा ने टी-शर्ट ऊपर उठाई। उसके नीचे ब्रा नहीं थी। दो भारी, गोल स्तन बाहर निकले। निपल्स कड़े और गहरे रंग के। फिर उसने जींस का बटन खोला और नीचे सरका दी। पैंटी भी साथ में।


उसकी चूत पर घने, काले बाल थे। निशा ने दोनों हाथों से अपनी चूत के होंठ फैलाए। अंदर का गुलाबी मांस चमक रहा था।
“देख। सुबह से खुजली हो रही है। बता, घाव तो नहीं हो गया?”
राहुल पीछे हटा। “मैं… मैं नहीं देख सकता।”
निशा का चेहरा कठोर हो गया। आवाज में बर्फ जम गई।


“अगर तूने मेरी मदद नहीं की तो मैं अभी पुलिस को फोन करके बोल दूँगी कि तूने मेरे साथ छेड़खानी की। अमित और पापा तुझे जान से मार डालेंगे। तेरे बाप की नौकरी भी चली जाएगी। सोच ले।”
राहुल काँप गया। डर ने उसकी रीढ़ सुन्न कर दी। उसने सिर झुका लिया।
“अच्छा… दिखाओ।”


निशा सोफे पर लेट गई। टाँगें चौड़ी कीं। राहुल घुटनों के बल बैठ गया। उसके काँपते हाथों ने बाल हटाए। उँगली जब चूत के होंठों को छूई तो निशा ने जोर से साँस ली।
“और अंदर। अच्छे से देख।”
राहुल की उँगली अंदर फिसल गई। गरम, गीला। निशा ने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और अपनी चूत पर दबा दिया।
“चाट।”


“नहीं… गंदी है—”
“चाट वरना…”
राहुल ने जीभ निकाली। पहली बार किसी औरत की चूत का स्वाद। नमकीन, तीखा। उसने चाटा। निशा की कमर उछली। उसने राहुल के बाल पकड़कर जोर से अपनी चूत में रगड़ने लगी।
“हाँ… ऐसे… जीभ अंदर डाल… चूस…।”


पाँच मिनट तक राहुल ने चाटा। उसकी जीभ थक गई, जबड़ा दुखने लगा। निशा का पानी उसके मुँह और ठोड़ी पर लग गया। फिर निशा ने उसे खड़ा किया।
“पैंट खोल।”


राहुल ने खोली। उसका लंड पहले से ही तना हुआ था—सात इंच, मोटा, नसें फूली हुई। निशा ने घुटनों के बल बैठकर उसे मुँह में ले लिया। गले तक। राहुल की आँखें फटी रह गईं। निशा ने जोर-जोर से चूसा, दाँत लगाए, गला बंद किया। लार टपकने लगी।
फिर वह उठी और बेडरूम की तरफ चली। राहुल पीछे-पीछे गया। कमरे में निशा ने बिस्तर पर तौलिया बिछाया, लेट गई और टाँगें फैलाईं।
“अब चोद।”


राहुल झिझका। निशा ने बिस्तर के पास रखा लूब्रिकेंट का ट्यूब उठाया। आधा उसके लंड पर मल दिया, आधा अपनी चूत में।
“अंदर डाल। जोर से।”
राहुल ने अपना लंड चूत के मुहाने पर रखा और एक जोर का धक्का मारा।
निशा की चीख निकली। खून की एक पतली लकीर बह निकली।


“आह्ह्ह… माँ चोद… अंदर तक घुस गया…।”
राहुल डरकर बाहर निकालने लगा। निशा ने उसके कूल्हे पकड़ लिए।
“मत निकाल। और जोर से चोद। मेरी सील तोड़ दे।”


राहुल ने फिर धक्का मारा। इस बार पूरा लंड अंदर चला गया। निशा की चूत खून और लूब्रिकेंट से गीली हो चुकी थी। राहुल ने धक्के मारने शुरू किए। धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाई। निशा नीचे से कूल्हे उठा-उठाकर ले रही थी।
“और जोर… मार… मेरी चूत फाड़ दे…।”
राहुल ने उसकी टाँगें कंधों पर चढ़ा लीं। अब वह पूरे जोर से पेल रहा था। हर धक्के पर निशा की चीखें गूँज रही थीं। खून बिस्तर पर फैल गया। निशा ने अपने दोनों स्तन मसलते हुए कहा—
“मेरे निपल्स काट… काट डाल…।”


राहुल ने झुककर एक निपल मुँह में लिया और दाँतों से काटा। निशा चीखी। दूसरे निपल पर भी वही किया। दोनों निपल्स लाल और सूजे हुए हो गए।
फिर निशा ने उसे नीचे गिराया और खुद ऊपर चढ़ गई। उसने राहुल के लंड को अपनी चूत में बैठाया और जोर-जोर से उछलने लगी। उसके भारी स्तन उसके चेहरे पर पट रहे थे। राहुल ने दोनों स्तन पकड़कर मसले, निपल्स को मोड़ा, खींचा।

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“हाँ… ऐसे मसल… तोड़ दे इन्हें…।”
निशा ने राहुल के गले पर हाथ रखा और दबाया। साँस रुकने लगी। राहुल की आँखें लाल हो गईं। निशा हँसते हुए और जोर से उछली।
“मरने वाला है क्या? सह ले…।”


जब राहुल का चेहरा नीला पड़ने लगा तो उसने हाथ हटाया। राहुल ने खाँसते हुए साँस ली। निशा फिर लेट गई और बोली—
“अब पीछे से।”
राहुल ने उसे घुटनों के बल करवाया। निशा ने अपना सर बिस्तर में धँसा लिया और कूल्हे ऊपर किए। राहुल ने लंड फिर से चूत में घुसाया और इस बार जानवर की तरह पेलने लगा। थप्पड़ पड़ रहे थे। निशा की चूत की आवाज—छप-छप—पूरे कमरे में गूँज रही थी।
“और जोर… मार… मेरी गांड भी मार…।”


राहुल ने लंड निकाला और निशा की गांड के छेद पर रखा। निशा ने चीखते हुए कहा—
“लूब्रिकेंट लगा…।”
राहुल ने थोड़ा और लगाकर जोर का धक्का मारा। आधा लंड गांड में घुस गया। निशा की आवाज टूट गई।
“आह्ह्ह… फट गई… माँ चोद… पूरा डाल…।”


राहुल ने पूरा अंदर कर दिया। अब वह गांड में धक्के मार रहा था। निशा के आँसू बह रहे थे, लेकिन वह पीछे से कूल्हे हिला रही थी।
“चोद… मेरी गांड फाड़ दे…।”
बीस मिनट बाद राहुल का शरीर तन गया। उसने लंड बाहर निकाला और निशा के मुँह में डाल दिया। निशा ने आँखें बंद करके सारा वीर्य निगल लिया। कुछ बूंदें उसके होठों पर रह गईं। उसने जीभ से चाट लिया।


निशा उठी, बाथरूम गई, खून और वीर्य साफ किया। वापस आकर राहुल के लंड को फिर से सहलाने लगी।
“आज और नहीं। कल आना। तब मैं तुझे रस्सियों से बाँधूँगी।”
अगले दिन राहुल फिर गया। इस बार निशा ने दरवाजा खोलते ही उसके हाथ पीछे बाँध दिए। रस्सी इतनी कसकर कि कलाईं लाल हो गईं। फिर उसे बेडरूम ले गई, बिस्तर पर लिटाया और आँखों पर काला कपड़ा बाँध दिया।


“अब तू सिर्फ महसूस कर।”
निशा ने उसके लंड पर बर्फ रगड़ी। फिर गर्म मोम टपकाया। राहुल चीखा। निशा हँसी। फिर उसने उसके अंडकोषों को हल्के हाथ से मसला, फिर जोर से दबाया। दर्द से राहुल की कमर उछली।
“सह ले कमीने। आज मैं तुझे पूरा इस्तेमाल करूँगी।”


उसने राहुल के मुँह में गैग डाला। फिर खुद उसकी छाती पर बैठ गई और अपनी चूत उसके चेहरे पर रगड़ने लगी। राहुल की साँस रुक रही थी। निशा ने उसके बाल पकड़कर और जोर से दबाया।
“चाट… पूरा चाट… मेरा पानी पी…।”
जब राहुल का चेहरा उसके पानी से तर हो गया तब निशा उतरी। उसने राहुल के लंड पर कंडोम चढ़ाया और खुद ऊपर चढ़ गई। इस बार उसने राहुल के गले पर दोनों हाथ रख दिए और दबाते हुए चोदने लगी।


“आज तू मेरी कुतिया है। बोल।”
राहुल गैग की वजह से बोल नहीं पाया। निशा ने गैग हटाया।
“बोल—मैं निशा की कुतिया हूँ।”
“मैं… निशा की कुतिया हूँ…”
“और जोर से।”
“मैं निशा की कुतिया हूँ! मेरी गांड मारो! मेरी चूत फाड़ो!”


निशा हँसी और और रफ्तार बढ़ा दी। उसने राहुल के सीने पर थप्पड़ मारे, निपल्स को मोड़ा, खींचा। फिर उतरकर उसे घुटनों के बल करवाया और गांड में फिर से घुस गई। इस बार बिना लूब्रिकेंट के। राहुल चीखा।
“दर्द हो रहा है ना? सह। आज मैं तुझे तोड़ दूँगी।”


वह आधे घंटे तक गांड में पेलती रही। बीच-बीच में लंड निकालकर राहुल के मुँह में डालती, फिर वापस गांड में। आखिर में उसने राहुल को पीठ के बल लिटाया, उसकी टाँगें कंधों तक मोड़ीं और चूत में इतनी जोर से पेलने लगी कि बिस्तर की आवाज आने लगी।


राहुल का शरीर काँप रहा था। निशा ने उसके गले पर हाथ रखा और दबाया। इस बार ज्यादा देर तक। राहुल की आँखों के सामने अँधेरा छा गया। तभी निशा ने हाथ हटाया और खुद चरमसुख पर पहुँच गई। उसकी चूत ने राहुल के लंड को जकड़ लिया। राहुल भी उसी समय झड़ गया।


निशा उसके ऊपर लेटी रही। साँसें तेज।
“कल फिर आना। तब मैं तुझे चाबुक से पीटूँगी।”
तीसरे दिन निशा ने सच में चाबुक निकाला। पतली चमड़े की। उसने राहुल को दीवार से बाँधा, उसके सामने खड़ी हुई और चाबुक चलाया। पीठ पर, कूल्हों पर, जाँघों पर। लाल धारियाँ पड़ गईं। राहुल चीख रहा था, लेकिन निशा नहीं रुकी।


“तेरी चीखें मुझे गीला कर रही हैं।”
फिर उसने राहुल को नीचे उतारा, फर्श पर लिटाया और उसके घावों पर सवार होकर चोदी। खून और पसीने की गंध पूरे कमरे में फैल गई।
एक हफ्ते तक यही सिलसिला चला। हर दिन नई क्रूरता। कभी निशा ने उसके अंडकोषों को बाँधकर लटकाया, कभी उसके लंड पर रबर बैंड कसकर रखा और घंटों तक सताया, कभी उसके मुँह में अपना पेशाब किया और निगलने को मजबूर किया।


सातवें दिन अमित आने वाला था। निशा ने राहुल को अंतिम बार बुलाया। इस बार वह पूरी तरह काली चमड़े की पोशाक में थी। हाथ में चाबुक, गले में कॉलर। उसने राहुल के गले में कॉलर पहनाया और रस्सी से बाँध लिया।
“आज तू मेरा कुत्ता है। चारों पैरों पर चल।”


राहुल ने वैसा ही किया। निशा ने उसे घसीटते हुए बेडरूम ले गई। वहाँ उसने राहुल को बिस्तर के पाये से बाँधा, उसकी गांड में एक मोटा डिल्डो घुसाया और चालू कर दिया। फिर खुद उसकी छाती पर बैठकर अपनी चूत उसके मुँह पर रगड़ने लगी।
“चाट, कुत्ते। पूरे जोर से।”


राहुल की जीभ थक गई, जबड़ा दुखने लगा, लेकिन निशा नहीं रुकी। आखिर में उसने डिल्डो निकालकर अपना लंड (एक स्ट्रैप-ऑन) राहुल की गांड में घुसा दिया और जानवर की तरह पेलने लगी।
“आज मैं तुझे गर्भवती बनाऊँगी… अपनी गांड में।”


राहुल चीख रहा था। निशा हँस रही थी। जब वह थक गई तो उसने स्ट्रैप-ऑन निकाला, राहुल के मुँह में घुसाया और बोली—
“साफ कर।”
राहुल ने चाटा।
उस रात निशा ने राहुल को अपने साथ सुलाया। सुबह जब अमित आने वाला था, निशा ने राहुल को कपड़े पहनाए और दरवाजे तक छोड़ा।
“अब तू मेरा है। चाहे अमित हो या कोई और। तू जब भी बुलाऊँगा, आएगा। वरना…”


राहुल ने सिर झुकाया।
तीन साल बीत गए। राहुल अब बाईस साल का है। निशा अट्ठाईस की। वे अब भी मिलते हैं। कभी अमित के घर में, कभी होटलों में, कभी निशा के ऑफिस के स्टोर रूम में। निशा अब और क्रूर हो चुकी है। कभी-कभी वह राहुल को पूरे दिन बाँधकर रखती है, कभी उसके शरीर पर सिगरेट के निशान बनाती है, कभी उसे सार्वजनिक जगहों पर अपमानित करती है।


राहुल भाग नहीं सकता। निशा के पास उसके नंगे वीडियो हैं, धमकियाँ हैं, और सबसे बड़ी बात—उसकी आदत हो चुकी है। दर्द के बिना अब उसे मजा नहीं आता।
एक रात निशा ने राहुल से कहा—
“शादी कर ले मेरे से। वरना मैं ये वीडियो अमित को, तेरे बाप को, सबको भेज दूँगी।”


राहुल चुपचाप लेटा रहा। निशा उसके ऊपर चढ़ गई, उसका लंड अपनी चूत में बैठाया और धीरे-धीरे हिलने लगी।
“बोल। हाँ या ना।”
राहुल की आँखों में आँसू थे, लेकिन लंड तना हुआ था।
“हाँ…”


निशा मुस्कुराई। उसने राहुल के गले पर हाथ रखा और दबा दिया।
“अच्छा कुत्ता।”
बाहर बारिश पड़ रही थी। कमरे के अंदर सिर्फ दो शरीरों की आवाज थी—एक जोर से पेलता हुआ, दूसरा दबी चीखें निकालता हुआ।
और कहीं दूर, अमित सो रहा था। उसे कुछ पता नहीं था कि उसकी बहन ने उसके सबसे अच्छे दोस्त को कितनी गहराई तक तोड़ रखा है।

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