बारिश की छांव में बहन की कुंवारी चूत

बारिश, जोंक और खेत में बहन की सलवार खुलते ही भाई ने अपनी 19 साल की कुंवारी बहन प्रीति की चूत फाड़ी, जो बाद में बार-बार चुदाई का आदी बन गई Free sex kahani only on lustystories.fun par।

राजन की उम्र 21 साल थी। घर में माँ, भैया, भाभी और छोटी बहन प्रीति (19 साल) रहती थी। प्रीति गोरी, नाजुक, लेकिन खेत-खलिहान के काम से शरीर में खूबसूरत ताकत थी। उसकी छातियाँ 34 साइज की, कसी हुई, कमर पतली और गांड गोल-मटोल। भाभी ने एक बार राजन को प्रीति की चूत के बारे में बताया था — “बहुत घनी झांटें हैं उसकी, अभी तक कुंवारी है, चूत टाइट और गुलाबी होगी।”

उस दिन से राजन प्रीति को अलग नजर से देखने लगा था। घर के काम में जब वह झुककर बर्तन धोती, सलवार में उसकी गांड हिलती, या रात को हल्की कमीज में चूचियां उभरतीं, तो राजन का लंड खड़ा हो जाता। वह रात में छुपकर मुठ मारता और प्रीति की चूत की कल्पना करता।

जुलाई का महीना था। धान की रोपाई चल रही थी। गाँव से थोड़ा दूर ताल के किनारे राजन का खेत था। माँ को बुखार आ गया था, इसलिए सिर्फ राजन और प्रीति ही गए। दोनों ने धान के पौधे और एक बड़ा छाता लिया।

“भैया, आज जल्दी खत्म कर लेंगे,” प्रीति ने मुस्कुराते हुए कहा। उसकी हल्की नीली सलवार और सफेद कमीज बारिश की नमी में चिपकने लगी थी।

खेत पहुंचते ही काम शुरू हुआ। ताल के पास होने से जोंकें ज्यादा थीं। प्रीति जोंक से बहुत डरती थी। राजन उसके पास ही रहता, जोंक पकड़कर फेंकता।

पहले हल्की बारिश शुरू हुई। प्रीति छाते के नीचे बैठ गई, राजन भीगता हुआ रोपता रहा। बारिश रुकी तो प्रीति भी मदद करने लगी। अचानक उसके बाएं पैर में जोंक लग गई। वह चीखकर भागी। राजन ने दौड़कर जोंक निकाली और उसके घुटने के नीचे वाली जगह को सहलाते हुए बोला, “डर मत, कुछ नहीं होता।”

उसके नरम पैर को छूते ही राजन के शरीर में करंट दौड़ गया।

कुछ देर बाद तेज बारिश और हवा शुरू हो गई। बिजली चमकने लगी। दोनों एक छाते के नीचे आ गए। प्रीति थोड़ा सहम गई थी। अचानक उसने चीख मारकर अपनी दाई जांघ पकड़ ली — “भैया! जोंक! जोंक लग गई!”

राजन ने तुरंत हाथ बढ़ाया। लेकिन उसे जोंक नहीं, सलवार की डोरी महसूस हुई। फिर भी उसने मौके का फायदा उठाया।

“सलवार खोल, देखता हूँ,” उसने गहरी सांस लेते हुए कहा।

प्रीति शरमाई, “भैया… मैंने कच्छी नहीं पहनी।”

“कोई बात नहीं, जल्दी कर वरना जोंक अंदर चली जाएगी,” राजन ने जोर दिया।

प्रीति ने डोरी खोली। राजन ने उसे धीरे से लिटा दिया और सलवार को जांघों तक सरका दिया। सामने घनी, काली, घुँघराली झांटों से भरी प्रीति की कुंवारी चूत दिख गई। राजन का लंड पत्थर की तरह खड़ा हो गया। चूत के ऊपर मोटी झांटें, नीचे गुलाबी फांकों के बीच हल्की सी नमी।

“ये तो डोरी ही है,” राजन ने कहा, लेकिन उसने नाखून से जांघ पर हल्की चिकोटी काट दी ताकि प्रीति को जोंक जैसा लगे। फिर उसका हाथ सीधा चूत पर पहुंच गया।

“अम्मा… भैया क्या कर रहे हो?” प्रीति चौंककर बोली।

लेकिन राजन ने उसे छोड़ा नहीं। उसने प्रीति को दोनों हाथों से पकड़ा और उसके बराबर लेट गया। सलवार को पूरी तरह उतारकर एक टांग अलग कर दी। अब प्रीति की चूत पूरी तरह खुली थी।

“बहन, तू बहुत सुंदर है,” उसने फुसफुसाते हुए कहा और एक हाथ से उसकी कमीज के अंदर हाथ डालकर 34 साइज की टाइट चूचियों को मसलने लगा। चूचियां निप्पल्स सख्त हो चुके थे।

प्रीति सिसकार रही थी — “भैया… ये गलत है… आह्ह…”

राजन ने उसकी कमीज ऊपर की और पहली बार प्रीति की नंगी चूचियां देखीं — गोल, भरी हुई, हल्के भूरे निप्पल्स। उसने मुंह लगाकर एक चूची चूसनी शुरू कर दी। जीभ से निप्पल घुमाता, हल्का काटता। प्रीति की सांसें तेज हो गईं।

दूसरे हाथ से वह चूत सहलाने लगा। झांटों के बीच उंगली फेरते ही प्रीति की चूत गीली होने लगी। “बहन, तेरी चूत तो पहले ही पानी छोड़ रही है,” राजन ने मुस्कुराते हुए कहा।

वह नीचे सरका और प्रीति की जांघों के बीच मुंह ले गया। घनी झांटों को अलग करके उसने चूत की गुलाबी फांकों को चाटना शुरू किया। जीभ चूत के छेद पर घुमाई, क्लिटोरिस को चूसा। प्रीति पागल हो गई — “भैया… उफ्फ… क्या कर रहे हो… आह्हह… मत करो… मजा आ रहा है…”

राजन ने 5-7 मिनट तक चूत चाटी। प्रीति का पहला ऑर्गेज्म आ गया। उसकी चूत से पानी की धार निकली।

अब राजन ने अपना अंडरवियर उतारा। उसका 7 इंच का मोटा लंड लोहे की तरह खड़ा था। उसने प्रीति के मुंह के पास ले जाकर कहा, “चूस बहन।”

प्रीति शरमाई लेकिन राजन ने हल्का दबाया। वह पहली बार लंड चूस रही थी। अनाड़ी लेकिन उत्सुक। राजन ने उसके बाल पकड़कर धीरे-धीरे मुंह में डाला।

फिर उसने प्रीति को मिशनरी पोजीशन में लिटाया। लंड चूत पर रगड़ा। “बहन, अब तेरी कुंवारी चूत फाड़ता हूँ।”

“आराम से भैया… दर्द होगा,” प्रीति ने घबराकर कहा।

राजन ने थूक लगाया और धीरे से दबाव दिया। आधा लंड घुसा तो प्रीति चीखी — “आआह्ह… दर्द कर रहा है… निकालो!”

लेकिन राजन ने जकड़ लिया और एक जोरदार झटके से पूरा लंड प्रीति की चूत में उतार दिया। खून की हल्की धार निकली। प्रीति रो पड़ी। राजन ने उसे चूमकर शांत किया और धीरे-धीरे हिलाने लगा।

धीरे-धीरे दर्द मजे में बदल गया। प्रीति भी कूल्हे उठाने लगी — “भैया… और तेज… आह्ह… फाड़ दो मेरी चूत…”

बारिश तेज हो गई थी। बिजली की रोशनी में दोनों भाई-बहन पागलों की तरह चुदाई कर रहे थे। राजन ने 10 मिनट तक चोदा। फिर पोजीशन बदली। प्रीति को घोड़ी बनाया। गांड ऊपर करके उसकी चूत में पीछे से लंड घुसाया। गांड पर थप्पड़ मारते हुए तेजी से चोदता रहा।

“तेरी गांड भी बहुत मस्त है बहन,” कहकर उसने गांड के छेद को भी उंगली से सहलाया।

तीसरी राउंड में प्रीति ऊपर आई। वह राजन पर बैठकर खुद कूल्हे हिलाने लगी। चूचियां उछल रही थीं। राजन नीचे से चूचियां दबाता, चोदता।

आखिरकार राजन का वीर्य प्रीति की चूत में फूटा। गर्म-गर्म वीर्य चूत के अंदर भर गया। प्रीति भी दूसरी बार झड़ गई।

दोनों थके हुए लेटे रहे। बारिश रुक चुकी थी। राजन ने प्रीति को चूमते हुए कहा, “अब तू मेरी है।”

घर लौटने के बाद भी कहानी जारी रही। रात को जब सब सो गए, राजन प्रीति के कमरे में घुसा। उसने फिर से प्रीति को चोदा — इस बार औरत की तरह, लंबी और रोमांटिक चुदाई। मुंह में वीर्य पिलाया, 69 पोजीशन में चूत चाटी और लंड चुसवाया।

अगले कई दिनों तक खेत, घर की छत, और रात के अंधेरे में दोनों ने बारिश, जोंक और चुदाई का मजा लिया। प्रीति अब खुद मांगती — “भैया, आज मेरी चूत में फिर से अपना माल भर दो…”

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