ट्रेन के गंदे बाथरूम में जबरदस्ती फाड़ी गई चूत और गांड, खून की धारा, गला दबाने वाले धक्के, फिर महीनों तक बाँधकर रोज़ नई यातना। दर्द में भी माँगती रही और फाड़ने वाली train stories ।
मेरा नाम हरमन सिंह है। उम्र 24 साल। पंजाब के लुधियाना का रहने वाला हूँ। लंबा-चौड़ा शरीर, काले घुंघराले बाल, और एक ऐसी शक्ल जो लड़कियों को पहली नज़र में ही खींच लेती है। मुझे मोटी-मोटी जाँघों वाली, भारी स्तनों वाली और बड़ी गांड वाली औरतें पागल कर देती हैं। जितनी मोटी और जितनी ज्यादा मांस वाली, उतनी ही मेरी भूख बढ़ जाती है।
पिछले साल दिसंबर की एक रात की बात है। मैं लुधियाना से देहरादून जा रहा था। रात की ट्रेन। स्लीपर कोच। टिकट बुक करवाकर स्टेशन पहुँचा तो ट्रेन डेढ़ घंटे लेट थी। प्लेटफॉर्म पर ठंड का मौसम था। मैं बेंच पर बैठा सिगरेट फूँक रहा था तभी नज़र पड़ी एक लड़की पर।
उसका नाम था रिया शर्मा। उम्र 22 साल। दिल्ली की। देहरादून में किसी प्राइवेट कंपनी में तीन महीने का प्रोजेक्ट करने जा रही थी। शरीर ऐसा कि देखकर लंड सीधा खड़ा हो जाए। 36 साइज़ के भारी स्तन, पतली कमर, और गांड इतनी मोटी कि जीन्स फटने को तैयार लग रही थी। गोरी चमकदार त्वचा, लंबे काले बाल और मोटे होंठ।
मैंने जानबूझकर उसके पास वाली बेंच पर बैठ गया। आँखें मिलाईं। उसने भी नज़रें नहीं हटाईं। थोड़ी देर बाद बात शुरू हुई। पता चला कि वह भी उसी ट्रेन में जा रही है। देहरादून। और अकेली। कोई जान-पहचान नहीं।
ट्रेन आई। हम दोनों एक ही कोच में चढ़े। रात का समय था। कोच आधा खाली। हम आमने-सामने बैठ गए। उसके शरीर से आने वाली हल्की परफ्यूम की खुशबू मेरे दिमाग में घूम रही थी। मेरा लंड जीन्स के अंदर पहले से ही सख्त हो चुका था।
थोड़ी देर बातें हुईं। फिर अंधेरा गहराया। बाहर बारिश शुरू हो गई। खिड़कियाँ बंद कर दीं। रिया थोड़ी झपकी लेने लगी। मैंने देखा कि उसकी जीन्स की जिप थोड़ी खुली हुई है और अंदर काली पैंटी झलक रही है। मेरा लंड अब पूरी तरह से तना हुआ था। 9 इंच लंबा और 3.5 इंच मोटा। नसों से भरा हुआ।
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मैं उठा और बाथरूम की तरफ चला गया। लौटकर देखा कि रिया जाग चुकी है और मेरी तरफ देख रही है। उसकी नज़रें मेरे तने हुए लंड पर थीं। मैंने जानबूझकर जिप खोल दी और लंड बाहर निकाल लिया। वह बड़ी-बड़ी आँखों से देखने लगी।
“चाहिए?” मैंने सीधा पूछा।
वह शर्माई, पर सिर नहीं हिलाया। इंकार भी नहीं किया। मैं उठकर उसके पास बैठ गया। उसके बालों में हाथ फँसाया और जबरदस्ती उसके होंठों पर अपना मुँह दबा दिया। पहले उसने धक्का दिया, फिर उसके होंठ खुल गए। मैंने उसकी जीभ चूस ली। एक हाथ से उसके टॉप की जिप खींच दी। ब्रा के ऊपर से उसके भारी स्तन दबाने लगा। दूसरे हाथ से उसकी जीन्स के अंदर हाथ डाल दिया। पैंटी गीली थी।
“बाथरूम चल,” मैंने फुसफुसाया।
वह उठ खड़ी हुई। हम दोनों बाथरूम में घुसे। मैंने अंदर से दरवाज़ा बंद किया और लैच लगा दी। जगह तंग थी। बदबूदार और गंदी। लेकिन मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।
मैंने उसके बालों को मुट्ठी में जकड़ लिया और उसके मुँह को अपने लंड पर दबा दिया। “चूस।”
उसने मना किया। मैंने और जोर से उसके बाल खींचे। “चूस वरना मैं तेरी गांड फाड़ दूँगा।”
रिया घुटनों के बल बैठ गई। उसके मोटे होंठ मेरे लंड के सिरे पर लगे। मैंने उसके सिर को दबाया और पूरा लंड उसके गले में धकेल दिया। वह घुटने लगी, आँखों से पानी निकलने लगा, लेकिन मैंने नहीं छोड़ा। गला दबा-दबाकर चूसाया। थूक लार से लंड तर हो गया।
फिर मैंने उसे खड़ा किया। उसके टॉप और ब्रा दोनों उतार दिए। भारी स्तन बाहर आ गए। मैंने एक स्तन मुँह में ले लिया और जोर से काटा। उसने आवाज़ निकाली। मैंने दूसरा भी काटा। निप्पल लाल हो गए।
उसकी जीन्स और पैंटी एक साथ नीचे खींच दी। मोटी जाँघें और बड़ी गोल गांड नंगी हो गईं। मैंने उसे दीवार की तरफ मुँह करके झुका दिया। दोनों हाथ दीवार पर टिकाए। उसकी गांड को दोनों हाथों से फैलाया। चूत और गांड का छेद साफ दिख रहा था। चूत पहले से गीली थी।
मैंने कोई तैयारी नहीं की। सीधे लंड का सिरा उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार झटके में आधा लंड अंदर धकेल दिया। रिया चीख पड़ी। उसकी चूत फट गई। खून निकलने लगा। मैंने उसके मुँह पर हाथ दबा दिया ताकि चीख बाहर न जाए।
“चुप रह रंडी। सह ले।”
मैंने पूरा लंड अंदर घुसेड़ दिया। उसकी चूत मेरे मोटे लंड से पूरी तरह फैल गई थी। खून लंड पर लग रहा था। मैंने बिना रुके जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ उसकी मोटी गांड थरथरा रही थी। दीवार से उसकी छाती टकरा रही थी।
दस मिनट तक लगातार चोदा। फिर लंड निकालकर उसके मुँह में ठूंस दिया। “चख अपनी चूत का खून।” वह मजबूरन चूसने लगी।
फिर मैंने उसे घुमाया। दोनों टाँगें उठाईं और दीवार के सहारे लटका लिया। इस बार और जोर से अंदर घुसाया। पूरा वजन उसके ऊपर डाल दिया। उसकी चूत से खून और पानी दोनों बह रहे थे। वह रो रही थी, लेकिन उसके होंठ मेरे होंठों पर थे। मैं उसके होंठ काट रहा था।
“अब गांड लूँगा,” मैंने कहा।
रिया काँप उठी। “नहीं… प्लीज़…”
मैंने नहीं सुना। उसके थूक से लंड गीला किया और गांड के छेद पर रखा। एक जोरदार धक्के में सिरा अंदर घुस गया। वह चीखी। मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और पूरा लंड उसकी गांड में ठूंस दिया। गांड फट गई। खून निकलने लगा।
अब मैं उसकी गांड चोद रहा था। बेरहमी से। हर धक्के के साथ उसकी मोटी गांड लहरा रही थी। मैं उसके स्तनों को मरोड़ रहा था। निप्पल काट रहा था। उसके गले पर हाथ दबाकर साँस रोक रहा था। जब वह बेहोशी की कगार पर पहुँचती तो छोड़ देता।
एक घंटे तक लगातार गांड और चूत दोनों बारी-बारी चोदीं। उसकी दोनों छेद खून से लथपथ हो चुके थे। मैंने उसे फर्श पर बैठाया। घुटनों के बल। फिर से गले में लंड ठूंस दिया और आखिरी जोरदार धक्कों के साथ उसके मुँह में ही झड़ गया। गर्म वीर्य उसके गले में उतर गया। कुछ बाहर निकलकर उसके ठुड्डी पर लगा।
मैंने उसे खड़ा किया। उसके चेहरे पर थप्पड़ मारा। “अब साफ कर।”
रिया ने अपने कपड़ों से अपना चेहरा और मेरा लंड साफ किया। उसके शरीर पर खून के निशान थे। गांड और चूत दोनों सूज चुकी थीं। वह काँप रही थी।
हमने कपड़े पहने। बाहर आकर देखा तो रात के सवा तीन बज रहे थे। कोच में अभी भी सन्नाटा था। हम अपनी सीटों पर वापस बैठ गए। रिया बिल्कुल चुप थी। उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन उसने कुछ नहीं कहा।
देहरादून पहुँचकर मैंने उसे अपने एक रिश्तेदार के खाली फ्लैट में रखा। अगले तीन महीने तक वह मेरे पास रही। हर रात मैं उसे उसी तरह इस्तेमाल करता रहा। कभी बाथरूम में, कभी बिस्तर पर, कभी फर्श पर। कभी उसके हाथ बाँधकर, कभी मुँह में कपड़ा ठूंसकर। कभी सिर्फ गांड, कभी दोनों छेद एक साथ। कभी वीर्य उसके चेहरे पर उड़ेलता, कभी उसके बालों में।
रिया ने कभी शिकायत नहीं की। वह हर बार चुपचाप सहती रही। कभी-कभी वह खुद आकर मेरे लंड को छूने लगती। कभी खुद ही कपड़े उतारकर लेट जाती।
तीन महीने बाद रिया दिल्ली चली गई थी, लेकिन उसकी यादें मेरे दिमाग से नहीं गईं। हर रात जब अकेला होता तो उसी ट्रेन बाथरूम का खून, उसकी फटी हुई गांड और उसकी चीखें याद आ जातीं। मेरा लंड खुद-ब-खुद तन जाता। मैंने उससे कोई संपर्क नहीं रखा। न फोन, न मैसेज। मैं चाहता था कि वह खुद टूटे और वापस आए।
दो महीने और बीत गए। एक रात अचानक मेरा फोन बजा। अनजान नंबर। उठाया तो दूसरी तरफ से भारी साँसें आईं।
“हरमन… मैं आ गई हूँ।”
रिया की आवाज़ थी। काँपती हुई, लेकिन भूखी।
“कहाँ हो?”
“तुम्हारे शहर के स्टेशन पर। बारिश हो रही है। कपड़े गीले हैं। मैं… मैं तुम्हारे पास आना चाहती हूँ।”
मैंने बस इतना कहा, “आ जा। पता भेज रहा हूँ। और हाँ… कोई अंडरवियर मत पहनना।”
आधी रात को दरवाज़े पर दस्तक हुई। मैंने खोला। रिया खड़ी थी। बालों से पानी टपक रहा था। सफेद टॉप शरीर से चिपककर उसके भारी स्तनों के निप्पल साफ दिखा रहा था। जीन्स गीली होकर जाँघों से सट गई थी। उसके चेहरे पर न डर था, न शर्म। सिर्फ एक गहरी प्यास।
मैंने उसे अंदर खींचा और दरवाज़ा बंद किया। कोई बात नहीं की। सीधे उसके बालों को मुट्ठी में जकड़कर घुटनों पर गिरा दिया। “मुँह खोल।”
रिया ने मुँह खोला। मैंने जिप खोली और 9 इंच का तना हुआ लंड उसके गले में एक झटके में ठूंस दिया। वह घुटने लगी, लेकिन मैंने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़कर और गहरा धकेल दिया। उसकी नाक मेरे पेट से लग गई। आँखों से आँसू बहने लगे, थूक मुँह से बाहर निकलकर फर्श पर गिरने लगा। मैंने उसके गले को बाहर से दबाया ताकि लंड और अंदर तक जाए। पाँच मिनट तक लगातार गला चोदा।
जब उसका चेहरा लाल हो गया और साँस रुकने लगी तो निकाला। वह फर्श पर गिरकर खाँसने लगी। मुँह से लार और मेरे लंड का स्वाद टपक रहा था।
“उठ। कपड़े उतार। एक-एक करके।”
रिया ने धीरे-धीरे टॉप उतारा। फिर ब्रा। भारी स्तन बाहर आ गए। निप्पल पहले से ही कड़े थे। फिर जीन्स। उसके नीचे कोई पैंटी नहीं थी। चूत और गांड दोनों नंगी। उसकी चूत के बाल थोड़े बढ़े हुए थे। मैंने देखा कि उसकी गांड पर अभी भी हल्के निशान बचे हुए थे पिछले बार के।
मैंने उसे बिस्तर पर धकेल दिया। उसके दोनों हाथों को सिर के ऊपर बाँध दिया मोटी रस्सी से। फिर दोनों टाँगें फैलाकर टखनों को भी बिस्तर के पायों से बाँध दिया। अब वह पूरी तरह फैली हुई थी। कोई हरकत नहीं कर सकती थी।
मैंने एक मोटी बेल्ट निकाली। पहले उसके बाएँ स्तन पर जोरदार चाबुक मारा। लाल निशान पड़ गया। फिर दाएँ पर। रिया चीखी, लेकिन मैंने उसके मुँह में अपना अंडरवियर ठूंस दिया। फिर बेल्ट से उसकी जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर मारने लगा। हर मार के साथ उसकी चूत सिकुड़ रही थी। मैंने देखा कि उसकी चूत से पानी रिसने लगा है। दर्द में भी वह गीली हो रही थी।
“तेरी चूत अभी भी प्यासी है रंडी,” मैंने कहा और दो उंगलियाँ उसकी चूत में धकेल दीं। अंदर घुमाया, फिर तीसरी उंगली भी। फिर चार। उसकी चूत फैलने लगी। मैंने पूरा मुट्ठी अंदर ठूसने की कोशिश की। रिया के शरीर में ऐंठन दौड़ गई। आँसू बह रहे थे, लेकिन उसकी चूत मेरी मुट्ठी को निगल रही थी।
मैंने मुट्ठी निकाली। खून और पानी मिला हुआ था। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और एक ही झटके में पूरा अंदर घुसा दिया। कोई धीरे-धीरे नहीं। सीधा जड़ तक। उसकी चूत फटने की आवाज़ आई। मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और बिना रुके धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ बिस्तर चरमरा रहा था। उसके भारी स्तन इधर-उधर हिल रहे थे। मैंने एक स्तन मुँह में ले लिया और निप्पल को दाँतों से दबाया। खून का स्वाद आया।
बीस मिनट तक लगातार चोदा। फिर लंड निकाला और उसकी गांड के छेद पर रखा। पिछले बार की तरह इस बार भी कोई तेल या थूक नहीं लगाया। सूखा। एक जोरदार धक्के में आधा लंड उसकी गांड में घुस गया। रिया की आँखें फटी की फटी रह गईं। मैंने और जोर लगाया। पूरा लंड अंदर चला गया। उसकी गांड मेरे लंड से फूल गई। खून फिर से बहने लगा।
अब मैं उसकी गांड चोद रहा था। बेरहमी से। एक हाथ से उसके गले को दबाए हुए, दूसरे हाथ से उसके बाल खींचे हुए। कभी-कभी लंड निकालकर उसके मुँह में ठूंस देता ताकि वह अपने ही खून का स्वाद चखे। फिर वापस गांड में।
एक घंटे बाद मैंने रस्सी खोली। उसके हाथ-पैर सुन्न हो चुके थे। मैंने उसे उल्टा कर दिया। घुटनों के बल। चेहरा फर्श पर दबाया। फिर से गांड में लंड डाल दिया। इस बार और तेज़। उसकी मोटी गांड हर धक्के के साथ लहराने लगी। मैंने उसके दोनों स्तन पीछे से मरोड़े। निप्पल इतने कसकर मरोड़े कि उसके मुँह से दर्द भरी आवाज़ें आने लगीं।
“बोल रंडी… तेरी गांड किसकी है?”
रिया ने मुश्किल से कहा, “तुम्हारी… सिर्फ तुम्हारी…”
“जोर से बोल।”
“मेरी गांड तुम्हारी है हरमन… फाड़ दो… और फाड़ दो…”
मैंने और तेज़ धक्के मारे। आखिर में जब चरम पर पहुँचा तो पूरा वीर्य उसकी गांड के अंदर ही छोड़ दिया। इतना कि बाहर निकलकर उसकी जाँघों पर बहने लगा।
मैंने लंड निकाला। उसकी गांड का छेद खुला हुआ था। वीर्य और खून मिलाकर रिस रहा था। मैंने उसे घुमाया। उसके चेहरे पर थप्पड़ मारा। फिर दूसरा। उसके होंठ फूल गए।
“अब चूस के साफ कर।”
रिया ने मेरे खून और वीर्य से सने लंड को मुँह में लिया और चाटने लगी। एक-एक बूँद साफ की।
रात अभी बाकी थी। मैंने उसे बाथरूम में घसीटा। ठंडे पानी के नीचे खड़ा किया। फिर वहीं दीवार से लगाकर फिर से चोदा। इस बार चूत में। पानी के नीचे खून और वीर्य बह रहे थे। उसकी चीखें बाथरूम में गूँज रही थीं।
सुबह चार बजे जब मैं थका तो उसे बिस्तर पर फेंक दिया। उसके शरीर पर जगह-जगह लाल निशान, दाँत के निशान, और खून के धब्बे थे। गांड और चूत दोनों सूजकर बंद होने को तैयार नहीं थे। वह लेटी हुई थी, साँसें उखड़ी हुईं।
मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “अब तू कहीं नहीं जाएगी। यहाँ रहेगी। जब तक मैं चाहूँगा। हर रात तेरी गांड और चूत दोनों फाड़ूँगा। कभी रस्सी से, कभी चेन से, कभी सिर्फ हाथों से। समझी?”
रिया ने आँखें बंद किए हुए धीरे से सिर हिलाया। उसके होंठों पर हल्की सी मुस्कान थी। दर्द की, या फिर संतुष्टि की… मैं नहीं जानता था।
अगली सुबह जब वह उठी तो चल नहीं पा रही थी। मैंने उसे जबरदस्ती उठाया, नाश्ता कराया, फिर फिर से बाँध दिया। इस बार उसके हाथ पीछे बाँधे। मुँह में बड़ा सा गैग ठूंस दिया। फिर उसकी चूत में एक मोटा खीरा घुसेड़ दिया और गांड में अपना लंड। दोनों छेद एक साथ भरे हुए।
मैंने घंटों तक उसे उस हालत में रखा। कभी धक्के मारता, कभी रोक देता। जब वह बेहोशी की कगार पर पहुँचती तो गैग हटाकर पानी पिलाता, फिर वापस ठूंस देता।
दोपहर तक उसकी चूत से खून नहीं रुक रहा था। मैंने उसे फर्श पर लिटाया। उसके चेहरे पर बैठ गया और लंड उसके मुँह में डालकर गला चोदने लगा। नीचे उसकी चूत में तीन उंगलियाँ घुमा रहा था। जब मैं झड़ा तो पूरा वीर्य उसके पेट में उतार दिया।
रिया अब बोल नहीं पा रही थी। गला बैठ चुका था। लेकिन उसकी आँखों में अभी भी वही भूख थी।
शाम को मैंने एक नई चीज़ निकाली। मोटी चेन। उसके गर्दन में डालकर दीवार से बाँध दिया। इतनी कि वह सीधी खड़ी तो हो सके लेकिन बैठ न सके। फिर उसकी दोनों टाँगें फैलाकर बाँध दीं। अब वह दीवार से बँधी हुई, फैली हुई खड़ी थी। मैंने उसके सामने कुर्सी रखी और बैठकर सिगरेट पीने लगा। बीच-बीच में उठकर उसके स्तनों पर थप्पड़ मारता, चूत में उंगली घुमाकर निकालता, गांड में थूककर उंगली डालता।
रात भर मैंने उसे उसी हालत में रखा। कभी चोदा, कभी सिर्फ तड़पाया। सुबह जब खोला तो उसके पैर काँप रहे थे। वह मेरे पैरों पर गिर पड़ी।
“और… और चोदो…” उसकी आवाज़ सिर्फ फुसफुसाहट थी।
मैंने उसके बाल पकड़कर उठाया। “अब तू मेरी कुतिया है। समझ गई?”
“हाँ… तुम्हारी कुतिया…”
उस दिन के बाद रिया ने दिल्ली वापस जाने की बात कभी नहीं की। वह मेरे घर में रहने लगी। हर रात एक नई यातना। कभी मोमबत्ती की मोम उसके स्तनों पर टपकाई, कभी उसके निप्पल में सुई जैसी चीज़ चुभाई (हल्की, बस दर्द के लिए), कभी उसे कुत्ते की तरह रेंगने पर मजबूर किया। कभी उसके मुँह में अपना मोजा ठूंसकर घंटों चोदा।
एक रात मैंने उसे छत पर ले जाकर खुले में बाँधा। ठंडी हवा में उसके नंगे शरीर पर चाबुक चलाया। पड़ोसियों के घरों की लाइटें जल रही थीं। किसी ने देखा या नहीं, मुझे परवाह नहीं थी। रिया की चीखें रात में गूँज रही थीं।
अब कई महीने बीत चुके हैं। रिया अभी भी मेरे पास है। उसका शरीर निशानों से भरा हुआ है। गांड और चूत दोनों इतने इस्तेमाल हो चुके हैं कि आसानी से खुल जाते हैं। लेकिन उसकी भूख नहीं मिटी।
कभी-कभी रात को जब मैं उसके ऊपर होता हूँ, लंड उसकी फटी गांड में धँसा होता है, और वह आँखों में आँसू लिए कहती है, “और जोर से… फाड़ दो पूरी…”
तब मुझे लगता है कि ट्रेन वाला वो गंदा बाथरूम सिर्फ शुरुआत थी। असली खेल तो अब शुरू हुआ है। और इसका कोई अंत नहीं है।
रियासत की मालकिन एक मजदूर के सामने
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