राहुल की महारंडी भाभी

मुंबई का प्रोफेसर राहुल अपनी शादीशुदा स्टूडेंट प्रिया को भाभी बनाकर उसके 36 इंच दूध, टाइट चूत और मोटी गांड को 8 इंच मोटे लंड से बर्बरता से फाड़ता है। थप्पड़, चूसाई, बंधन और गंदी क्रूर चुदाई की वो आग जो प्रिया को सच्ची महारंडी बना देती है yeh lusty webstories app lustystories par padh rhe ho।

मेरा नाम राहुल है। उम्र 30 साल। मैं मुंबई के एक नामी डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हूँ। अविवाहित, अकेला। किराए का फ्लैट लिया है बांद्रा में। ग्राउंड फ्लोर पर मकान मालिक रहता है, मैं फर्स्ट फ्लोर पर। कॉलेज में रोज नई-नई लड़कियों को पढ़ाने का मौका मिलता है। उनकी आँखों में झांकना, उनके साथ बातें करना, गाइड करना – ये सब मुझे बहुत भाता है। लेकिन असली मज़ा तो तब शुरू हुआ जब मेरी नजर प्रिया पर पड़ी।


प्रिया 24 साल की थी। बेहद खूबसूरत, गोरा रंग, लंबे काले बाल, बड़ी-बड़ी आँखें, गुलाबी होंठ और वो जिस्म – मानो किसी देवी का। फिगर 36-28-38। बड़े-बड़े दूध, पतली कमर, मोटे-मोटे गदराए चूतड़। पहली नजर में ही मेरा लंड खड़ा हो गया था। लेकिन जब मैंने उसके माथे पर सिंदूर देखा तो थोड़ा रुक गया। शादीशुदा थी। फिर भी मैंने हिम्मत की। कॉलेज में बातें शुरू कीं। पहले तो औपचारिक, फिर धीरे-धीरे पर्सनल। वह भी मेरी तरफ खिंचने लगी। उसकी मुस्कान, उसकी नजरें, सब कुछ बताता था कि वो भी कुछ चाहती है।


एक शाम मैं लिंकिंग रोड पर शॉपिंग कर रहा था। अचानक किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा। मुड़ा तो अमित खड़ा था – मेरा पुराना कॉलेज का दोस्त।
“अरे यार राहुल! कितने साल बाद!” अमित ने गले लगाया।
“हां यार, तू कहाँ गायब था?” मैंने पूछा।
“बस शादी हो गई, सेटल हो गया। पास में ही रहता हूँ, आ जा घर। मेरी बीवी से मिलवा दूं।”


मैं उसके साथ चला गया। उसके फ्लैट में घुसते ही अमित चिल्लाया, “प्रिया! देखो, मेरा पुराना दोस्त आया है!”
प्रिया कमरे में आई। मुझे देखते ही उसके चेहरे का रंग उड़ गया। “सर… आप?”
मैं भी हैरान। “प्रिया? तुम अमित की बीवी?”
अमित हंस पड़ा। “अरे वाह! तुम दोनों पहले से जानते हो? प्रिया मेरे कॉलेज में पढ़ती है।”


“हां यार, वो मेरी स्टूडेंट है,” मैंने जल्दी से कहा।
अमित बहुत खुश हुआ। “बहुत अच्छा! अब तुम अपनी भाभी का ख्याल रखना राहुल।”
हम तीनों बैठे, चाय-नाश्ता किया, पुरानी यादें ताजा कीं। लेकिन मेरी नजर बार-बार प्रिया के जिस्म पर जा रही थी। उसके कसे हुए ब्लाउज में दूध फटने को तैयार थे।


दूसरे दिन कॉलेज में प्रिया ने मुझे कोने में बुलाया। “सर, कल घर पर… प्लीज कुछ मत बोलना।”
मैं मुस्कुराया। “चिंता मत करो भाभी। लेकिन अब तुम मेरी भाभी हो।”
उसके बाद मैं अक्सर अमित के घर जाने लगा। एक दिन अमित ड्यूटी पर बाहर गया हुआ था। मैं सीधा वहाँ पहुंच गया। प्रिया ने दरवाजा खोला। वो घरेलू साड़ी में थी, लेकिन उसकी साड़ी का पल्लू नीचे खिसका हुआ था। गोरी पेट की नाभि साफ दिख रही थी।


“आइए सर… मतलब राहुल,” वह शरमाई।
हम बैठे। चाय पीते हुए बातें शुरू हुईं। मेरी नजर उसके दूधों पर अटक गई। वो बड़े-बड़े, भारी, जैसे दो तरबूज। मैं कल्पना करने लगा कि इन्हें मसलूं तो कितना मज़ा आएगा। मेरा लंड पैंट में तन गया।
“प्रिया, तुम बहुत खूबसूरत हो,” मैंने सीधे कहा।


वह मेरी आँखों में देखकर बोली, “राहुल, मैं भोली नहीं हूँ। शादी के बाद भी मुझे बहुत कुछ चाहिए होता है। अमित अच्छा है, लेकिन…”
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया। “मुझे तुम बहुत पसंद हो।”
उसने मेरा हाथ अपनी जांघ पर रख दिया। “तो फिर पीछे मत हटना।”


मैंने उसे खींचकर चूम लिया। उसके गुलाबी होंठ चूसने लगा। वह भी जोर से चूमने लगी। मेरी जीभ उसके मुंह में घुस गई। हम दोनों एक-दूसरे को चाटने लगे। मैंने उसकी साड़ी का पल्लू खींचा। ब्लाउज के हुक तोड़ते हुए उसके भारी दूध बाहर निकाल दिए। गुलाबी निप्पल्स सख्त हो चुके थे। मैंने एक निप्पल मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा।


“आह राहुल… जोर से चूसो… काटो इन्हें!” वह सिसक रही थी।
मैंने दूसरे दूध को मसलना शुरू किया। इतने बड़े और नरम कि हाथ में घुल रहे थे। प्रिया ने मेरी पैंट खोल दी। मेरा 8 इंच का मोटा लंड बाहर निकल आया। वह उसे देखकर बोली, “वाह! अमित से कहीं बड़ा और मोटा है।”


उसने लंड पकड़कर हिलाना शुरू किया। फिर झुककर मुंह में ले लिया। गपागप चूसने लगी। गला तक ले जा रही थी। मैं उसके बाल पकड़कर मुंह में ठोके मारने लगा। “ले चुदक्कड़ रंडी, चूस मेरे लौड़े को!”


वह और जोर से चूसने लगी। मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट उतार दिया। उसकी चूत बिना बाल की, गुलाबी और पहले से ही गीली थी। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसकी टांगें फैला दीं। चूत चाटने लगा। जीभ अंदर घुसेड़ दी। वह तड़प रही थी। “फाड़ दो मेरी चूत राहुल… चाटो पूरी!”


मैंने तीन उंगलियां अंदर डाल दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। वह झड़ गई। चूत का पानी मेरे मुंह पर गिरा।
अब मैं तैयार था। लंड उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार झटके में पूरा घुसा दिया।
“हाय माँ! फट गई मेरी चूत! इतना मोटा… आह!” वह चीखी।


मैं बेरहमी से चोदने लगा। घपाघप की आवाजें पूरे कमरे में गूंज रही थीं। उसके दूध हिल रहे थे। मैं उन्हें दबाते हुए जोर-जोर से ठोके मार रहा था। “ले साली महारंडी! तेरी चूत फाड़ दूंगा आज! अमित की बीवी को रंडी बना दूंगा!”
“हां… और जोर से… मेरी चूत फाड़ दो… मैं तुम्हारी रंडी हूँ!” वह चिल्ला रही थी।


मैंने उसे कुत्ते की तरह घोड़ी बनाया। पीछे से लंड घुसेड़ा। उसके मोटे चूतड़ थपथपा रहे थे। मैंने एक थप्पड़ मारा। “ये ले रंडी!” फिर गांड पर भी थप्पड़। वह और उत्तेजित हो गई।
“राहुल… मेरी गांड भी मारो… खुजली हो रही है!”


मैंने लंड निकाला, थूक लगाया और गांड पर दबाव डाला। धीरे-धीरे पूरा घुसा दिया। उसकी गांड बहुत टाइट थी। “उफ्फ… फट रही है… लेकिन मज़ा आ रहा है… पूरा घुसा दो!”
मैंने गांड में भी तेज चुदाई शुरू कर दी। एक हाथ से उसके बाल खींचे, दूसरे से दूध मसले। वह पूरी तरह पागल हो चुकी थी। “चोदो… मेरी दोनों सुराख फाड़ दो… मैं 14 लंड खा चुकी हूँ… तुम 15वें हो… लेकिन सबसे मोटा और बर्बर!”


यह सुनकर मेरी आग और भड़की। मैंने उसे कई पोजीशन में चोदा – मिशनरी, डॉगी, राइडिंग। वह ऊपर चढ़कर लंड पर कूद रही थी। उसके दूध उछल रहे थे। मैंने निप्पल काटे, गर्दन चूसी, पूरे बदन पर निशान बना दिए।
पहली राउंड में हम दोनों साथ झड़े। उसकी चूत ने मेरे लंड को निचोड़ लिया। फिर हम नंगे लेटे रहे। उसने मेरे सीने पर सिर रखा।
“राहुल, तुमने मुझे वो मज़ा दिया जो अमित कभी नहीं दे सका।”


मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “ये तो शुरुआत है प्रिया।”
दूसरी राउंड शुरू हुई। इस बार मैंने उसे बाथरूम ले जाकर शावर के नीचे चोदा। पानी के साथ उसकी चूत चोदी, गांड मारी। फिर किचन में बेंच पर बिठाकर चोदा। उसके चूतड़ पर लाल निशान पड़ गए थे थप्पड़ों से।


“मैं तुम्हारी गुलाम हूँ राहुल… जब चाहो बुलाओ… मैं आ जाऊंगी। अमित को पता भी नहीं चलेगा,” वह हांफते हुए बोली।
तीसरी राउंड में मैंने उसे खूब बेरहमी से चोदा। उसके मुंह में मूतने की बात की तो वह तैयार हो गई। “करो… मुझे सब कुछ चाहिए।” लेकिन मैंने सिर्फ चोदाई पर फोकस रखा। उसके पूरे शरीर को अपनी संपत्ति बना लिया।


शाम होने तक हमने चार राउंड पूरे किए। प्रिया पूरी तरह थक गई थी लेकिन खुश थी। उसकी चूत और गांड लाल हो गई थीं, लेकिन वह मुस्कुरा रही थी।
“अब तुम मेरी हो प्रिया। कॉलेज में स्टूडेंट, घर पर भाभी, और मेरी प्राइवेट रंडी।”


वह मेरे लंड को चूमते हुए बोली, “हां… हमेशा।”
कुछ हफ्तों बाद अमित को अचानक दो हफ्ते की ट्रेनिंग के लिए दिल्ली जाना पड़ा। प्रिया ने मुझे फोन करके बताया तो मेरे लंड में तुरंत आग लग गई। “आज रात आ जाओ राहुल… पूरा घर खाली है। मैं तुम्हारी इंतजार कर रही हूँ।” उसकी आवाज में वही घुटन थी जो मुझे दीवाना कर देती थी।


शाम को मैं उसके फ्लैट पहुंचा। दरवाजा खुला था। अंदर घुसते ही नजारा देखकर मेरा मुंह सूख गया। प्रिया सिर्फ एक काली ट्रांसपेरेंट बेबीडॉल में खड़ी थी। उसके 36 इंच के भारी दूध लगभग बाहर झांक रहे थे। गुलाबी निप्पल्स साफ दिख रहे थे। नीचे कोई पैंटी नहीं थी। उसकी साफ चूत पहले से ही चमक रही थी।


“आज मैं तुम्हारी पूरी रंडी बनकर तैयार हूँ सर,” उसने मेरे गले लगते हुए कहा और मेरे होंठों को चूसने लगी। हम दोनों दीवानगी से एक-दूसरे को चाट रहे थे। मैंने उसे उठाकर सोफे पर पटक दिया। उसकी टांगें फैलाकर चूत पर मुंह रख दिया। जीभ से उसके क्लिटोरिस को चाटते हुए तीन उंगलियां अंदर घुसेड़ दीं।


“आआह… फाड़ दो राहुल… आज मेरी चूत को नोच डालो!” वह चीख रही थी। उसकी चूत का पानी मेरे मुंह में बह रहा था। मैंने उसे उल्टा कर उसके मोटे चूतड़ फैलाए और गांड के छेद पर भी जीभ फेरने लगा। प्रिया पागल हो गई। “हां… गांड भी चाटो… मैं तुम्हारी गंदी रंडी हूँ!”


मैंने अपना 8 इंच का मोटा लंड बाहर निकाला। बिना किसी रुकावट के उसकी चूत में एक ही झटके में पूरा घुसा दिया। “ले साली महारंडी! आज तेरी चूत का भोसड़ा फाड़ दूंगा!” घपाघप की आवाजें तेज हो गईं। मैं उसके बाल खींचकर पीछे से कुत्ते की तरह चोद रहा था। हर झटके पर उसके चूतड़ लहरा रहे थे। मैंने थप्पड़ मारे – एक, दो, दस। उसके गोरे चूतड़ लाल हो गए।


“मारो… और जोर से थप्पड़ मारो… मुझे दर्द चाहिए राहुल!” वह चिल्ला रही थी। मैंने उसके दूध पकड़कर उन्हें बेरहमी से मसला। निप्पल्स को चिमटा और खींचा। प्रिया की सिसकारियां पूरे फ्लैट में गूंज रही थीं।


पहली राउंड में मैंने उसे बेडरूम में ले जाकर चारों पोजीशन में चोदा। मिशनरी में उसके पैर कंधों पर रखकर इतना गहरा पेला कि उसकी चूत फटने लगी। “हाय माँ… तुम्हारा लंड मेरी पेटी तक पहुंच रहा है… चीर दो मुझे!”


फिर मैं लेट गया। प्रिया ऊपर चढ़ी और पागलों की तरह कूदने लगी। उसके भारी दूध उछल-उछलकर मेरे मुंह पर पड़ रहे थे। मैं उन्हें काट रहा था। वह मेरे लंड पर बैठकर चूत से ही लंड चोद रही थी। “तेरा लंड मेरी जान है… 15वें लंड ने मुझे पूरी तरह रंडी बना दिया!”


दूसरी राउंड में मैंने उसे बालकनी में ले जाया। रात का अंधेरा था लेकिन नीचे सड़क पर लोग थे। प्रिया को रेलिंग पकड़वाकर पीछे से गांड में लंड घुसेड़ दिया। “क्या कर रहे हो… कोई देख लेगा!” वह डरते हुए भी उत्तेजित हो रही थी।


“देख ले तो ले साली… आज तेरी गांड फाड़नी है!” मैंने पूरा लंड अंदर ठोंक दिया। उसकी टाइट गांड मेरे लंड को निचोड़ रही थी। मैं तेज-तेज झटके मार रहा था। एक हाथ से उसके मुंह पर हाथ रखा ताकि चीख न निकले। दूसरे हाथ से क्लिटोरिस रगड़ रहा था। प्रिया झड़ गई। उसके पैर कांप रहे थे।


रात भर हमने पांच राउंड लिए। हर राउंड में नई बर्बरता। मैंने उसे फर्श पर बिठाकर मुंह में लंड ठोका। गला फाड़कर चूसवाया। “ले पूरी तरह गला तक… रंडी बन!” उसकी आंखों से पानी आ रहा था लेकिन वह रुकी नहीं। फिर मैंने उसे शावर के नीचे खड़ा करके दोनों छेदों में उंगलियां और लंड घुसेड़े।


सुबह होने तक प्रिया का पूरा शरीर निशानों से भरा हुआ था। गर्दन पर चूसने के निशान, चूतड़ पर थप्पड़ों के लाल दाग, दूधों पर दांतों के निशान। उसकी चूत और गांड सूजी हुई थी लेकिन वह मुस्कुरा रही थी।
“राहुल… तुमने मुझे वो मज़ा दिया जो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। अमित कभी इतना बर्बर नहीं हो पाता।”


“ये तो बस शुरुआत है प्रिया। अब से हर मौका हम लेंगे,” मैंने उसके होंठ चूसते हुए कहा।
ट्रेनिंग के पूरे दो हफ्ते हमने जैसे शादी का हनीमून मनाया। रोज नई जगह – कभी मेरे फ्लैट पर, कभी होटल में, कभी कॉलेज के बाद कार में। एक दिन कॉलेज की लाइब्रेरी के पीछे वाले स्टोर रूम में मैंने प्रिया को घुसाकर खड़ा-खड़ा चोदा। उसके मुंह पर हाथ रखे हुए पूरा लंड अंदर-पूरा बाहर। वह दबे स्वर में चीख रही थी। “यहां… सर… कोई आ जाएगा… लेकिन रुकना मत!”


एक और दिन मैंने उसे अपने फ्लैट पर बुलाया। उस रात मैंने उसे पूरा बांध दिया। हाथ-पैर बेड से बंधे। आंखों पर पट्टी। फिर घंटों तक उसकी चूत, गांड और मुंह का इस्तेमाल किया। वह तड़प-तड़पकर भीख मांग रही थी – “चोदो… मारो… फाड़ दो… मैं तुम्हारी गुलाम रंडी हूँ!”
मैंने उसे इतना बेरहमी से चोदा कि उसकी चूत से खून तक निकल आया। लेकिन प्रिया को दर्द में भी मज़ा आ रहा था। “और जोर से… मुझे तोड़ दो राहुल!”


उसके बाद हमने और भी गंदी चीजें कीं। मैंने उसके मुंह में मूत दिया। वह सब पी गई। “तुम्हारा सब कुछ स्वीकार है,” वह बोली। फिर मैंने उसके चूतड़ पर मोमबत्ती की बूंदें गिराईं। गर्म मोम की जलन पर वह और पागल हो गई।


कई महीनों तक यह सिलसिला चलता रहा। अमित को शक भी नहीं हुआ। प्रिया अब पूरी तरह मेरी थी। कॉलेज में वह स्टूडेंट बनकर रहती, लेकिन मेरे सामने वह सबसे गंदी, सबसे चुदक्कड़ रंडी बन जाती।


एक शाम अमित घर पर था तो भी प्रिया ने मुझे मैसेज किया – “बाथरूम में आ जाओ।” मैं गया। उसने दरवाजा बंद किया और घुटनों पर बैठकर मेरे लंड को चूसने लगी जबकि अमित बाहर टीवी देख रहा था। जोखिम भरा मज़ा था। मैंने उसके मुंह में झड़ दिया। वह सब निगल गई और मुस्कुराते हुए बाहर चली गई।


प्रिया की भूख कभी खत्म नहीं होती थी। वह मुझे बताती कि पहले के 14 लंडों में से कोई भी मुझे टक्कर नहीं दे सका। “तुम्हारा लंड, तुम्हारी बर्बरता… ये सब मुझे दीवाना कर देता है।”
आज भी जब कभी अमित बाहर जाता है, प्रिया मेरे पास आ जाती है। हमारी चूत-गांड की ये आग कभी बुझने वाली नहीं है। मुंबई की चकाचौंध के बीच ये हमारा गुप्त जुनून है – बर्बर, गंदा, और बेहद लत लगाने वाला।


जो भी ये कहानी पढ़ रहा है, समझ ले कि कुछ औरतें बाहर से भोली दिखती हैं लेकिन अंदर से आग होती हैं। और जब सही लंड मिल जाए तो वो आग भड़ककर सब कुछ जला देती है। राहुल और प्रिया की कहानी यहीं खत्म नहीं होती… ये रोज नई चुदाई के साथ आगे बढ़ती रहती है।

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