24 साल का चिकना रोहन अपनी टाइट गांड़ फटवाने के लिए ट्रक ड्राइवरों के विशाल लंडों का गुलाम बन गया। जंगलों, टायरों और गैंगबैंग में क्रूर चाबुक, डबल पेनेट्रेशन और बिना रुके फाड़ने वाली चुदाई की बेहद बर्बर कहानी hindi romantic stories on lustystories.fun par ।
राहुल की जगह अब मैं रोहन था, 24 साल का एक गोरा-चिकना, नाजुक बदन वाला युवक। दिल्ली के एक मल्टी नेशनल कंपनी में मैनेजर की पोस्ट पर काम करता था। स्कूल के दिनों से ही मैं बॉटम बन चुका था। अपने क्लासमेट अर्जुन के साथ पहली बार गांड मरवाई थी, तब से गांड में लंड लेने की लत सी लग गई थी। अर्जुन मेरा टॉप था – 28 साल का मर्दाना बदन, मोटा 8 इंच का लंड।
हम दोनों दिल्ली के एक लग्जरी अपार्टमेंट में रहते थे। रातें चुदाई से भरी रहतीं। वह मेरे चूचों को इतनी जोर से चूसता कि निशान पड़ जाते, मेरी गांड को घंटों तक ठोकता।
फिर अचानक अर्जुन को सिंगापुर में तीन साल के लिए ट्रांसफर मिल गया। उसके जाने के बाद मेरी गांड सूनी पड़ गई। दो महीने तक मैंने मोमबत्ती, उंगलियां, वाइब्रेटर सब ट्राई किए, लेकिन असली मोटा लंड नहीं मिला तो खुजली बढ़ती गई। रात को सपने में अजनबी मर्दों द्वारा अपनी गांड फटवाते देखता।
एक दिन ऑफिस की फैक्ट्री साइट पर मैं इंस्पेक्शन के लिए गया। वहां ट्रक ड्राइवर विक्रम को देखा। विक्रम 37 साल का था, काला-कड़ा, मजबूत शरीर, छह फुट लंबा, चौड़े कंधे। उसका क्लीनर रजत (19 साल) ट्रक के पीछे झुका हुआ था और विक्रम उसकी गांड में जोर-जोर से अपना लंड ठोक रहा था। विक्रम का लंड कम से कम 9 इंच लंबा और मोटा था, जैसे कोई काला सांप।
रजत चीख रहा था लेकिन मजा भी ले रहा था। मैं छुपकर देखता रहा। मेरी गांड सिकुड़ने लगी।
विक्रम का चेहरा क्रूर था, आंखों में जानवर जैसी भूख। मैंने सोचा यही मेरा नया टॉप हो सकता है। विक्रम भरोसेमंद लगा – सीनियर ड्राइवर, कंपनी में अच्छी पकड़। मैंने प्लान बनाया।
दो दिन बाद मैंने उसे फोन किया। “विक्रम भाई, कहां हो?”
“कल मुंबई जा रहा हूं ट्रक से, अकेला। क्लीनर छुट्टी पर है।”
“मुझे ट्रक का सफर एक्सपीरियंस करना है। साथ ले चलोगे?”
विक्रम हंसा, “साहब, तकलीफ होगी।”
“नहीं, बस मजा करना है।”
मैंने पूरी बॉडी वैक्सिंग कराई, स्किन अब और भी चिकनी, गेहुंआ रंग की हो गई थी। कंडोम के ढेर सारे पैकेट, के-वाई जैल की दो बड़ी ट्यूब्स, अपना पसंदीदा नरम लेकिन तेज चाबुक, दर्द निवारक गोलियां, लुब्रिकेंट सब बैग में रखा। ऑफिस से 12 दिन की छुट्टी ली और विक्रम के साथ दिल्ली से मुंबई के लंबे हाईवे पर निकल पड़ा।
पहले दिन हाईवे पर ट्रैफिक कम था। मैंने विक्रम से कहा, “पेशाब लगी है।”
ट्रक रुका। मैंने पैंट उतारकर मूता। मेरे गोल, भरे हुए कूल्हे विक्रम की नजर में आए। उसकी आंखें भड़क उठीं। लंच पर ढाबे में मैंने बात शुरू की।
“विक्रम भाई, तुम्हारी बीवी?”
“तीन महीने में एक बार मिलती है। तुम साहब?”
मैंने सीधे कहा, “मुझे शादी नहीं करनी। मैं अर्जुन नाम के दोस्त के साथ रहता था। वह मेरी गांड मारता था। मुझे लंड की बहुत आदत हो गई है। मैंने तुम्हें रजत की गांड मारते देखा है। तुम्हारा लंड बहुत मोटा है।”
विक्रम की आंखें चौड़ी हो गईं। “साहब… तुम…”
“राहुल मत बोलो, बस रोहन। और वादा करो, किसी को नहीं बताना।”
उसने वादा किया। हम दोनों के बीच तनाव बढ़ गया। खाने के बाद मैंने शॉर्ट्स पहन लिए। मेरी चिकनी जांघें विक्रम को पागल कर रही थीं। वह गियर बदलते वक्त जानबूझकर मेरी जांघों को छू रहा था। मैं सी-सी-सी करके सिसकियां भर रहा था।
कुछ घंटों बाद घना जंगल वाला इलाका आया। विक्रम ने ट्रक सड़क से हटाकर अंदर लिया। “चलो, मजे करते हैं।”
मैंने बैग से कंडोम और जैल निकाला। विक्रम ने लुंगी उतारी। उसका लंड देखकर मेरी सांस रुक गई – 9.5 इंच लंबा, मोटाई अंगूठे जितनी, काला और नसों से भरा। मैं पेड़ के सहारे झुका। विक्रम ने मेरे कूल्हों पर जोरदार थप्पड़ मारा। “बहुत मस्त गांड है तेरी, रंडी!”
एक झटके में पूरा लंड अंदर। दो महीने की टाइट गांड फटने लगी। मैं चीखा, “आआह… फट गई… धीरे!” लेकिन विक्रम ने मेरे बाल पकड़कर और जोर से ठोंका। दर्द और मजा का मिश्रण। उसकी गेंदें मेरी गांड से टकरा रही थीं। “ले रंडी, ले पूरा!” वह गुर्राया।
करीब 20 मिनट तक उसने मेरी गांड का भयंकर हमला किया। फिर कंडोम में झड़ गया। मैं थरथरा रहा था।
“अगली बार चूचे भी दबाऊंगा,” उसने कहा।
ट्रक में वापस हम खुलकर बातें करने लगे। रात को ट्रक के अंदर उसने मुझे चूम लिया। उसके होंठ क्रूर थे। उसने मेरे चूचों को काटा, चूसा। मैं उसके लंड को चूसने लगा। फिर पेट के बल लेट गया। विक्रम ऊपर चढ़ा और फिर से गांड फाड़ने लगा। पूरी रात तीन बार उसने मुझे चोदा।
दूसरे दिन हमने जंगल में फिर मस्ती की। मैंने चाबुक निकाला। “मेरी गांड पर मारो, जोर से!”
विक्रम ने मुझे पेड़ से बांध दिया। चाबुक की आवाज गूंजी – फटाक! फटाक! मेरे सफेद कूल्हे लाल हो गए। दर्द से मैं तड़प रहा था लेकिन गांड गीली हो रही थी। फिर उसने लंड घुसाया और घमासान चुदाई की।
तीसरे दिन पहुंचे मुंबई के पास। सामान अनलोडिंग में देर थी। विक्रम ने मुझे पास के ढाबे पर ले जाकर कमरा दिलाया। शाम को वहां कई ड्राइवर इकट्ठे हुए। विक्रम का दोस्त करण – 40 साल का, और भी भयंकर मर्द। उसका लंड 10 इंच से ज्यादा लंबा और मोटा था।
रात को ढाबे के पीछे टायर वाली जगह। बड़े-बड़े ट्रक टायर रस्सियों से पेड़ों से लटके हुए थे। अंदर चादर बिछी। एक ड्राइवर ने अपने क्लीनर को नंगा करके टायर में पेट के बल लिटा दिया। फिर जोर-जोर से गांड मारने लगा। चीखें गूंज रही थीं।
विक्रम ने मुझे नंगा किया। मेरे चूचों को इतनी जोर से चूसा कि नीले निशान पड़ गए। फिर मुझे टायर में लिटाया। हाथ-पैर बाहर लटक रहे थे। गांड बिल्कुल उजागर। विक्रम ने के-वाई लगाया और पूरा लंड एक झटके में घुसा दिया। “आआहहह!” मैं चीख उठा।
करण पास में ही अपने क्लीनर को चोद रहा था। उसने कहा, “विक्रम, तेरी रंडी बहुत मस्त है। एक बार मुझे दे।”
विक्रम नशे में था। “ले ले आज जश्न है!”
करण ने चाबुक उठाया। मेरे लटके हुए कूल्हों और जांघों पर बेरहमी से मारने लगा। फटाक! फटाक! “ढीली कर गांड, साली!”
मैं चीख रहा था। फिर उसने अपना विशाल लंड निकाला। 10.5 इंच का मोटा हथियार। मैं डर गया, “नहीं… फट जाएगी…!”
लेकिन करण ने बाल पकड़े और एक ही झटके में आधा लंड घुसा दिया। मेरी आंखों से आंसू निकल आए। दर्द असहनीय था। वह धीरे-धीरे पूरा घुसाने लगा। फिर तेजी से ठोकने लगा। हर झटके पर टायर हिल रहा था। मैं अर्धबेहोश हो गया लेकिन गांड अंदर से खुश थी।
करण ने करीब 25 मिनट तक मेरी गांड का कच्चा मांस बनाया। अंत में कंडोम में झड़ गया। मेरी गांड से खून जैसा लाल पानी निकल रहा था। विक्रम ने मुझे उतारा, कमरे में ले जाकर बर्फ लगाई, दवा दी।
वापसी की यात्रा में भी कई बार चुदाई हुई। जंगलों में, ट्रक में, ढाबों पर। विक्रम और करण दोनों ने मिलकर कई बार मुझे दो-दो लंडों से चोदा।
9 महीने बाद अर्जुन का दोस्त विवान (27 साल) दिल्ली आ गया। वह मेरा नया टॉप बना। विवान बहुत प्यार करता था लेकिन चुदाई क्रूर थी। वह बिना कंडोम मेरी गांड में वीर्य भर देता। 69 पोजीशन में लंड चूसता, फिर घंटों तक गांड फाड़ता।
जब भी मुझे विक्रम की याद आती, मैं विवान को लेकर जंगलों में चला जाता। विवान को भी यह पसंद आने लगा।
रोहन की जिंदगी अब पूरी तरह से गांड चुदाई की भूख से बंध चुकी थी। विवान के आने के बाद तो जैसे आग में घी पड़ गया। विवान 27 साल का था, छह फुट दो इंच लंबा, जिम किया हुआ शरीर, मसल्स फटे हुए, और उसका लंड 9.5 इंच लंबा, मोटाई दो अंगुल, नसों से उभरा हुआ और सिरा हमेशा गीला रहने वाला। वह मुझे इतना क्रूरता से चोदता कि कई बार मैं बेहोश हो जाता। लेकिन वही दर्द मुझे पागल कर देता।
विवान रोज ऑफिस से लौटते ही मुझे नंगा करके अपार्टमेंट के बालकनी में खड़ा कर देता। दिल्ली की ऊंची इमारत, नीचे ट्रैफिक की आवाजें, और ऊपर विवान का लंड मेरी गांड में घुसता। “ले रंडी, पूरी दिल्ली देखे तेरी गांड फटती हुई!” वह मेरे बाल खींचकर, गले को दबाकर, चूचों को इतनी जोर से काटता कि खून निकल आता। बिना कंडोम, सीधा वीर्य मेरी गांड के अंदर उड़ेल देता। गर्म, चिपचिपा वीर्य गांड की दीवारों से टपकता, और मैं खुशी से कांपता।
एक शाम विवान ने मुझे बताया, “कल विक्रम आ रहा है शहर में। मैंने उसे इनवाइट किया है। तुझे तीन लंड चाहिए ना?” मेरी गांड सिकुड़ गई। विक्रम का क्रूर स्वभाव मुझे याद आया।
अगली रात विक्रम आया। उसके साथ उसका पुराना साथी रणवीर भी था – 42 साल का, काला, भैंस जैसा शरीर, 11 इंच का विशालकाय लंड जिसकी मोटाई किसी लड़की की कलाई जितनी। तीनों मर्द मुझे घेरकर खड़े हो गए। विवान ने मुझे बाल पकड़कर घुटनों पर बैठाया। “चूस रंडी, सबका स्वागत कर।”
मैंने पहले विक्रम का मोटा लंड मुंह में लिया। गला फट रहा था। फिर रणवीर का। वह तो मुंह के अंदर ही पूरा नहीं समा रहा था। तीनों ने बारी-बारी मेरे मुंह में ठोका। थूक, आंसू और लंड का पानी मेरे चेहरे पर बह रहा था।
फिर उन्होंने मुझे बेड पर पटका। विवान नीचे लेट गया, मुझे अपनी गोद में बिठाया और अपना लंड मेरी गांड में घुसा दिया। विक्रम सामने आया, मेरे चूचों को मरोड़ते हुए अपना लंड मेरे मुंह में ठेला। रणवीर ने पीछे से मेरी गांड के पास आकर विवान के लंड के साथ अपनी उंगली घुसाने की कोशिश की। “डबल फक करो इसकी!”
रणवीर ने के-वाई की पूरी ट्यूब मेरी गांड पर उड़ेल दी और अपना 11 इंच का लंड विवान के लंड के बगल में घुसाने लगा। मेरी गांड फटने लगी। “आआआहहह… मार डालोगे… फट गई मेरी गांड!” मैं चीख रहा था लेकिन तीनों मर्द हंस रहे थे। रणवीर ने जोर का झटका मारा। आधा लंड अंदर चला गया। दर्द से मेरी आंखें उलट गईं। लेकिन गांड अंदर से भर गई थी। दोनों लंड एक साथ मेरी गांड में घुस-घुसकर निकल रहे थे।
विवान ने मेरे चूचों को काटा, विक्रम ने गला दबाया, रणवीर ने कमर पकड़कर इतनी तेजी से ठोका कि बेड हिल रहा था। “ले साली, ले पूरी रात चुदेगी!” तीनों ने घंटों तक मुझे इस डबल पेनेट्रेशन में रखा। जब वे झड़े तो मेरी गांड से वीर्य का फव्वारा निकला। सफेद, गाढ़ा वीर्य मेरी जांघों पर बह रहा था।
उस रात उन्होंने मुझे बाथरूम में भी चोदा। विक्रम ने मुझे दीवार से सटाकर खड़ा किया, मेरी टांगें अपने कंधों पर रखीं और खड़े-खड़े गांड फाड़ी। रणवीर ने मुंह में लंड ठेला। विवान चाबुक लेकर मेरी पीठ और कूल्हों पर मारता रहा। फटाक! फटाक! मेरी चीखें पूरे अपार्टमेंट में गूंज रही थीं लेकिन कोई नहीं सुन रहा था।
सुबह तक मेरी गांड लाल, सूजी हुई, वीर्य और खून से सनी थी। लेकिन मैं संतुष्ट था।
इसके बाद तो सिलसिला शुरू हो गया। विक्रम जब भी दिल्ली आता, रणवीर को साथ लेकर आता। कभी ट्रक में, कभी जंगल में, कभी होटल के रूम में। एक बार तो मुंबई हाईवे पर ट्रक के अंदर तीनों ने मुझे घेर लिया। ट्रक चलते-चलते विवान ड्राइव कर रहा था, विक्रम और रणवीर मुझे पीछे चोद रहे थे। मैं टायर वाली पोजीशन में लटका हुआ था। रणवीर का लंड अंदर, विक्रम मुंह में। हर ब्रेक पर झटका।
जंगल की एक घटना याद आती है। हम चारों (मैं, विवान, विक्रम, रणवीर) एक घने जंगल में गए। रात का अंधेरा। उन्होंने मुझे नंगा करके एक बड़े पेड़ से दोनों हाथ बांध दिए। पैर भी फैलाकर रस्सी से बांध दिए। फिर चाबुक, बेल्ट, हाथ सब चला। मेरे कूल्हे, जांघें, पीठ, चूचे – कहीं जगह नहीं बची जो लाल न हो गई हो।
“रो मत रंडी, तुझे तो यही पसंद है!” विवान ने कहा और अपना लंड मेरी गांड में ठेल दिया। फिर विक्रम आया, फिर रणवीर। बारी-बारी, कभी दो-दो, कभी एक-एक। रणवीर ने इतनी जोर से ठोका कि मुझे लगा मेरी रीढ़ टूट जाएगी। मैं चीख-चीखकर बेहोश हो गया। जब होश आया तो मेरी गांड से वीर्य टपक रहा था और तीनों मर्द शराब पी रहे थे।
फिर उन्होंने मुझे घास पर पटककर फिर से शुरू किया। इस बार मैं ऊपर था – विवान का लंड गांड में, विक्रम का मुंह में, रणवीर मेरा लंड चूस रहा था। 69 पोजीशन में क्रूर चुदाई। मैं भी अब पूरी रंडी बन चुका था। उनकी गेंदों को चूसता, गांड हिलाकर लंड लेता।
कुछ महीनों बाद एक और तूफान आया। विक्रम ने अपने ट्रक ड्राइवर दोस्तों का ग्रुप बनाया। पांच मर्द – सभी 35-45 साल के, भारी-भरकम लंड वाले। वे सब मिलकर मुझे एक पुराने गोदाम में ले गए। वहां बड़े-बड़े टायर लटके हुए थे।
पूरी रात गैंगबैंग। एक के बाद एक, कभी दो-दो लंड गांड में, कभी एक गांड में दूसरा मुंह में। मेरी चीखें, उनकी गालियां, चाबुक की आवाजें, थप-थप की आवाजें – सब मिलकर जंगली संगीत बन गया। रणवीर ने मुझे टायर में लटकाकर इतनी क्रूरता से चोदा कि मेरी गांड के आसपास खून बहने लगा। लेकिन मैंने रोका नहीं। “और मारो… फाड़ दो… मुझे रंडी बना दो!” मैं चिल्लाया।
वे सब झड़-झड़कर मेरे शरीर पर वीर्य उड़ेलते। चेहरे पर, चूचों पर, गांड पर, पेट पर। मैं वीर्य से नहाया हुआ था।
सुबह जब वे गए तो मैं गोदाम के फर्श पर पड़ा था। बदन दर्द से चूर, गांड फटी हुई, लेकिन मन में अजीब संतोष। विवान मुझे उठाकर घर ले गया। उसने मेरी गांड पर बर्फ लगाई, दवा दी, और फिर शाम को फिर से चोदना शुरू कर दिया।
अब मेरी आदत और बढ़ गई थी। मैं खुद विक्रम को फोन करके बुलाता। “भाई, जल्दी आओ, मेरी गांड सूख रही है।”
एक बार तो मैंने विवान के साथ मिलकर प्लान किया। हम तीनों (मैं, विवान, विक्रम) रणवीर के ट्रक में लंबे सफर पर निकले। रास्ते भर मैं ट्रक के केबिन में नंगा लेटा रहता। कोई भी ड्राइव करता, मैं उसकी गोद में बैठकर लंड लेता। जंगलों में रुककर घंटों चुदाई।
मेरी जिंदगी अब एक सेक्स मशीन की तरह हो गई थी। दर्द, क्रूरता, बेरहमी और लंड की भूख – ये सब मेरी सांस बन गए थे। कभी-कभी दर्द इतना बढ़ जाता कि मैं सोचता रुक जाऊं, लेकिन जैसे ही गांड में खुजली होती, मैं फिर तैयार हो जाता।
विवान मुझे प्यार भी करता था। दिन में ऑफिस के बाद वह मुझे गले लगाता, चूमता, लेकिन रात में जानवर बन जाता। विक्रम और रणवीर क्रूर मालिक थे। वे मुझे रंडी, साली, गांडू कहकर अपमानित करते और मुझे और मजा आता।
यह सिलसिला चलता रहा। महीनों तक। मेरी गांड अब इतनी ट्रेंड हो चुकी थी कि 11 इंच का लंड भी आसानी से अंदर ले लेती। लेकिन हर बार नया दर्द, नया मजा।
अगर आपको यह क्रूर और बेरहम चुदाई वाली कहानी पसंद आई हो तो जरूर बताएं। अगली कहानी में और भी ज्यादा हॉट, ब्रूटल और गैंगबैंग सीन होंगे।
मेल करते समय “रोहन की ट्रक वाली क्रूर गांड चुदाई – पार्ट 2” लिखना।