होली के रंग में नवविवाहिता नेहा भाभी की टाइट चूत को आर्यन ने 9 इंच के मोटे लंड से बेरहमी से फाड़ा। घोड़ी, मिशनरी, काउगर्ल – हर स्टाइल में चीखती रही, झड़ती रही, गुलाम बन गई।
हैलो, चुदाई के भूखे मेरे प्यारे पाठकों। मेरा नाम आर्यन है और मैं 26 साल का हूँ। आपको सुनकर हैरानी होगी, लेकिन ये पूरी तरह सच है कि ये मेरी 95वीं चुदाई की कहानी है। मैं 19 साल की उम्र से ही लंड की पूजा करने लगा था। उसमें मेरी गर्लफ्रेंड्स, भाभियों, आंटियों और कभी-कभी अनजान लड़कियों तक की चूतें शामिल रहीं। मैंने अपने लंड को शुरू से ही इतना मोटा और लंबा बनाने पर फोकस किया कि एक बार जिसने भी मुझे अंदर लिया, वो दूसरे किसी के लंड की तरफ देखने की हिम्मत ही न कर सके। और सच में ऐसा ही हुआ। जितनी भी औरतों को मैंने एक बार चोदा, वो आज भी मेरे लंड की गुलाम हैं। शादी के बाद भी वो मेरे फ्लैट पर चुदने आती हैं। कितनी को तो मैंने माँ भी बना दिया जिनका पति बाँझ था।
ये न्यूली मैरिड वाली खतरनाक चुदाई की कहानी होली के दिन की है। वैसे तो मैं मुंबई में तीन साल से अकेला रह रहा हूँ, सिर्फ इसलिए ताकि मेरे फ्लैट पर किसी भी वक्त किसी भी चूत को चोदने में कोई दिक्कत न हो। मुंबई में रहते हुए अब तक मैंने 47 चुदाई कर ली हैं। मेरे अंकल का घर मेरे फ्लैट से सिर्फ चार किलोमीटर दूर एक छोटे से हाउसिंग सोसाइटी में है। लेकिन मैं वहाँ बहुत कम जाता हूँ। वजह? हर हफ्ते शनिवार-रविवार को मेरे फ्लैट पर पाँच चूतें फिक्स्ड आती हैं। दो भाभियाँ हमेशा की, बाकी गर्लफ्रेंड हर हफ्ते नई।
एक बार मेरी तबीयत बहुत खराब हो गई। पापा ने अंकल के घर रुकने को कहा। मैंने सोचा, कुछ दिन आराम मिल जाएगा। मैं अंकल के घर चला गया। वहाँ आस-पास सिर्फ परिवार वाले ही रहते थे। अंकल एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर थे और उन्हें कंपनी की तरफ से ही ये फ्लैट मिला था। मैं वहाँ कुछ दिन रहा। मेरा स्वास्थ्य ठीक हो गया लेकिन चुदाई की भूख बढ़ती गई। हर हफ्ते पाँच चूतें चोदने की आदत थी, वहाँ एक भी नहीं। लंड रात-रात भर तड़पता रहता।
उसी सोसाइटी में मैंने एकदम मस्त भाभी देखी। नाम था नेहा। उम्र 24 साल। शादी को सिर्फ चार महीने हुए थे। उसका पति बीएसएफ में तैनात था और जम्मू-कश्मीर में ड्यूटी पर था। नेहा का फिगर 38-30-40 था। उसकी चूचियाँ इतनी भारी कि ब्लाउज फटने को तैयार। गांड इतनी मोटी और उछालदार कि देखते ही लंड खड़ा हो जाए। चेहरे पर वो नई-नई दुल्हन वाली शर्म और आँखों में छुपी भूख। मैं बालकनी से रोज उसे देखता। वो भी मेरी नजरें महसूस कर रही थी। लेकिन मैं अंकल के घर में कोई गड़बड़ नहीं करना चाहता था।
फिर एक दिन जब लंड ने बर्दाश्त नहीं किया, मैंने नेहा को अपना लंड दिखा ही दिया। उस दिन मैंने सिर्फ तौलिया लपेटा, ऊपर टी-शर्ट पहनी, नीचे कुछ नहीं। लंड आधा सख्त होकर तौलिए के अंदर लटक रहा था। जैसे ही नेहा अपनी बालकनी में आई, मैं भी बालकनी में निकल गया। तौलिया हल्का सा हिला और मेरा मोटा लंड उसकी नजरों के सामने उछल पड़ा। नेहा की आँखें फैल गईं। उसने एक नजर में ही समझ लिया कि ये लंड उसकी छोटी-सी चूत को फाड़ डालेगा। वो घूरती रही, फिर शर्मा कर अंदर चली गई। लेकिन उसकी साँसें तेज हो गई थीं।
मैंने उसी दिन बालकनी से फोन पर बात करते हुए नेहा को इशारा कर दिया कि मैं कल जा रहा हूँ। नेहा ने मुझे ऐसे देखा जैसे मैं उसका प्रेमी हूँ और उसे छोड़कर जा रहा हूँ। उसकी आँखों में प्यास साफ दिख रही थी। लेकिन मैंने इंतजार किया। कोई संकेत नहीं मिला तो मैं मुंबई वापस आ गया।
फिर होली का मौका आया। अंकल-आंटी अपने दोस्तों के साथ बाहर शहर गए थे। मुझे उनके घर की देखभाल के लिए जाना पड़ा। मैं बालकनी में खड़ा होली का मजा ले रहा था तभी मेरी नजर नेहा पर पड़ी। वो नीचे अपने घर की बालकनी में थी। जैसे ही उसने मुझे देखा, उसका चेहरा हैरानी और खुशी से लाल हो गया। मैंने मुस्कुराते हुए ऊँची आवाज में कहा, “हैप्पी होली नेहा भाभी!” वो बोली, “आर्यन तुम? कब आए?” मैंने कहा, “बस अभी। तुम्हें देखा तो आ गया।” नेहा हँसी, “होली खेलने आए हो तो खेलो, क्यों खड़े हो?”
मैंने जवाब दिया, “यहाँ किसी को जानता नहीं, किसके साथ खेलूँ?” नेहा तुरंत बोली, “अरे किसी को भी रंग लगा दो, होली है। कोई बुरा नहीं मानेगा।” मैंने कहा, “तो फिर शुरुआत तुमसे ही करूँ?” नेहा बोली, “रुको, मैं आती हूँ।”
मैं इंतजार कर रहा था। दिल में सोच रहा था – आज अगर ये आई तो इसकी चूत को इतना फाड़ूँगा कि वो हिल भी न सके। काफी देर बाद नेहा आई। साड़ी में, बाल खुले, चेहरा पहले से ही हल्के गुलाल से रंगा। वो बोली, “क्या डर गए या थक गए?” मैंने कहा, “तुम्हीं लेट आई हो।” नेहा हँसी, “चलो, खेलते हैं। बाहर कोई नहीं है, अंकल-आंटी भी नहीं।”
मैंने गेट बंद कर दिया। अब सिर्फ हम दोनों। मैंने गुलाल उठाया और पहले उसके चेहरे पर लगा। फिर गालों पर, गर्दन पर। हाथ नीचे सरकते गए। जैसे ही मेरा हाथ उसके ब्लाउज के ऊपर से चूचियों पर गया, नेहा सिहर गई। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। नेहा ने भी गुलाल लेकर मेरे चेहरे पर मल दिया, फिर मेरी शर्ट के अंदर हाथ डालकर छाती पर गुलाल पोत दिया।
मैंने मौका देखा और गुलाल का पूरा मुट्ठी उसके ब्लाउज के अंदर डाल दिया। हाथ सीधा उसके भारी चूचियों पर। नेहा चीखी, “आह… आर्यन… बाहर मत…” लेकिन उसकी आवाज में शर्म नहीं, भूख थी।
मैंने उसे दीवार से सटा दिया। आँचल खींचकर नीचे गिरा दिया। ब्लाउज के हुक खोल दिए। काला ब्रा में उसके 38 साइज के स्तन उछल रहे थे। मैंने ब्रा के कप ऊपर किया और दोनों चूचियों को बाहर निकाल लिया। एकदम काले निप्पल, भरे हुए। मैंने एक चूची मुँह में भर ली और जोर से चूसने लगा। दाँत से काटा। नेहा कराह रही थी, “हाय… आर्यन… धीरे…” मैंने कहा, “धीरे? आज मैं तुझे इतना चोदूँगा कि तू याद रखेगी जिंदगी भर।”
नेहा ने मेरा लंड पकड़ लिया। पैंट के ऊपर से ही उसका आकार महसूस करके उसकी आँखें चौड़ी हो गईं। “ये… ये तो बहुत मोटा है…” मैंने पैंट उतारी। मेरा 9 इंच का मोटा लंड लटका हुआ था, सिर लाल, नसें फूली हुईं। नेहा घुटनों पर बैठ गई। बिना कहे मुँह में ले लिया। वो इतनी तेज चूस रही थी जैसे सालों से भूखी हो। गला तक ले जा रही थी। मैंने उसके बाल पकड़े और जोर से मुँह में ठोका। “चूस… गहरी चूस… साला तेरा पति तुझे इतना चोदता भी नहीं होगा।” नेहा गला घुटने के बावजूद चूसती रही। आँखों में पानी आ गया लेकिन वो रुकी नहीं।
मैंने उसे उठाया और घोड़ी बनाया। साड़ी ऊपर की, पैंटी खींचकर फेंक दी। उसकी चूत बिल्कुल गुलाबी, लेकिन छोटी और टाइट। न्यूली मैरिड होने की वजह से अभी तक पूरी तरह नहीं खुली थी। मैंने लंड पर थूक लगाया और एक झटके में पूरा घुसा दिया। नेहा चीखी, “आआआह… आर्यन… फट जाएगी… बहुत मोटा है… निकालो!” मैंने उसके बाल पकड़े, “चुप… आज तू मेरी रंडी है।” और जोर-जोर से ठोकने लगा। हर ठोके में पूरा लंड निकालकर फिर से जड़ तक घुसा रहा था। नेहा की चूत फूल गई थी। वो रो रही थी लेकिन गांड पीछे कर-करके ले रही थी। 20 मिनट तक मैंने उसे घोड़ी में इतना चोदा कि उसकी टाँगें काँपने लगीं। वो दो बार झड़ चुकी थी।
फिर मैंने उसे उठाकर बिस्तर पर फेंका। मिशनरी में लेटाया। पैर कंधों पर रखे और फिर से धसकने लगा। “ले… ले साली… तेरी चूत को आज मैं पकौड़ा बना दूँगा।” नेहा चिल्ला रही थी, “हाँ… हाँ… और जोर से… फाड़ दो… मेरी चूत फाड़ दो आर्यन!” मैंने उसके गाल पर थप्पड़ मारा, चूचियों को मसलते हुए इतना तेज ठोका कि बेड हिल रहा था।
तीसरा राउंड मैंने उसे खड़ा करके किया। बालकनी की दीवार से सटाकर पीछे से गांड पकड़कर चोदा। उसकी चूत से पानी बह रहा था। मैंने एक उँगली उसकी गांड में भी डाल दी। नेहा चीखी, “नहीं… वहाँ नहीं…” लेकिन मैंने नहीं माना। लंड चूत में और उँगली गांड में… वो पागल हो गई।
आखिरी राउंड में नेहा खुद मेरे ऊपर चढ़ी। काउगर्ल स्टाइल। वो ऊपर-नीचे उछल रही थी। उसके भारी चूचे उछल रहे थे। मैंने नीचे से जोर-जोर से धक्के दिए। “झड़… झड़ साली… मेरे लंड पर झड़!” नेहा चीखते हुए तीसरी बार झड़ गई। मैंने भी उसके अंदर पूरा माल उड़ेल दिया। गर्म-गर्म वीर्य उसकी चूत में भर गया।
चुदाई के बाद नेहा लेटी हुई थी। उसकी चूत सूजी हुई, लाल, वीर्य और उसके रस से सनी। चूचियाँ गुलाल और दाँतों के निशानों से भरी। मैंने उसका नंबर लिया। बोला, “अब तू मेरी है। जब भी पति नहीं होगा, मेरे फ्लैट पर आना।” नेहा मुस्कुराई, “पक्का… तुम्हारे लंड के बिना अब नहीं रह सकती।”
जैसे ही मैं अपने फ्लैट पर वापस आया, नेहा ने वीडियो कॉल किया। कैमरा नीचे किया। उसकी चूत फूलकर पकौड़े जैसी हो गई थी। चूचियाँ लाल-सेब जैसी। वो बोली, “देखो आर्यन… तुमने क्या हालत कर दी है। अब रोज आऊँगी।”
अब नेहा हर हफ्ते मेरे फ्लैट पर आती है। कभी दो-दो घंटे तक चुदती है। कभी पूरी रात। उसकी चूत अब मेरे लंड के साइज की हो चुकी है। पति के आने पर भी वो सिर्फ मेरे लंड की याद में रहती है।
क्या आपको मेरी ये होली वाली भयानक चुदाई वाली कहानी पसंद आई? कमेंट में जरूर बताओ – तुम्हारी चूत कितनी गीली हो गई? अगली कहानी में और भी खतरनाक चुदाई लेकर आऊँगा। धन्यवाद, जय होली और जय चुदाई!
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