दो जवान लंडों ने चूत-गांड को बर्बाद कर डाला – hindi lusty stories

हॉट गोरी पत्नी की आग दो मस्कुलर सर्विसमैन ने ब्रूटल डबल पेनिट्रेशन से बुझाई। थप्पड़, गालियां, थूक, फाड़ चुदाई – रंडी बनकर हर रोज स्कूटी सर्विसिंग के बहाने चुदवाने लगी!  hindi lusty stories

मेरा नाम राजेश है, और ये कहानी बिल्कुल सच्ची है, जो आज से लगभग छह साल पहले की है। हमारी शादी को तब तीन साल हो चुके थे। मेरी बीवी प्रिया उस वक्त 26 साल की थी, उसका रंग इतना गोरा कि जैसे कोई यूरोपियन ब्यूटी हो, लंबाई 5 फुट 6 इंच, फिगर 36C-30-38 – भरे हुए उभरे बोबे जो किसी को भी पागल कर दें, पतली कमर और ऐसी मटकती हुई मांसल गांड कि देखने वाला सीधा लंड पकड़ ले। लोग सड़क पर उसे घूरते, मैं पहले जलता था, लेकिन बाद में मुझे गर्व होने लगा कि मेरी पत्नी इतनी सेक्सी है कि हर कोई उसकी तरफ आकर्षित होता है।


हम मुंबई के एक व्यस्त इलाके में रहते थे, जहां ट्रैफिक और हलचल कभी थमती नहीं। एक दोपहर प्रिया की स्कूटी की सर्विसिंग करवानी थी। गर्मी का मौसम था, सूरज आग उगल रहा था। प्रिया ने हल्का नीला टॉप और काली लेगिंग्स पहनी थी। टॉप इतना टाइट कि उसके बोबों की आउटलाइन साफ दिख रही थी, गहरा नेकलाइन जहां से क्लीवेज झांक रहा था।

दुपट्टा बस दिखावा था, जो हवा में उड़ता रहता। हम शोरूम पहुंचे, जहां सर्विस एडवाइजर विक्रम मिला – 35 साल का मजबूत जाट टाइप का आदमी, कद 6 फुट, चौड़ी छाती, मूंछें जो उसे और भी रौबीला बनातीं। उसकी नजरें प्रिया पर पड़ते ही जैसे चिपक गईं, वो बात करते हुए उसकी छातियों पर ही टिकी रहीं। मैंने देखा, लेकिन चुप रहा। प्रिया भी मुस्कुरा रही थी, जैसे उसे पता था कि ये शैतान क्या सोच रहा है।


स्कूटी छोड़कर हम बाहर निकले। पहले एक रेस्टोरेंट में खाना खाया, जहां प्रिया की वजह से वेटर बार-बार टेबल पर आता रहा। फिर हम एक मॉल में गए, जहां एक हॉट एडल्ट मूवी चल रही थी। फिल्म में इंटेंस सेक्स सीन थे – किसिंग, ग्रोपिंग, सब कुछ। हॉल में अंधेरा था, मैंने प्रिया के कान में फुसफुसाया और उसके होंठों पर किस किया। वो तुरंत गर्म हो गई, मेरे करीब सरक आई और मेरे मुंह में जीभ डालकर गहरा किस करने लगी। चारों तरफ सिसकारियां गूंज रही थीं।

मैंने उसकी जांघ पर हाथ फेरा, लेगिंग्स के ऊपर से उसकी चूत को सहलाया। वो सिहर उठी, मेरी पैंट के ऊपर से लंड दबाने लगी। मैं पहले से तना हुआ था। उसने जिप खोली, हाथ अंदर डाला और जोर-जोर से हिलाने लगी। मैंने उसकी लेगिंग्स में हाथ डाला, पैंटी गीली हो चुकी थी। मैं उंगली से उसकी क्लिट रगड़ने लगा। कुछ ही मिनटों में मैं उसके हाथ में झड़ गया, स्पर्म बाहर छलक आया। वो हंसकर बोली, “डार्लिंग, आज रात मुझे बुरी तरह चोदना। मेरी चूत में आग लगी हुई है, फाड़ डालना इसे।” मैंने कहा, “हां, आज तेरी चूत और गांड दोनों को रगड़-रगड़ कर चोदूंगा, तू चिल्लाती रहेगी।”


फिल्म खत्म हुई तो शाम के सात बज चुके थे। शोरूम छह बजे बंद होता था, लेकिन हम जल्दी पहुंचे। मेन गेट आधा बंद था। विक्रम ने हमें देखा और बोला, “सर, कोई टेंशन नहीं, स्कूटी तैयार है। बस वॉशिंग बाकी है, रुकिए मैं बोलकर आता हूं।” वॉशिंग वाला करण भी वहां था – 28 साल का जवान, मस्कुलर बॉडी, टैटू वाली बाहें। दोनों की आंखों में हवस साफ झलक रही थी। प्रिया को देखकर वो एक-दूसरे को इशारा कर रहे थे, जैसे कोई शिकार मिल गया हो। मैंने कहा, “मेरी बाइक बाहर है, मैं निकलता हूं।

तुम लोग स्कूटी दे दो।” प्रिया बोली, “हां, ठीक है। तुम जाओ, मैं ले आऊंगी।” मैं चला गया, लेकिन आधे रास्ते में याद आया कि घर की चाबी प्रिया के पर्स में है। मैं वापस मुड़ा।


शोरूम पहुंचा तो गेट पूरी तरह बंद था। मैं साइड एंट्री से अंदर घुसा। लाइट्स बंद थीं, लग रहा था सब चले गए। लेकिन अंदर से हल्की-हल्की आवाजें आ रही थीं – सिसकारियां, हंसी। मैं चुपके से आगे बढ़ा, सर्विस काउंटर के पास छिप गया। वहां का नजारा देखकर मेरे पैर जम गए। प्रिया का टॉप ऊपर उठा हुआ था, ब्रा नीचे सरका दी गई थी।

उसके गोरे, भरे बोबे बाहर लटक रहे थे, निप्पल्स सख्त हो चुके थे। विक्रम दोनों हाथों से उन्हें बुरी तरह मसल रहा था, जैसे आटा गूंथ रहा हो। निप्पल्स को पिंच करके खींच रहा था, प्रिया दर्द से सिहर रही थी लेकिन मजा ले रही थी। करण पीछे से उसकी कमर पकड़कर उसकी गर्दन चाट रहा था, दांत गड़ा रहा था। प्रिया की आंखें बंद थीं, वो कराह रही थी, “आह्ह्ह विक्रम, जोर से दबाओ। मेरे बोबों को निचोड़ डालो, आज तक किसी ने ऐसे नहीं मसला। फाड़ दो इन्हें।”


विक्रम हंसकर बोला, “भाभी, तुम तो आग हो। तुम्हारे पति को पता है कि तुम इतनी रंडी हो? वो तो बस नाम का आदमी लगता है।” प्रिया ने आंखें खोलकर कहा, “उसे क्या पता, वो तो लुल्ला है। बस थिएटर में गरम करके छोड़ दिया, अब तुम लोग बुझाओ मेरी आग।” करण ने उसका चेहरा घुमाया और मुंह में जीभ डालकर किस करने लगा, जैसे खा जाएगा। दोनों की जीभें एक-दूसरे से लड़ रही थीं, थूक आदान-प्रदान हो रहा था। चप-चप की आवाजें गूंज रही थीं। विक्रम ने टॉप खींचकर उतार दिया, ब्रा फेंक दी।

अब प्रिया ऊपर से नंगी थी, उसके बोबे हिल रहे थे। करण ने एक बोबा मुंह में लिया और जोर-जोर से चूसने लगा, दांत गड़ा रहा था। चट्ट-चट्ट की आवाजें, खून के निशान पड़ने लगे। दूसरा बोबा विक्रम कुचल रहा था। प्रिया चिल्लाई, “आह्ह्ह्ह दांत लगाओ, निप्पल काटो। ओह्ह्ह्ह कितना दर्द और मजा एक साथ।”


करण ने लेगिंग्स का इलास्टिक खींचा और नीचे कर दी। अब सिर्फ ब्लैक पैंटी थी, जो पूरी तरह भीग चुकी थी। करण ने पैंटी सूंघी, “वाह भाभी, तुम्हारी चूत की महक तो किसी को भी पागल कर दे। इतनी गर्म खुशबू।” प्रिया शर्म से लाल हो गई लेकिन बोली, “करण, अब मत तड़पाओ। डालो अंदर, फाड़ दो मेरी चूत।” दोनों ने अपने कपड़े उतारे। विक्रम का लंड 7 इंच लंबा, लेकिन इतना मोटा कि जैसे कोई क्लब हो। करण का 8 इंच, काला और नसों से भरा, लोहे जैसा सख्त। प्रिया घुटनों पर बैठ गई, दोनों लंड उसके मुंह के सामने लहरा रहे थे। उसने पहले विक्रम का टोपा चाटा, जीभ से घुमाया, फिर करण का। दोनों को बारी-बारी चूसने लगी।

ग्लुक-ग्लुक की आवाजें, थूक लंडों पर चमक रहा था। करण ने उसके बाल पकड़े और मुंह में जोर-जोर से धक्के मारने लगा, जैसे मुंह चोद रहा हो। प्रिया की आंखों से आंसू बहने लगे, लेकिन वो रुक नहीं रही थी। विक्रम नीचे से उसके बोबों को थप्पड़ मार रहा था, लाल कर रहा था।


फिर विक्रम ने प्रिया को काउंटर पर लिटाया। करण का लंड उसके मुंह में था, वो गले तक ठूंस रहा था। विक्रम ने बोबों के बीच अपना लंड रखा और टिट-फक करने लगा, जोर-जोर से धक्के। प्रिया की सिसकारियां तेज हो गईं, “आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह फक मी हार्ड।” करण बोला, “घोड़ी बन साली रंडी, अब तेरी गांड का नंबर है।”

प्रिया तुरंत घोड़ी बन गई। उसकी पैंटी फर्श पर गिर गई, मैंने चुपके से उठाई और सूंघते हुए अपना लंड बाहर निकाल लिया, हिलाने लगा। विक्रम ने उसकी गांड पर थूक गिराया, उंगली से फैलाया। बोला, “रानी, मैंने कभी अपनी बीवी की गांड नहीं मारी, लेकिन आज तेरी टाइट गांड को फाड़कर चौड़ा कर दूंगा। तेरा पति देखेगा तो सोचेगा कि कोई ट्रक घुस गया इसमें।”

प्रिया हंस पड़ी, “आराम से शुरू करो, लेकिन बाद में जोर से। मुझे दर्द पसंद है।” करण बोला, “दर्द तो तुझे रोज मिलेगा अब, हम दोनों तेरी रंडी बनाकर रखेंगे। हर दिन चोदेंगे।” प्रिया ने कहा, “हां, मैं तैयार हूं। रोज आऊंगी, बस चोदते रहो।”


विक्रम ने टोपा सेट किया और धीरे-धीरे गांड में घुसेड़ना शुरू किया। प्रिया चिल्लाई, “आह्ह्ह्ह्ह आराम से, फट रही है। ओह्ह्ह्ह्ह दर्द हो रहा है!” लेकिन जैसे-जैसे लंड अंदर गया, वो मजा लेने लगी। “आह्ह्ह्ह्ह मारो जोर से, फाड़ दो मेरी गांड।” करण आगे से मुंह में लंड ठूंस रहा था। दोनों ने स्पीड पकड़ी – विक्रम पीछे से धक्का मारता, प्रिया आगे करण का लंड निगलती। ग्लुक-ग्लुक, थप-थप की आवाजें पूरे शोरूम में गूंज रही थीं। दस मिनट तक गांड मारी, प्रिया का शरीर पसीने से चमक रहा था।


फिर करण नीचे लेट गया। प्रिया उसकी गोद में बैठी, उसका मोटा लंड चूत में लिया। “आह्ह्ह्ह्ह मर गई! इतना मोटा, फट जाएगी मेरी चूत।” फिर ऊपर-नीचे उछलने लगी, चप-चप की तेज आवाजें। उसके बोबे उछल रहे थे। विक्रम पीछे से आया और गांड में अपना लंड घुसेड़ दिया। अब डबल पेनिट्रेशन – दोनों छेदों में लंड।

प्रिया की चीखें निकल पड़ीं, “आह्ह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह्ह फाड़ दो मुझे! दोनों लंड एक साथ, येस्स्स्स! हार्डर, ब्रूटल!” दोनों ने स्पीड बढ़ाई, जोर-जोर से धक्के। प्रिया का शरीर थरथरा रहा था, वो ऑर्गेज्म पर ऑर्गेज्म हो रही थी। “आह्ह्ह्ह्ह कमिंग! ओह्ह्ह्ह्ह गॉड!” आधे घंटे तक ये ब्रूटल चुदाई चली – पोजिशन चेंज, चूत से गांड, गांड से चूत। दोनों ने उसे रगड़ा, मसला, थप्पड़ मारे। प्रिया की गांड और चूत लाल हो गईं, लेकिन वो रुकने को नहीं कह रही थी।


आखिर में करण बोला, “साली रंडी, ले अब मैं तेरे पेट में अपना बीज डालता हूं। तुझे मेरे बच्चे की मां बना दूंगा।” ये कहते हुए उसने चूत में तेज धारें मारीं, स्पर्म भर दिया। प्रिया चिल्लाई, “हां, बना दे मुझे! तेरा तगड़ा बच्चा चाहिए, मेरे पति जैसा कमजोर नहीं।” विक्रम बोला, “तो मेरा माल पी ले साली, प्रोटीन मिलेगा।” उसने मुंह पकड़ा और लंड से स्पर्म की धारें उसके मुंह में छोड़ीं। प्रिया ने जीभ निकालकर चाटा, सारा निगल लिया। “यम्मी, और दो।”


चुदाई के बाद प्रिया बोली, “वाह, क्या चोदा तुम दोनों ने। मेरी जिंदगी की बेस्ट फक थी ये। मेरे पति ने थिएटर में गरम करके छोड़ दिया था, लेकिन तुमने बुझाई। अब कल फिर आऊंगी, स्कूटी वॉशिंग के बहाने।” तीनों हंसने लगे। करण ने बोबे दबाते हुए कहा, “रंडी बन जा हमारी पर्मानेंट। रोज चोदेंगे, तेरी गांड को और चौड़ा करेंगे।” प्रिया बोली, “हां, मैं राजी हूं। बस ऐसे ही ब्रूटल तरीके से।” विक्रम बोला, “कल इंतजार रहेगा, गाड़ी धोने और तेरी चूत-गांड बजाने का।” फिर कपड़े पहने और हंसते हुए अलग हुए।


मैं चुपके से बाहर निकला, घर पहुंचा। पंद्रह मिनट बाद प्रिया आई। मैंने पूछा, “स्कूटी वॉश नहीं हुई? इतनी देर लग गई? चाबी तेरे पास थी, मैं इंतजार कर रहा था। क्या हुआ?” वो बोली, “मशीन खराब थी, कल फिर जाऊंगी। ट्रैफिक में फंस गई, दो ट्रक वालों ने इतना हॉर्न बजाया कि सिर दर्द हो गया। बदन भी टूट रहा है।” मैं समझ गया कि कल फिर दो ‘ट्रक’ उसके ‘हॉर्न’ दबाएंगे। मैं बाथरूम में गया, पैंटी सूंघते हुए लंड हिलाया और सोचता रहा कि ये सब कितना इंटेंस था। अगले दिन से प्रिया की स्कूटी सर्विसिंग रेगुलर हो गई, और मैं चुपचाप देखता रहा। जीवन कभी पहले जैसा नहीं रहा।

Yeh meri hindi lusty stories kaisi lagi muje comment krke batiye. Or agar apke sath bhi kuch aisa hua he toh ap apni hot hindi lusty stories muje email kr skte he.

Hindi lusty stories send kijiye lustystories9@gmail.com par send kijiye.

More Hindi lusty stories:-

Train Mein Anjaan Ladke Ne Mujhe Toilet Mein Full Choda – hindi lusty stories

Maa Ki Mumbai Chudai – Beta Ka 8 Inch Ka Lauda

Neha Bhabhi Ki Chudai Ka Secret Raaz – Lucknow Ki Hot Randi Bhabhi

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *