क्रूर कॉलर वाली गुलाम

विक्रम ने 23 साल की प्रिया को अपनी जंगली गुलाम बना लिया। बंधन, थप्पड़, मोम, गांड चुदाई और बर्बर सजा के बीच प्रिया दर्द में भी चीख-चीखकर मांगती रही और पूरी तरह टूट गई full Indian Hindi desi sex stories।

राहुल की जगह अब विक्रम था। वह 25 साल का एक बेहद आकर्षक और मस्कुलर लड़का था, जो मुंबई के अंधेरी इलाके में रहता था। उसकी हाइट 6 फीट थी, चौड़ी छाती और मजबूत बाजू। उसका लंड 8 इंच लंबा और 5 इंच मोटा था, जो किसी भी औरत को चीखने पर मजबूर कर देता था।

विक्रम एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर पोजीशन पर काम करता था, लेकिन उसकी असली पहचान उसकी बेदर्द चुदाई और बंधन की ललक थी। वह हर लड़की, भाभी या आंटी को अपनी गुलामी में झुकाने का माहिर था।

प्रिया 23 साल की थी। वह विक्रम के घर के ठीक सामने वाली किराने की दुकान पर बैठती थी। उसका फिगर 36-26-34 का था – भरे-भरे दूध, पतली कमर और मोटी गोल गांड। उसके गोरे रंग, लंबे काले बाल और भूरी आंखें किसी को भी दीवाना बना सकती थीं। प्रिया दिखने में मासूम लगती थी, लेकिन अंदर से वह बेहद चुदक्कड़ और मसोचिस्ट थी।

वह दुकान पर बैठकर विक्रम के साथ रोज हल्की-फुल्की छेड़खानी करती, लेकिन उसकी नजरों में गहरी भूख छिपी रहती थी।

विक्रम रोज शाम को दुकान पर आता। सामान लेते वक्त दोनों के बीच की बातें धीरे-धीरे गंदी और कामुक होती जा रही थीं।
एक शाम विक्रम दुकान पर पहुंचा। गर्मी का मौसम था, मुंबई की उमस सबको पागल कर रही थी। प्रिया ने आज टाइट ब्लाउज और घुटनों तक की स्कर्ट पहनी थी, जिससे उसके दूध और जांघें साफ झलक रही थीं।

“आज क्या चाहिए, विक्रम जी?” प्रिया ने मुस्कुराते हुए पूछा, लेकिन उसकी आंखों में शरारत थी।
“तुम्हारी चूत चाहिए, लेकिन अभी नहीं,” विक्रम ने सीधे जवाब दिया।

प्रिया का चेहरा लाल हो गया, लेकिन उसने हंसकर कहा, “बहुत हिम्मत हो गई है आज। दुकान के अंदर आओ, कोई नहीं है।”
विक्रम ने इधर-उधर देखा। शाम के सात बज रहे थे। दुकान के अंदर एसी चल रहा था। प्रिया ने बाहर का शटर आधा बंद कर दिया और विक्रम को अंदर खींच लिया।

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जैसे ही शटर बंद हुआ, प्रिया ने विक्रम के गले में बाहें डाल दीं और उसके होंठों को चूसने लगी। विक्रम ने उसे जोर से दीवार से सटा दिया। उसका एक हाथ प्रिया के दूध पर गया और जोर से मसलने लगा।
“आह… धीरे…” प्रिया कराह उठी।

“धीरे? आज मैं तुझे बर्बाद कर दूंगा, रंडी,” विक्रम ने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और गले पर काट लिया।
प्रिया की सिसकारी पूरे दुकान में गूंज गई। विक्रम ने उसे घुटनों के बल बैठाया और अपनी पैंट उतार दी। उसका 8 इंच का मोटा लंड लोहे की रॉड की तरह खड़ा था।

“मुंह खोल,” विक्रम ने आदेश दिया।
प्रिया ने मुंह खोला तो विक्रम ने पूरा लंड एक झटके में उसके गले तक धकेल दिया। प्रिया की आंखों से आंसू निकल आए, लेकिन वह चूसने लगी।

विक्रम ने उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से मुंह चोदा। गला फाड़ती थ्रस्ट्स, थूक और कफ की आवाजें दुकान भर रही थीं।
“चूस, साली… गहरी ले… हां, इसी तरह,” विक्रम गुर्राया।

पांच मिनट तक विक्रम ने उसके मुंह का इस्तेमाल किया, फिर उसे उठाकर काउंटर पर लिटा दिया। उसने प्रिया की स्कर्ट ऊपर की और पैंटी फाड़कर फेंक दी। प्रिया की चूत बिल्कुल साफ शेव की हुई थी, पहले से ही गीली।
विक्रम ने दो उंगलियां अंदर डालीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। प्रिया तड़पने लगी।

“और… और तेज… आह विक्रम… मैं तुम्हारी गुलाम हूं आज,” प्रिया चीखी।
विक्रम ने तीसरी उंगली भी डाल दी और चूत को फाड़ने लगा। फिर उसने प्रिया को पेट के बल घुमाया, उसकी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा।
चटाक!
“आह मर गई!” प्रिया चिल्लाई।

विक्रम ने लगातार 10-12 थप्पड़ मारे, गांड लाल हो गई। फिर उसने बेल्ट निकाली और प्रिया के हाथ पीछे बांध दिए। अब वह पूरी तरह बंधी हुई थी।
विक्रम ने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक ही झटके में पूरा 8 इंच अंदर ठेल दिया।
“आआआह… फट गई… निकालो… बहुत मोटा है!” प्रिया रो पड़ी।

लेकिन विक्रम ने रुका नहीं। वह पागलों की तरह चोदने लगा। हर थ्रस्ट इतना जोरदार कि काउंटर हिल रहा था। प्रिया की चीखें दुकान की दीवारों से टकरा रही थीं।
“चुद, रंडी… मेरी चूत है ये… फाड़ डालूंगा आज,” विक्रम ने उसके बाल खींचे और गला दबाते हुए चोदा।
प्रिया कई बार झड़ चुकी थी। उसकी चूत से पानी बह रहा था। विक्रम ने उसे नीचे उतारा, घुटनों पर बैठाया और मुंह में पानी निकाल दिया। प्रिया ने बिना बर्बाद किए पूरा पिया।

“अभी खत्म नहीं हुआ,” विक्रम ने कहा।
उसने प्रिया को दुकान के अंदर वाले स्टोर रूम में ले जाकर एक पुरानी मेज पर लिटाया। वहां से रस्सी निकाली और प्रिया के दोनों पैर फैलाकर मेज के पायों से बांध दिए। अब वह पूरी तरह खुली हुई थी – चूत और गांड दोनों एक्सपोज।

विक्रम ने शहद की बोतल उठाई, उसके दूधों, चूत और गांड पर ढेर सारा शहद डाला। फिर घंटों तक चूसता रहा, काटता रहा, चबाता रहा। प्रिया रो रही थी, चीख रही थी, लेकिन मांग रही थी और ज्यादा।
“मेरी गांड भी चोदो… प्लीज…” प्रिया ने गिड़गिड़ाते हुए कहा।

विक्रम ने लंड पर थूक लगाया और गांड में घुसाने लगा। प्रिया की गांड टाइट थी। विक्रम ने जोर लगाया और आधा लंड अंदर कर दिया। प्रिया बेहोश होने लगी दर्द से, लेकिन विक्रम ने थप्पड़ मारकर होश में लाया और पूरी तरह गांड चोदनी शुरू कर दी।
दोनों तरफ से चुदाई, बंधन, थप्पड़, गाली – सब कुछ हो रहा था। विक्रम ने उसे कई पोजीशन में चोदा – डॉगी, मिशनरी, स्टैंडिंग, रिवर्स काउगर्ल। हर बार नई क्रूरता के साथ।

रात के नौ बज चुके थे। दुकान बंद थी। विक्रम ने प्रिया को कपड़े पहनाए और कहा, “आज रात तू मेरे साथ होटल चलेगी।”
प्रिया ने हामी भर दी।
होटल पहुंचकर विक्रम ने एक लग्जरी रूम बुक किया। वहां उसने प्रिया को पूरी तरह नंगा किया और बेड के चारों खंभों से बांध दिया। फिर उसने आइस क्यूब्स, मोमबत्ती, व्हिप और दूसरे टॉयज निकाले।

पहले मोमबत्ती जलाई और गर्म मोम प्रिया के दूधों, पेट और जांघों पर टपकाया। प्रिया तड़पकर चीख रही थी। फिर विक्रम ने व्हिप से हल्की-हल्की मार शुरू की। हर मार के साथ प्रिया की चीख बढ़ती जा रही थी, लेकिन उसकी चूत और गीली होती जा रही थी।
“मैं तुम्हारी गुलाम रंडी हूं… जितना चाहो सजा दो,” प्रिया ने कहा।

विक्रम ने उसे घंटों तक बर्बाद किया। लंड चूसवाया, चूत और गांड चोदा, झाड़ा, फिर से तैयार किया। रात भर तीन बार उसने प्रिया की चूत और गांड में पानी भरा। प्रिया कई बार बेहोश हुई और वापस होश में आई।
सुबह होने तक प्रिया का पूरा शरीर निशानों से भरा था – थप्पड़ों के लाल निशान, मोम के जलने के निशान, काटने के दांतों के निशान। लेकिन उसके चेहरे पर संतोष की मुस्कान थी।

“कल फिर आओगी?” विक्रम ने पूछा।
“जब भी बुलाओगे… मैं तुम्हारी हूं,” प्रिया ने कमजोर आवाज में कहा।
प्रिया अब विक्रम की पूरी तरह से समर्पित गुलाम बन चुकी थी। हर शाम दुकान बंद होते ही वह फोन पर विक्रम का मैसेज देखती और कांप उठती। एक हफ्ते बाद विक्रम ने उसे एक नया मैसेज भेजा – “आज रात 10 बजे मेरे फ्लैट पर आ। चाबी नीचे मत रखना। नंगी होकर घुटनों पर बैठकर इंतजार करना। कोई कपड़ा नहीं, कोई बहाना नहीं।”

प्रिया का दिल जोरों से धड़का। उसने घर पर बहाना बनाया कि दोस्त के यहां रुक रही है और ठीक 9:45 पर विक्रम के अंधेरी के फ्लैट पहुंच गई। दरवाजा खुला था। अंदर घुसते ही उसने सारे कपड़े उतार दिए – ब्रा, पैंटी, सब फर्श पर फेंक दिए। फिर घुटनों पर बैठकर सिर झुकाकर इंतजार करने लगी।

विक्रम 10:15 पर आया। उसने प्रिया को देखा तो मुस्कुराया। “अच्छी गुलाम।” उसने प्रिया के गले में एक ब्लैक लेदर कॉलर बांध दिया, जिसमें “विक्रम की रंडी” लिखा हुआ था। कॉलर पर चेन भी लगी थी।

“आज तुझे असली सजा मिलेगी,” विक्रम ने कहा और उसे बालों से खींचकर बेडरूम में ले गया। कमरा पहले से तैयार था – चारों तरफ मिरर, बेड पर रस्सियां, चेन, क्लैंप्स, व्हिप, कैंडल, आइस, और एक बड़ा सा डील्डो।

विक्रम ने प्रिया को बेड पर उल्टा लिटाया। उसके हाथ-पैर फैलाकर चारों कोनों से बांध दिए। अब वह पूरी तरह अचल थी। विक्रम ने पहले उसके दूधों पर क्लैंप्स लगाए। तेज दर्द से प्रिया चीख उठी – “आआह… निकाल दो… बहुत दर्द हो रहा है!”
“चुप रंडी!” विक्रम ने एक थप्पड़ मारा और क्लैंप्स को और कस दिया। फिर उसने मोमबत्ती जलाई और गर्म मोम प्रिया के दोनों दूधों, पेट, जांघों और चूत पर टपकाना शुरू कर दिया। हर टपके के साथ प्रिया का शरीर ऐंठ जाता। मोम ठंडा होकर उसके गोरे शरीर पर सफेद निशान छोड़ रहा था।

विक्रम ने व्हिप उठाया और प्रिया की जांघों, गांड और दूधों पर लगातार मारना शुरू कर दिया। चटाक… चटाक… चटाक! प्रिया रो रही थी, चीख रही थी, लेकिन उसकी चूत से पानी की धार बह रही थी। “मैं तुम्हारी रंडी हूं… और मारो… मुझे तोड़ दो…”
विक्रम ने प्रिया की चूत में तीन उंगलियां डालकर तेजी से फिंगर फकिंग शुरू की। फिर चार। फिर पूरा मुट्ठी अंदर डालने की कोशिश की। प्रिया की आंखें बाहर निकल आईं – “फट जाएगी… मर जाऊंगी… आहहह!”

लेकिन विक्रम ने रुका नहीं। उसने अपना 8 इंच का मोटा लंड निकाला और प्रिया के मुंह में ठेल दिया। गला फाड़ता डीप थ्रोट। प्रिया उल्टी करने लगी, थूक और कफ बाहर निकल रहा था, लेकिन विक्रम ने उसके सिर को बेड से दबाकर 10 मिनट तक मुंह चोदा।

फिर उसने प्रिया को खोला और डॉगी स्टाइल में खड़ा किया। गांड ऊपर, सिर नीचे। विक्रम ने लंड पर थूक लगाया और एक ही झटके में पूरी गांड में घुसा दिया। प्रिया की चीख आसमान छू गई। विक्रम ने चेन खींची और गांड की बर्बर चुदाई शुरू कर दी। हर थ्रस्ट इतना जोरदार कि प्रिया का पूरा शरीर आगे-पीछे हिल रहा था।

“ले रंडी… मेरी गांड है ये… फाड़ डालूंगा… आज तू हॉस्पिटल जाएगी!” विक्रम गुर्राया।
प्रिया झड़ते-झड़ते बेहोश हो गई। विक्रम ने उसके चेहरे पर पानी डालकर होश में लाया और फिर चोदना जारी रखा। उसने प्रिया की गांड में झड़ दिया। गर्म वीर्य गांड से बाहर निकल रहा था।

थोड़ी देर आराम के बाद विक्रम ने प्रिया को बाथरूम ले जाकर शावर के नीचे खड़ा किया। ठंडे पानी के नीचे उसने प्रिया को फिर से बांधा और शावर का नोजल सीधा उसकी चूत पर लगाकर तेज पानी की धार मारी। प्रिया तड़प रही थी। फिर विक्रम ने खुद भी नहाया और प्रिया को घुटनों पर बैठाकर लंड चुसवाया।

रात के 2 बजे तक यह सिलसिला चलता रहा। विक्रम ने प्रिया को कई बार चोदा – कभी बेड पर, कभी फ्लोर पर, कभी सोफे पर। उसने प्रिया की चूत में बड़ा डील्डो डालकर वाइब्रेटर ऑन कर दिया और खुद लंड से मुंह चोदा। प्रिया लगातार झड़ रही थी। उसका शरीर दर्द और सुख से कांप रहा था।

“कल छुट्टी है। सुबह 11 बजे तक तू यहीं रहेगी,” विक्रम ने आदेश दिया।
अगली सुबह प्रिया जागी तो विक्रम पहले से तैयार था। उसने प्रिया को एक नया आउटफिट दिया – बहुत छोटी सी स्कर्ट जो गांड के नीचे तक मुश्किल से आती थी और बिना ब्रा का टॉप। “आज हम बाहर जा रहे हैं।”
प्रिया डर गई। “कहां?”

“मॉल। वहां तुझे पब्लिक में सजा दूंगा।”
मॉल पहुंचकर विक्रम ने प्रिया को फिटिंग रूम में ले जाकर स्कर्ट ऊपर की और वहां ही खड़े-खड़े चोद दिया। प्रिया मुंह पर हाथ रखकर दर्द और खुशी की चीख दबा रही थी। बाहर लोग आवाज सुन रहे थे लेकिन कुछ समझ नहीं पा रहे थे।

फिर विक्रम ने उसे फूड कोर्ट के पास एक कोने में बिठाया। टेबल के नीचे प्रिया का हाथ उसके लंड पर रखवाया और चुसवाया। प्रिया डरते-डरते लंड चूस रही थी जबकि आस-पास लोग खाने-पीने में व्यस्त थे।
शाम को वापस फ्लैट पर लौटकर विक्रम ने और क्रूर खेल शुरू किया। उसने प्रिया को पूरी तरह नंगा करके बालकनी में ले गया (जो आंशिक रूप से छिपी थी लेकिन नीचे सड़क दिख रही थी)। वहां उसने प्रिया को रेलिंग पकड़वाकर पीछे से चोदा। प्रिया की चीखें नीचे तक जा रही थीं।
“कोई देख लेगा… आह… तेज चोदो… मुझे परवाह नहीं!” प्रिया चिल्लाई।

विक्रम ने उसके दूधों को जोर से मसलते हुए, गले को दबाते हुए और बाल खींचते हुए बर्बर चुदाई की। फिर अंदर ले जाकर उसने प्रिया को फ्लोर पर लिटाया और उसके मुंह पर बैठकर फेस सिटिंग की। प्रिया की सांस बंद हो रही थी लेकिन वह जीभ से विक्रम की गांड चाट रही थी।
रात भर यह क्रूरता जारी रही। विक्रम ने प्रिया को पिसाब भी पिलाया, मोम से पूरी तरह ढक दिया, और अंत में दोनों तरफ से चोदकर उसके अंदर झड़ा। प्रिया का पूरा शरीर निशानों, काटने के मार्क्स, और वीर्य से सना हुआ था।

तीन दिन तक प्रिया विक्रम के फ्लैट में बंद रही। हर घंटे नई सजा, नई चुदाई। चौथे दिन जब वह घर लौटी तो चल भी नहीं पा रही थी। लेकिन उसके चेहरे पर संतोष था। वह जानती थी कि अब वह विक्रम की जिंदगी भर की गुलाम रंडी है।
विक्रम की ये भूख कभी खत्म नहीं होती। अगले हफ्ते उसने प्रिया को एक स्विंगर्स पार्टी में ले जाने की प्लानिंग शुरू कर दी, जहां और भी लोग प्रिया का इस्तेमाल करेंगे। लेकिन वो और भी खतरनाक कहानी है…

प्रिया अब हर रात सपने में विक्रम के क्रूर हाथ, मोटा लंड और बर्बर थ्रस्ट्स महसूस करती। और वह चाहती थी कि यह सिलसिला कभी न रुके। विक्रम ने उसे वो औरत बना दिया था जो दर्द में ही सुख ढूंढती है।

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