राहुल ने अपनी माँ कविता को चेन से बाँधा, चाबुक से गाँड और चुत दोनों फाड़े, मुँह में गंदगी ठूँसी और रातभर जानवर की तरह इस्तेमाल किया। दर्द और मजे के बीच माँ पूरी तरह टूट गई milf porn stories।
राहुल 22 साल का था। दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-15 में छोटा-सा फ्लैट। माँ का नाम कविता, उम्र 41। पति दो साल पहले रोड एक्सीडेंट में मर चुका था। घर में सिर्फ माँ-बेटा।
राहुल कॉलेज में फाइनल ईयर का था। माँ घरेलू काम करती थी, कभी-कभी पास के कॉलेज में पार्ट-टाइम क्लीनिंग का काम भी। शरीर अभी भी टाइट था। 36-D के स्तन, चौड़ी कमर, मोटी जांघें और एक ऐसी गांड जो साड़ी में भी साफ झलकती थी। चुत बिना बाल की रखती थी, गुलाबी और हमेशा थोड़ी गीली।
पिछली रात राहुल ने पहली बार माँ की चुत फाड़ दी थी। माँ ने खुद बुलाया था। “बेटा… आज रात मुझे चाहिए…” कहकर। राहुल ने तीन घंटे तक चोदा। माँ चीखी, रोई, फिर खुद ही गांड उठा-उठा के लंड माँगने लगी। आखिर में राहुल ने पूरा माल उसकी बच्चेदानी में भर दिया।
सुबह 7 बजे राहुल उठा। किचन में कविता नाश्ता बना रही थी। पीली साड़ी, बिना ब्लाउज। स्तन लटक रहे थे। राहुल पीछे गया, दोनों हाथों से स्तन पकड़ लिए और जोर से दबाया। निप्पल कड़े हो गए।
कविता मुस्कुराई, “अभी नहीं… नहा ले। आज तेरा प्रैक्टिकल है।”
राहुल ने कान में कहा, “रात का रिजल्ट बता। पास हुआ या फेल?”
कविता ने धीरे से कहा, “जितने लंड अब तक ले चुकी हूँ… उनमें से सिर्फ एक से बेहतर था तू। बाकी सब बेकार।”
“कौन था वो एक?”
“जा तैयार हो। लेट हो जाएगा।”
राहुल नाश्ता करके निकल गया। प्रैक्टिकल सिर्फ डेढ़ घंटे का था। 10:30 पर वापस आ गया। गेट की चाबी से दरवाज़ा खोला। घर खाली लग रहा था। ऊपर छत से आवाज़ आ रही थी।
राहुल चुपके से सीढ़ियाँ चढ़ा। कविता छत पर खड़ी थी, मोबाइल कान पर लगाए। सामने वाले फ्लैट के लड़के विकास से बात कर रही थी। विकास 24 का था, बुआ का बेटा, मोटा और बदसूरत, लेकिन लंड 8 इंच का मोटा।
विकास बोल रहा था, “आज रात आऊँगा। चुत दिखा।”
कविता मना कर रही थी, “नहीं… राहुल घर में है।”
“वीडियो कॉल कर। चुत दिखा तो मान जाऊँ।”
कविता ने देखा राहुल खड़ा है। राहुल ने इशारा किया – दिखा।
कविता ने वीडियो कॉल लगा दी। साड़ी ऊपर की, पैंटी नीचे खींची। दिन की रोशनी में उसकी चुत पूरी साफ दिख रही थी। गुलाबी फाँके, बीच में लाल छेद, थोड़ा-सा पानी टपक रहा था।
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विकास फोन पर लंड निकालकर हिलाने लगा। “उँगली डाल रंडी।”
कविता ने दो उँगलियाँ चुत में घुसा दीं। जोर-जोर से अंदर-बाहर करने लगी। आवाज़ आने लगी – चप-चप।
राहुल ने पैंट-कच्छा एक साथ उतार दिए। उसका लंड 7.5 इंच का, मोटा और नसों वाला, पहले से कड़ा था। वह माँ के सामने खड़ा होकर हिलाने लगा।
विकास बोल रहा था, “और गहरा… चुत फाड़।”
राहुल ने सह न सका। फोन छीनकर काट दिया। कविता को सीढ़ी पर ही घुमाया, झुकाया और एक झटके में पूरा लंड चुत में उतार दिया।
“आआआह्ह्ह… बेटा…” कविता चीखी।
राहुल ने कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोकना शुरू किया। सीढ़ी की रेलिंग पकड़े कविता की गांड हिल रही थी। हर झटके में चुत से पानी निकल रहा था। 20 झटके में ही कविता का पहला ऑर्गेज्म आ गया। उसकी चुत सिकुड़-सिकुड़ के लंड को निचोड़ रही थी। गरम लावा बाहर बहने लगा।
राहुल रुका नहीं। और तेज चोदने लगा। “चिल्ला… कह कि तेरी रंडी चुत बेटे के लंड से फट रही है।”
कविता चीख रही थी, “फाड़ दे… बच्चेदानी तक घुसेड़… राहुल… और जोर से…”
राहुल ने आखिरी झटका मारा और पूरा माल अंदर छोड़ दिया। इतना कि कविता की जांघों से सफेद धारें बहने लगीं।
दोनों नीचे आए। कविता नहाने चली गई। 10 मिनट बाद नंगी निकली। शरीर पर पानी की बूँदें, स्तन हिल रहे थे, चुत से अभी भी राहुल का माल टपक रहा था।
राहुल का लंड फिर खड़ा हो गया। कविता कमरे में गई, गांड हिलाते हुए। राहुल पीछे गया, घुटनों के बल बैठा और जीभ से उसकी गांड चाटने लगा। छेद के आसपास चाटा, फिर जीभ अंदर घुसा दी।
कविता मुड़ी, “ये क्या… अभी तो चोदा…”
“रात को कहा था गांड दूँगी। अब दे।”
“रात में… अभी दर्द होगा।”
“नहीं। अभी।”
कविता बिस्तर पर लेट गई, गांड ऊपर करके। राहुल ने नारियल का तेल निकाला। उँगली से गांड के छेद में तेल भरा, दो उँगलियाँ अंदर घुमाईं। कविता सिसक रही थी।
राहुल ने लंड पर तेल लगाया, गांड पर टिकाया और धीरे-धीरे धक्का दिया। सिर्फ अगल घुसा। कविता जोर से चिल्लाई।
“निकाल… दर्द… बहुत दर्द…”
राहुल रुका नहीं। “चुत की सील बाप ने तोड़ी थी। गांड की सील बेटा तोड़ेगा। हिसाब बराबर।”
एक और धक्का। आधा लंड अंदर। कविता रो रही थी, पसीना बह रहा था। राहुल ने पूरा लंड एक झटके में धकेल दिया।
“आआआआह्ह्ह्ह… मर गई…” कविता चीखी।
राहुल ने कमर पकड़कर मारना शुरू किया। पहले धीरे, फिर जोर से। हर झटके में कविता की गांड की मांसपेशियाँ फड़क रही थीं। 5 मिनट बाद कविता खुद गांड पीछे करने लगी।
“और… और गहरा… फाड़ दे मेरी गांड…”
राहुल पागल हो गया। इतनी जोर से चोदा कि बिस्तर की चरपाई चरमरा रही थी। कविता की गांड लाल हो गई, सूजन आ गई। राहुल ने आखिर में पूरा माल गांड के अंदर छोड़ दिया।
लंड निकाला तो उस पर मल लगा था। राहुल ने कविता के मुँह के सामने लंड पकड़ा।
“साफ कर।”
कविता ने मुँह फेर लिया। राहुल ने बाल पकड़कर सिर घुमाया और लंड मुँह में ठूंस दिया। “चाट। साफ कर। वरना फिर से गांड में डालूँगा बिना तेल के।”
कविता रोते-रोते चाटने लगी। जीभ से मल साफ किया, फिर पूरा लंड मुँह में ले लिया। राहुल ने सर दबाकर गले तक ठोका। कविता की आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन वह चूस रही थी।
राहुल बोला, “रात को विकास आएगा। तू उसे बुला। जब वह तेरी चुत चोद रहा होगा, मैं जाग जाऊँगा। फिर दोनों एक साथ। एक चुत में, एक गांड में। डबल।”
कविता के मुँह में लंड था, वह सिर्फ “हम्म” कर सकी।
राहुल ने मुँह में ही दूसरा माल छोड़ दिया। कविता ने पूरा निगल लिया।
शाम को कविता ने विकास को मैसेज किया – “आ जा। राहुल सो जाएगा।”
रात 11 बजे विकास आया। कविता ने दरवाज़ा खोला। नंगी थी। विकास ने उसे दीवार से लगाकर चुत में उँगली की, फिर बिस्तर पर गिराया और चोदने लगा।
राहुल बगल के कमरे में जाग रहा था। 15 मिनट बाद वह नंगा कमरे में घुसा। विकास हैरान रह गया। कविता ने कहा, “डर मत… आज दोनों।”
राहुल ने कविता को घोड़ी बनाई। विकास ने सामने से चुत में लंड डाला। राहुल ने पीछे से गांड में। दोनों एक साथ ठोकने लगे।
कविता पागल हो गई। दो मोटे लंड अंदर-बाहर हो रहे थे। वह चीख रही थी, “मारो… फाड़ो… दोनों छेद फाड़ दो…”
राहुल ने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। विकास ने स्तन दबा-दबा के मसल दिए। कविता का तीसरा ऑर्गेज्म आया। शरीर कांप रहा था, दोनों छेद सिकुड़-सिकुड़ के लंड निचोड़ रहे थे।
दोनों ने एक साथ माल छोड़ा। कविता की चुत और गांड दोनों सफेद माल से भर गईं। माल बाहर बह रहा था।
विकास चला गया। राहुल कविता के पास लेट गया। कविता थककर सो गई, लेकिन उसकी जांघों के बीच अभी भी माल टपक रहा था।
सुबह राहुल ने फिर से जगाया। इस बार रस्सी से उसके हाथ-पैर बाँध दिए। आँखों पर कपड़ा बाँधा। फिर चुत, गांड और मुँह तीनों जगह बारी-बारी से चोदा। कविता चीख नहीं सकती थी क्योंकि मुँह में लंड था। राहुल ने उसके निप्पल पर क्लिप्स लगाए, गांड पर थप्पड़ मारे जब तक लाल नहीं हो गई।
आखिर में राहुल ने कहा, “अब तू सिर्फ मेरी रंडी है। कोई और लंड नहीं। समझी?”
कविता ने सिर हिलाया। राहुल ने रस्सी खोली और उसे गोद में लेकर सो गया।
अगली सुबह कविता नाश्ता बनाते हुए मुस्कुरा रही थी। राहुल पीछे से आया, स्तन दबाए और बोला, “आज शाम को नई चीज़ ट्राई करेंगे। चेन और चाबुक।”
सुबह का समय था। किचन में कविता नाश्ता बना रही थी। पीली साड़ी पहने, बिना ब्लाउज। स्तन साड़ी के अंदर हिल रहे थे। राहुल पीछे से आया, दोनों हाथों से उसके स्तन पकड़कर जोर से दबाए। निप्पल तुरंत कड़े हो गए।
“आज शाम को नई चीज़ ट्राई करेंगे। चेन और चाबुक,” राहुल ने कान में कहा।
कविता ने सिर घुमाकर देखा। आँखों में डर था, लेकिन मुँह से सिर्फ इतना निकला, “जैसी मरजी बेटा…”
पूरा दिन राहुल कॉलेज गया। कविता घर पर बैठी रही। उसके दिमाग में रात की बातें घूम रही थीं। दो लंड एक साथ, गांड और चुत दोनों फटे हुए, मुँह में मल लगा लंड… और अब चेन-चाबुक। शरीर कांप रहा था, लेकिन चुत गीली हो रही थी।
शाम 6 बजे राहुल लौटा। हाथ में एक काला बैग था। उसने बैग खोला – मोटी लोहे की चेन, चाबुक, रस्सी, क्लिप्स, और एक मोटा काला डिल्डो।
“आज रात तू सिर्फ जानवर है। बोलने की इजाजत नहीं। सिर्फ चीखना और सहना,” राहुल ने कहा।
कविता ने सिर झुका लिया। राहुल ने उसकी साड़ी एक झटके में फाड़ दी। स्तन बाहर आ गए। उसने दोनों निप्पल पर मेटल क्लिप्स लगा दिए। कविता सिसकी, लेकिन चुप रही।
राहुल ने उसे बेडरूम में घसीटा। बिस्तर के चारों कोनों पर चेन बाँध दीं। कविता के हाथ-पैर फैलाकर जकड़ दिए। शरीर पूरा तना हुआ था। चुत और गांड दोनों खुले हुए थे।
राहुल ने चाबुक उठाया। पहली मार गांड पर पड़ी। “थप्प!” लाल निशान उभर आया। कविता ने दाँत भींच लिए। दूसरी मार और जोर से। तीसरी, चौथी… दस मार तक गांड जल रही थी। त्वचा फटने वाली थी।
“गिन,” राहुल ने आदेश दिया।
कविता आंसुओं भरी आवाज में गिनने लगी, “एक… दो… तीन…”
बीस मार के बाद राहुल रुका। गांड पूरी लाल और सूजी हुई थी। उसने उँगली से छुआ तो कविता काँप गई। फिर उसने चाबुक चुत पर मारा। सीधा फाँकों पर। कविता जोर से चिल्लाई।
“चुप!” राहुल ने गाल पर थप्पड़ मारा। फिर चुत पर दो और मारें। पानी निकलने लगा।
राहुल ने काला डिल्डो निकाला। तेल लगाया और एक झटके में चुत में ठूंस दिया। कविता की कमर उछली। डिल्डो इतना मोटा था कि चुत के किनारों से मांस फटता दिख रहा था। राहुल ने उसे अंदर-बाहर करना शुरू किया। जोर-जोर से, बिना किसी दया के। हर धक्के के साथ कविता की चीख निकल रही थी।
“अब गांड,” राहुल बोला।
डिल्डो निकाला और सीधे गांड में घुसा दिया। कोई तैयारी नहीं। कविता की आँखें फटी की फटी रह गईं। दर्द से शरीर ऐंठ गया। राहुल ने डिल्डो को पूरा अंदर तक धकेल दिया और वहीं छोड़ दिया। फिर चाबुक से गांड पर मारना शुरू किया। हर मार के साथ डिल्डो अंदर हिल रहा था।
कविता रो रही थी, “बेटा… माफ कर… बहुत दर्द…”
राहुल ने उसके मुँह में अपना लंड ठूंस दिया। “चुपचाप चूस। वरना चाबुक मुँह में भी डालूँगा।”
कविता ने आंसू पोंछते हुए लंड चूसना शुरू किया। राहुल गले तक ठोक रहा था। कविता की नाक से सांस नहीं आ रही थी। थूक और आंसू चेहरे पर बह रहे थे।
आधा घंटा बाद राहुल ने चेन ढीली की। कविता को फर्श पर गिराया। “कुत्ते की तरह रेंग।”
कविता चारों हाथ-पैरों पर रेंगने लगी। राहुल ने उसकी गर्दन में चेन बाँध दी और खींचते हुए कमरे में घुमाया। बीच-बीच में चाबुक से गांड पर मारता रहा। कविता के स्तन फर्श पर रगड़ खा रहे थे। निप्पल के क्लिप्स और कस गए थे।
फिर राहुल ने उसे दीवार से लगाकर खड़ा किया। हाथ ऊपर बाँध दिए। चाबुक से पीठ, गांड, जांघें… हर जगह मारा। लाल निशान, कुछ जगहों से खून की हल्की धारें। कविता का शरीर कांप रहा था, लेकिन चुत से पानी टपक रहा था।
“देख, रंडी की चुत दर्द में भी गीली हो जाती है,” राहुल हँसा। उसने दो उँगलियाँ चुत में घुसा दीं और जोर से फाड़ते हुए अंदर-बाहर किया। फिर तीन उँगलियाँ। कविता चीख उठी।
राहुल ने लंड निकाला और एक झटके में चुत में डाल दिया। इतनी जोर से कि कविता की पीठ दीवार से लग गई। वह ठोकने लगा – तेज, गहरा, बेरहम। हर धक्के में कविता की सांस फूल रही थी। राहुल ने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और कान में कहा, “तेरी चुत अब सिर्फ मेरे लंड की गुलाम है। समझी?”
कविता ने सिर्फ हां में आवाज निकाली।
राहुल ने लंड निकाला और गांड में डाल दिया। बिना तेल के। कविता की चीख घर में गूंज गई। राहुल ने कमर पकड़कर इतनी जोर से मारा कि गांड की मांसपेशियाँ फड़कने लगीं। दस मिनट बाद उसने पूरा माल गांड के अंदर छोड़ दिया।
लंड निकाला तो मल और वीर्य मिला हुआ था। राहुल ने कविता को घुटनों पर बिठाया और मुँह के सामने लंड पकड़ा। “साफ कर। जीभ से।”
कविता ने आँखें बंद करके चाटना शुरू किया। राहुल ने सर दबाकर गले तक ठूंस दिया। कविता की उल्टी की कोशिश हो रही थी, लेकिन राहुल ने नहीं छोड़ा। पूरा साफ होने तक मुँह में रखा।
रात के 12 बज गए थे। राहुल थका नहीं था। उसने कविता को फिर से बिस्तर पर बाँधा। इस बार पैर फैलाकर। चुत और गांड दोनों में उँगलियाँ घुमाते हुए चाबुक से स्तनों पर मारने लगा। निप्पल के क्लिप्स हिल रहे थे। कविता अब सिर्फ सिसक रही थी। आवाज निकलना बंद हो चुका था।
राहुल ने डिल्डो फिर से गांड में ठूंस दिया और खुद चुत में घुस गया। दोनों छेद एक साथ भरे हुए थे। वह जोर-जोर से ठोकने लगा। कविता का शरीर हर धक्के के साथ हिल रहा था। आंसू, पसीना, थूक सब मिला हुआ था।
आखिर में राहुल ने चुत में माल छोड़ा। इतना कि बाहर बहने लगा। फिर डिल्डो निकालकर गांड से भी माल निकाल दिया। कविता की जांघें सफेद और भूरे रंग के मिश्रण से लथपथ थीं।
राहुल ने चेन खोली। कविता ढेर हो गई। राहुल ने उसे गोद में उठाया और बाथरूम ले गया। ठंडे पानी से नहलाया। क्लिप्स निकाले तो निप्पल सूजे हुए और दर्द भरे थे। गांड और चुत दोनों सूजे हुए, लाल, कुछ जगहों पर हल्के घाव।
नहलाकर बिस्तर पर लिटाया। कविता की आँखें बंद थीं। राहुल उसके पास लेट गया, हाथ से उसके बाल सहलाते हुए बोला, “कल और नया होगा। आज तो बस शुरुआत थी।”
कविता ने आँखें खोलीं। आंसुओं भरी आवाज में सिर्फ इतना कहा, “जैसी मरजी… बेटा…”
राहुल मुस्कुराया। उसने कविता के स्तन पर हाथ रखा और धीरे से निचोड़ा। कविता का शरीर फिर से कांप उठा।
बाहर रात गहरी थी। घर की दीवारें अभी भी चाबुक की आवाजें और चीखें याद रखे हुए थीं। और राहुल जानता था कि यह सिलसिला अभी रुकेगा नहीं। माँ अब पूरी तरह उसकी गुलाम बन चुकी थी – शरीर से, मन से, और हर छेद से।
सुबह जब कविता उठी तो चल नहीं पा रही थी। गांड जल रही थी, चुत दर्द कर रही थी। लेकिन जब राहुल ने उसे किचन में बुलाया और फिर से स्तन दबाए तो उसने सिर्फ सिर झुका लिया।
“आज रात और लंबा होगा,” राहुल ने कहा।
कविता ने जवाब नहीं दिया। बस चुपचाप नाश्ता बनाने लगी। उसके निप्पल अभी भी दर्द कर रहे थे, लेकिन चुत फिर से गीली हो चुकी थी।
कहानी यहीं नहीं रुकी। राहुल हर रात नई सीमा पार कर रहा था। और कविता हर रात और गहराई तक गिरती जा रही थी।
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