पड़ोसन की बेचैन रातें

अकेली पड़ोसन की देह ने पड़ोसी को पागल कर दिया। पति के सामने ही उसे रस्सियों में जकड़कर दोनों ने बारी-बारी से तोड़ा, पीटा और रात-भर अपनी भूख मिटाई। हर साँस में दर्द और कामुकता का मिश्रण।

रोहित 28 साल का था। दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-15 की एक घनी बस्ती में रहता था। उसके घर के ठीक सामने वाली गली में एक नया जोड़ा आया था। पति विक्रम 35 का, पत्नी प्रिया 24 की। प्रिया का शरीर ऐसा था कि पहली नज़र में ही रोहित का लंड पत्थर हो गया। गोरा-चिट्टा रंग, लंबे काले बाल, बड़े-बड़े गोल बूब्स जो साड़ी के अंदर से फूटने को तैयार रहते, पतली कमर और भारी गांड जो हर कदम पर हिलती थी। उम्र कम थी लेकिन बदन में एक जंगली जानवर की आग थी।

रोहित सुबह 6 बजे ही उठ जाता। ब्रश करते हुए आंगन में खड़ा होकर प्रिया को देखता। वह अपने आंगन में पानी भरती, साड़ी का पल्लू सरकाती तो उसकी नाभि और नीचे की गहरी रेखा साफ दिख जाती। रोहित का हाथ अपनी पेंट के अंदर चला जाता। वह धीरे-धीरे लंड सहलाता और कल्पना करता कि कैसे इस भाभी को दीवार से सटाकर चोदेगा, बाल पकड़कर खींचेगा, गालों पर थप्पड़ मारेगा।

प्रिया भी उसे देखती। कभी-कभी मुस्कुरा देती। विक्रम सुबह 7 बजे ऑफिस निकल जाता और रात 9 बजे लौटता। दिन भर प्रिया अकेली रहती। रोहित ने धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ाई। चाय, बिस्कुट, छोटी-मोटी मदद। एक हफ्ते में ही वह उसके घर के अंदर तक पहुँच गया।
एक दोपहर की बात है। गर्मी कड़क रही थी। रोहित ने देखा प्रिया छत पर कपड़े सुखा रही है। उसकी साड़ी भीगकर शरीर से चिपक गई थी। बूब्स के निप्पल साफ उभर रहे थे। रोहित सीढ़ियाँ चढ़ गया। प्रिया ने पीछे मुड़कर देखा तो चौंक गई लेकिन मुस्कुराई।

“क्या हुआ रोहित?”
“कुछ नहीं भाभी… सिर्फ देख रहा था कि आप अकेली कैसे काम कर रही हैं।”
प्रिया ने साड़ी ठीक की। “आ जाओ अंदर। पानी पियो।”

कमरे में घुसते ही रोहित ने दरवाज़ा बंद कर दिया। प्रिया पीछे मुड़ी तो रोहित ने झपटकर उसे दीवार से सटा दिया। एक हाथ से उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और दूसरे हाथ से साड़ी का पल्लू खींच दिया। बूब्स बाहर आ गए। बड़े, सख्त, गुलाबी निप्पल।
“क्या कर रहे हो?” प्रिया की आवाज़ काँपी लेकिन विरोध नहीं किया।
रोहित ने उसके मुँह पर थप्पड़ मारा। जोर का। गाल लाल हो गया। “चुप। आज से तुम मेरी रंडी हो। समझी?”

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प्रिया की आँखों में डर और उत्तेजना दोनों थे। रोहित ने उसके बूब्स दबाए, निप्पल्स को दाँतों से काटा। प्रिया सिसकी। रोहित ने साड़ी फाड़ दी। अंदर लाल रंग की लेस वाली ब्रा और पैंटी। ब्रा खींचकर फाड़ दी। बूब्स मुक्त हो गए। रोहित ने उन्हें मुँह में लिया, जोर-जोर से चूसा, काटा। प्रिया के हाथ उसके बालों में थे लेकिन रोक नहीं रही थी।
“घुटनों पर बैठ।” रोहित ने आदेश दिया।

प्रिया घुटनों के बल बैठ गई। रोहित ने पेंट खोली। उसका मोटा, काला, नसों वाला लंड बाहर निकला। 8 इंच लंबा, मोटा। प्रिया की आँखें फटी रह गईं।
“मुँह खोल। पूरा अंदर ले।”
प्रिया ने मुँह खोला। रोहित ने बाल पकड़कर लंड उसके गले तक ठूँस दिया। प्रिया ने गैग किया, आँखों से आँसू निकले लेकिन रोहित नहीं रुका। वह उसके मुँह को चोदने लगा। जोर-जोर से। लंड गले में अटकता, प्रिया की साँस फूलती। थूक लार बहने लगी। रोहित ने दोनों हाथों से सिर पकड़ रखा था। “साली रंडी, मुँह से चूस। और गहरा।”

दस मिनट तक मुँह चोदने के बाद रोहित ने लंड निकाला। प्रिया हाँफ रही थी, मुँह लार से भरा। रोहित ने उसे बिस्तर पर धकेल दिया। पैंटी फाड़ दी। प्रिया की चूत बालों से साफ थी, गीली, गुलाबी। रोहित ने दो उंगलियाँ अंदर डालकर जोर से मरोड़ी। प्रिया चीखी।
“आवाज़ मत निकाल। नहीं तो और जोर से मारूँगा।”

रोहित ने अपनी बेल्ट निकाली। प्रिया के दोनों हाथ पीछे बाँध दिए। फिर उसे घोड़ी बना दिया। गांड ऊपर, चेहरा तकिए में। रोहित ने उसकी गांड पर जोर का थप्पड़ मारा। लाल निशान पड़ गए। फिर एक के बाद एक। प्रिया सिसक रही थी लेकिन चूत और गीली हो रही थी।
रोहित ने थूक लगाकर अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा और एक झटके में पूरा अंदर घुसा दिया। प्रिया की चीख निकली। रोहित ने बाल पकड़कर खींचे और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ प्रिया की गांड हिलती, बूब्स लटके हुए थरथराते।

“बोल रंडी, कैसा लग रहा है?”
“अच्छा… बहुत अच्छा…” प्रिया की आवाज़ टूटी हुई थी।
रोहित ने और जोर लगाया। कमर अकड़कर चोदने लगा। चूत की छप-छप की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। वह कभी बाल खींचता, कभी गाल थपथपाता, कभी गर्दन दबाता। प्रिया का चेहरा लाल हो गया था। साँस फूल रही थी।

आधा घंटा लगातार चोदने के बाद रोहित ने लंड निकाला। प्रिया की चूत से सफेद झाग निकल रहा था। रोहित ने उसे पलट दिया। हाथ अभी भी बंधे थे। उसने प्रिया के मुँह पर बैठकर अपना लंड फिर से मुँह में ठूँस दिया। “साफ कर। अपनी चूत का पानी चाट।”
प्रिया ने चाटा। रोहित संतुष्ट होकर फिर चूत में घुस गया। इस बार उसने प्रिया की टाँगें कंधों पर रखीं और इतनी गहराई तक ठोका कि प्रिया की आँखें उलटने लगीं। रोहित ने निप्पल्स को मोड़ दिया, काटा। प्रिया रोने लगी लेकिन शरीर कांप रहा था। वह झड़ गई। चूत सिकुड़कर लंड को निचोड़ रही थी।

रोहित नहीं रुका। वह और तेज चोदने लगा। “मैं अंदर छोड़ूँगा। समझी? मेरे बच्चे पैदा करगी।”
प्रिया ने सिर हिलाया। रोहित ने जोर की आवाज़ के साथ अपना पानी उसकी कोख में उड़ेल दिया। गर्म, गाढ़ा। प्रिया की चूत भर गई। रोहित लंड अंदर ही रखे हुए प्रिया के ऊपर गिर पड़ा। दोनों हाँफ रहे थे।

उस दिन के बाद रोहित रोज आता। कभी दोपहर, कभी शाम। विक्रम के आने से पहले। प्रिया अब खुद दरवाज़ा खोलती। कभी-कभी सिर्फ साड़ी ओढ़े होती, अंदर कुछ नहीं। रोहित उसे रसोई में चोदता, दीवार से सटाकर, फर्श पर घसीटता। एक दिन उसने प्रिया के हाथ-पैर रस्सी से बाँध दिए। बिस्तर के चारों कोनों पर। फिर मोमबत्ती जलाई और गर्म मोम उसके बूब्स और चूत पर टपकाया। प्रिया चीखी लेकिन रोहित ने मुँह बंद कर दिया। फिर उसने बर्फ के टुकड़े उसकी चूत में डाले और ठंडी चूत को गर्म लंड से चोदा।

एक रात विक्रम देर से आया। रोहित छिपकर घर के पीछे वाले छेद से देख रहा था। प्रिया विक्रम के ऊपर सवार थी, लेकिन उसकी आँखें दीवार के उस छेद की तरफ थीं जहाँ रोहित खड़ा था। वह जानबूझकर जोर-जोर से सिसक रही थी, बाल बिखराए हुए, बूब्स हिलाती हुई। रोहित ने वहीं अपना लंड निकाला और हिलाते हुए देखा। जब विक्रम सो गया तो प्रिया चुपके से पीछे के दरवाज़े से रोहित को अंदर ले आई।

अँधेरे में रोहित ने उसे फिर से बाँधा। इस बार मुँह में कपड़ा ठूँस दिया ताकि आवाज़ न निकले। फिर उसकी गांड में थूक लगाकर लंड घुसाया। पहली बार। प्रिया का शरीर अकड़ गया। आँसू बह रहे थे। रोहित ने धीरे-धीरे लेकिन गहराई तक ठोका। गांड की दीवारें कस रही थीं। रोहित ने बाल पकड़कर खींचे और जोर मारने लगा। छप-छप, छप-छप। प्रिया की आँखें सफेद पड़ गईं। रोहित ने गांड में ही पानी छोड़ दिया। फिर लंड निकालकर प्रिया के मुँह में ठूँस दिया। “चाट। अपनी गांड का स्वाद।”

प्रिया ने चाटा। आँसू और थूक मिलाकर।
धीरे-धीरे खेल और क्रूर होते गए। रोहित ने प्रिया को अपने घर बुलाया। वहाँ उसने उसे चाबुक से पीटा। गांड और जाँघों पर लाल निशान। फिर कुत्ते की तरह रस्सी बाँधकर घसीटा। फर्श पर लेटाकर मुँह में पेशाब डाला। प्रिया ने पिया। रोहित खुश हुआ। उसने प्रिया को कुर्सी पर बाँधा, आँखों पर पट्टी बाँधी और अलग-अलग चीजें इस्तेमाल कीं—गाजर, खीरा, बोतल। प्रिया की चूत और गांड दोनों फैला दिए।

एक दिन रोहित ने प्रिया को पूरे दिन नंगा रखा। सिर्फ कॉलर पहनाया जिसमें लिखा था “रोहित की रंडी”। घर के अंदर घुमाया, चाय बनवाई, फर्श साफ करवाई। बीच-बीच में चोदा। कभी मुँह, कभी चूत, कभी गांड। शाम को विक्रम आने से पहले कपड़े पहनाए और भेज दिया।
प्रिया अब पूरी तरह अधीन हो चुकी थी। वह खुद रोहित को मैसेज करती—“आज जोर से मारना। गांड में दो बार।” रोहित कभी मना नहीं करता। वह उसे दीवार से लटकाता, पैर फैलाकर बाँधता, फिर घंटों चोदता। कभी उसके बूब्स पर क्लिप लगाता, कभी चूत में वाइब्रेटर डालकर छोड़ देता।

एक रात विक्रम को शक हुआ। वह जल्दी लौट आया। दरवाज़ा खुला पाया। अंदर रोहित प्रिया को कुत्ते की पोजीशन में चोद रहा था। हाथ बंधे, मुँह में गैग। विक्रम हैरान खड़ा रह गया। प्रिया ने आँखें मिलाईं लेकिन शर्म नहीं दिखाई। रोहित रुका नहीं। वह और जोर से ठोकने लगा।
“आ जाओ यार। दोनों मिलकर चोदेंगे।” रोहित ने कहा।

विक्रम कुछ पल चुप रहा। फिर पेंट खोली। उसका लंड भी खड़ा हो गया था। रोहित ने प्रिया का गैग निकाला। “बोल रंडी, दोनों को चूस।”
प्रिया ने दोनों लंड मुँह में लिए। बारी-बारी। फिर रोहित ने चूत में और विक्रम ने मुँह में। दोनों ने मिलकर प्रिया को घंटों इस्तेमाल किया। अंत में दोनों ने उसके चेहरे और बूब्स पर पानी उड़ा दिया। प्रिया थककर गिर पड़ी। शरीर पर निशान, थूक, वीर्य।

उस रात के बाद तीनों का रिश्ता बदल गया। विक्रम अब खुद रोहित को बुलाता। कभी-कभी दोनों मिलकर प्रिया को बाँधते, पीटते, चोदते। प्रिया की चूत और गांड हमेशा खुली रहती। वह अब सिर्फ एक वस्तु बन चुकी थी—रोहित और विक्रम की साझा रंडी।
रोहित रात को बिस्तर पर लेटा सोचता। प्रिया की चीखें, सिसकियाँ, गीली चूत की आवाज़ें कानों में गूँजतीं। उसका लंड फिर खड़ा हो जाता। वह जानता था कि कल फिर वही होगा। और भी जोर से, और भी क्रूर। प्रिया अब खुद माँगती थी कि उसे और दर्द दो, और गहरा चोदो, और अपमानित करो।

रोहित की मुस्कान अभी चेहरे से नहीं हटी थी कि अगली सुबह विक्रम ने ही फोन किया। आवाज़ में एक अजीब उत्तेजना थी। “आज ऑफिस नहीं जाऊँगा। तुम आ जाओ। प्रिया तैयार है।”
रोहित पहुँचा तो देखा प्रिया पूरी नंगी फर्श पर घुटनों के बल बैठी है। गर्दन में चौड़ा काला कॉलर कसा हुआ है, जिस पर चाँदी के अक्षर चमक रहे हैं—“रोहित की कुतिया”। दोनों हाथ पीछे बंधे हैं, मोटी रस्सी से। मुँह में बड़ा सा लाल गैग ठूँसा हुआ है, लार ठुड्डी से टपक रही है। आँखों में पट्टी। विक्रम उसके पीछे खड़ा था, हाथ में चमड़े का चाबुक।

“आज इसे सिखाएँगे कि असली दर्द क्या होता है,” विक्रम ने कहा।
रोहित ने पेंट खोली। उसका लंड पहले से तना हुआ था। उसने प्रिया के बाल पकड़कर सिर ऊपर उठाया और गैग निकाल दिया। “जीभ निकाल।”

प्रिया ने जीभ बाहर निकाली। रोहित ने अपना लंड उसके मुँह पर पटक दिया, फिर गले तक ठूँस लिया। विक्रम ने पीछे से चाबुक चलाया। गांड पर एक जोर का निशान पड़ गया। प्रिया की चीख लंड के अंदर दब गई। रोहित ने और गहरा धकेला। आँखों से आँसू निकलने लगे। विक्रम लगातार चाबुक मार रहा था—गांड, जाँघें, पीठ। हर वार पर प्रिया का शरीर काँपता, लेकिन मुँह से लंड नहीं निकालती थी।

दस मिनट बाद रोहित ने लंड निकाला। प्रिया हाँफ रही थी। विक्रम ने उसे खींचकर बिस्तर पर लिटा दिया। हाथ अभी भी बंधे थे। दोनों पैर फैलाकर अलग-अलग खंभों से बाँध दिए। चूत पूरी तरह खुली, पहले से ही गीली। रोहित ने गर्म मोमबत्ती जलाई। पहली बूँद ठीक निप्पल पर गिरी। प्रिया चीखी। दूसरी बूँद दूसरे निप्पल पर। फिर मोम की धार चूत के ऊपर टपकने लगी। गर्म मोम ठंडा होकर सफेद पपड़ी बना रहा था। रोहित ने उंगली से मोम हटाया और दो उंगलियाँ अंदर घुसा दीं। जोर से मरोड़ा। प्रिया की कमर उछली।

“अब असली मज़ा,” रोहित ने कहा। उसने एक मोटी काली डिल्डो निकाली—12 इंच लंबी, नसों वाली। थूक लगाकर चूत के मुँह पर रखी और एक झटके में आधी अंदर घुसा दी। प्रिया की चीख घर में गूँज गई। रोहित ने बाकी हिस्सा भी ठूँस दिया। फिर डिल्डो को बाहर-अंदर करने लगा। जोर-जोर से। छप-छप की आवाज़। विक्रम ने उसी समय अपना लंड प्रिया के मुँह में ठूँस दिया। दोनों तरफ से भरी हुई।

आधा घंटा तक यही चला। डिल्डो इतनी तेज चल रही थी कि प्रिया की चूत लाल और सूजी हुई लग रही थी। रोहित ने डिल्डो निकाली तो चूत का छेद खुला रह गया, अंदर की गुलाबी दीवारें दिख रही थीं। उसने तुरंत अपना लंड घुसा दिया। विक्रम ने मुँह से लंड निकालकर गांड की तरफ चला गया। थूक लगाकर एक झटके में गांड में घुस गया। प्रिया का शरीर अकड़ गया। दोनों लंड अंदर—एक चूत में, एक गांड में। दोनों ने एक साथ धक्के मारने शुरू किए। प्रिया की चीखें अब सिसकियों में बदल गई थीं। शरीर पसीने से तरबतर। बूब्स इधर-उधर हिल रहे थे।

रोहित ने बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा। “बोल, तू क्या है?”
“कु… कुतिया… आपकी कुतिया…”
“और जोर से।”
“मैं रोहित और विक्रम की रंडी हूँ… चोदो… और जोर से चोदो…”

दोनों ने रफ्तार बढ़ा दी। बिस्तर चरमरा रहा था। प्रिया की आँखें उलटने लगीं। वह झड़ गई। चूत ने रोहित के लंड को इतनी जोर से निचोड़ा कि वह भी नियंत्रण खो बैठा। गर्म वीर्य की धार अंदर छोड़ दी। विक्रम ने भी गांड में पानी उड़ेल दिया। दोनों लंड निकाले तो चूत और गांड से सफेद तरल रिस रहा था, जाँघों पर बह रहा था।
वे रुके नहीं। रोहित ने प्रिया को खोलकर फर्श पर घसीटा। कॉलर की चेन पकड़कर खींचा। “कुत्ते की तरह चल।”

प्रिया चारों पैरों पर चलने लगी। रोहित ने उसकी गांड पर थप्पड़ मारे हुए घर के हर कमरे में घुमाया। रसोई में लेजाकर सिंक के किनारे झुका दिया। फिर से चोदा—इस बार सिर्फ गांड। विक्रम ने फ्रिज से बर्फ निकाली और प्रिया की चूत में ठूँस दी। ठंड और गर्मी का मिश्रण। प्रिया काँप रही थी। रोहित गांड चोदते हुए उसके बालों को पकड़े हुए था। “आज रात भर चोदेंगे। सुबह तक तेरी चूत और गांड दोनों फट जाएँगे।”

शाम होते-होते प्रिया की हालत खराब हो चुकी थी। शरीर पर चाबुक के निशान, दाँत के निशान, उंगलियों के निशान। चूत और गांड दोनों सूजे हुए, लाल। फिर भी जब रोहित ने फिर से लंड दिखाया तो उसने खुद मुँह खोल दिया। विक्रम ने एक नया खिलौना निकाला—बिजली वाला शॉकर। छोटी सी छड़। उसने प्रिया के निप्पल पर लगाकर स्विच दबाया। प्रिया उछल पड़ी। चीख निकली। फिर चूत पर। फिर गांड के छेद पर। हर बार शरीर ऐंठ जाता। रोहित ने उसी दौरान उसका मुँह चोदा। गले तक। आँसू, लार, सिसकियाँ।

रात के 11 बजे दोनों ने उसे फिर से बाँधा। इस बार उल्टा—सिर नीचे, गांड ऊपर, हाथ-पैर खंभों से। रोहित ने एक लंबी मोटी मोमबत्ती उसकी गांड में ठूँस दी और जला दी। मोम अंदर टपक रहा था। प्रिया चीख रही थी लेकिन आवाज़ गैग में दब रही थी। विक्रम ने उसकी चूत में तीन उंगलियाँ डालकर जोर-जोर से फटकारा। फिर दोनों ने बारी-बारी से चोदा। कभी एक साथ। कभी एक मुँह में, एक नीचे। प्रिया का शरीर अब सिर्फ एक गोश्त का टुकड़ा लग रहा था जिसे वे मनचाहे तरीके से इस्तेमाल कर रहे थे।

आधी रात को रोहित ने गैग निकाला। प्रिया की आवाज़ बैठ चुकी थी। “पानी… प्लीज…”
रोहित मुस्कुराया। उसने अपना लंड उसके मुँह के पास लाया और पेशाब करना शुरू कर दिया। गर्म धारा मुँह में गई। प्रिया ने गटक लिया। कुछ बाहर गिरा तो रोहित ने चाटा। “अच्छी कुतिया। अब और ले।”

विक्रम ने भी वही किया। प्रिया ने दोनों का पेशाब पिया। चेहरा चमक रहा था। फिर दोनों ने उसे खोलकर नहलाया। पानी की धार के नीचे फिर से चोदा। दीवार से सटाकर। बाल पकड़कर। गाल पर थप्पड़ मारते हुए।
सुबह चार बजे जब दोनों थककर बिस्तर पर गिरे तो प्रिया उनके बीच नंगी पड़ी थी। शरीर पर सैकड़ों निशान। चूत से अभी भी वीर्य रिस रहा था। आँखें बंद थीं लेकिन होंठ हिल रहे थे—“और… कल और…”

रोहित ने उसकी गांड सहलाते हुए कहा, “कल और क्रूर होगा। आज तो सिर्फ शुरुआत थी।”
प्रिया ने आँखें खोलीं। उनमें अब डर नहीं, सिर्फ भूख थी। भूख और दर्द और अपमान की। वह जानती थी कि उसकी जिंदगी अब सिर्फ इसी अंधेरे कमरे और इन दो लंडों के बीच कैद हो चुकी है। और वह चाहती थी कि यह कैद कभी खत्म न हो।

अगले दिन विक्रम ने छुट्टी बढ़ा ली। रोहित भी नहीं गया। तीनों ने दिन भर दरवाज़ा बंद रखा। प्रिया को कभी छत से लटकाया, कभी टेबल पर बाँधा, कभी अलमारी में बंद करके छेद से लंड दिया। चाबुक, मोम, बर्फ, शॉकर, डिल्डो, दोनों के लंड—सब कुछ इस्तेमाल हुआ। प्रिया की आवाज़ बैठ गई, शरीर काँपने लगा, लेकिन हर बार जब रोहित पूछता “और चाहिए?” तो वह सिर हिलाती।

शाम को जब आखिरी बार दोनों ने एक साथ उसकी चूत और गांड में पानी छोड़ा तो प्रिया बेहोश सी हो गई। रोहित ने उसके चेहरे पर थप्पड़ मारा। आँखें खुलीं।
“अब तू पूरी तरह हमारी है,” रोहित ने कहा। “आज से रोज यही होगा। कभी नरम नहीं। हमेशा क्रूर। हमेशा दर्द। समझी?”
प्रिया ने फटी आवाज़ में जवाब दिया, “हाँ… मालिक… हमेशा…”

रोहित मुस्कुराया। उसने प्रिया के सूजे हुए निप्पल को मोड़ते हुए कहा, “कल एक नया खेल होगा। तुझे सड़क पर नंगा घुमाएँगे। रात के अंधेरे में। जो मिलेगा उसे भी चूसने देंगे। तैयार रह।”
प्रिया की आँखों में फिर से वही भूख चमक उठी। वह जानती थी कि कल और भी नीचे गिरेगी। और वह गिरना चाहती थी—जितना गहरा हो सके।

मेघगढ़ की रानी वैशाली

पति खोने के बाद अकेली पड़ी मामी

गर्भवती भाभी और विधवा बहन

रियासत की मालकिन एक मजदूर के सामने

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