क्रूर मालकिन की गुलाम चुदाई

32 साल की बेरहम बाईसेक्सुअल rakhail porn stories ट्यूशन टीचर प्रिया ने 22 साल के आर्यन को अपना सेक्स गुलाम बना लिया। लेदर बेल्ट, डिल्डो, फिस्टिंग और ग्रुप BDSM की क्रूर चोदाई, जहां दर्द और वासना की कोई सीमा नहीं।

मेरा नाम आर्यन है, 22 साल का जवान लड़का। मैं दिल्ली के एक पॉश इलाके, साउथ एक्सटेंशन में रहता हूँ। मेरी ट्यूशन टीचर का नाम प्रिया है। वे 32 साल की हैं, बेहद आकर्षक और खतरनाक। उनका रंग दूधिया गोरा है, लंबाई 5 फीट 8 इंच, कमर पतली लेकिन कूल्हे भारी और गोल। उनके स्तन 38DD साइज के हैं, जो हर बार उनके टाइट ब्लाउज में फटने को तैयार रहते हैं।

उनकी आँखें तेज, होंठ मोटे और चेहरा ऐसा कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए। वे एक क्रूर स्वभाव की महिला हैं – रूखी, डोमिनेंट और बिना किसी हिचक के अपनी इच्छा थोपने वाली।


उस दिन शाम ढल चुकी थी। मैं ट्यूशन के लिए निकला था। रास्ते में अचानक आसमान में काले बादल घिर आए और मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। मैं प्रिया मैम के घर से महज 150 मीटर दूर था। घर का पता था – वसंत विहार की एक बड़ी सी स्वतंत्र बंगला, जिसमें पीछे बड़ा गार्डन और अंदर कई कमरे। गेट आश्चर्यजनक रूप से खुला मिला। भीगते हुए मैं अंदर घुस गया। मेरा बैग और किताबें बच गईं, लेकिन कपड़े तर हो चुके थे।


मैंने मैम को कॉल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं। घर में अजीब सी सन्नाटा था, सिर्फ बारिश की आवाज। मैं सोच रहा था कि शायद वे बाहर गई हों। जैसे ही मैं वापस लौटने लगा, अंदर से एक तेज चीख गूँजी – “आहहह… मारो और जोर से, कुतिया!” मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। डर और उत्सुकता दोनों। मैम बहुत सख्त थीं। अगर बिना इजाजत अंदर घुसा तो नौकरी से निकाल सकती थीं। लेकिन चीख सुनकर मैं रुक नहीं पाया।


धीरे-धीरे मैं पीछे वाले बेडरूम की तरफ बढ़ा। दरवाजा बंद था, लेकिन खिड़की की सिटकनी खुली हुई थी। मैंने सावधानी से खिड़की थोड़ी सी खोली और अंदर झाँका। जो नजारा देखा, उसने मेरी सांस रोक दी।
प्रिया मैम नंगी थीं। उनके हाथ में चमड़े की मोटी बेल्ट थी। उनके सामने उनकी 25 साल की नौकरानी रानी नंगी घुटनों के बल झुकी हुई थी। रानी की गोरी पीठ और मोटी गांड पर लाल-लाल निशान थे। मैम ने रानी के मुंह में अपनी गीली पैंटी ठूंस रखी थी। रानी की आँखों से आंसू बह रहे थे, लेकिन चेहरे पर वासना थी।


“ले साली हरामी, आज तेरी गांड लाल कर दूंगी!” प्रिया मैम ने बेल्ट से जोरदार प्रहार किया। चटाक! रानी के शरीर ने झटका लिया, लेकिन मुंह से सिर्फ दबी हुई कराह निकली। मैम ने फिर मारा, फिर मारा – पांच, दस, पंद्रह बार। रानी की गांड अब खून की लाली से चमक रही थी।
फिर मैम ने पैंटी निकाली। रानी हांफते हुए बोली, “मेम… और मारो… मैं आपकी गुलाम कुतिया हूँ…”
प्रिया हंसीं, “अच्छी लड़की। अब मेरी चूत चाट, वरना आज रात तेरी गांड में मोमबत्ती डालकर जलाऊंगी।”


रानी ने तुरंत मैम को बेड पर धकेला। प्रिया लेट गईं, पैर फैलाए। रानी अपना चेहरा उनकी जांघों के बीच गाड़ दिया। जीभ बाहर निकाली और प्रिया की मोटी, गीली चूत को चाटने लगी। प्रिया की कराहें कमरे में गूंजने लगीं – “आहह… चाट साली, जीभ अंदर डाल… हां, यूं… कुतिया, मेरी क्लिट को चूस… आहह फक…”


रानी ने दो उंगलियां प्रिया की चूत में ठोंक दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगी। दूसरा हाथ उनके स्तनों को मसल रहा था। प्रिया मैम का शरीर तड़प रहा था। उन्होंने रानी के बाल पकड़े और चूत पर और जोर से दबाया – “चूस मेरी रानी, पी जा सारी चूत का रस… मैं तेरी मालकिन हूँ… आहह मैं झड़ने वाली हूँ…”


कुछ ही मिनटों में प्रिया का शरीर काँप उठा। वे चीखीं, “आहहह… ले ले मेरी कुतिया… सारा पानी पी ले!” उनके चूत से झरना फूट पड़ा। रानी ने लपलपाकर सब चाट लिया।
फिर दोनों ने एक दूसरे को चूम लिया। गहरी, लार वाली किस। रानी बोली, “मेम, अब मुझे जाना होगा। पति इंतजार कर रहा होगा।”
प्रिया ने उसकी गांड पर थप्पड़ मारा, “जा, लेकिन रात को उसकी लंड चूसते हुए मेरी याद करना। कल फिर आना, तेरी गांड में डिल्डो घुसाऊंगी।”


रानी चली गई। मैं तेजी से भागा, घर पहुंचकर घंटों सोचता रहा। प्रिया मैम बाईसेक्सुअल थीं, और कितनी क्रूर डोमिनेंट। उनके 38DD स्तन, उनकी मोटी गांड – सब याद आ रहा था। मैंने फैसला किया – अब सीधा चोदूंगा, मुट्ठी नहीं।
कुछ दिन बीते। एक शाम मैं अपनी गर्लफ्रेंड नेहा के साथ प्रिया मैम के घर गया।

नेहा 21 साल की थी, सुंदर लेकिन थोड़ी शर्मीली। हम कुछ डाउट्स क्लियर कर रहे थे कि रानी अंदर आई। मेरी नजर रानी पर पड़ी और मैं अनजाने में बोल पड़ा, “तुम जो करती हो, सब देख चुका हूँ।”
रानी का चेहरा सफेद पड़ गया। ठीक उसी वक्त प्रिया मैम कमरे में आईं और सब सुन लिया। उन्होंने नेहा और रानी को बाहर भेज दिया। फिर मेरी तरफ घूमीं। उनकी आँखों में गुस्सा और वासना दोनों थे।


“क्या देखा है तूने, कुत्ते?” उनकी आवाज कड़क थी।
मैं डर गया, लेकिन सब सच बता दिया। बारिश, खिड़की, सब।
प्रिया मुस्कुराईं, लेकिन वो मुस्कान डरावनी थी। “तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरे घर में घुसने की? अब सजा मिलेगी, और वो सजा तेरी जिंदगी बदल देगी।”
वे मुझे बाल पकड़कर बेडरूम में घसीटकर ले गईं। दरवाजा बंद किया, लॉक कर दिया। “कपड़े उतार, हरामी। आज से तू मेरी पर्सनल सेक्स गुलाम है।”


मैंने विरोध किया, लेकिन उन्होंने एक जोरदार थप्पड़ मारा। “चुप! बोलने का हक नहीं। सिर्फ हां या चीखना।”
मैं नंगा हो गया। मेरा लंड पहले से ही खड़ा था। प्रिया ने अपने कपड़े उतारे। उनके विशाल स्तन बाहर आए, गुलाबी निप्पल्स सख्त। उन्होंने मुझे घुटनों पर बैठाया और अपनी चूत मेरे मुंह पर रख दी।
“चाट, कुत्ते। जीभ अंदर डाल। अगर एक बूंद भी गिरा तो तेरी गांड में बेल्ट मारूंगी।”


मैं चाटने लगा। उनकी चूत का स्वाद मीठा-खट्टा। वे मेरे सिर को दबाए जा रही थीं। “हां… गहरी… चूस मेरी क्लिट… आहह… अच्छा कुत्ता है तू…”
15 मिनट तक चूत चाटने के बाद उन्होंने मुझे बेड पर पटका। मेरे लंड को मुट्ठी में पकड़ा और जोर से मसलने लगीं। “ये लंड अब मेरी प्रॉपर्टी है। जब चाहूं चूसूंगी, जब चाहूं चोदवाऊंगी।”
फिर वे मेरे लंड पर बैठ गईं। एक झटके में पूरा 7 इंच अंदर। “आहहह… फट गई मेरी चूत… मोटा लंड है तेरा…”


वे तेजी से ऊपर-नीचे होने लगीं। उनके भारी स्तन उछल रहे थे। मैंने उन्हें पकड़ना चाहा तो उन्होंने मेरे गले पर हाथ रखकर दबाया – “चुप रह, गुलाम! मैं कंट्रोल करूंगी।”
वे चोदती रहीं। बीच-बीच में थप्पड़, निप्पल कुतरना, बाल खींचना। मैं कराह रहा था। “मेम… मैं आने वाला हूँ…”
“अंदर मत डालना, कुत्ते! मेरे मुंह में निकाल!”


वे नीचे उतरीं और मेरे लंड को गले तक मुंह में ले लिया। जोरदार चूसने लगीं। मैं झड़ गया – पूरा माल उनके गले में। उन्होंने सब निगल लिया।
लेकिन ये खत्म नहीं था। उन्होंने ड्रेसिंग टेबल से चमड़े का कॉलर निकाला और मेरे गले में बांध दिया। “अब तू मेरा पेट है।” फिर बेल्ट से मेरी पीठ और गांड पर मारना शुरू किया। हर मार के साथ वे कह रही थीं, “ये तेरी सजा है… झाँकने की… मेरी राज़ जानने की…”
मेरी गांड लाल हो गई। दर्द के साथ अजीब मज़ा आ रहा था। फिर उन्होंने एक डिल्डो निकाला – 10 इंच का मोटा। “आज तेरी गांड भी ट्रेनिंग होगी।”


मैं डर गया, लेकिन वे मेरे मुंह में अपनी पैंटी ठूंस दीं। घुटनों पर मोड़कर डिल्डो मेरी गांड में घुसाने लगीं। धीरे-धीरे, फिर जोर से। “चीख, कुत्ते! चीख!”
दर्द भयानक था, लेकिन वे मेरे लंड को सहला रही थीं। धीरे-धीरे मज़ा आने लगा। वे मेरी गांड फाड़ रही थीं और मैं कराह रहा था।
आधे घंटे बाद उन्होंने डिल्डो निकाला और खुद मेरे ऊपर लेट गईं। “अब चोद मुझे, बाबा। जोर से, क्रूरता से।”


मैंने उन्हें कुत्ते की तरह चोदा। उनके बाल खींचे, गांड पर थप्पड़ मारे, स्तनों को काटा। वे चीख रही थीं – “हां… और जोर से… फाड़ डाल मेरी चूत… मैं तेरी रंडी हूँ आज… आहहह…”
हम दोनों साथ ही झड़े। कमरा पसीने और वीर्य की महक से भर गया।
उसके बाद प्रिया ने मुझे गले लगाया। “अब तू मेरा है। रोज आएगा। कभी-कभी रानी और नेहा को भी शामिल करेंगे।”

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कुछ दिन बाद एक शाम मैंने देखा – नेहा और रानी बेड पर लिपटी हुई थीं। नेहा रानी की चूत चूस रही थी। प्रिया मैम मुस्कुराते हुए मुझे देख रही थीं। “आ जा, आर्यन। आज हम चारों मिलकर खेलेंगे।”
मैंने आगे बढ़कर नेहा की गांड पर बेल्ट मारी। रानी मेरे लंड को चूसने लगी। प्रिया ने सबको कंट्रोल किया – थप्पड़, चीखें, चोदाई, सब कुछ। वो रात हमारी जिंदगी की सबसे क्रूर और मस्त वाली रात थी।


प्रिया मैम अब सिर्फ मेरी ट्यूशन टीचर नहीं रहीं। वे मेरी मालकिन बन चुकी थीं – एक क्रूर, बेरहम, वासना से भरी डोमिनatrix जो हर पल मुझे अपनी गुलामी का एहसास दिलातीं। उस रात के बाद से मेरी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। हर शाम ट्यूशन के नाम पर मैं उनके वसंत विहार वाले बंगले में पहुंचता। बाहर से देखने वाला यही समझता कि पढ़ाई हो रही है, लेकिन अंदर… अंदर तो नर्क और स्वर्ग का मेल था।


अगले दिन शाम को जैसे ही मैं पहुंचा, दरवाजा खुला था। अंदर घुसते ही प्रिया मैम ने मुझे बालों से पकड़कर घसीटा। “आ गया मेरा कुत्ता? आज तेरी ट्रेनिंग का दूसरा दिन है।” उनकी आवाज में ठंडी क्रूरता थी। उन्होंने मुझे सीधे बेसमेंट में ले जाया, जहां उन्होंने एक खास प्ले रूम बना रखा था – काली दीवारें, चेन, हुक, बेल्ट्स, डिल्डो, व्हिप्स, मोमबत्तियां और हर तरह का BDSM सामान।


“कपड़े फाड़कर उतार!” उन्होंने हुक्म दिया। मैंने जल्दी-जल्दी नंगा होकर घुटनों पर बैठ गया। प्रिया ने काला लेदर कॉलर मेरे गले में बांधा, जिसमें चेन लगी थी। फिर उन्होंने मेरे हाथ पीछे बांध दिए और मुझे एक मेटल फ्रेम पर टांग दिया। मेरी गांड ऊपर थी, लंड नीचे लटक रहा था।
“आज तेरी गांड की असली ट्रेनिंग होगी, हरामी।” वे मुस्कुराईं और रानी को आवाज लगाई। रानी अंदर आई – नंगी, सिर्फ हाई हील्स में। उसकी गांड पर कल के निशान अभी भी ताजा थे। प्रिया ने रानी को आदेश दिया, “इस कुत्ते की गांड चाट और लुब्रिकेट कर।”


रानी ने अपनी जीभ मेरी गांड में घुसेड़ दी। चाटते हुए वह मेरे लंड को भी सहला रही थी। प्रिया ने एक मोटा 12 इंच का ब्लैक डिल्डो लिया, उस पर जेल लगाया और बिना किसी चेतावनी के मेरी गांड में ठोक दिया। “आआआहहह…!” मेरी चीख निकल गई। दर्द असहनीय था, लेकिन प्रिया ने मेरे मुंह में गैग बॉल ठूस दिया।


“चीख, कुत्ते! जितना दर्द होगा, उतना मज़ा आएगा।” वे डिल्डो को तेजी से अंदर-बाहर करने लगीं। हर थ्रस्ट के साथ मेरी आंखों से आंसू बह रहे थे। रानी नीचे लेट गई और मेरे लंड को अपना मुंह में ले लिया। दोहरी यातना – गांड फट रही थी और लंड स्वर्ग में था।


करीब 20 मिनट तक वे मुझे फाड़ती रहीं। फिर डिल्डो निकाला और अपनी चूत मेरे मुंह पर रख दी। “अब चाट, गुलाम! मेरी चूत का रस पी!” मैं जीभ हिलाने लगा। वे मेरे चेहरे पर बैठकर रगड़ रही थीं। उनकी चूत से रस टपक रहा था।
तभी दरवाजा खुला और नेहा अंदर आई। मेरी गर्लफ्रेंड। उसका चेहरा शर्म और उत्तेजना से लाल था। प्रिया ने हंसकर कहा, “आ जा रंडी। आज तुझे भी अपनी सच्चाई दिखाते हैं।” नेहा ने कपड़े उतारे। उसके 34C स्तन और गोल गांड देखकर मेरा लंड और खड़ा हो गया।


प्रिया ने नेहा को मेरी पीठ के पीछे खड़ा किया और उसे एक व्हिप थमा दिया। “मार इस कुत्ते को। जोर से।” नेहा ने हिचकिचाते हुए पहला प्रहार किया। चटाक! फिर दूसरा, तीसरा। धीरे-धीरे उसकी मार तेज होती गई। मेरी पीठ पर लाल धारियां पड़ गईं। प्रिया ने रानी को आदेश दिया कि वह नेहा की चूत चाटे। कमरा चीखों, कराहों और चुदाई की आवाजों से भर गया।
प्रिया ने मुझे फ्रेम से उतारा और चारों तरफ घुटनों पर रखा। “अब चारों को चोद। लेकिन याद रख – मैं मालकिन हूँ। बिना मेरी इजाजत के झड़ना मत।”


मैंने पहले रानी को कुत्ते की तरह चोदा। उसकी गांड ऊपर थी, मैंने बाल खींचे और पूरे जोर से लंड ठोक दिया। “आहहह… फाड़ दो आर्यन बाबा…!” रानी चीख रही थी। प्रिया ने मेरी गांड पर बेल्ट मारी – “जोर से, मादरचोद! इस कुतिया को रुला दे!”


फिर नेहा की बारी। मैंने नेहा को दीवार से सटाकर खड़ा किया और उसकी टांग उठाकर चूत में घुसा दिया। नेहा मेरे कंधे काट रही थी। “आर्यन… तेरे लंड ने आज मेरी चूत फाड़ दी… आहह…” प्रिया ने नेहा के स्तनों पर मोमबत्ती की गर्म बूंदें गिराईं। दर्द और मज़े का मेल।
आखिर में प्रिया। उन्होंने मुझे बेड पर लिटाया और उल्टा बैठकर मेरे लंड पर सवार हो गईं। उनकी मोटी गांड मेरी जांघों से टकरा रही थी।

“लंड अंदर तक ले लेती हूँ… हां… फट रही है मेरी चूत… मार झटके!” मैं नीचे से तेजी से धक्के मार रहा था। रानी और नेहा दोनों हमारे पास थीं – एक मेरे मुंह में चूत रख रही थी, दूसरी प्रिया के स्तनों को चूस रही थी।
प्रिया ने मेरे गले पर हाथ रखकर दबाया, “अब झड़, कुत्ते! लेकिन मेरी चूत में!” मैंने पूरा माल उनके अंदर उड़ेल दिया। वे चीखीं और झड़ गईं।
उसके बाद हम चारों थके हुए लेटे। लेकिन प्रिया रुकी नहीं।

उन्होंने तीनों को एक साथ बांध दिया – हाथ ऊपर, घुटने मोड़े। फिर एक-एक करके हमारी गांड में छोटे-छोटे बट प्लग डाले। “रात भर यही रहेंगे। कल सुबह निकालूंगी।”


अगले कुछ हफ्तों में हमारी सेक्सुअल जर्नी और गहरी होती गई। एक दिन प्रिया ने मुझे पब्लिक रिस्क गेम खेलाया। उन्होंने मुझे कार में बांधकर ड्राइव किया, मेरे लंड पर वाइब्रेटर लगाकर। “अगर चीखा तो सजा दूंगी।” मैं दांत भींचकर सह रहा था। घर पहुंचकर उन्होंने मुझे बालकनी में नंगा खड़ा किया, जहां पड़ोसी देख सकते थे।

रानी मेरे लंड को चूस रही थी और प्रिया मेरी गांड में डिल्डो चला रही थीं।
एक और क्रूर सेशन में प्रिया ने नेहा को मेरे सामने क्रॉस पर बांधा। मैंने नेहा को व्हिप मारा, प्रिया ने नेहा की चूत में फिस्टिंग की। नेहा रो रही थी लेकिन बार-बार कह रही थी, “और… और मारो मालकिन… मैं आपकी रंडी हूँ।”


रानी को भी कोई राहत नहीं मिलती थी। प्रिया उसे अक्सर केज में बंद करके रखतीं, सिर्फ चोदने के लिए निकालतीं। एक रात उन्होंने रानी की गांड में दो डिल्डो एक साथ घुसाए और मुझे मजबूर किया कि मैं रानी को चोदूं। तीनों के साथ सैंडविच बन गया – मैं बीच में, आगे-पीछे चुदाई।
हर सेशन में नई सजा, नया दर्द, नया मज़ा। कभी प्रिया मेरे लंड पर सुई चुभातीं, कभी बॉल क्रशर लगातीं। कभी मुझे घंटों एजिंग करवातीं – झड़ने नहीं देतीं। फिर अचानक परमिशन दे देतीं और मैं झरकर बेहोश हो जाता।


नेहा अब पूरी तरह बदल चुकी थी। वह पहले शर्मीली लड़की थी, अब प्रिया की दूसरी गुलाम बन गई। वह खुद मुझसे कहती, “आर्यन, आज मालकिन के सामने मेरी गांड फाड़ दो।”
हमारी ये बाईसेक्सुअल, हार्डकोर, BDSM वाली दुनिया दिल्ली की उन बंद दीवारों में फल-फूल रही थी। प्रिया मैम की क्रूरता, रानी की आज्ञाकारीता, नेहा की नई उत्तेजना और मेरा समर्पण – सब मिलकर एक ऐसी कहानी बना रहे थे जो कभी खत्म नहीं होती।


हर रात नया खेल, नई यातना, नई चोदाई। कभी वे मुझे लेडीज पार्टी में ले जातीं जहां मैं सबकी सेवा करता – चूत चाटना, लंड चूसना, सब कुछ। और मैं… मैं खुशी-खुशी सहता क्योंकि ये दर्द ही अब मेरा सबसे बड़ा मज़ा बन चुका था।
प्रिया ने एक दिन कान में फुसफुसाया, “तू अब हमेशा मेरा रहेगा, आर्यन। तेरी जिंदगी, तेरी चूत, तेरी गांड – सब मेरी।”
और मैंने सिर्फ इतना कहा, “जी मालकिन… हमेशा।”
दिल्ली की रातें अब गर्म, क्रूर और अनंत वासना से भरी हुई थीं।

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