28 साल की हॉट टीचर नेहा को स्टूडेंट आर्यन ने अपनी सेक्स स्लेव बना लिया। रस्सी, चाबुक और बर्बर चोदाई में उसकी चूत-गांड रोज फटती है। शादी के बाद भी पति के आगे मेरी राँड! बेहद क्रूर, hardcore BDSM वाली अनोखी Family sex stories कहानी।
नमस्ते दोस्तों, ये कहानी उन सभी के लिए है जो रातों को गर्म कहानियाँ पढ़कर अपना लंड हिलाते हैं। मैं आर्यन हूँ, 24 साल का, दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन इलाके में रहता हूँ। एक प्राइवेट यूनिवर्सिटी में फाइनल ईयर का स्टूडेंट। मेरा बॉडी एथलेटिक है, 6 फीट लंबा, और लंड 8 इंच लंबा व 3 इंच मोटा – जो किसी भी औरत की चूत को फाड़ने के लिए काफी है।
कॉलेज में मेरी एक टीचर थी – नेहा मैडम। उम्र 28 साल, अविवाहित, बेहद सेक्सी और गोरी। उनका फिगर 36-28-38 था। घने काले घुंघराले बाल, मोटी-मोटी गोल चूचियाँ जो हर सांस के साथ हिलतीं, और इतने मोटे गदराए चूतड़ कि देखते ही मन करता था कि उन्हें थप्पड़ मार-मारकर लाल कर दूँ। उनकी चाल में एक खास लचक थी, जैसे वो जानबूझकर अपने चूतड़ हिलाकर लड़कों को पागल कर रही हों। कॉलेज के हर लड़के की फैंटसी थी वो, लेकिन मैंने तय कर लिया था कि ये राँड मेरी होगी।
फाइनल ईयर के एग्जाम चल रहे थे। नेहा मैडम की ड्यूटी मेरी एग्जाम हॉल में लगी। उस दिन उन्होंने डीप नेक ब्लाउज वाली लाल साड़ी पहनी थी। उनकी चूचियाँ ब्लाउज से बाहर निकलने को बेताब थीं। मैं पेपर लिखने की बजाय उनकी चूत को घूर रहा था। मेरा लंड पैंट में 8 इंच का खड़ा होकर तंबू बना चुका था। पेपर खत्म होते ही घर जाकर मैंने उनके नाम पर तीन बार जोरदार मुट्ठी मारी, लेकिन लंड शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था।
उसके बाद रोज़ उनकी याद में मुट्ठी मारने लगा। एक रात इंस्टाग्राम पर उनकी प्रोफाइल खोजी और फॉलो रिक्वेस्ट भेज दी। दो हफ्ते बाद उन्होंने एक्सेप्ट कर लिया। मैंने तुरंत मैसेज किया – “हेलो मैडम, आर्यन यहाँ से।”
उन्होंने रिप्लाई किया। शुरू में औपचारिक बातें, फिर धीरे-धीरे हमारी चैटिंग बढ़ने लगी। मैं उन्हें खुलकर तारीफें करने लगा – उनकी चूचियों की, चूतड़ की। पहले वो शर्मा जातीं, लेकिन धीरे-धीरे वो भी गर्म होने लगीं। दो महीने बाद मैंने उन्हें मूवी देखने का प्रपोज किया। उन्होंने हाँ कर दी।
शाम 6 बजे मॉल के सिनेमा हॉल में मैं काला शर्ट और जींस में पहुँचा। 6:30 बजे नेहा मैडम आईं – काली ट्रांसपेरेंट साड़ी में। उनकी चूचियाँ साड़ी के पल्लू से झाँक रही थीं। मैंने उन्हें घूरते हुए कहा, “मैडम आज तो आप किसी राँड से कम नहीं लग रही।” वो शरमा गईं लेकिन मुस्कुरा भी दीं।
हॉरर मूवी थी। डार्क हॉल में कॉर्नर सीट पर हम बैठे। डर के सीन में उन्होंने मेरी बाँह पकड़ ली। मैंने हिम्मत करके उनकी जाँघ पर हाथ फेरा। उनकी सांसें तेज हो गईं। अंधेरे में मैंने उनकी साड़ी के ऊपर से चूतड़ दबाया। उन्होंने विरोध नहीं किया। मूवी खत्म होते ही हम अलग हो गए, लेकिन रात 1 बजे उनका मैसेज आया – “आज तुम्हारा वो… बहुत बड़ा था।”
चैटिंग शुरू हुई। मैंने साफ-साफ कहा, “मैडम, मैं आपकी चूत फाड़ना चाहता हूँ।” उन्होंने लिखा, “तुम बहुत बेशर्म हो।” लेकिन फिर पूछा, “कैसे करोगे?”
तीन दिन बाद उनका घर खाली था। उन्होंने मुझे अपने फ्लैट पर बुलाया। मैं कंडोम, लुब्रिकेंट, रस्सी और कुछ सेक्स टॉयज लेकर पहुँचा। दरवाजा खुला तो नेहा लाल शॉर्ट वन-पीस में खड़ी थीं। उनके मोटे चूतड़ वन-पीस से फटने को तैयार थे।
“अंदर आओ,” उन्होंने कहा। मैंने दरवाजा बंद किया और तुरंत उन्हें दीवार से सटा दिया। “आज से तुम मेरी गुलाम राँड हो, समझी?” मैंने उनके बाल खींचे। वो कराह उठीं।
डिनर के बहाने हम बैठे, लेकिन मैंने उन्हें खाना खिलाने की बजाय अपनी उँगलियाँ उनकी चूत में डाल दीं। वो पहले ही भीगी हुई थीं। “आर्यन… धीरे…” लेकिन मैंने एक और उँगली डाल दी और जोर से अंदर-बाहर करने लगा। वो चीखने लगीं।
मैंने उन्हें उठाकर बेडरूम में ले जाया। वहाँ मैंने उनकी वन-पीस फाड़ दी। नीचे सिर्फ ब्लैक लेस ब्रा और पैंटी थी। मैंने ब्रा खींचकर फेंक दी। उनकी 36 साइज की भारी चूचियाँ छूट गईं। मैंने एक चूची मुँह में भर ली और जोर से चूसने लगा, दूसरे को थप्पड़ मारता रहा। “आह… दर्द हो रहा है!” वो चिल्लाईं।
“चुप राँड! आज तुम्हारी चूत और गांड दोनों मेरी हैं।” मैंने उन्हें बेड पर पटका और उनके हाथ-पैर रस्सी से बाँध दिए। अब वो पूरी तरह बंधी हुई थीं। मैंने उनकी पैंटी उतारी। उनकी चूत साफ और गुलाबी थी, पहले से रस टपक रही थी।
मैंने घुटनों के बल बैठकर उनकी चूत पर जोरदार थप्पड़ मारा। “फट… आह!” वो उछल पड़ी। मैंने चार-पाँच थप्पड़ लगाए, फिर जीभ से चाटना शुरू किया। उनकी क्लिटोरिस को दाँतों से काटा। वो पागल हो गईं – “आर्यन… फाड़ दो… चोद दो मुझे!”
मैंने अपना 8 इंच का मोटा लंड निकाला। बिना किसी चेतावनी के उनके मुँह में ठूँस दिया। “चूस राँड!” उनके गले तक लंड घुसा दिया। वो उबकाई लेने लगीं, आँखों में आँसू आ गए, लेकिन मैंने बाल पकड़कर जोर-जोर से मुँह चोदा। 10 मिनट तक उनका गला फाड़ा, फिर मुँह में ही झड़ गया। “पी जा साली!” वो सब निगल गईं।
अब असली खेल शुरू हुआ। मैंने उनके पैर फैलाए और लंड की नोक उनकी चूत पर रखी। एक जोरदार झटका – पूरा 8 इंच अंदर! “माँ… मर गई!” नेहा चीख पड़ीं। उनकी कुंवारी जैसी टाइट चूत फट गई थी। खून की हल्की धार निकली, लेकिन मैं रुका नहीं।
मैंने उन्हें बर्बर तरीके से पेलना शुरू किया। हर झटके में पूरा लंड निकालकर फिर पूरी ताकत से घोंपता। बेड हिल रहा था। “जोर से… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत!” वो अब दर्द और मजे के बीच चिल्ला रही थीं।
मैंने उनका गला दबाया, चूचियों पर काटते हुए चोदा। फिर उन्हें घोड़ी बनाया। उनके मोटे चूतड़ पर जोर-जोर से थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। “ये लो राँड!” कहकर गांड पर भी थूक लगाकर लंड घुसाने लगा। पहले चूत, फिर गांड – दोनों जगह बारी-बारी से फाड़ता रहा।
नेहा रो रही थीं, लेकिन उनकी चूत से रस बह रहा था। “मैं तुम्हारी राँड हूँ… जितना चाहो चोदो… बर्बर चोदो!”
मैंने उन्हें डॉगी स्टाइल में पेलते हुए बाल खींचे, एक हाथ से चूत पर उँगलियाँ डालीं। वो तीन बार झड़ चुकी थीं। आखिर में मैंने कंडोम निकालकर फेंक दिया और उनकी चूत में ही गरम वीर्य उड़ेल दिया। “अंदर ले ले साली… प्रेग्नेंट हो जा!”
उस रात मैंने उन्हें पाँच बार चोदा – हर बार अलग पोजीशन में। कभी बंधे हुए, कभी चाबुक (बेल्ट) से मारते हुए, कभी उनके मुँह पर बैठकर सांस रोकते हुए। उनकी चूत, गांड और मुँह – तीनों जगह मेरा वीर्य भरा।
सुबह वो थकी हुई, चोटों से भरी लेकिन संतुष्ट थीं। “कभी इतनी बर्बर चुदाई नहीं हुई।” उन्होंने कबूल किया।
उसके बाद हमारा सिलसिला चलता रहा। कॉलेज में वो पढ़ातीं, और शाम को मेरे फ्लैट पर आकर मेरी गुलाम बन जातीं। मैंने उन्हें पब्लिक प्लेस में भी चोदा – कार में, लिफ्ट में। एक बार तो कॉलेज की छत पर उनकी गांड मारी थी।
नेहा मैडम की शादी के बाद भी वो मेरी गुलाम राँड बनी रही। उनकी शादी एक बिजनेसमैन से हुई थी, लेकिन वो बेचारा कभी नहीं जान पाया कि उसकी बीवी की चूत और गांड का असली मालिक कौन है। हर हफ्ते कम से कम दो बार वो मेरे साउथ दिल्ली वाले फ्लैट पर आती। मैंने एक पूरा BDSM रूम तैयार कर रखा था – ब्लैक वॉल्स, चेन, रस्सियाँ, चाबुक, क्लैम्प्स, डिल्डो, वाइब्रेटर और एक स्पेशल बेड जिसमें उसके हाथ-पैर फैलाकर बाँधा जा सकता था।
एक शाम वो आई। लाल साड़ी में, लेकिन अंदर कुछ नहीं पहना था जैसा मैंने ऑर्डर किया था। दरवाजा खुलते ही मैंने उसके बालों को मुट्ठी में भरकर घसीटते हुए अंदर खींच लिया। “आज देर हुई राँड! सजा मिलेगी।” उसने डरते हुए कहा, “माफ कर दो मालिक… घर में Husband था।”
मैंने उसे बेडरूम में घसीटा और साड़ी एक झटके में फाड़ दी। उसकी 36 इंच की भारी-भारी चूचियाँ छूट गईं। मैंने निप्पल क्लैम्प्स लगाए और चेन खींची। नेहा चीख उठी – “आह… बहुत दर्द हो रहा है!” मैंने चाबुक उठाया और उसके चूतड़ पर 10 जोरदार कोड़े मारे। लाल-लाल धारियाँ पड़ गईं। वो रो रही थी, लेकिन उसकी चूत से रस टपक रहा था।
मैंने उसे घुटनों पर बैठाया और अपना 8 इंच का मोटा लंड उसके मुँह में ठूँस दिया। गले तक। वो उबकाई ले रही थी, आँसू बह रहे थे, लेकिन मैंने सिर पकड़कर face-fuck किया। “निगल साली… सारा वीर्य अंदर जाना चाहिए!” जब मैं झड़ा तो उसका पूरा मुँह और चेहरा वीर्य से सना हुआ था।
फिर मैंने उसे बेड पर लिटाया और चारों तरफ से बाँध दिया। टाँगें फैली हुईं, चूत पूरी तरह खुली। मैंने एक बड़ा वाइब्रेटर उसकी चूत में घुसाया और हाई स्पीड पर ऑन कर दिया। साथ में उसकी गांड में मीडियम प्लग डाला। नेहा पागल हो गई – “मालिक… फट जाएगी… आह… मैं झड़ रही हूँ!” वो लगातार squirting कर रही थी। मैंने 20 मिनट तक उसे tease किया, कभी रुकता, कभी तेज करता।
जब वो भीख माँगने लगी तो मैंने प्लग निकाला और अपना लंड उसकी गांड में एक ही झटके में पूरा धकेल दिया। “नहीं… आह माँ… फट गई गांड!” उसकी चीख पूरे फ्लैट में गूँज गई। मैंने रुकने की जगह नहीं दी। जोर-जोर से गांड पेलता रहा, थप्पड़ मारता, चूचियाँ मरोड़ता। “तुम्हारी शादीशुदा गांड अब मेरी है राँड! Husband को कभी मत देने देना।”
उस रात मैंने उसे 7 बार चोदा। तीन बार चूत में, दो बार गांड में, और दो बार मुँह में। आखिरी राउंड में मैंने उसे बालकनी में ले जाकर खड़ा किया। नीचे सड़क पर लोग घूम रहे थे। मैंने उसे रेलिंग पकड़वाकर पीछे से चोदा। “चुप रह वरना सब देख लेंगे!” वो दाँत भींचकर कराह रही थी। मैंने उसके गले पर हल्का सा कॉलर बाँध रखा था जिस पर लिखा था – “आर्यन की पर्सनल राँड”।
एक और खास दिन याद है। मैंने उसे कॉलेज के बाद कार में बुलाया। कार को एक सुनसान पार्किंग में ले गया। वहाँ मैंने उसकी आँखों पर पट्टी बाँध दी, हाथ पीछे बाँधे और सीट पर लिटा दिया। फिर उसकी चूत और गांड दोनों में उँगलियाँ डालकर फिंगर-फक किया। वो चीख रही थी लेकिन मैंने मुँह में कपड़ा ठूँस दिया।
“आज मैं तुम्हें पब्लिक में humiliate करूँगा।” मैंने उसे कार से उतारा और पास के जंगल जैसे एरिया में ले गया। वहाँ मैंने उसे नंगी कर दिया और एक पेड़ से बाँध दिया। फिर चाबुक से पूरे शरीर पर मारना शुरू किया – चूचियों पर, चूतड़ पर, जाँघों पर। नेहा रो-रोकर भीख माँग रही थी – “मालिक… जो चाहो कर लो… बस चोद दो… मैं मर रही हूँ प्यास से!”
मैंने उसे घुटनों पर बैठाया और पेड़ के सामने खड़े होकर उसके मुँह में पेशाब किया। “पी ले राँड!” वो पहले हिचकिचाई लेकिन फिर गला खोलकर पी गई। ये देखकर मेरा लंड और सख्त हो गया। मैंने उसे पेड़ से बाँधे रखकर doggy style में बर्बर चोदा। गांड में बिना लुब्रिकेंट के पूरा लंड घुसा दिया। उसकी चीखें जंगल में गूँज रही थीं।
उसके बाद मैंने उसे वापस कार में लिया और घर तक ले गया। पूरे रास्ते उसकी चूत में वाइब्रेटर ऑन रखा। वो लगातार झड़ रही थी।
धीरे-धीरे हमारी क्रूरता बढ़ती गई। मैंने उसे nipple piercing करवाई (टेम्पररी), और चूत के होंठों पर क्लिप्स लगाकर घंटों tease करता। एक बार तो मैंने उसे पूरे दिन बिना कपड़ों के फ्लैट में रखा, सिर्फ कॉलर और चेन के साथ। वो घर के काम करती, मैं पीछे से कभी भी चोद देता।
एक वीकेंड मैंने उसे लेह ले जाया। होटल के सुइट में मैंने पूरे 48 घंटे उसे बाँधकर रखा। खाना भी मैं ही खिलाता, लेकिन हर कौर के साथ एक थप्पड़। वहाँ मैंने उसे double penetration के लिए तैयार किया – एक लंड चूत में, एक बड़ा डिल्डो गांड में। वो इतनी पागल हो गई कि बेहोश हो गई। जब होश आया तो बोली, “मालिक… मैं तुम्हारी permanent slave हूँ। Husband सिर्फ नाम का है।”
अब वो हर महीने अपनी शादी की सालगिरह पर भी मेरे पास आती है और कहती है, “आज मुझे इतना बर्बर चोदो कि मैं चल भी न पाऊँ।” मैं उसे पूरा सताता हूँ – wax play, ice play, breath play, whipping, और अंत में creampie। उसकी चूत हमेशा मेरे वीर्य से भरी रहती है।
नेहा की ये गुलामी आज भी जारी है। वो कॉलेज में पढ़ाती है, घर पर पत्नी बनकर रहती है, लेकिन असली मालिक मैं हूँ। उसकी चूत, गांड, मुँह और पूरी जिंदगी मेरी है।
अगर तुम्हें ये कहानी पसंद आई और और ज्यादा क्रूर डिटेल्स चाहिए – जैसे कैसे मैंने उसे gangbang fantasy पूरी की, या public humiliation के और किस्से – तो कमेंट में बताओ। मैं और भी hardcore कहानियाँ ला सकता हूँ।