प्रेग्नेंट नंदिनी रोहित के हाथों बार-बार टूटती है। दर्द माँगती है, गला घोंटने को कहती है, और हर रात खुद को और गिराने की जिद करती रहती है।
ये कहानी मेरे नाम रोहित की है। उम्र 29 साल। शरीर मजबूत, कद 5 फुट 11 इंच, और लंड की लंबाई 8.5 इंच तथा मोटाई करीब 3.5 इंच। मैं पुणे में सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता हूँ। मेरी गर्लफ्रेंंड का नाम प्रिया है। उसकी बड़ी बहन का नाम नंदिनी है। उम्र 32 साल। शरीर 38-28-42 का। गोरा, नरम, और बेहद सेक्सी। उसके पति चेन्नई में जॉब करते हैं और महीने में एक-दो बार ही घर आते हैं। नंदिनी पुणे के कोरेगाँव पार्क इलाके में एक बड़े फ्लैट में रहती है। मेरा फ्लैट उससे सिर्फ तीन किलोमीटर दूर है।
पिछले साल की सर्दियों की बात है। नंदिनी के सास-ससुर रिश्तेदारों के यहाँ जयपुर चले गए थे। घर में सिर्फ नंदिनी अकेली थी। उसके पति का फोन भी दो दिन से बंद था। एक शाम करीब सात बजे मेरा फोन बजा। नंदिनी की आवाज थी, हल्की सी दर्द भरी।
“रोहित… जल्दी आ जाओ। मेरे घर। पैर फिसल गया बाथरूम में… कमर और… और नीचे दर्द हो रहा है। कोई नहीं है घर में।”
मैंने बिना देर किए गाड़ी निकाली। रास्ते में मेडिकल से दर्द निवारक स्प्रे और तेल ले लिया। उसके फ्लैट के दरवाजे पर पहुँचा तो घंटी बजाई। उसने दरवाजा खोला। बाल खुले थे, शरीर पर सिर्फ एक पतला सफेद तौलिया लपेटा हुआ था। तौलिया इतना छोटा था कि जांघों का ऊपरी हिस्सा और गहरी क्लीवेज साफ दिख रही थी। आँखों में पानी था, लेकिन होंठों पर एक अजीब सी मुस्कान भी।
“अंदर आ जाओ… जल्दी।”
मैं अंदर घुसा। लिविंग रूम में सोफे पर वह लेट गई। तौलिया थोड़ा खिसक गया। उसके बड़े-बड़े स्तन आधे बाहर निकल आए। गोरी त्वचा पर पानी की बूंदें अभी भी चमक रही थीं। उसने कहा, “स्प्रे लगा दो… कमर में और… गांड की हड्डी में बहुत दर्द है।”
मैंने तौलिया के ऊपर से स्प्रे लगाने की कोशिश की। उसने हाथ बढ़ाकर तौलिया एक झटके में खींच लिया और फर्श पर फेंक दिया। पूरा नंगा शरीर मेरे सामने था। बड़े-बड़े स्तन, गुलाबी निप्पल, चिकनी चूत जिस पर बाल ठीक से कटे हुए थे, और मोटी-गोरी गांड। मेरा लंड तुरंत सख्त हो गया।
“अब लगा… बिना कुछ सोचे।” उसकी आवाज में हुक्म था।
मैंने कमर पर स्प्रे लगाया। फिर गांड की हड्डी पर। उंगलियाँ जानबूझकर नीचे सरक गईं। चूत के होंठों को छुआ। वह पहले से गीली थी। मेरी मोटी उंगली उसके चूत के छेद पर घूमी। उसने आँखें बंद कर लीं लेकिन कुछ नहीं बोली। मैंने उंगली अंदर धकेल दी। तंग, गर्म और गीली दीवारें उंगली को जकड़ गईं। दूसरी उंगली भी अंदर घुसा दी। दो उंगलियों से उसकी चूत को फैलाने लगा। अंदर-बाहर, तेज-तेज। उसकी कमर हिलने लगी।
“और अंदर… पूरी मुट्ठी तक…” उसने फुसफुसाया।
मैंने तीन उंगलियाँ अंदर घुसा दीं। फिर चार। उसकी चूत खिंच रही थी। वह कराहने लगी। “आह्ह… रोहित… और जोर से…” मैंने उंगलियों को घुमाते हुए उसकी चूत को खोदना शुरू कर दिया। अंगूठा उसके क्लिट पर रगड़ रहा था। उसकी टाँगें कांपने लगीं। अचानक वह जोर से झड़ गई। चूत से पानी की धार निकलकर मेरे हाथ पर गिरने लगी।
मैंने तुरंत अपना पैंट खोला। 8.5 इंच का मोटा लंड बाहर निकला। नंदिनी ने आँखें खोलीं। लंड देखकर उसकी आँखें बड़ी हो गईं। “इतना मोटा… पति का तो आधा भी नहीं…”
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मैंने उसके पैर फैलाए। लंड की नोक चूत के मुंह पर रखी और एक जोरदार धक्का मारा। आधा लंड एक झटके में अंदर घुस गया। नंदिनी चीख पड़ी। “आाह्ह… फट गई… रुक…” लेकिन मैं नहीं रुका। दूसरा धक्का। पूरा लंड उसकी तंग चूत में समा गया। उसकी आँखों से आँसू निकल आए। होंठ काट लिए उसने। मैंने कमर पकड़ी और बिना रुकें घपा-घप शुरू कर दिया। हर धक्के पर उसकी गांड सोफे से टकरा रही थी। स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे थे।
“और जोर… और क्रूर… मुझे तोड़ दो…” उसने कहा।
मैंने उसकी दोनों टाँगें अपने कंधों पर रख लीं। लंड और गहराई तक घुसने लगा। उसकी गर्भ की दीवार से टकरा रहा था। वह चीख रही थी लेकिन कमर उठा-उठाकर और अंदर ले रही थी। आधा घंटा लगातार पीटा। दो बार वह जोर से झड़ चुकी थी। चूत से झाग निकल रहा था। फिर मैंने उसे पलट दिया। घुटनों के बल बैठाया। गांड ऊपर। उसकी मोटी गोरी गांड मेरे सामने फैल गई। चूत का छेद लाल और खुला हुआ था।
मैंने फिर से लंड अंदर घुसाया। इस बार पीछे से। दोनों हाथों से उसकी गांड के गालों को फैलाकर और जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के पर उसकी गांड हिल रही थी। थप्पड़ मारे मैंने। एक, दो, तीन… लाल हो गई गांड। वह कराह रही थी, “मार… और मार… मेरी गांड फाड़ दो…”
मैंने थूक लगाकर उसकी गांड के छेद पर उंगली घुमाई। धीरे-धीरे एक उंगली अंदर धकेल दी। गांड तंग थी। दूसरी उंगली भी। फिर लंड उसकी चूत से निकाला और गांड के छेद पर रखा। दबाव डाला। नंदिनी चिल्ला उठी। “आह्ह… दर्द… रुक मत… पूरा घुसा…”
एक जोरदार धक्के में आधा लंड उसकी गांड में घुस गया। वह चीख रही थी लेकिन पीछे धकेल रही थी। मैंने पूरा लंड अंदर ठेल दिया। उसकी गांड मेरे लंड को जकड़ रही थी। धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाई। घपा-घप… घपा-घप… गांड की चुदाई की आवाज पूरे फ्लैट में गूंज रही थी। उसके बाल पकड़कर पीछे खींचे। गर्दन पर थप्पड़ मारे। निप्पल पकड़कर मरोड़े। वह पागलों की तरह कराह रही थी।
“मैं तेरी रखैल हूँ… जो चाहे कर… तोड़ दे मुझे…”
मैंने उसकी गांड को आधा घंटे तक बेरहमी से चोदा। फिर लंड निकाला और उसके मुंह में ठेल दिया। गांड का स्वाद और चूत का रस उसके मुंह में। वह लंड चूस रही थी, गले तक ले जा रही थी। आँसू निकल रहे थे लेकिन रुक नहीं रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह में और गहराई तक लंड ठेला। वह गग कर रही थी लेकिन चूसती जा रही थी।
फिर मैंने उसे बेड पर खींच लिया। बेड पर लेटाया। उसके हाथ ऊपर बांध दिए बेल्ट से। पैर भी फैलाकर बाँध दिए। अब वह पूरी तरह बेबस थी। मैंने मोमबत्ती जलाई। गर्म मोम उसके स्तनों पर टपकाया। वह चीखी। फिर निप्पल पर। फिर पेट पर। फिर चूत के ऊपर। गर्म मोम गिरते ही उसकी देह सिहर उठी। मैंने मोम को साफ किया और फिर से लंड उसकी चूत में घुसा दिया। इस बार और क्रूर। हर धक्के पर थप्पड़। गाल पर, स्तन पर, गांड पर। लाल निशान पड़ गए।
“और क्रूर… मुझे इस्तेमाल कर… जैसे कोई वैश्या…” उसने आँखों में आँसू लेकर कहा।
मैंने उसकी चूत में तीन उंगलियाँ और लंड साथ में घुसाने की कोशिश की। चूत फैल गई। वह चिल्ला रही थी लेकिन मना नहीं कर रही थी। फिर मैंने उसे 69 पोजीशन में लिया। उसका मुंह मेरे लंड पर, मेरा मुंह उसकी चूत और गांड पर। मैं उसकी चूत चाट रहा था, क्लिट को दाँत से काट रहा था, गांड के छेद में जीभ घुसा रहा था। वह मेरे लंड को गले तक ले जाकर चूस रही थी। दस मिनट बाद वह फिर झड़ गई। मेरा चेहरा उसके पानी से भीग गया।
रात के बारह बज गए थे। मैंने उसे बांधकर रखा। लंड उसकी गांड में डाले हुए सो गया। सुबह जब आँख खुली तो लंड अभी भी अंदर था। वह जाग चुकी थी। मुस्कुरा रही थी।
“आज रात फिर से… और ज्यादा बर्बर…” उसने कहा।
मैंने लंड निकाला। गांड से लार और वीर्य मिश्रित तरल बह रहा था। मैंने उसे उठाया और शावर में ले गया। पानी के नीचे फिर से चोदा। दीवार के साथ। एक पैर ऊपर उठाकर। लंड चूत में, उंगलियाँ गांड में। वह चीख-चीखकर झड़ रही थी। फिर मैंने उसे घोड़ी बनाकर बाथरूम की फर्श पर चोदा। पानी बह रहा था, शरीर फिसल रहे थे, लेकिन धक्के नहीं रुक रहे थे।
उस दिन मैं ऑफिस नहीं गया। पूरे दिन उसे बाँधकर, पीटकर, चोदता रहा। कभी चूत, कभी गांड, कभी मुंह। कभी उसे फर्श पर घसीटा, कभी बाल पकड़कर खींचा। उसके स्तनों पर दाँत के निशान छोड़ दिए। जांघों पर थप्पड़ों के निशान। चूत लाल और सूजी हुई। गांड का छेद खुला और दर्द भरा। लेकिन हर बार वह और मांग रही थी।
“और मार… और तोड़… मैं तेरी कुतिया हूँ…”
शाम को उसने खुद अपने हाथ बाँधने को कहा। मैंने बाँध दिए। फिर उसकी आँखों पर कपड़ा बाँधा। अब वह कुछ देख नहीं सकती थी। मैंने अलग-अलग चीजें इस्तेमाल कीं। बर्फ के टुकड़े उसके निप्पल पर। फिर गर्म चाय का पानी बूंद-बूंद करके चूत पर। वह तड़प रही थी। फिर मैंने अपना लंड उसके मुंह में ठेल दिया और पीछे से चूत में दildo घुसा दिया जो मैंने उसके ड्रॉयर में देखा था। दोनों छेद भरे हुए। वह गग कर रही थी और कराह रही थी।
रात भर चलता रहा। सुबह चार बजे जब मैंने आखिरी बार उसकी गांड में वीर्य छोड़ा तो वह थककर सो गई। मैंने उसके शरीर पर लगे निशान देखे। लाल, नीले। लेकिन चेहरे पर संतुष्टि थी।
उसके बाद से हर हफ्ते दो-तीन दिन मैं उसके फ्लैट में जाता। कभी वह मेरे फ्लैट आती। हमने नियम बना लिए। वह मेरी रखैल थी। जब चाहूँ, जैसे चाहूँ इस्तेमाल करूँ। कभी पब्लिक प्लेस में भी। एक बार कार में पार्किंग में चोदा। एक बार उसकी बालकनी में रात को। हाथ बाँधे, मुंह में कपड़ा ठूसे। लोग नीचे से गुजर रहे थे। वह कांप रही थी लेकिन मना नहीं किया।
तीन महीने बाद उसका प्रेग्नेंट टेस्ट पॉजिटिव आया। पति का नहीं, मेरा। उसने पति को बताया कि डॉक्टर ने कहा था मुश्किल है। पति ने विश्वास कर लिया। अब वह मेरे बच्चे की माँ है। और मेरी पूरी तरह से गुलाम। जब चाहूँ बुलाता हूँ। जब चाहूँ बाँधता हूँ, पीटता हूँ, चोदता हूँ। उसकी चूत, गांड, मुंह सब मेरे हैं। वह खुद कहती है, “रोहित… आज और क्रूर होना… मुझे याद दिला कि मैं तेरी संपत्ति हूँ।”
उस रात के बाद के महीनों में हमारी जिंदगी और भी अंधेरी और गंदी हो गई। नंदिनी का पेट धीरे-धीरे आगे निकलने लगा था। तीन महीने की प्रेग्नेंसी में भी उसका शरीर पहले से ज्यादा सेक्सी लग रहा था। स्तन और भारी हो गए थे, निप्पल काले और संवेदनशील। चूत हमेशा गीली रहती थी। लेकिन दर्द की भूख कम नहीं हुई थी। बल्कि और बढ़ गई थी।
एक शनिवार की रात मैं उसके फ्लैट पहुँचा। दरवाजा खोलते ही उसने मेरे पैर छू लिए। नंगी थी। गर्दन में चमड़े का कॉलर पहना हुआ था जिस पर मेरा नाम कढ़ा था। हाथ पीछे बंधे थे। आँखों में इंतजार।
“मालिक… आज पूरा रात मेरी कोई सीमा मत छोड़ना। पेट में तेरा बच्चा है… फिर भी मुझे कुतिया की तरह इस्तेमाल कर।”
मैंने उसके बाल पकड़कर खींचे और लिविंग रूम में घसीटते हुए ले गया। फर्श पर गिराया। थप्पड़ मारा गाल पर। जोर का। फिर दूसरा। उसके होंठ फट गए। खून की बूंद निकली। मैंने झुककर वह खून चाट लिया और फिर उसके मुंह में थूक दिया।
“चाट… मेरा थूक और अपना खून।”
वह चाटने लगी। मैंने पैंट खोली। 8.5 इंच का लंड उसके चेहरे पर पटका। आँखों पर, गालों पर, होंठों पर। फिर मुंह में ठेल दिया। गले तक। वह गग करने लगी। आँसू बहने लगे। मैंने बाल पकड़कर सिर आगे-पीछे किया। मुंह की चुदाई शुरू। हर धक्के पर उसका गला मेरे लंड को निगल रहा था। लार बहकर उसके स्तनों पर गिर रही थी। दस मिनट बाद मैंने लंड निकाला। उसके चेहरे पर थप्पड़ मारते हुए कहा, “अब गांड खोल।”
वह घुटनों के बल हो गई। गांड ऊपर। मैंने उसके गांड के छेद में पहले तीन उंगलियाँ घुसा दीं। बिना तेल के। वह चीखी। “आाह्ह… फट रही है…” लेकिन पीछे नहीं हटी। मैंने उंगलियाँ घुमाते हुए अंदर-बाहर किया। फिर लंड सीधा गांड में धकेल दिया। एक झटके में आधा। दूसरा झटका पूरा। उसकी गांड मेरे मोटे लंड से फैल गई। मैंने कमर पकड़ी और बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। हर धक्के पर उसकी गांड के गाल थपथपा रहे थे। थप्पड़ मारता गया। लाल से बैंगनी हो गए निशान।
“गिन… कितने थप्पड़ खाए…”
वह गिनने लगी बीच-बीच में कराहते हुए। “एक… दो… आह्ह… पंद्रह… बीस…” मैंने तीस तक मारे। फिर लंड निकालकर उसकी चूत में घुसा दिया। प्रेग्नेंट चूत और भी नरम और गीली थी। लेकिन मैंने कोई नरमी नहीं दिखाई। दोनों हाथों से उसके कंधे दबाए और पूरी ताकत से धक्के मारे। उसका पेट फर्श से छू रहा था। हर धक्के पर वह आगे सरक रही थी। मैंने बाल पकड़कर खींचे। गर्दन मोड़ दी।
“बोल… तू क्या है?”
“तेरी कुतिया… तेरी रखैल… तेरा बच्चा पैदा करने वाली रंडी…”
मैंने उसकी चूत से लंड निकाला और मुंह में ठेल दिया। गांड और चूत का मिला-जुला रस। वह चूस रही थी। मैंने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़कर मुंह की गहराई तक लंड ठेला। नाक बंद कर दी। वह सांस के लिए तड़पने लगी। चेहरा लाल। फिर छोड़ा। वह खांसने लगी। लार और रस फर्श पर गिर रहा था।
मैंने उसे उठाया और बेड पर फेंक दिया। हाथ ऊपर बाँध दिए हेडबोर्ड से। पैर फैलाकर अलग-अलग बाँध दिए। अब वह पूरी तरह खुली और बेबस थी। मैंने ड्रॉयर से मोटी मोमबत्ती निकाली। जलाई। गर्म मोम पहले उसके बाएँ निप्पल पर टपकाया। वह चीखी। फिर दाएँ पर। फिर पेट पर जहाँ हल्का सा उभार आ चुका था। फिर चूत के ऊपर। क्लिट पर सीधा। वह तड़प रही थी। शरीर उठ-उठ रहा था लेकिन रस्सियाँ नहीं छोड़ रही थीं।
“और… और जला… मुझे याद दिला कि मैं सिर्फ तेरी हूँ।”
मैंने मोमबत्ती बुझाई। फिर चमड़े की बेल्ट निकाली। उसकी जांघों पर फटकार मारी। एक, दो, तीन… लाल धारियाँ पड़ गईं। फिर चूत पर हल्के-हल्के। वह पागलों की तरह कराह रही थी। मैंने बेल्ट उसके मुंह में ठूंस दी। अब वह चीख भी नहीं सकती थी। सिर्फ गले से आवाजें निकल रही थीं।
मैंने लंड फिर उसकी गांड में घुसाया। इस बार और तेज। बेड की चरमराहट और मेरे धक्कों की आवाज मिलकर कमरे में गूंज रही थी। उसके स्तन इधर-उधर हिल रहे थे। प्रेग्नेंट पेट थोड़ा ऊपर उठा हुआ। मैंने एक हाथ से पेट को सहलाया और दूसरे से गला दबाया। हल्का। फिर जोर से। उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं। मैंने गला छोड़ते हुए लंड चूत में डाल दिया। अब दोनों छेद बारी-बारी इस्तेमाल कर रहा था। कभी गांड, कभी चूत। कभी दोनों में उंगलियाँ और लंड साथ।
आधी रात हो चुकी थी। वह तीन बार झड़ चुकी थी। शरीर पसीने से भीगा। रस्सियों से कलाईयाँ लाल। मैंने रस्सियाँ खोलीं। वह ढेर की तरह गिर पड़ी। मैंने उसे घसीटते हुए बाथरूम ले गया। शावर खोल दिया। ठंडा पानी। वह कांपने लगी। मैंने उसे दीवार से सटाया। एक पैर उठाया और लंड चूत में ठेल दिया। पानी के नीचे घपा-घप। उसके बाल चेहरे पर चिपक गए। मैंने गला दबाया और कान में कहा, “आज रात तेरी गांड से खून निकलेगा… तैयार रह।”
लंड निकाला। गांड में फिर से घुसाया। बिना किसी स्नेहक के। वह चीख रही थी। मैंने रफ्तार बढ़ाई। उसकी गांड के अंदर लंड की नोक गर्भ की तरफ जा रही थी। दर्द से उसकी आँखों से आँसू की धारा बह रही थी। लेकिन वह पीछे धकेल रही थी। “और अंदर… फाड़ दे…”
मैंने आखिरकार गांड में ही वीर्य छोड़ दिया। भरपूर। बाहर निकलते समय सफेद तरल उसकी टाँगों पर बहने लगा। मैंने उसे फर्श पर बैठाया। लंड उसके मुंह में दे दिया। “साफ कर… सब चाट।” वह चाटने लगी। गांड से निकला वीर्य और अपना रस।
सुबह तक मैंने उसे तीन बार और चोदा। एक बार बालकनी में। रात के अंधेरे में। कॉलर पकड़कर खड़ा किया। शहर की लाइटें दूर जल रही थीं। किसी ने देखा या नहीं, पता नहीं। लेकिन वह कांपते हुए झड़ गई जब मैंने पीछे से उसकी चूत फाड़ दी।
उसके बाद के हफ्तों में खेल और क्रूर होते गए। कभी मैं उसे पूरे दिन बाँधकर छोड़ देता। मुंह में बॉल गैग। चूत में मोटा दildo। गांड में दूसरा। कभी उसे फर्श पर रेंगने को मजबूर करता। कॉलर में चेन बाँधकर। “भिनक… कुतिया की तरह।” वह भिनकती। मैंने उसके शरीर पर सिगरेट के हल्के निशान भी छोड़े। जांघ के अंदर। स्तन के नीचे। वह हर निशान को चूमती और कहती, “और दे… मालिक।”
एक दिन मैंने उसे अपने ऑफिस के पास वाली छोटी होटल में बुलाया। लंच टाइम। कमरा लिया। उसे बिस्तर पर बाँधा। ऑफिस के कपड़ों में ही चोदा। टाई उसके गले में बाँधकर खींची। वह गर्भवती शरीर के साथ तड़प रही थी। मैंने उसके मुंह में अपना अंडकोष ठूंस दिया। चाटने को कहा। फिर लंड चूत में और उंगलियाँ गांड में। कमरे में सिर्फ उसकी दबी चीखें और मेरे धक्कों की आवाज थी।
अब छह महीने की प्रेग्नेंसी हो चुकी है। पेट काफी निकल आया है। फिर भी जब भी मिलते हैं, खेल पहले से ज्यादा बर्बर होता है। कभी वह खुद मेरे पास आती है और कहती है, “आज खून निकले या न निकले… लेकिन मुझे आज पूरी तरह तोड़ देना।”
और मैं तोड़ता हूँ। हर बार। उसकी चूत, गांड, मुंह, स्तन… सब कुछ। क्योंकि नंदिनी अब सिर्फ मेरी गर्लफ्रेंड की दीदी नहीं। वह मेरी निजी संपत्ति है। मेरे बच्चे की माँ। मेरी cubी। मेरी दर्द की प्यासी रंडी।
रातें अभी भी वही हैं। पुणे के उस फ्लैट में जब अंधेरा गहरा होता है, तो नंदिनी की दबी-दबी चीखें और चमड़े की फटकार की आवाजें दीवारों से टकराती रहती हैं। और मैं… मैं हर बार पहले से ज्यादा क्रूर होकर उसके शरीर को अपना युद्धक्षेत्र बनाता हूँ। क्योंकि दोनों जानते हैं कि यह सिलसिला बच्चे के जन्म के बाद और भी गहरा और अंधेरा होने वाला है।
भतीजे ने चाची को कमरे में कैद किआ