छत पर लटकी रंडी

शादी के मेहमान प्रिया को राहुल ने अपनी नंगी गुलाम बना लिया। सस्पेंशन, मोम, बेल्ट और बर्बर थ्रीसम के साथ खून तक उबाल देने वाली क्रूर चुदाई। दर्द में भीख मांगती लालसा की अनोखी कहानी Free Hindi Story Porn Videos join my telegram channel for leaked

मेरा नाम राहुल है। उम्र 24 साल। दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूं। मैं हमेशा से ही सेक्स और महिलाओं की खूबसूरती का दीवाना रहा हूं। लेकिन असली जुनून मुझे तब जागा जब मेरे घर में मेरी चचेरी बहन की शादी हुई। उस शादी में मेरी चचेरी बहन की मौसी की बेटी प्रिया भी आई थी।

प्रिया 21 साल की थी, उसका बदन बेहद आकर्षक – 36D साइज के मस्त उभरे हुए स्तन, पतली कमर और भारी-भरकम 38 इंच की गोल-मटोल गांड जो चलते वक्त लहराती हुई किसी को भी पागल कर सकती थी। उसकी ऊंचाई 5 फीट 6 इंच, गोरा रंग, लंबे काले बाल और आंखें ऐसी कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए।

शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। पूरे घर में रौनक थी। प्रिया सबकी मदद कर रही थी। मैंने उसे पहली बार महिला संगीत के दौरान डांस करते देखा। वह इतना जोरदार डांस कर रही थी कि उसके स्तन उछल-उछल कर मटक रहे थे और गांड हिलती हुई ऐसी लग रही थी मानो कोई जादू हो। बूढ़े-जवान सब उसे घूर रहे थे।

उस वक्त मेरे मन में कोई गलत ख्याल नहीं था, बस वह बेहद खूबसूरत लग रही थी।
शादी वाले दिन पूरा घर मेहमानों से भरा हुआ था। विदाई के बाद सब थककर चूर थे। सोने की जगह कम पड़ रही थी। मैं नीचे दादी के पुराने कमरे में चला गया जहां शादी के गिफ्ट्स, साड़ियां और सामान रखा हुआ था। वहां कोई और नहीं था। मैंने एक गद्दा बिछाया और लेट गया। तभी प्रिया भी वहां आ पहुंची।

“राहुल, यहां मेरे लिए भी थोड़ी जगह है? बहुत थक गई हूं,” उसने प्यार से पूछा।
मैंने हामी भर दी। जगह कम थी तो हम दोनों एक-दूसरे से सटकर लेट गए। रात गहरी हो चुकी थी। नींद में मैंने अनजाने में ही उसकी कमर पर हाथ रख दिया। सुबह मेरे एक कजिन ने हमें देख लिया और पूरे घर में अफवाह फैला दी कि राहुल और प्रिया का चक्कर चल रहा है। मम्मी ने मुझे डांटा, “किसी लड़की के साथ ऐसे नहीं सोते! शर्म नहीं आती?”

बिना मतलब की खिंचाई हुई। तभी मैंने सोच लिया – जब सबने नाम ही लगा दिया है तो असली मजा ले ही लूं। शादी के बाद प्रिया हमारे घर पर ही रुक गई। उसे एक महीने का ऑफिस वर्क था दिल्ली में, इसलिए वह हमारे यहां ठहर गई।
अब मैंने उस पर नजरें जमानी शुरू कर दीं। धीरे-धीरे उससे मजाक, बातें बढ़ाईं। बहन से उसका नंबर लिया और व्हाट्सएप पर चैट शुरू हो गई।

वह भी मुझे पसंद करने लगी थी। मैं हमेशा अपनी जेब में कंडोम रखने लगा, लेकिन उसे काले रैपर में लपेटकर छुपाता।
एक रविवार को घर खाली था। सब बाहर गए हुए थे। मैंने प्रिया से कहा, “मूवी देखें?”
उसने हां कहा।

मैंने Netflix पर एक हॉट एरोटिक मूवी चला दी जिसमें खूब सेक्स सीन थे। जब इंटेंस सीन आया तो प्रिया शर्माकर आंखें बंद कर लेती। मैं हंसा, “ये सीन तो असली मूड बनाने के लिए होते हैं।”

वह बोली, “तुम अपना मूड बना लो, मैं सो रही हूं।” लेकिन मैं जानबूझकर उसके बेड पर ही लेट गया। दरवाजा बंद था। हम दोनों चादर ओढ़कर लेटे। मैं उसके करीब सरक गया। उसकी गर्म सांसें मेरे चेहरे पर पड़ रही थीं। मेरी हिम्मत बढ़ी। मैंने अपनी टांग उसकी टांग पर रख दी।

वह चुप रही। फिर मैंने उसकी जांघ मसलनी शुरू की। उसकी सांसें तेज हो गईं।
मैंने उसके होंठों पर हल्का किस किया। उसने मुंह नहीं हटाया। फिर मैंने जोरदार किस किया, उसके होंठ चूसने लगा। एक हाथ से उसके बड़े-बड़े स्तनों को दबाया।

प्रिया भी उत्तेजित हो गई। मैंने कहा, “मुंह खोलो।” उसने खोला। मैंने जीभ अंदर डाली और उसकी जीभ चूसने लगा। वह भी मेरे होंठ चूसने लगी।

मैंने उसकी चादर हटाई, टॉप ऊपर किया। ब्रा में कैद उसके 36D वाले खरबूजे जैसे स्तन देखकर मेरा लंड पत्थर हो गया। मैंने ब्रा का हुक खोला। स्तन आजाद हो गए। मैंने एक स्तन मुंह में ले लिया, निप्पल को जोर से चूसा, काटा। प्रिया आहें भरने लगी, “आह… राहुल… जोर से!”
वह खुद अपने स्तन मेरे मुंह में थमाने लगी।

मैंने दूसरे स्तन को भी रौंदा, निप्पल खींचा। फिर मैं उसके ऊपर चढ़ गया। उसकी गर्दन, कंधे चूसने लगा। उसने अपनी टांगें फैला दीं। मेरा लंड उसकी चूत पर रगड़ खा रहा था। मैंने उसकी पजामी और पैंटी खींचकर उतार दी। उसकी चूत बिल्कुल साफ, गुलाबी और अब गीली हो चुकी थी।

मैं झुका और उसकी चूत पर जीभ फेरनी शुरू की। प्रिया सिसक उठी। मैंने जीभ अंदर डाली, चूत चाटी, क्लिटोरिस को चूसा। वह मेरे बाल पकड़कर अपनी चूत मेरे मुंह पर दबा रही थी। “चाटो… और जोर से… आह!” कुछ ही मिनट में उसका पहला ऑर्गेज्म आ गया। वह कांप उठी और चूत से रस निकलकर मेरे मुंह में भर गया। मैंने सब पी लिया।

अब वह पूरी तरह तैयार थी। मैंने पैंट उतारी। मेरा 7 इंच का मोटा लंड खड़ा था। मैंने कंडोम चढ़ाया। उसने खुद अपने हाथ से लंड पकड़कर चूत पर रखा। मैंने एक जोरदार धक्का मारा। “आआह!” प्रिया चीख उठी। लंड आधा घुसा। उसकी चूत बहुत टाइट थी। मैंने और जोर लगाया। पूरा लंड अंदर चला गया। गर्मी, नमी और कसाव अद्भुत था।

फिर मैंने ताबड़तोड़ धक्के मारे। प्रिया कराह रही थी, “जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… आह!” मैंने उसके स्तनों को रौंदते हुए, बाल पकड़कर खींचते हुए चोदा। वह मेरी पीठ पर नाखून गड़ाए जा रही थी। मैंने उसे पलटा, चौड़ी गांड ऊपर की और पीछे से घुसा। गांड पर जोरदार थप्पड़ मारे। “चुद मेरा रंडी!” मैं गुर्राया।

वह और उत्तेजित हो गई। “हां… मैं तुम्हारी रंडी हूं… और जोर से मारो!” मैंने उसके बाल खींचे, गर्दन पर लव बाइट्स दिए। फिर मैंने उसे बेड से बांधने के लिए उसके दुपट्टे से हाथ बांध दिए। अब वह पूरी तरह मेरे कंट्रोल में थी। मैंने उसके मुंह में उंगलियां डालीं, स्तन काटे, चूत में तीन उंगलियां डालकर फिंगर फक किया। फिर लंड घुसाकर बेरहमी से चोदा।

वह बार-बार झड़ रही थी। “मैं मर जाऊंगी… राहुल… इतना जोर से!” लेकिन मैं रुका नहीं। आखिरकार मैं भी झड़ गया। कंडोम भर गया। हम थककर लेट गए। लेकिन यह शुरुआत थी।

उसके बाद हमारे रिश्ते ने खतरनाक मोड़ लिया। प्रिया को भी BDSM का शौक था। वह कहती, “मुझे दर्द के साथ मजा दो।” अगले दिन जब घर खाली हुआ, मैंने उसे कमरे में बुलाया। मैंने उसके हाथों को बेडपोस्ट से बांध दिया। आंखों पर पट्टी बांध दी। फिर मैंने उसके पूरे बदन पर आइस क्यूब फेरा। ठंड से वह कांप उठी।

फिर मैंने उसके स्तनों पर क्लिप्स लगाए। निप्पल्स को जोर से खींचा। वह चीख रही थी लेकिन चूत से रस टपक रहा था। मैंने उसकी गांड पर बेल्ट से हल्के-हल्के मारना शुरू किया। हर थप्पड़ के साथ वह चिल्लाती, “और मारो… मैं तुम्हारी गुलाम हूं!”
मैंने उसे घुटनों के बल बैठाया और मुंह में लंड ठूंस दिया। “चूसो रंडी!” वह गला भरकर चूसने लगी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह में धक्के मारे।

वो उबकाई ले रही थी लेकिन रुकी नहीं। फिर मैंने उसे फिर से बेड पर लिटाया और उसके पैर फैलाकर बांध दिए।
अब मैंने एक बड़ा वाइब्रेटर निकाला (जो मैंने पहले से तैयार रखा था) और उसकी चूत में घुसा दिया। वाइब्रेटर तेज चल रहा था। प्रिया तड़प रही थी। मैंने उसकी गांड में उंगली डाली, फिर दो। वह “आह… फाड़ दो… मुझे चोदो!” चिल्ला रही थी।

मैंने वाइब्रेटर निकाला और अपना लंड उसकी गांड में घुसाने की कोशिश की। पहले दर्द से वह रो पड़ी लेकिन मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे पूरा लंड गांड में चला गया। फिर मैंने बेरहमी से गांड मारी। एक हाथ से उसकी चूत मसलता, दूसरे से बाल खींचता। वह बार-बार ऑर्गेज्म कर रही थी। आखिर मैं भी उसके मुंह में झड़ गया। वह सब पी गई।

हमारे इस क्रूर खेल में दिन गुजरते गए। कभी मैं उसे बालकनी में खड़ा करके चोदता, कभी किचन में झुकाकर। एक बार रात को छत पर ले जाकर मैंने उसे नंगा करके बांधा और पूरे बदन पर मोमबत्ती की बूंदें गिराईं। जलन से वह तड़प रही थी लेकिन चूत गीली हो रही थी। फिर मैंने उसे वहां ही जोर-जोर से चोदा।

प्रिया अब पूरी तरह मेरी हो चुकी थी। वह कहती, “तुम्हारे बिना नहीं रह सकती। मुझे रोज दंड दो।” हमने कई बार रोल प्ले किए – कभी मैं मास्टर, वह गुलाम। कभी वह मुझे बांधकर सजा देती लेकिन ज्यादातर मैं ही डोमिनेंट रहता।
एक दिन मैंने उसे चौड़ी टांगों से बांधकर उसकी चूत और गांड दोनों में एक-एक लंड जैसा टॉय घुसाया और खुद उसके मुंह में चोदा। वह इतनी जोर से झड़ी कि बेहोश हो गई। जब होश आया तो बोली, “ये सबसे बेहतरीन चुदाई थी।”

महीने भर में हमने अनगिनत बार सेक्स किया। हर बार नया प्रयोग – चेन, व्हिप, आइस, मोम, पब्लिक रिस्क वाले प्लेस। उसकी चूत और गांड अब मेरे लंड के आकार की हो गई थीं। लव बाइट्स, निशान छुपाने के लिए वह लंबी स्लीव्स पहनने लगी थी।
आखिरकार जब वह जाने लगी तो आखिरी रात हमने क्रूरता की हद कर दी। मैंने उसे पूरी तरह नंगा करके पूरे घर में घुमाया, हर कमरे में चोदा।

अंत में बेडरूम में बांधकर इतनी जोर से मारा कि वह चीख-चीखकर रो पड़ी लेकिन बार-बार मांगती रही, “और चोदो… मुझे अपना बना लो।”

प्रिया अब भी मेरी सबसे प्यारी और सबसे खतरनाक गुलाम है। लेकिन उसकी विदाई के बाद असली खेल शुरू हुआ। वो अपने शहर लखनऊ लौट गई, लेकिन हर वीकेंड दिल्ली आने का बहाना बनाती। एक महीने बाद पहली मुलाकात हुई। मैंने उसे एयरपोर्ट से पिक किया और सीधा

एक आउटस्कर्ट वाले होटल ले गया जहां कोई पहचान नहीं थी।
रूम में घुसते ही मैंने दरवाजा बंद किया और प्रिया को दीवार से सटाकर खड़ा कर दिया। “आज तुझे सजा मिलेगी रंडी, क्योंकि तू एक महीने से दूर थी।”

मैंने उसकी साड़ी खींचकर फाड़ दी। ब्लाउज के बटन उड़ाए। ब्रा को चाकू से काटकर उतारा। उसके 36D वाले भारी स्तन बाहर आ गए। मैंने दोनों निप्पल्स पर क्लैम्प्स लगाए और चेन से जोड़ दिया। हर हलचल पर खिंचाव से वह चीख उठती।

“घुटनों पर बैठ!” मैंने आदेश दिया। प्रिया तुरंत घुटनों के बल बैठ गई। मैंने उसके गले में ब्लैक लेदर कॉलर बांधा, जिसमें रिंग थी। उसमें चेन लगाकर जैसे कुत्ते को घुमाया। फिर उसकी मुंह में अपना 7.5 इंच का मोटा, नसों वाला लंड ठूंस दिया। “गला भरकर चूस, गहरी तक!” वह उबकाई लेते हुए भी पूरा लंड गले में लेने की कोशिश कर रही थी। मैंने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़कर जबरदस्ती फेस फक किया। आंसू बह रहे थे, थूक की लार चूती से टपक रही थी, लेकिन वह रुकी नहीं।

जब मेरा मन भर गया तो मैंने उसे बेड पर पटका। हाथ-पैर चारों तरफ बांध दिए। आंखों पर ब्लैक पट्टी। अब वह पूरी तरह अंधेरी दुनिया में थी। मैंने उसके पूरे बदन पर हॉट वैक्स ड्रिप करना शुरू किया। हर बूंद पर वह तड़पकर चीखती, “आह… राहुल… जल रहा है… लेकिन मत रुको!” स्तनों पर, पेट पर, जांघों पर, और सबसे ज्यादा उसकी साफ चूत और गांड पर मोम गिराई। ठंडा होने पर मैंने वैक्स को नाखून से खुरचा, जिससे लाल निशान पड़ गए।

फिर मैंने उसके पैरों को और फैलाया। चूत पहले से ही रस से लथपथ थी। मैंने एक बड़ा डील्डो चूत में घुसाया और उसे ऑन कर दिया। वाइब्रेशन तेज था। साथ में उसकी गांड में छोटा बट प्लग डाला। दोनों छेद भरे हुए थे। प्रिया पागल हो रही थी। “मुझे चोदो… फाड़ दो… मैं मरना चाहती हूं इस दर्द में!”

मैं हंसा और उसके मुंह पर बैठ गया। लंड फिर से गले में। एक हाथ से उसके क्लिट पर व्हिप की हल्की मारें। हर मार के साथ उसकी चूत सिकुड़ती। मैंने डील्डो तेज किया। अचानक उसका पहला ऑर्गेज्म आया। वह पूरी तरह कांपी, चूत से फुहार निकली। लेकिन मैं रुका नहीं। डील्डो निकाला और अपना लंड उसकी गांड में एक झटके में धकेल दिया।

“आआआह… फट गई!” प्रिया चीखी। लेकिन मैंने बाल खींचे और बेरहमी से गांड मारना शुरू कर दिया। हर धक्के पर चेन खिंचती, क्लैम्प्स खींचते। मैंने उसके स्तनों को थप्पड़ मारे, निप्पल काटे। “तू मेरी प्रॉपर्टी है। समझी?” वह रोते हुए भी हां में सिर हिला रही थी।

दूसरे राउंड में मैंने उसे खड़ा किया, हाथ ऊपर बांधकर शावर के नीचे ले गया। ठंडा पानी चलाया। ठंड और दर्द से उसका बदन लाल हो रहा था। मैंने पीछे से चूत में लंड घुसाया और पानी के साथ जोर-जोर से चोदा। उसकी चीखें होटल की दीवारों में गूंज रही थीं। आखिरकार मैंने उसके मुंह में पूरा लोड झाड़ दिया। वह हर बूंद चाट-चाटकर पी गई।

उस वीकेंड हमने होटल के हर कोने में क्रूर सेक्स किया। बालकनी में उसे नंगा खड़ा करके बाहर दिखाते हुए चोदा, जहां कोई भी देख सकता था। लिफ्ट में उसकी गांड पर उंगलियां डालते हुए ऊपर लाया। रात को मैंने उसे लेश पर घुमाकर फ्लोर पर रेंगवाया और फिर बेड पर पटककर इतनी जोर से चोदा कि बेड हिलने लगा। उसके गले, स्तनों, जांघों पर इतने लव बाइट्स और निशान थे कि वो अगले दिन लंबी ड्रेस पहनकर छुपा रही थी।

अगले महीनों में हमारे खेल और खतरनाक होते गए। एक बार मैंने उसे दिल्ली के एक लक्जरी रिसॉर्ट में ले जाया। वहां प्राइवेट विला था। मैंने उसे पूरे दिन नंगा रखा। गले में कॉलर, कमर में चेन बेल्ट। दिन भर वह मेरी सेवा करती – चाय बनाती, पैर दबाती, लंड चूसती। गलती पर सजा – गांड पर 50 थप्पड़ या व्हिप।

रात को मैंने उसे स्प्रेड ईगल पोजीशन में बांधा। दोनों छेदों में बड़े-बड़े टॉयज। फिर मैंने उसके मुंह में लंड लेकर स्मोकिंग करते हुए उसे यूज किया। उसके बाद असली तूफान आया। मैंने उसे उल्टा लटका दिया – सस्पेंशन प्ले। पैर ऊपर, सिर नीचे। इस पोजीशन में उसकी चूत और गांड पूरी तरह खुली थीं। मैंने दोनों में लंड घुसाया, एक-एक करके और फिर डबल पेनेट्रेशन टॉय के साथ। प्रिया बेहोश होने लगी थी लेकिन मैंने उसके चेहरे पर थप्पड़ मारकर होश दिलाया। “देख रंडी, कितना मजा ले रही है तू!”

वह चीखती, “हां मास्टर… मुझे और दर्द दो… मुझे तोड़ दो!” मैंने उसके क्लिट पर वाइब्रेटर रखा और लंड से गांड फाड़ी। उसका ऑर्गेज्म इतना जोरदार था कि वह पेशाब छोड़ बैठी। शर्म से रो रही थी लेकिन मैंने उसे साफ किया और फिर चोदा।

एक और यादगार रात थी जब मैंने अपने दोस्त के साथ थ्रीसम का प्लान किया (कंसेंसुअल, लेकिन प्रिया को पहले से पता नहीं था)। लेकिन असल में मैंने उसे ब्लाइंडफोल्ड करके रखा और खुद ही अलग-अलग आवाज में बात करके उसे धोखा दिया। वह समझी दो लंड हैं। मैंने उसे दोनों तरफ से चोदा, मुंह और चूत भर दी। प्रिया पागल हो गई थी, “दोनों मेरा इस्तेमाल करो… मैं पब्लिक रंडी हूं!” बाद में पता चला तो वह और उत्तेजित हुई।

समय के साथ हमने और एक्सट्रीम चीजें ट्राई कीं। नीडल प्ले (सेफ), इलेक्ट्रिक शॉक टॉयज, वॉटर स्पोर्ट्स, और पब्लिक आउटडोर सेक्स। एक बार कार में हाईवे पर मैंने उसे ड्राइव करते हुए अपनी गोद में बिठाकर चोदा। ट्रक ड्राइवर देख रहे थे लेकिन हम रुके नहीं।
प्रिया अब पूरी तरह बदल चुकी थी। ऑफिस में भी वह कॉलर के नीचे स्कार्फ पहनती और मुझे फोटो भेजती। कहती, “मेरा बदन सिर्फ तुम्हारा है। जितना चाहो क्रूर बनो।”

आज भी जब वह आती है तो हमारा खेल जारी है। कल रात ही मैंने उसे अपने फ्लैट की छत पर ले जाकर नंगा करके खड़ा किया। ठंडी हवा में उसके स्तन सिकुड़ रहे थे। मैंने उसे रेलिंग से बांधा और पीछे से इतनी जोर से चोदा कि उसकी चीखें पूरे इलाके में गूंजीं। गांड पर बेल्ट से 100 मारें दीं। फिर चूत में लंड डालकर बाल खींचे, गर्दन दबाई (breath play)। वह बार-बार झड़ रही थी।

“तुम्हारे बिना मैं अधूरी हूं राहुल… मुझे रोज तोड़ो, फाड़ो, इस्तेमाल करो।” ये शब्द सुनकर मेरा लंड फिर खड़ा हो जाता है।
हमारा ये क्रूर, बर्बर, जंगली प्यार कभी खत्म नहीं होगा। प्रिया मेरी गुलाम, मेरी रंडी, मेरी जान है। और मैं उसका मालिक। दुनिया की सबसे खतरनाक और सबसे संतोष देने वाली चुदाई की कहानी यही है। जो पढ़ रहा है, समझ गया होगा कि असली मजा दर्द और समर्पण में है।

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