माँ के सोते ही जेठ ने बहू को चोदा

माँ के सोते ही जेठ ने बहू को दीवार से बाँधा, स्तन काटे, गला दबाया और रातभर उसकी चूत-गांड फाड़ता रहा। दर्द में रोती रही फिर भी और माँगा।

मेरा नाम विक्रम सिंह है। उम्र 41 साल। मैं जयपुर के पास सीतापुरा इलाके में रहता हूँ। मेरे परिवार में पत्नी सुमन, दो बेटे (14 और 11 साल के), मेरी माँ, छोटा भाई राहुल और उसकी पत्नी कल्पना रहती हैं। माँ की उम्र 68 साल हो चुकी है, शरीर कमजोर है, अक्सर बिस्तर पर पड़ी रहती हैं। राहुल मुंबई में एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर है, शादी को तीन साल हो गए हैं, लेकिन काम के कारण ज्यादातर वहीं रहता है। कल्पना हमारे साथ जयपुर में ही रहती है।

मेरा अपना फिटनेस सेंटर है और साथ में रियल एस्टेट का बिजनेस भी। शरीर मैंने लोहे जैसा बना रखा है—6 फुट 1 इंच लंबा, चौड़े कंधे, सख्त छाती, मोटी जाँघें। दिन में दो घंटे वेट ट्रेनिंग और एक घंटा कार्डियो। देसी घी, दूध, बादाम का सेवन नियमित है। पत्नी सुमन से रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन बच्चों के बाद उसकी इच्छा कम हो गई है। मैं रोज रात को तरसता हूँ।

कल्पना… वो अलग किस्सा है। उम्र 27 साल। गोरी चमड़ी, घने काले बाल, भरा हुआ बदन। सीने पर 38 साइज के मोटे, भारी स्तन, निप्पल गहरे गुलाबी। कमर पतली, लेकिन गांड मोटी, गोल, हिलती-डुलती। जाँघें मोटी और मुलायम। चेहरा इतना आकर्षक कि कोई भी आदमी देखकर पागल हो जाए। लेकिन वो राहुल की पत्नी है, इसलिए मैंने कभी गलत नजर से नहीं देखा।
फिर एक हफ्ता ऐसा आया जिसने सब बदल दिया।

सुमन के चाचा की लंबी बीमारी के बाद मृत्यु हो गई। पूरा परिवार जोधपुर चला गया क्रियाकर्म के लिए। घर पर सिर्फ माँ और कल्पना रह गईं। मैं जिम और प्रॉपर्टी के काम की वजह से दो दिन बाद वापस आ गया। सुमन बच्चों के साथ तेरहवीं तक रुक गई।
वापसी के पहले दो दिन सामान्य रहे। कल्पना घर का काम करती, माँ को दवा और खाना देती, मैं जिम और ऑफिस जाता। लेकिन तीसरी रात सब कुछ टूट गया।

रात के 10:30 बजे माँ सो चुकी थीं। मैं अपने कमरे में लेटा मोबाइल चला रहा था। नींद नहीं आ रही थी। टॉयलेट जाने के लिए उठा तो देखा गेस्ट रूम की हल्की रोशनी जल रही है। लगा किसी ने बंद करना भूल गया। दरवाजा आधा खुला था। अंदर से हल्की-हल्की सिसकारियाँ आ रही थीं।
धीरे से झाँका… और मेरी साँसें थम गईं।

join my telegram channel for leaked videos

कल्पना बिस्तर पर लेटी थी। साड़ी एक तरफ फेंकी हुई। ब्लाउज खुला, ब्रा एक तरफ खिसकी हुई। एक मोटा स्तन बाहर निकला हुआ, निप्पल कड़ा। पेटीकोट कमर तक चढ़ाया हुआ। कच्छी पूरी उतारी हुई। टाँगें फैलाए हुए वो अपनी दो उंगलियाँ चूत में अंदर-बाहर कर रही थी। उंगलियाँ गीली चमक रही थीं। दूसरी हाथ से वो अपना एक स्तन मसल रही थी। आँखें बंद, होंठ खुले, “आह… राहुल… और अंदर…” बड़बड़ा रही थी।

मेरा लंड तुरंत सख्त हो गया। आठ इंच से ज्यादा, मोटा, नसें फूली हुई। मैं खड़ा देखता रहा। उसकी मोटी जाँघों के बीच की फूली हुई, बाल रहित चूत लैंप की रोशनी में चमक रही थी। क्लिटोरिस बाहर निकला हुआ। वो उंगलियाँ घुमा-घुमाकर अंदर गहरी कर रही थी।
अचानक दरवाजा हल्का सा खुला और कल्पना की आँखें खुल गईं। उसने मुझे देखा। एक पल के लिए सन्न रह गई, फिर झट से साड़ी से खुद को ढक लिया।

मैं बिना कुछ बोले अपने कमरे में लौट आया। पूरी रात नींद नहीं आई। दिमाग में सिर्फ उसकी गीली चूत, उसके मोटे स्तन और उसकी सिसकारियाँ घूम रही थीं।
अगली सुबह नाश्ते में हम दोनों नजर नहीं मिला पा रहे थे। कल्पना सूट में थी। उसकी गांड सूट के अंदर से गोल-गोल हिल रही थी। स्तन आगे को धकेले हुए। मैंने जबरदस्ती नजरें हटाईं और जिम चला गया।

रात को 10 बजे मेरे कमरे के दरवाजे पर दस्तक हुई।
कल्पना खड़ी थी। चेहरा थोड़ा लाल। “जेठ जी… बात करनी है।”
मैंने अंदर बुलाया। दरवाजा बंद किया। वो सोफे पर बैठी। मैं सामने।
“कल रात… जो आपने देखा…” उसकी आवाज काँप रही थी।
मैंने सीधा जवाब दिया, “मैंने देखा। तुम अपनी प्यास बुझा रही थी। कोई गलती नहीं। राहुल दूर है। शरीर की जरूरत है।”

उसने सिर उठाया। आँखों में शर्म और भूख दोनों थे। “मैं रोज करती हूँ… लेकिन संतुष्ट नहीं होती। राहुल कभी-कभी वीडियो कॉल पर देखता है, बोलता है उंगली करो… लेकिन वो मजा नहीं आता।”
मैं उठा, उसके पास गया। उसके गाल पर हाथ रखा। “मैं तुम्हारी प्यास बुझा सकता हूँ। पूरी तरह। लेकिन मेरी शर्तें होंगी।”
“क्या शर्तें?” उसकी साँस तेज हो गई।
“तुम मेरी हो जाओगी। जब तक राहुल नहीं आता। मेरी बात मानोगी। दर्द भी सहोगी। मना नहीं करोगी। और घर में किसी को पता नहीं चलेगा।”

कल्पना एक पल चुप रही, फिर धीरे से सिर हिलाया।
मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे किया और उसके होंठों पर अपना मुँह रख दिया। जोर से चूसा। जीभ उसके मुँह में घुसा दी। उसने भी जवाब दिया। दोनों हाथों से उसके स्तनों को पकड़कर जोर से मसला। ब्लाउज के हुक एक-एक करके खोले और फेंक दिए। ब्रा काट दी। उसके 38 साइज के भारी स्तन बाहर निकल आए। निप्पल कड़े थे। मैंने एक निप्पल मुँह में लिया और दाँतों से हल्का काटा। उसने सिसकारी भरी।

“आह… जेठ जी…”
मैंने पेटीकोट और कच्छी दोनों फाड़कर उतार दिए। अब वो पूरी नंगी थी। फूली हुई, चिकनी चूत। मैंने दो उंगलियाँ अंदर घुसा दीं। गीली थी। उंगलियाँ घुमाते हुए उसके क्लिटोरिस पर अंगूठे से जोर से रगड़ा। वो छटपटाने लगी।
मैंने उसे बिस्तर पर धक्का दिया। उसके मुँह पर अपना अंडरवियर उतारकर लंड बाहर निकाला। मोटा, नसदार, आठ इंच से ज्यादा। उसके होठों पर रगड़ा। “चूसो।”

कल्पना ने मुँह खोला। मैंने पूरा लंड उसके गले तक ठूंस दिया। वो घुटने टेककर बैठ गई। आँखों से आँसू निकलने लगे, लेकिन वो चूसती रही। मैं उसके बाल पकड़कर सिर आगे-पीछे करने लगा। गले की दीवार से टकराता लंड। थूक बहने लगा। दस मिनट तक मुँह चोदा। फिर निकाला। लंड पर थूक चमक रहा था।

मैंने उसे घोड़ी बना दिया। गांड ऊपर। मोटी, गोल गांड। मैंने थप्पड़ मारा। जोर का। लाल निशान पड़ गया। फिर एक और। फिर तीसरा। वो कराह उठी। “आह… और मारो…”
मैंने लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा और एक झटके में आधा अंदर धकेल दिया। वो चीख पड़ी। “आह्ह्ह… बहुत मोटा है… दर्द… निकालो…”
मैंने नहीं निकाला। दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़ी और बाकी का लंड एक और जोरदार धक्के में पूरा अंदर उतार दिया। उसकी चूत फटने जैसी लग रही थी। अंदर पूरी तरह फँस गया। मैं रुका नहीं। जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के पर उसकी मोटी गांड मेरे पेट से टकराती। थप्पड़ मारता। स्तनों को नीचे से पकड़कर मसलता।

“चोदो… और जोर से… फाड़ दो…” वो रोते हुए बोल रही थी, लेकिन कूल्हे पीछे कर रही थी।
मैंने लंड बाहर निकाला। चूत से पानी टपक रहा था। फिर गांड के छेद पर लंड रखा। थूक लगाकर धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया। कल्पना चीखने लगी। “नहीं… वहाँ नहीं… बहुत दर्द…”

मैंने एक हाथ से उसका मुँह बंद किया और लंड आधा अंदर घुसा दिया। फिर पूरा। उसकी गांड तंग थी। मैंने धीरे-धीरे धक्के दिए। दर्द के साथ आनंद भी आने लगा। वो सिसकने लगी। दस मिनट गांड चोदने के बाद मैंने लंड निकाला और फिर से चूत में पेल दिया।
अब पोजीशन बदली। उसे उल्टा लिटाया। टाँगें मेरे कंधों पर। पूरा वजन उसके ऊपर डालकर जोर-जोर से पेलने लगा। हर धक्का गहरा। उसकी आँखें ऊपर पलटने लगीं। “आह… मर गई… और… और…”

मैंने उसके गले पर हाथ रखा। हल्का दबाया। साँस फूलने लगी। उसकी चूत और जोर से भींचने लगी। मैंने दबाव बढ़ाया। वो छटपटाने लगी, लेकिन कूल्हे हिलाती रही। जब साँस लगभग रुकने वाली थी तो छोड़ा। वो जोर से साँस लेने लगी और उसी समय झड़ गई। शरीर अकड़ गया। चूत से पानी मेरे लंड पर फूट पड़ा।

मैं रुका नहीं। झड़ने के बाद भी धक्के जारी रखे। उसकी संवेदनशीलता चरम पर थी। वो रोने लगी। “बहुत हो गया… अब नहीं…”
मैंने उसके बाल पकड़कर सिर उठाया। “अब मेरी बारी।” लंड निकालकर उसके मुँह में ठूंस दिया। दो-तीन धक्के और फिर पूरा माल उसके मुँह और चेहरे पर उड़ेल दिया। गरम वीर्य उसके होठों, गालों और स्तनों पर गिर रहा था। उसने जितना बन पड़ा निगल लिया।

हम दोनों पसीने से भीगे पड़े रहे। दस मिनट बाद मैंने फिर से शुरू किया। इस बार रस्सी निकाली जो जिम से लाया था। उसके हाथ पीछे बाँध दिए। आँखों पर कपड़ा बाँधा। फिर चूत में तीन उंगलियाँ घुसाकर जोर-जोर से मसलने लगा। दूसरी तरफ से एक उंगली गांड में। वो तड़पने लगी। मैंने उसके क्लिटोरिस पर जीभ लगाई और दाँतों से हल्का काटा। वो फिर से झड़ गई।

रात भर में हमने चार बार किया। कभी दीवार के साथ खड़े होकर, कभी फर्श पर, कभी कुर्सी पर बैठाकर। हर बार मैंने उसके शरीर पर निशान छोड़े—लाल थप्पड़ के निशान, दाँतों के निशान, उंगलियों के निशान।
सुबह 4:30 बजे मैंने उसके हाथ खोल दिए। “अब जाओ। माँ के उठने का समय हो गया।”
कल्पना उठकर खड़ी हुई। टाँगें काँप रही थीं। चूत और गांड दोनों लाल और सूजी हुई। चेहरे पर वीर्य के सूखे निशान। लेकिन आँखों में संतुष्टि थी। उसने मुझे गले लगाया। “कल रात भी…”

मैंने उसके गांड पर जोर से थप्पड़ मारा। “हर रात। जब तक मैं कहूँ।”
उसके बाद से हर रात यही सिलसिला चला। माँ सो जातीं तो कल्पना मेरे कमरे में आ जाती। कभी मैं उसे रस्सियों से बाँधता, कभी आँखें बंद करके सिर्फ छूने देता, कभी जोर से पीटता। कभी उसे घुटनों पर बैठाकर घंटों लंड चूसवाता। कभी उसकी चूत में बर्फ के टुकड़े डालकर फिर गर्म लंड पेलता। कभी उसके स्तनों पर मोमबत्ती का गर्म मोम गिराता। वो हर दर्द सहती और हर बार और गहरी प्यासी होकर लौटती।

एक रात मैंने उसे पूरी तरह तोड़ दिया। हाथ-पैर बाँधकर बिस्तर पर लिटाया। आँखें बंद। फिर बारी-बारी से चूत, गांड और मुँह चोदा। बीच-बीच में थप्पड़, बाल खींचना, गला दबाना। जब वो रोने लगी तो और जोर से। आखिर में जब मैंने उसका पूरा शरीर वीर्य से भर दिया—मुँह, स्तन, चूत, गांड—तो वो बेहोश सी हो गई।
सुबह जब जागी तो मुस्कुराई। “जेठ जी… आपने मुझे अपना बना लिया।”

मैंने उसके बाल सहलाए। “अब तुम मेरी हो। राहुल आएगा तो भी तुम रात को मेरे पास आओगी। समझी?”
उसने सिर हिलाया।
रात के अंधेरे में कल्पना फिर मेरे कमरे के दरवाजे पर खड़ी थी। माँ सो चुकी थीं। उसके हाथ में एक काली रेशमी स्कार्फ और एक पतली चमड़े की बेल्ट थी। आँखों में वो भूख थी जो पिछले कई रातों की चुदाई के बाद भी नहीं बुझी थी।

मैंने दरवाजा बंद किया और ताला लगा दिया। “आज तुम खुद लाई हो सामान?”
उसने सिर हिलाया। “जेठ जी… आज और सख्त करो। जितना दर्द दे सकते हो, दो। मैं सह लूँगी।”
मैंने उसके बाल पकड़कर पीछे खींचे। “कपड़े उतार। धीरे-धीरे। मुझे दिखाना है।”
कल्पना ने सूट का दुपट्टा गिराया। फिर कुर्ती के हुक एक-एक करके खोले। स्तन बाहर निकले—38 के भारी, निप्पल पहले से कड़े। उसने स्कर्ट नीचे सरकाई। अंदर सिर्फ एक पतली काली स्ट्रिंग थी जो उसकी फूली चूत को आधा ढक रही थी। मैंने स्ट्रिंग पकड़कर एक झटके में फाड़ दी। कपड़ा उसके जाँघों पर लटक गया।

मैंने उसे दीवार के साथ धकेल दिया। दोनों हाथ ऊपर उठाकर स्कार्फ से बाँध दिए। फिर बेल्ट से उसकी कमर बाँधी ताकि वो हिले नहीं। अब वो दीवार से सटी खड़ी थी—हाथ ऊपर, स्तन आगे को धकेले हुए, गांड थोड़ी बाहर निकली।
मैंने उसके गाल पर जोर का थप्पड़ मारा। फिर दूसरा। गाल लाल हो गए। तीसरा थप्पड़ उसके बाएँ स्तन पर। निप्पल पर सीधा। वो कराह उठी लेकिन आवाज दबाई। चौथा थप्पड़ दाएँ स्तन पर। दोनों स्तन लाल हो चुके थे।

“गिनती कर,” मैंने कहा।
“एक… दो… तीन…” उसकी आवाज काँप रही थी।
मैंने बेल्ट खोली और उसके हाथों को नीचे लाकर पीठ के पीछे बाँध दिए। फिर उसे घोड़ी की तरह बिस्तर पर झुकाया। गांड ऊपर। मैंने दोनों हाथों से उसकी मोटी गांड के गोल हिस्सों को पकड़कर फैलाया। चूत और गांड का छेद साफ दिख रहा था। चूत पहले से गीली थी, चमक रही थी।

मैंने दो उंगलियाँ चूत में घुसा दीं और जोर से अंदर-बाहर करने लगा। तीसरी उंगली गांड के छेद पर रखी। थूक लगाकर धीरे-धीरे अंदर धकेला। कल्पना की कमर ऐंठ गई। “आह्ह… दोनों जगह…”
मैंने उंगलियाँ और तेज कीं। चूत में तीन, गांड में दो। उसकी चूत की दीवारें मेरे अंगुलियों को भींच रही थीं। पानी टपकने लगा। मैंने अचानक उंगलियाँ निकाल लीं और जोर का थप्पड़ उसकी चूत पर मारा। सीधे क्लिटोरिस पर। वो चीख पड़ी। दूसरा थप्पड़। तीसरा। चूत लाल हो गई।
“अब लंड ले,” मैंने कहा।

मैंने अपना अंडरवियर उतारा। लंड पूरा खड़ा—मोटा, नसदार, सिर चमक रहा था। मैंने उसके मुँह के पास लाकर रगड़ा। “चाट।”
कल्पना ने जीभ निकाली। सुपाड़े से लेकर नीचे तक चाटा। फिर मुँह खोला। मैंने पूरा लंड उसके गले में ठूंस दिया। नाक उसकी नाक से जा टकराई। वो घुटने टेककर बैठी थी, आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन गला खोलकर ले रही थी। मैंने बाल पकड़कर सिर दोनों तरफ से हिलाना शुरू किया। गले की दीवार से लंड रगड़ रहा था। थूक उसके ठोड़ी और स्तनों पर गिर रहा था। पंद्रह मिनट तक मुँह चोदा। जब साँस फूलने लगी तो निकाला।

अब मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। हाथ पीछे बँधे। आँखों पर स्कार्फ बाँध दिया। अंधेरे में वो सिर्फ महसूस कर सकती थी। मैंने उसके दोनों निप्पलों को दाँतों से पकड़कर खींचा। फिर काटा। हल्का खून निकला। उसने दर्द भरी आवाज दी लेकिन मना नहीं किया। मैंने एक निप्पल मुँह में लेकर जोर से चूसा और दाँतों से दबाया। दूसरे को उंगलियों से मसला।
फिर मैंने उसकी टाँगें फैलाकर कंधों पर रखीं। लंड चूत के मुँह पर रखा और एक झटके में पूरा अंदर पेल दिया। उसकी चूत फटने जैसी आवाज आई। वो चीखी। “आह्ह्ह… बहुत गहरा… निकल जाएगा…”

मैं रुका नहीं। दोनों हाथों से उसके कूल्हे पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्का उसकी गर्भ तक पहुँच रहा था। बिस्तर चरमरा रहा था। उसकी बँधी हुई बाँहें तड़प रही थीं। मैंने एक हाथ उसके गले पर रखा और दबाया। साँस रुकने लगी। चूत और जोर से भींचने लगी। जब उसकी आँखें स्कार्फ के अंदर सफेद पड़ने लगीं तो दबाव छोड़ा। वो जोर से साँस लेकर फिर से झड़ गई। पानी मेरे लंड और जाँघों पर फूट पड़ा।

मैंने लंड निकाला। चूत पूरी तरह खुली और लाल थी। मैंने तुरंत गांड के छेद पर लंड रखा। थूक की जगह उसकी चूत के पानी से गीला किया और धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया। आधा अंदर जाने पर उसने सिर इधर-उधर हिलाना शुरू कर दिया। “नहीं… बहुत तंग है… फट जाएगी…”

मैंने उसके मुँह पर हाथ रख दिया और बाकी का लंड एक जोरदार धक्के में पूरा उतार दिया। गांड की दीवारें मेरे लंड को जकड़ रही थीं। मैंने धीरे-धीरे धक्के दिए। फिर गति बढ़ाई। हर धक्के पर उसकी मोटी गांड मेरे पेट से टकराती। थप्पड़ मारता। स्तन मसलता। बीस मिनट तक गांड चोदी। जब लंड पूरी तरह चिकना हो गया तो निकाला और फिर से चूत में पेल दिया।

अब पोजीशन बदली। मैंने उसे खड़ा किया। हाथ अभी भी पीछे बँधे। आँखें बंद। दीवार के साथ पीठ करके खड़ा किया और पीछे से चोदने लगा। एक हाथ उसके गले पर, दूसरा उसके क्लिटोरिस पर रगड़ता। वो खड़ी-खड़ी झड़ने लगी। शरीर काँप रहा था। मैंने गला और दबाया। उसकी जीभ बाहर निकल आई। मैंने उसी समय अपना माल उसकी चूत के अंदर उड़ेल दिया। गरम वीर्य की धार अंदर जाती रही।

लेकिन मैं अभी नहीं रुका। लंड अंदर ही रखा। थोड़ी देर बाद फिर सख्त हो गया। मैंने उसे फर्श पर घुटनों के बल बैठाया। आँखों का स्कार्फ खोला। “देख।”
उसने देखा—मेरा लंड उसकी चूत के पानी और वीर्य से चमक रहा था। मैंने उसे मुँह में ले लिया। “साफ कर।”
कल्पना ने जीभ से चाटना शुरू किया। पूरा लंड साफ किया। फिर गले तक ले गई। मैंने फिर से बाल पकड़कर मुँह चोदना शुरू किया। इस बार और गहरा। जब उसकी आँखों से आँसू और नाक से पानी बहने लगा तब निकाला।

मैंने रस्सी निकाली जो अलमारी में रखी थी। उसके दोनों टखनों को बाँधकर टाँगें फैला दीं। फिर हाथ भी ऊपर बाँध दिए। अब वो बिस्तर पर पूरी तरह फैली हुई थी—हाथ ऊपर, टाँगें खुली, चूत और गांड दोनों उपलब्ध।
मैंने बर्फ के दो टुकड़े फ्रीजर से निकाले। एक चूत में धकेल दिया। दूसरा गांड में। कल्पना की कमर उछल गई। “आह्ह… ठंड… बहुत…”
मैंने तुरंत गर्म लंड चूत में पेल दिया। बर्फ पिघल रही थी। ठंड और गर्मी का मिश्रण। वो पागल हो रही थी। मैंने धक्के तेज किए। बर्फ का पानी उसकी जाँघों पर बह रहा था। फिर लंड निकालकर गांड में डाल दिया। बर्फ का दूसरा टुकड़ा अंदर ही पिघल रहा था।

एक घंटे तक मैंने उसे इसी तरह तोड़ा। कभी चूत, कभी गांड, कभी मुँह। बीच-बीच में थप्पड़, बाल खींचना, निप्पल काटना, गला दबाना। जब वो तीसरी बार झड़ी तो शरीर में बल नहीं बचा। लेकिन मैंने चौथी बार भी शुरू कर दी।
आखिर में जब मैंने अपना आखिरी माल उसके खुले मुँह में उड़ेल दिया और बाकी उसके स्तनों और चूत पर फैला दिया, तो वो बेहोश सी पड़ी थी। शरीर पर लाल निशान, दाँतों के निशान, उंगलियों के निशान। चूत और गांड दोनों सूजे हुए, लाल, वीर्य टपकाते हुए।

मैंने उसके हाथ-पैर खोले। गीले तौलिये से उसका शरीर पोछा। फिर उसके पास लेट गया। उसने आँखें खोलीं। आवाज काँप रही थी, “जेठ जी… आज आपने मुझे पूरा तोड़ दिया… लेकिन… कल फिर से तोड़ना।”
मैंने उसके बाल सहलाए और गांड पर जोर से थप्पड़ मारा। “कल और सख्त होगा। आज तो बस शुरुआत थी।”
कल्पना मुस्कुराई। आँखों में आँसू थे, लेकिन संतुष्टि भी। उसने मेरा लंड हाथ में लिया जो अभी भी आधा खड़ा था। “मैं आपकी हूँ… पूरी तरह… जितना चाहो इस्तेमाल करो… जितना दर्द दो… मैं सह लूँगी।”

मैंने उसके होठों को चूसा। मुँह में अभी भी मेरे वीर्य का स्वाद था। “सो जा। सुबह माँ के उठने से पहले अपने कमरे में चली जाना। और याद रखना—अगली रात मैं तुम्हारे स्तनों पर मोम गिराऊँगा। और तुम्हारी चूत में एक और चीज डालूँगा।”
उसकी आँखें चमक उठीं। “क्या चीज?”

मैंने उसके कान में धीरे से कहा। उसने सिहरन महसूस की। फिर मेरे सीने से लगकर सो गई।
बाहर आसमान में उजाला फैलने ही वाला था। घर शांत था। लेकिन मेरे और कल्पना के बीच जो आग जल रही थी, वो अब बुझने वाली नहीं थी। हर रात और गहरी, और निर्दय, और काली होती जा रही थी।
और ये तो बस शुरुआत थी।

अनन्या की खून से भीगी रातें

गाँव की एक लड़की की हिंदी सेक्स कहानी

ट्यूशन वाली मैडम को घर में

लॉकडाउन में फँसी रिश्तेदार लड़की

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *