दिल्ली के बंगले में बॉस की बीवी सायरा ने खुद को पूरी तरह सौंप दिया। रस्सियों, छड़ी और जलते मोम के बीच कबीर ने उसकी हर सीमा तोड़ दी। दर्द और भूख एक हो गए।
मेरा नाम कबीर है। उम्र 28 साल। ऊंचाई 182 cm। लंड का साइज 7.8 इंच मोटा और लंबा। मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में सीनियर एग्जीक्यूटिव हूँ। मेरा बॉस राजेश मेहता है। उसकी बीवी का नाम सायरा है। उम्र 34 साल। गोरी, लंबी, 36D के भारी स्तन, पतली कमर और गोल-मटोल गांड। सायरा को देखकर कोई भी आदमी पागल हो जाए। राजेश अक्सर बाहर रहता था बिजनेस ट्रिप पर। सायरा अकेली रहती थी उनके दक्षिण दिल्ली के बंगले में।
हमारी मुलाकात ऑफिस पार्टी में हुई थी। पहली नज़र में ही मेरी नज़र उसकी भारी छातियों पर अटक गई थी। बाद में चैट शुरू हुई। एक रात उसने खुद फोन किया और बोली, “कबीर, आज घर आ जा। राजेश तीन दिन के लिए सिंगापुर गया है।”
मैं पहुंचा। बंगले का गेट खुलते ही सायरा दरवाजे पर खड़ी थी। काले लेदर की टाइट ड्रेस में। स्तन लगभग बाहर निकलने को तैयार। उसने मुझे अंदर खींचा और दरवाजा बंद करते ही मेरे मुंह पर अपने होंठ चिपका दिए। जबरदस्त चुंबन। जीभ से जीभ लड़ाई। मैंने उसके स्तनों को ड्रेस के ऊपर से ही जोर-जोर से मसलना शुरू कर दिया। वो कराह उठी।
“आज तुम मुझे बिल्कुल बर्बाद करके रखना,” उसने फुसफुसाया। “जितना क्रूर हो सके, उतना करो। मैं तुम्हारी गुलाम बनना चाहती हूँ।”
मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और गर्दन पर दांत गड़ा दिए। वो चीखी। मैंने ड्रेस को ऊपर से चीर दिया। ब्रा भी फाड़ दी। 36D के स्तन बाहर निकल आए। मैंने एक स्तन मुंह में ले लिया और जोर से चूसने लगा। दांत से निप्पल दबाया। सायरा की चीखें गूंजने लगीं। दूसरे हाथ से उसके दूसरे स्तन को इतनी ताकत से मसल रहा था कि उंगलियों के निशान पड़ गए।
मैंने उसे सोफे पर धकेल दिया। पैंटी फाड़कर फेंक दी। उसकी चुत पहले से ही भीग चुकी थी। मैंने दो उंगलियां अंदर घुसेड़ दीं और जोर-जोर से फटकारने लगा। वो कराह रही थी, “आह्ह… और जोर से… तोड़ दो मुझे।”
मैंने तीसरी उंगली भी डाल दी। फिर चौथी। उसकी चुत फैल गई। मैंने पूरा हाथ अंदर धकेलने की कोशिश की। सायरा चिल्ला उठी, “नहीं… बहुत दर्द हो रहा है…” लेकिन मैं रुका नहीं। धीरे-धीरे मुट्ठी अंदर चली गई। उसकी चुत मेरे हाथ को निगल रही थी। मैंने मुट्ठी घुमाई। सायरा की आंखों से आंसू बहने लगे लेकिन वो रोकने को नहीं कह रही थी। बल्कि बोली, “और अंदर… पूरा…”
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मैंने मुट्ठी पूरी अंदर कर दी और जोर-जोर से पंच करने लगा। उसकी चुत से पानी की धार निकल रही थी। वो कांप रही थी। मैंने अपना लंड निकाला। 7.8 इंच का मोटा लंड। सायरा की आंखें फटी की फटी रह गईं। मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह में ठूंस दिया। वो गला घोंटते हुए चूसने लगी। मैंने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। लंड उसके गले तक जा रहा था। सायरा की आंखों से पानी बह रहा था, नाक से सिसकी आ रही थी लेकिन वो रुकने को नहीं कह रही थी।
मैंने उसका मुंह छोड़कर उसे पलटा और कुत्ते की तरह बैठा दिया। गांड ऊपर। मैंने उसके दोनों हाथ पीछे बांध दिए बेल्ट से। फिर उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और अपना लंड उसकी चुत में एक झटके में पूरा घुसेड़ दिया। सायरा चीख पड़ी। मैंने कोई रहम नहीं किया। पूरे जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के पर उसके स्तन आगे-पीछे झूल रहे थे। मैंने उसके गांड पर जोर-जोर से थप्पड़ मारना शुरू कर दिया। लाल हो गई गांड। फिर और जोर से। सायरा रो रही थी लेकिन साथ में कराह भी रही थी, “और मारो… और जोर से चोदो… मैं तुम्हारी रांड हूँ…”
मैंने उसकी चुत छोड़कर गांड पर लंड रखा। सायरा घबरा गई, “नहीं कबीर… गांड मत मारो… बहुत दर्द होगा…” लेकिन मैंने सुना नहीं। थूक लगाया और एक ही झटके में आधा लंड अंदर धकेल दिया। सायरा की चीख पूरे बंगले में गूंज गई। मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और बाकी लंड भी अंदर घुसेड़ दिया। उसकी गांड मेरे लंड को निगल रही थी। मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के पर सायरा का शरीर कांप रहा था। आंसू बह रहे थे। मैंने उसके बाल पकड़कर और जोर से खींचे। गांड फटने जैसी आवाज आ रही थी।
मैंने उसे उठाया और दीवार से सटा दिया। एक पैर ऊपर उठाकर फिर से गांड में लंड घुसेड़ दिया। अब और तेज। सायरा की चीखें दबी हुई थीं क्योंकि मेरा हाथ उसके मुंह पर था। मैंने उसके निप्पल्स को जोर से मरोड़ा। एक निप्पल को दांतों से काटा। खून की बूंद निकली। सायरा और जोर से कांपने लगी।
फिर मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। हाथ-पैर चारों तरफ बांध दिए। रस्सी से। अब वो पूरी तरह बेबस थी। मैंने मोमबत्ती जलाई और गर्म मोम उसके स्तनों पर टपकाने लगा। सायरा चीख रही थी। मोम ठंडा होकर जम रहा था। मैंने गांड पर भी मोम गिराया। फिर अपना लंड फिर से उसकी गांड में ठूंस दिया। अब पूरी क्रूरता से। इतनी तेज चोदाई कि बिस्तर हिल रहा था। सायरा का शरीर पसीने से तर था। उसकी चुत से पानी की धारा बह रही थी। वो दो बार झड़ चुकी थी लेकिन मैं रुका नहीं।
मैंने उसका मुंह खोला और गले तक लंड ठूंस दिया। फिर निकाला और चेहरे पर थप्पड़ मारा। “चूस रांड,” मैंने कहा। सायरा ने आंखों में आंसू लेकर लंड चूसना शुरू कर दिया। मैंने उसके गले में हाथ डालकर हल्का गला दबाया। वो घबरा रही थी लेकिन चूसती जा रही थी।
फिर मैंने उसे अनटाइड किया और अपने ऊपर बिठाया। सायरा खुद मेरा लंड अपनी गांड में बैठा रही थी। ऊपर-नीचे कूद रही थी। उसके भारी स्तन मेरे चेहरे पर बार-बार लग रहे थे। मैंने दोनों स्तनों को मुंह में लेकर काटना शुरू कर दिया। सायरा कराह रही थी, “तोड़ दो मुझे कबीर… मेरी गांड फाड़ दो…”
मैंने उसे फिर से कुत्ते की पोजीशन में कर दिया। अब दोनों छेद एक साथ। एक हाथ की उंगलियां चुत में, लंड गांड में। सायरा पागल हो रही थी। वो खुद पीछे धक्के मार रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और कान में कहा, “आज तुम्हें इतना चोदूंगा कि चल भी नहीं पाओगी।”
मैंने एक बार फिर से गांड में पूरा लंड घुसेड़ दिया और अब अंतिम राउंड शुरू किया। इतनी बर्बरता से कि सायरा की चीखें सिसकियों में बदल गईं। उसकी गांड पूरी तरह लाल और सूजी हुई थी। मैंने उसके गले में बेल्ट कस दी और हल्का गला घोंटते हुए धक्के मारते रहे। सायरा की आंखें ऊपर पलट रही थीं। वो तीसरी बार झड़ गई। चुत से पानी फव्वारे की तरह निकल रहा था।
अंत में मैंने लंड निकाला और उसके चेहरे के सामने लाया। सायरा ने खुद मुंह खोल दिया। मैंने उसके बाल पकड़कर गले तक ठूंस दिया और पूरा पानी उसके गले में उतार दिया। कुछ बाहर निकलकर उसके चेहरे, स्तनों पर गिर गया। सायरा ने आंखें बंद करके सारा वीर्य निगल लिया और बचे हुए को चाट-चाटकर साफ कर दिया।
मैं बिस्तर पर गिर गया। सायरा मेरे ऊपर लेट गई। उसका शरीर कांप रहा था। गांड से हल्का खून की बूंदें निकल रही थीं। उसने मेरे कान में फुसफुसाया, “कल फिर आना। अगली बार और क्रूर होना। मुझे पूरी तरह तोड़ देना।”
मैंने उसके बाल सहलाए और कहा, “तू मेरी निजी रांड है सायरा। जब चाहूं, जैसे चाहूं चोदूंगा।”
सायरा मुस्कुराई। उसकी आंखों में अभी भी दर्द और मस्ती दोनों थे। बाहर रात के अंधेरे में दिल्ली की बत्तियां जल रही थीं। बंगले के अंदर दो शरीर पसीने, वीर्य और दर्द से सने पड़े थे।
अगली सुबह सायरा मुश्किल से चल पा रही थी। गांड में दर्द हो रहा था। स्तनों पर दांत और उंगलियों के निशान थे। लेकिन उसने मुझे मेसेज किया, “रात को आना। आज और सख्त सामान तैयार रखूंगी।”
मैंने जवाब दिया, “तैयार रह। आज तुझे रस्सियों से बांधकर घंटों चोदूंगा।”
अगली रात ठीक 9 बजे मैं फिर से सायरा के बंगले पहुंचा। दरवाजा खुलते ही उसने मुझे अंदर खींच लिया। आज वो सिर्फ एक पतली काली चेन और एड़ियों वाली हाई हील्स में थी। बाकी बिल्कुल नंगी। स्तनों पर कल के दांत के निशान अभी भी लाल थे। गांड पर थप्पड़ों के निशान साफ दिख रहे थे। उसने मेरे हाथ में एक काला बैग थमाया।
“आज सब कुछ तैयार है,” उसने धीमी आवाज में कहा। “रस्सियां, चमड़े की पट्टियां, मोमबत्तियां, क्लिप्स, और एक मोटी रबर की छड़ी। जितना चाहो, उतना तोड़ दो मुझे।”
मैंने बैग खोला। अंदर सामान देखकर मेरा लंड तुरंत सख्त हो गया। मैंने सायरा के बाल पकड़कर खींचा और उसे घुटनों के बल बैठा दिया। “आज तुम सिर्फ एक जानवर हो। बोलने की इजाजत नहीं। सिर्फ आवाजें निकालना।”
उसने सिर हिलाया। मैंने उसके दोनों हाथ पीछे किए और मोटी रस्सी से कसकर बांध दिए। फिर उसकी टखनों को भी बांध दिया ताकि वो भाग न सके। उसके मुंह में एक बड़ा गैग ठूंस दिया। अब वो सिर्फ नाक से सांस ले सकती थी। आंखों में काला कपड़ा बांध दिया। पूरी तरह अंधेरी दुनिया में कैद।
मैंने उसे बिस्तर के पास घसीटा और चारों तरफ से रस्सियों से कसकर बांध दिया। हाथ ऊपर, पैर फैले हुए। चुत और गांड पूरी तरह खुली। मैंने पहले उसके निप्पल्स पर मेटल क्लिप्स लगा दिए। सायरा की शरीर में सिहरन दौड़ गई। फिर मैंने क्लिप्स को चेन से जोड़कर थोड़ा खींचा। उसके स्तन खिंच गए। दर्द की सिसकी गैग के पीछे से निकली।
मैंने मोमबत्ती जलाई। गर्म मोम पहले उसके पेट पर टपकाया। फिर स्तनों पर। सायरा का शरीर उछल रहा था लेकिन रस्सियां कसकर पकड़े हुए थीं। मोम उसके निप्पल्स पर जमा। मैंने छड़ी उठाई। चमड़े की मोटी छड़ी। पहली चोट उसकी जांघ के अंदर दी। तेज आवाज। लाल निशान उभर आया। दूसरी चोट दूसरी जांघ पर। तीसरी सीधे चुत के ऊपर। सायरा की चीख गैग में दब गई। मैंने लगातार दस चोटें चुत और गांड पर लगाईं। उसकी त्वचा जल रही थी, लाल-लाल हो चुकी थी।
अब मैंने अपना लंड निकाला। 7.8 इंच का मोटा लंड। सायरा के मुंह से गैग निकाला और पूरा लंड उसके गले में ठूंस दिया। वो घुट रही थी। आंसू बह रहे थे। मैंने उसके सिर को दोनों हाथों से पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारे। लंड उसके गले की गहराई तक जा रहा था। थोड़ी देर बाद मैंने निकाला। सायरा का चेहरा लार और आंसुओं से तर था।
मैंने उसे पलटा। अब गांड ऊपर। मैंने उसके गांड के छेद पर थूक लगाया और बिना किसी तैयारी के पूरा लंड एक झटके में अंदर घुसेड़ दिया। सायरा की चीख निकल गई। मैंने कोई धीमापन नहीं रखा। पूरे जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के पर उसकी गांड फटती हुई महसूस हो रही थी। मैंने छड़ी से उसकी पीठ पर चोटें लगाना शुरू कर दिया। साथ-साथ गांड चोदते हुए। सायरा का शरीर कांप रहा था। वो रो रही थी लेकिन रुकने के लिए कोई इशारा नहीं कर रही थी।
मैंने लंड निकाला। उसकी गांड का छेद खुला और लाल था। थोड़ा खून की बूंदें दिख रही थीं। मैंने दो उंगलियां अंदर डालकर फैलाया। फिर तीन। फिर चार। सायरा की चीखें तेज हो गईं। मैंने मुट्ठी बनाने की कोशिश की। धीरे-धीरे गांड का छेद फैलता गया। आखिरकार मेरी मुट्ठी अंदर चली गई। सायरा का पूरा शरीर तनाव में था। मैंने मुट्ठी अंदर-बाहर करने लगा। उसकी गांड मेरे हाथ को निगल रही थी।
फिर मैंने मुट्ठी निकाली और लंड वापस ठूंस दिया। अब और तेज। मैंने उसके बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और कान में कहा, “तू सिर्फ एक छेद है। मेरा पर्सनल टॉयलेट।” सायरा की आंखों से आंसू बह रहे थे लेकिन वो पीछे की तरफ खुद धक्के मार रही थी।
मैंने उसे अनटाइड किया। रस्सियां खोलीं। फिर उसे खड़ा किया और दीवार से सटा दिया। एक पैर ऊपर उठाकर फिर से गांड में लंड घुसेड़ दिया। अब खड़े-खड़े बर्बरता से चोदने लगा। उसके स्तन दीवार से टकरा रहे थे। मैंने दोनों निप्पल्स को जोर से मरोड़ा। क्लिप्स अभी भी लगे हुए थे। दर्द से सायरा की टांगें कांप रही थीं।
फिर मैंने उसे फर्श पर गिराया। कुत्ते की तरह। अब दोनों छेद एक साथ। लंड गांड में, उंगलियां चुत में। सायरा पागलों की तरह कराह रही थी। मैंने उसके गले में चमड़े की पट्टी कस दी और हल्का गला दबाते हुए धक्के मारते रहे। उसकी सांसें उखड़ रही थीं। चेहरा लाल हो गया था। लेकिन वो झड़ गई। चुत से पानी की तेज धारा निकली। फर्श गीला हो गया।
मैंने लंड निकाला और उसके चेहरे पर थप्पड़ मारा। “मुंह खोल।” सायरा ने मुंह खोला। मैंने पूरा लंड गले तक ठूंस दिया और इस बार पूरा पानी उसके पेट में उतार दिया। कुछ बाहर निकलकर उसके चेहरे पर फैल गया। सायरा ने आंखें बंद करके सारा कुछ निगल लिया। बचे हुए को जीभ से चाटा।
मैं बिस्तर पर बैठ गया। सायरा मेरे पैरों के पास घुटनों के बल थी। शरीर पर मोम, लाल निशान, थूक, वीर्य सब लगा हुआ था। गांड से हल्का खून रिस रहा था। उसने मेरे लंड को फिर से मुंह में ले लिया और धीरे-धीरे साफ करने लगी।
मैंने उसके बाल सहलाए। “कल रात और सख्त होगा। आज सिर्फ वार्म-अप था।”
सायरा ने सिर उठाया। आंखों में दर्द था, लेकिन साथ में एक भूखी सी चमक भी। उसने फुसफुसाया, “मैं तैयार रहूंगी। जितना चाहो, उतना तोड़ देना। मैं तुम्हारी पूरी तरह से गुलाम हूँ।”
बाहर बारिश शुरू हो चुकी थी। बंगले के अंदर दो शरीर फिर से थककर गिरे हुए थे। सायरा की सांसें भारी थीं। गांड में जलन हो रही थी। स्तनों पर क्लिप्स के निशान गहरे पड़ गए थे। लेकिन उसकी उंगलियां अभी भी मेरे लंड को छू रही थीं। जैसे कह रही हों कि ये अभी खत्म नहीं हुआ।
मैंने उसे उठाया और बाथरूम ले गया। गर्म पानी से नहलाया। उसके घावों पर धीरे से हाथ फेरा। सायरा मेरी छाती से चिपक गई। “राजेश तीन दिन और बाद में आएगा,” उसने कहा। “इन तीन दिनों में मुझे इतना चोदना कि मैं भूल जाऊं कि मैं किसी और की बीवी हूँ।”
मैंने उसके होंठों को काटा। “तू किसी और की नहीं। तू सिर्फ मेरी रांड है। और मैं तुझे याद दिलाता रहूंगा।”
रात और गहराई तक चली। मैंने उसे फिर से बांधा। इस बार उल्टा। सिर नीचे, गांड ऊपर। फिर से छड़ी से पीटा। फिर से मोम। फिर से दोनों छेदों को बारी-बारी से फाड़ा। सायरा की आवाज अब सिर्फ सिसकियों में रह गई थी। वो कई बार झड़ चुकी थी। शरीर में जान नहीं बची थी। लेकिन हर बार जब मैं रुकता, वो सिर हिलाकर और मांगती।
सुबह होते-होते सायरा बिस्तर पर पड़ी थी। चल नहीं पा रही थी। गांड सूजी हुई। चुत लाल। पूरे शरीर पर निशान। लेकिन चेहरे पर एक अजीब सी संतुष्टि थी। उसने मेरे हाथ को पकड़ा और अपने स्तन पर रखा। “कल फिर आना। आज से भी ज्यादा क्रूर होकर।”
मैंने उसके माथे पर चुंबन लिया। “तैयार रह। कल मैं तुझे पूरी रात जगाए रखूंगा।”
दरवाजा बंद करते समय सायरा की आवाज आई, “कबीर… मुझे अपनी कुतिया बना दो हमेशा के लिए।”
मैंने जवाब नहीं दिया। सिर्फ मुस्कुराया और निकल गया। बारिश अभी भी हो रही थी। दिल्ली की सड़कें गीली थीं। लेकिन मेरे दिमाग में सिर्फ सायरा की चीखें और उसकी फटी हुई गांड घूम रही थी। अगली रात और भी काली होने वाली थी।
राहुल की प्रिया हाउसवाइफ बंधक कुतिया