20 साल की प्रिया को अर्जुन ने अपनी विशाल लंड से दुकान, होटल, बीच और क्लब में बर्बरता से चोदा। खूनी काट, गैंगबैंग, पब्लिक फाड़ और असीम क्रूर वासना की वो जंगली, बेहद खतरनाक और लालची कहानी जो एक बार शुरू हुई तो कभी रुकी नहीं full desi kahani on lustystories.fun ।
मेरा नाम अर्जुन है। मैं 25 साल का एक तगड़ा, हैंडसम लड़का हूँ। दिल्ली के पटेल नगर इलाके में रहता हूँ। एक मल्टीनेशनल कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर की जॉब करता हूँ। मेरी बॉडी जिम की वजह से शेप्ड है, चौड़ी छाती, पतली कमर और मोटी टांगें। मेरा लंड 8 इंच लंबा और 4 इंच मोटा है, जो किसी भी औरत को चीखने पर मजबूर कर देता है। मैं सेक्स का शौकीन हूँ और जानता हूँ कि किसी लड़की, भाभी या आंटी को कैसे रुला-रुलाकर चोदना है।
पटेल नगर की गलियों में एक छोटी सी किराना दुकान थी, जिसे रवि किराना स्टोर कहते थे। दुकान के अंदर ही रवि अंकल की बेटी प्रिया बैठती थी। प्रिया सिर्फ 20 साल की थी, लेकिन उसकी देह किसी परिपक्व रंडी की तरह थी। उसका फिगर 36-26-38 का था। बड़े-बड़े गोरे मम्मे, कसी हुई कमर और मोटी, गोल गांड। चेहरे पर मासूमियत थी, लेकिन आँखों में चुदाई की भूख साफ झलकती थी। उसके लंबे काले बाल, गुलाबी होंठ और निचली कमर पर हल्की सी चुभन वाली चाल देखकर मेरी नजर बार-बार उस पर अटक जाती।
मैं रोज शाम को दुकान पर जाता। कभी सिगरेट, कभी कोल्ड ड्रिंक, कभी चिप्स। प्रिया मुझे देखते ही मुस्कुरा देती और मज़ाक शुरू कर देती।
“अर्जुन भैया, आज फिर अकेले आए हो? कोई गर्लफ्रेंड नहीं बनाई अभी तक?”
मैं हँसकर जवाब देता, “जब तुम जैसी चीज़ सामने हो तो गर्लफ्रेंड की क्या जरूरत?”
धीरे-धीरे हमारा ये हंसी-मज़ाक गंदा होने लगा। वह मुझे अश्लील इशारे करने लगी। कभी अपनी कमीज के ऊपर से मम्मों को दबाकर दिखाती, कभी झुककर अपनी गहरी नेकलाइन दिखाती। मैं भी पीछे नहीं हटता।
एक दिन गर्मी का मौसम था। दोपहर के तीन बजे थे। मैं दुकान पर पानी की बोतल लेने गया। प्रिया अकेली थी। उसने सफेद टाइट टॉप और नीला शॉर्ट्स पहना हुआ था, जिससे उसकी मोटी जांघें और गोल गांड साफ नजर आ रही थीं।
“अर्जुन, आजकल बहुत गर्मी पड़ रही है ना?” उसने कामुक नजरों से कहा।
“हाँ, लेकिन असली गर्मी तो तुम्हारे अंदर है प्रिया,” मैंने सीधा जवाब दिया।
वह हँसी और मेरे करीब आई। “तो दिखाओ ना अपनी गर्मी… मैं तो देखना चाहती हूँ कि तुम कितने मर्द हो।”
मैंने चारों तरफ देखा। गली सुनसान थी। “अंदर चलो,” मैंने कहा।
प्रिया ने तुरंत दुकान का शटर आधा गिरा दिया। हम अंदर चले गए। दुकान के पीछे छोटा सा स्टोर रूम था, जहाँ सामान रखा रहता था। एसी चल रहा था, लेकिन हम दोनों की देह पहले से ही आग की तरह जल रही थी।
जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, प्रिया ने मेरी शर्ट का बटन खींचकर तोड़ दिया और मेरी छाती चूसने लगी। मैंने उसके बाल पकड़े और उसके होंठों पर अपना मुंह रख दिया। हम दोनों जानवरों की तरह एक-दूसरे को चूस रहे थे। मेरी जीभ उसकी जीभ को रगड़ रही थी, लार टपक रही थी।
“साली, कितनी चुदक्कड़ है तू,” मैंने उसके होंठ काटते हुए कहा।
“हाँ अर्जुन… मैं तुम्हारे लंड की भूखी हूँ। बहुत दिनों से सपने देख रही हूँ कि तुम मुझे रगड़-रगड़कर चोदोगे,” वह हाँफते हुए बोली।
मैंने उसका टॉप ऊपर किया। ब्रा के अंदर से उसके ३६ इंच के भारी मम्मे बाहर आ गए। गुलाबी निप्पल पहले से ही खड़े थे। मैंने एक मम्मा मुंह में भर लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। दूसरे मम्मे को हाथ से मसल रहा था। प्रिया कराह रही थी, “आह… अर्जुन… जोर से… काट लो इन्हें… मेरे मम्मे तुम्हारे हैं आज!”
मैंने उसके निप्पल को दांतों से काटा। वह चीख उठी, लेकिन दर्द के साथ मजे की सिसकारी भी निकली। मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़ा किया और उसके शॉर्ट्स उतार दिए। उसकी पैंटी पहले से ही भीगी हुई थी। मैंने पैंटी नीचे सरकाई। उसकी चूत बिल्कुल क्लीन शेव थी, गुलाबी और सूजी हुई।
मैं घुटनों पर बैठ गया और उसकी चूत पर जीभ फेरने लगा। प्रिया ने मेरे सिर को अपनी जांघों में दबा लिया। “चाटो… पूरी चूत चाटो… अंदर तक जीभ डालो अर्जुन!”
मैंने उसकी चूत के अंदर जीभ घुसेड़ दी और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। उसका पानी मेरे मुंह में बह रहा था। वह झड़ने लगी। उसकी टांगें काँप रही थीं। “आह… मैं झड़ गई… तुम तो जादूगर हो!”
अब मेरी बारी थी। मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा ९ इंच का मोटा लंड लोहे की रॉड की तरह खड़ा था। प्रिया की आँखें फट गईं।
“ये… ये तो घोड़े का लंड है! मेरी चूत फट जाएगी!”
“फटेगी तो ठीक है, आज तुझे मैं रंडी बना दूँगा,” मैंने उसके बाल पकड़े और लंड उसके मुंह में ठूंस दिया।
प्रिया गला फाड़कर चूसने लगी। आधा लंड मुंह में लेकर आगे-पीछे कर रही थी। मैं उसके गले तक धक्के दे रहा था। वह उबकाई ले रही थी, लेकिन रुक नहीं रही थी। लार उसके मुंह से बह रही थी। मैंने उसके मम्मों पर थप्पड़ मारे और लंड और जोर से उसके गले में घुसाया।
“चूस साली… पूरा मुंह चूत बना दे!”
दस मिनट तक उसका मुंह चोदने के बाद मैंने उसे उठाया और स्टोर रूम की टेबल पर लिटा दिया। उसकी टांगें फैला दीं और लंड की नोक उसकी चूत पर रखी।
“अब ले अपनी गर्मी,” कहकर मैंने एक जोरदार धक्का मारा।
आधा लंड एक ही झटके में अंदर चला गया। प्रिया चीख पड़ी, “आआह… मार डाला… निकालो… बहुत बड़ा है!”
मैं रुका नहीं। दूसरे धक्के में पूरा ९ इंच उसकी चूत में घुसा दिया। उसकी चूत के दीवारें मेरे लंड को जकड़ रही थीं। मैंने बेरहमी से चोदना शुरू किया। तेज-तेज धक्के। हर धक्के पर उसके मम्मे उछल रहे थे।
“चोद… जोर से चोद… फाड़ दो मेरी चूत!” वह अब दर्द भूलकर चिल्ला रही थी।
मैंने उसकी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और पिस्टन की तरह चोदने लगा। कमरे में चप-चप, थप-थप की आवाजें गूंज रही थीं। उसकी चूत से झाग बन रहा था। वह दो बार और झड़ चुकी थी।
मैंने उसे घुमाकर डॉगी स्टाइल में किया। उसकी मोटी गांड पर थप्पड़ मारते हुए लंड अंदर डाला। “ले रंडी… तेरी गांड भी मारूँगा आज!”
उसकी गांड को फाड़ते हुए मैं चोद रहा था। प्रिया तकिए में मुंह दबाकर चीख रही थी। मैंने उसके बाल खींचे और गले में काट लिया।
“अंदर ही निकाल दूँ?”
“हाँ… भर दो अपनी गर्म वीर्य से… मेरी चूत गर्भवती कर दो!”
मैंने आखिरी जोरदार धक्के मारे और उसकी चूत के अंदर ही झड़ गया। गर्म वीर्य की धार उसके अंदर फूट पड़ी। हम दोनों हाँफते हुए गिर पड़े।
लेकिन ये शुरुआत थी।
हमने कपड़े पहने। बाहर देखा, अभी भी कोई नहीं था। प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “रात को आना। घर वाले शादी में गए हैं। पूरी रात मेरे पास रहना।”
रात नौ बजे मैं उसके घर पहुँचा। पूरा घर खाली था। प्रिया ने काला ट्रांसपेरेंट नाइट सूट पहना हुआ था। उसके निप्पल और चूत की लाइन साफ दिख रही थी।
जैसे ही मैं अंदर घुसा, उसने मुझे दीवार से लगा दिया और मेरी पैंट उतारकर लंड मुंह में ले लिया। मैंने उसे उठाकर बेडरूम में ले गया।
उस रात मैंने उसे हर तरीके से चोदा।
पहले मिशनरी में, फिर डॉगी, फिर काउगर्ल। मैंने उसके मम्मों पर शहद डालकर चाटा, उसकी चूत में उंगली डालकर ग-spot मारा, फिर लंड से फाड़ा। उसकी गांड में भी थोड़ा-थोड़ा करके लंड घुसाया। वह दर्द से चीखती, लेकिन और माँगती।
“अर्जुन… तुम जानवर हो… मुझे रंडी बना दो… हर रोज चोदना मुझे!”
मैंने उसे बाथरूम में ले जाकर शावर के नीचे खड़ा करके चोदा। पानी के साथ उसकी चीखें गूंज रही थीं। फिर किचन में बेंच पर लिटाकर उसकी चूत चाटी और फिर से भरा।
तीसरी बार जब मैं झड़ा तो उसकी चूत, मुंह और मम्मों पर वीर्य फैला दिया। प्रिया पूरी तरह से संतुष्ट और थकी हुई थी, लेकिन उसकी आँखों में अभी भी भूख थी।
सुबह होने तक हम चार बार चुदाई कर चुके थे। उसके शरीर पर मेरे दांतों के निशान, गालों पर थप्पड़ों के लाल चिह्न और चूत सूजी हुई थी।
उसके बाद हमारा सिलसिला चलता रहा। कभी दुकान के स्टोर रूम में, कभी मेरी कार में, कभी होटल में। प्रिया मेरी पक्की चुदाई पार्टनर बन गई।
वो दिन याद आता है जब मैंने उसे पहली बार देखा था। अब वो मेरी पूरी तरह से बनी हुई थी। उसकी चूत, उसकी गांड, उसके मम्मे… सब मेरे थे।
और मैं जानता था, ये सिर्फ शुरुआत थी।
और मैं जानता था, ये सिर्फ शुरुआत थी।
उस रात के बाद प्रिया पूरी तरह से बदल गई थी। वो अब कोई मासूम दुकान वाली लड़की नहीं रही। वो मेरी भूखी रंडी बन चुकी थी। अगले दिन सुबह जब मैं उसके घर से निकला तो उसकी चाल लड़खड़ा रही थी। चूत सूजी हुई थी, गांड पर मेरे हाथों के लाल निशान थे और होंठ फटे हुए थे। लेकिन उसके चेहरे पर वो चमक थी जो सिर्फ पूरी तरह चुद चुकी औरत को आती है।
“अर्जुन… आज शाम को फिर आना,” उसने दरवाजे पर खड़े होकर मेरे कान में फुसफुसाया, “मेरी चूत अभी भी तुम्हारे लंड की तरस रही है।”
मैं मुस्कुराया और चला गया। लेकिन शाम होते-होते मेरे मन में एक नया प्लान बन चुका था। इस बार मैं उसे सिर्फ चोदना नहीं चाहता था। मैं उसे तोड़ना चाहता था। पूरी तरह से।
शाम सात बजे मैं दुकान पर पहुंचा। प्रिया अकेली थी। उसने आज काला टाइट टॉप और बहुत छोटी स्कर्ट पहनी थी, जिससे उसकी मोटी जांघें और गांड का आधा हिस्सा बाहर झांक रहा था। मैंने दुकान का शटर पूरी तरह बंद कर दिया और उसे बालों से पकड़कर स्टोर रूम में घसीट लिया।
“आज तुझे मैं सिखाऊंगा कि असली मर्द क्या होता है,” मैंने गुर्राते हुए कहा।
प्रिया की आंखों में डर और उत्तेजना दोनों थे। मैंने उसे घुटनों पर बैठाया और अपना ९ इंच का मोटा लंड बाहर निकाला। बिना कोई चेतावनी दिए मैंने उसके गले तक ठोक दिया। प्रिया की आंखें बाहर निकल आईं। वह उबकाई ले रही थी, आंसू बह रहे थे, लेकिन मैंने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से मुंह चोदा। लंड उसके गले में घुस रहा था, लार और थूक उसके चेहरे पर बह रहा था।
“चूस साली रंडी… गला चूत बना दे अपना!”
दस मिनट तक उसके मुंह को फाड़ने के बाद मैंने उसे उठाया और दीवार से सटा दिया। उसकी स्कर्ट ऊपर की, पैंटी फाड़ दी। उसकी चूत पहले से ही रस से लथपथ थी। मैंने लंड की नोक रखी और एक ही झटके में पूरा का पूरा ९ इंच घुसा दिया। प्रिया चीख पड़ी, “आआह… फट गई… मार डाला रे!”
लेकिन मैं रुका नहीं। मैंने उसे बेरहमी से पिस्टन की तरह चोदना शुरू कर दिया। हर धक्का इतना जोरदार कि उसकी टांगें हवा में लहरा रही थीं। उसके मम्मे टॉप के अंदर उछल रहे थे। मैंने टॉप फाड़ दिया और निप्पलों को दांतों से चबाया। खून तक निकल आया। प्रिया दर्द और मजे के मिले-जुले आंसुओं से चीख रही थी।
“जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… मैं तुम्हारी रंडी हूँ अर्जुन… आज मुझे मार डालो!”
मैंने उसे फर्श पर पटक दिया और डॉगी स्टाइल में घुसा। उसकी मोटी गांड को थप्पड़ों से लाल कर दिया। हर थप्पड़ के साथ उसकी चूत और सिकुड़ रही थी। फिर मैंने उसकी गांड पर निशाना साधा। पहले उंगली, फिर दो, फिर अपना मोटा लंड। प्रिया चीखती रही, “नहीं… गांड फट जाएगी… धीरे!” लेकिन मैंने एक जोरदार धक्का मारा और आधा लंड उसकी गांड में ठेल दिया।
उसकी गांड इतनी टाइट थी कि मेरा लंड दबकर फटने को हो रहा था। मैंने बाल खींचे और पूरी ताकत से चोदना शुरू किया। प्रिया तकिए में मुंह दबाकर रो रही थी, लेकिन उसकी एक हाथ अपनी चूत में उंगलियां डाल रही थी। वह झड़ गई। एक, दो, तीन बार।
मैंने उसकी गांड के अंदर ही झड़ दिया। गर्म वीर्य उसकी आंतों में भर गया।
लेकिन दिन खत्म नहीं हुआ था।
रात को मैं उसे अपने फ्लैट ले गया। वहां मेरे दोस्त राहुल और विक्रम भी थे। प्रिया को देखकर उनकी आंखें चमक उठीं।
“ये क्या अर्जुन? तू शेयर भी करता है?” राहुल ने पूछा।
प्रिया पहले तो शर्मा गई, लेकिन जब मैंने उसके कान में कहा, “आज तुझे तीन लंडों से चुदवाऊंगा,” तो उसकी चूत फिर से गीली हो गई।
हम तीनों ने मिलकर उसे नंगा किया। राहुल ने उसके मुंह में लंड ठूंस दिया, विक्रम ने चूत में घुसा दिया और मैं उसके मम्मों और गांड से खेलने लगा। प्रिया अब पूरी रंडी मोड में थी। वह तीनों लंडों का मजा ले रही थी। कभी मुंह में, कभी चूत में, कभी गांड में।
हमने उसे हर पोजीशन में चोदा। एयरटाइट डबल पेनेट्रेशन में दोनों लंड एक साथ उसकी चूत और गांड में। प्रिया चीख रही थी, “मर गई… फट गई… लेकिन मत रुको… और चोदो मुझे!”
विक्रम ने उसके मम्मों पर मोमबत्ती की गर्म मोम टपकाई। राहुल ने गले पर हल्का दबाव डाला। मैंने उसके क्लिट पर वाइब्रेटर रख दिया। वह लगातार झड़ रही थी। कमरा उसकी चीखों, चप-चप की आवाजों और हमारे गुर्राने से भर गया था।
रात भर हमने उसे रगड़ा। चार बार उसके मुंह में, तीन बार चूत में और दो बार गांड में झड़ा। सुबह तक प्रिया का पूरा शरीर निशानों से भरा हुआ था। होंठ फटे, गर्दन पर सक्शन मार्क्स, मम्मों पर दांत के निशान, जांघों पर थप्पड़ों के लाल छाप और चूत-गांड से वीर्य रिस रहा था।
लेकिन प्रिया खुश थी। “अर्जुन… तुमने मुझे सच में तोड़ दिया। अब मैं तुम्हारी गुलाम हूँ। जितना चाहो, जितने लोगों के सामने चुदवाओ।”
इसके बाद हमारा सिलसिला और खतरनाक हो गया।
एक दिन मैंने उसे दुकान में ही बांध दिया। हाथ ऊपर करके शटर के हुक से। फिर दुकान खोल दी। बाहर ग्राहक आ रहे थे और अंदर मैं उसकी चूत चाट रहा था। प्रिया दबे स्वर में सिसकार रही थी। कोई ग्राहक सामान मांगता तो वह हांफते हुए जवाब देती। मैंने लंड घुसाया और धीरे-धीरे चोदा। बाहर लोग थे, अंदर वो मेरे लंड पर झड़ रही थी।
फिर हम होटल गए। पांच स्टार होटल की सुइट बुक की। वहां मैंने उसे बालकनी में नंगा खड़ा करके चोदा। नीचे सड़क पर लोग घूम रहे थे। प्रिया डर रही थी कि कोई देख लेगा, लेकिन उत्तेजना ज्यादा थी। मैंने उसे बालकनी की रेलिंग पर झुकाया और पीछे से गांड में घुसा दिया। उसकी चीखें दिल्ली की रात में गूंज रही थीं।
एक बार हम कार में गए। हाईवे पर ड्राइव करते हुए प्रिया मेरे लंड पर बैठकर चुद रही थी। ट्रक वाले देख रहे थे, हॉर्न बजा रहे थे। प्रिया को और मजा आ रहा था।
फिर एक वाइल्ड नाइट क्लब में ले गया। वहां डांस फ्लोर पर अंधेरे में मैंने उसकी स्कर्ट ऊपर की और खड़े-खड़े चोद दिया। आसपास लोग नाच रहे थे। किसी ने देख लिया तो भी हमें फर्क नहीं पड़ता था।
धीरे-धीरे प्रिया की भूख बढ़ती गई। अब वह खुद मांगने लगी – “अर्जुन, आज मुझे गैंगबैंग करवाओ… पांच लंड चाहिए।”
मैंने उसके लिए अरेंज किया। एक प्राइवेट पार्टी में तीन लड़के और दो औरतें। प्रिया को बीच में रखकर सबने मिलकर रगड़ा। औरतें उसके मम्मे चूस रही थीं, लड़के चूत और गांड फाड़ रहे थे। प्रिया उस रात सात बार झड़ी। पूरा शरीर वीर्य से नहाया हुआ था।
अब वो मेरी जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थी। दुकान पर वह मेरे लिए खास पैंटी पहनकर आती। कभी-कभी बिना पैंटी। मैं दुकान में घुसकर उसकी चूत में उंगली डाल देता।
एक दिन उसके पापा ने शक किया। लेकिन प्रिया ने झूठ बोलकर मैनेज कर लिया। अब हम और भी सावधानी से लेकिन और भी खतरनाक तरीके से मिलते।
मेरी कंपनी की ट्रिप पर मैंने उसे साथ ले लिया। गोवा के बीच में पांच दिन हमने होटल की बालकनी, स्विमिंग पूल, बीच पर चुदाई में बिताए। रात को बीच पर नंगा होकर चोदा। लहरें हमारे शरीर को छू रही थीं और मैं उसकी चूत में घुसा हुआ था।
प्रिया अब पूरी तरह से मेरी थी। उसकी देह, उसकी आत्मा, उसकी हर सांस।
और मैं जानता था कि ये आग कभी बुझने वाली नहीं। हम दोनों एक-दूसरे को हर रोज नया रूप देते, नई पीड़ा और नया मजा देते।
कभी-कभी सोचता हूँ – अगर उस दिन दुकान पर न गया होता तो क्या होता? लेकिन अब वो सवाल बेकार है।
प्रिया मेरी है। मेरी रंडी, मेरी जान, मेरी आग।
और ये आग रोज और तेज होती जा रही है…
more desi kahani on lustystories:-