गुप्त बर्बर गुलामी

दिल्ली का शादीशुदा राहुल अपनी पत्नी की सहेली अंजलि को बेडरूम में बर्बर तरीके से बाँधकर, थप्पड़ मारकर, गांड फाड़कर और बेरहमी से चोदकर अपना personal hardcore slave बना लेता है। नॉनस्टॉप क्रूर BDSM, दर्द भरा pleasure और छुपा हुआ खतरनाक अफेयर।

नमस्ते दोस्तों, उम्मीद है आप सब स्वस्थ और खुश होंगे। मेरा नाम राहुल है, मैं दिल्ली के साउथ एक्सटेंशन में रहता हूँ। उम्र 35 साल। शादी को आठ साल हो चुके हैं। मेरी पत्नी प्रिया से मुझे बेहद प्यार है। वह 28 साल की है, उसका शरीर बेहद आकर्षक है—34-26-36। हम दोनों की सेक्स लाइफ बहुत वाइल्ड और संतोषजनक रही है। हमारा एक 4 साल का बेटा है, जो ज्यादातर अपनी नानी के पास गुरुग्राम में रहता है क्योंकि हम दोनों वर्किंग हैं।


मैं प्रिया से सच में प्यार करता हूँ, लेकिन कभी-कभी इंसान के अंदर छिपा जानवर बाहर आने को मजबूर हो जाता है। यह कहानी मेरी और मेरी पत्नी की सबसे अच्छी सहेली अंजलि के बीच हुई है। अंजलि 27 साल की है—शरीर 36-28-40 का बम, गोरा रंग, लंबे काले बाल, और ऐसी आँखें जो किसी को भी गुलाम बना सकती हैं। वह ऑफिस की कॉलेज की फ्रेंड है प्रिया की।


एक शाम प्रिया फोन पर किसी से बात कर रही थी। आवाज में थोड़ी चिंता थी। फोन रखते ही उसने बताया, “अंजलि आ रही है। उसके पति विक्रम के साथ बहुत बड़ा झगड़ा हो गया है। वह कुछ दिनों के लिए हमारे घर आना चाहती है।”
मैंने सहमति दे दी। अंजलि को मैं अच्छी तरह जानता था। वह हमेशा हँसमुख और सेक्सी लगती थी, लेकिन कभी मेरे मन में गलत ख्याल नहीं आया था।


अगले दिन शाम को दोनों ऑफिस से सीधे घर आ गईं। मैं थोड़ा लेट पहुँचा। अंजलि ने साधारण सा सूट पहना था, लेकिन उसकी भरी हुई छातियाँ और मोटी कमर देखकर कोई भी पागल हो सकता था। मैंने उसे वेलकम किया और कहा कि यह उसका ही घर है। हमारा तीन बेडरूम का फ्लैट था। उसे गेस्ट रूम दे दिया, हमारा मास्टर बेडरूम बगल में।


उस रात प्रिया ने डिनर का खास प्लान किया। घर पर ही शराब का स्टॉक था। हम तीनों डिनिंग टेबल पर बैठे। मैंने व्हिस्की के साथ कोल्ड ड्रिंक्स बनाईं। अंजलि पहले ही टेंशन में थी, उसने पहला ग्लास एक साँस में खत्म कर दिया। दूसरा ग्लास भी उसी स्पीड से गया। फिर वह रोने लगी। प्रिया उसे सहलाती रही।


“विक्रम का किसी और औरत से अफेयर चल रहा है,” अंजलि ने नशे में बड़बड़ाते हुए कहा।
प्रिया उसे उसके रूम में ले गई, खाना खिलाया और सुला आई। जब प्रिया हमारे रूम में आई तो मेरा मूड पहले ही गर्म था। हम दोनों ने ड्रिंक खत्म की और बिना देर किए एक-दूसरे पर टूट पड़े।


मैंने प्रिया को बेड पर धकेल दिया। उसकी साड़ी खींचकर उतारी। 69 पोजीशन में आ गए। उसकी गीली चूत मेरे मुँह में, मेरा 7 इंच का मोटा लंड उसके गले तक। वह जोर-जोर से चूस रही थी। मैं उसकी चूत चाटते हुए दो उंगलियाँ अंदर डाल रहा था। फिर मैंने उसे कुतिया बनाया और पीछे से जोरदार ठोका। “आह्ह्ह… राहुल… harder!” वह चीखी।
हम दोनों इतने खो गए कि दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हुआ था। मैं प्रिया के मुँह में झड़ा। हम थककर सो गए।
अंजलि ने सब कुछ दरवाजे से देख लिया था।


दो दिन ऐसे ही गुजरे। तीसरे दिन प्रिया को अचानक गुरुग्राम जाना पड़ा—उसकी माँ की तबीयत खराब थी। वह रात को वापस आने वाली थी, लेकिन अगली सुबह तक रुक गई।
शाम को मैं घर पहुँचा तो अंजलि पहले से मौजूद थी। उसने कहा, “कल सुबह तक प्रिया आएगी, मैं यहीं रुकूंगी।”


हमने बाहर से चिकन और रोटी मँगवाई। ड्रॉइंग रूम में टीवी चल रहा था। मैं ड्रिंक बना रहा था। अंजलि आई और बोली, “अकेले पी रहे हो? मुझे भी दो।”
चार-पाँच पेग के बाद दोनों काफी नशे में थे। अंजलि लड़खड़ाते हुए अपने रूम गई। थोड़ी देर बाद किचन से आवाज आई। मैं गया तो देखा वह पानी लेने की कोशिश कर रही थी लेकिन ग्लास गिरा दिया।


मैंने उसे सहारा दिया। उसकी बिना ब्रा वाली टी-शर्ट से उसके भारी बूब्स मेरे सीने से रगड़ खा रहे थे। उसे उसके बेड पर लिटाया। जैसे ही मैं मुड़ा, अंजलि ने मेरा हाथ पकड़ लिया।
“आज यहीं सो जाओ राहुल… मैं बहुत अकेली हूँ।”


मैं बगल में लेट गया। बातें शुरू हुईं। अंजलि ने अचानक कहा, “मैंने उस रात तुम दोनों को देख लिया था… तुम प्रिया को कितनी जोर से चोद रहे थे।”


मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने उसकी तरफ देखा। नशा, गुस्सा और हवस—तीनों एक साथ उसकी आँखों में थे।
“तो अब क्या चाहती हो?” मैंने उसकी गरदन पकड़कर पूछा।
अंजलि ने मेरी आँखों में देखा और बोली, “जो तुमने प्रिया को दिया, उससे कहीं ज्यादा… मुझे brutal चाहिए। मुझे दर्द दो, मुझे अपना गुलाम बना लो।”


यह सुनते ही मेरे अंदर का जानवर जाग गया। मैंने उसे बालों से पकड़ा और जोर से किस किया। जीभ उसके गले तक घुसा दी। फिर टी-शर्ट फाड़कर उतार दी। उसके विशाल 36D बूब्स बाहर आ गए। मैंने एक निप्पल को दाँतों से काटा। अंजलि चीखी लेकिन पीछे नहीं हटी।
“और जोर से!” वह चिल्लाई।


मैंने उसके दोनों बूब्स को रगड़ा, थप्पड़ मारे, निप्पल्स को मरोड़ा। फिर उसके पजामे को खींचकर फेंक दिया। उसकी गोरी चूत बिल्कुल साफ और गीली थी। मैंने उसे बेड पर पटका और उसके हाथों को अपनी बेल्ट से बाँध दिया।
“आज तू मेरी रंडी है, समझी?”


“हाँ मालिक…” उसकी आवाज काँप रही थी।
मैंने अपनी उंगलियाँ उसकी चूत में घुसाईं—तीन एक साथ। वह तड़प उठी। फिर जीभ से उसका क्लिटोरिस चूसने लगा। अंजलि पागल हो रही थी। मैंने उसके मुंह में अपना लंड ठूँस दिया। गला भर गया। वह उबकाई ले रही थी लेकिन मैंने बाल पकड़कर जबरदस्ती चुसवाया। लार उसके चेहरे पर बह रही थी।


जब मेरा लंड पूरी तरह चिकना हो गया, मैंने उसे कुतिया बनाया। पीछे से एक जोरदार थप्पड़ उसके मोटे गांड पर पड़ा। लाल निशान बन गया। फिर लंड उसकी चूत में पूरा का पूरा ठोक दिया।
“फाड़ दो मेरी चूत!” वह चीखी।


मैंने उसकी कमर पकड़कर जानवरों की तरह चोदा। हर थ्रस्ट पर उसके बूब्स लहरा रहे थे। मैंने उसके बाल खींचे, गरदन दबाई। फिर तेल की बोतल उठाई और उसकी गांड पर ढेर सारा तेल डाल दिया।
“आज तेरी गांड भी मेरी होगी।”


अंजलि ने विरोध किया लेकिन मैंने उसे बाँध रखा था। अपनी उंगली गांड में डाली, फिर दो। वह दर्द से कराह रही थी। मैंने लंड निकाला और गांड के छेद पर सेट किया। धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया। आधा लंड घुसा तो वह चीख पड़ी।
“दर्द हो रहा है मालिक… लेकिन मत रोको!”


मैंने पूरा लंड उसकी कुवारी गांड में धकेल दिया। फिर जोर-जोर से पेलने लगा। अंजलि रो रही थी, चीख रही थी, लेकिन उसकी चूत से पानी बह रहा था। मैंने एक हाथ से उसकी चूत में उंगलियाँ डाल रखी थीं।
लगभग 15 मिनट तक उसकी गांड मारने के बाद मैंने उसे छोड़ा। उसकी आँखें लाल थीं, शरीर पसीने और लार से तर। लेकिन हवस अभी बाकी थी।


मैंने उसे उल्टा लिटाया, पैर फैलाए और फिर से चूत में घुस गया। इस बार missionary में, उसकी आँखों में देखते हुए। “तू अब मेरी permanent slut है।”
“जी मालिक… जब चाहो चोद लो।”


मैंने उसके गले पर हाथ रखकर दबाया, दूसरे हाथ से बूब्स पर थप्पड़ मारे। वह झड़ने लगी। मैंने भी अंदर ही झड़ने की तैयारी की।
“अंदर मत… या जहां चाहो!” उसने कहा।
मैंने लंड निकाला और उसके मुँह, चेहरे, बूब्स पर सारा माल उड़ेल दिया। अंजलि ने जितना मुंह में आया निगल लिया, बाकी अपनी उंगलियों से चाट लिया।


हम दोनों थककर लेट गए। लेकिन रात अभी बाकी थी।
दूसरी राउंड में मैंने उसे बाथरूम ले जाकर शावर के नीचे खड़ा किया। गर्म पानी के नीचे उसकी चूत और गांड को फिर से चोदा। वह मेरे कंधे पर नाखून गड़ा रही थी। मैंने उसे दीवार से सटाकर खड़े-खड़े लंड मारा। उसकी टांगें मेरी कमर पर लिपटी थीं।


तीसरी राउंड सुबह होने से पहले हुई। मैंने उसे बेड से बाँधा, आँखों पर पट्टी बाँधी और पूरे शरीर पर आइस क्यूब्स फेरा। फिर मोमबत्ती की गर्म बूँदें उसके बूब्स और पेट पर गिराईं। वह तड़प रही थी। अंत में मैंने उसे doggy में गांड मारी और इस बार अंदर ही झड़ गया।
सुबह होने पर अंजलि मेरे सीने पर सिर रखे लेटी थी। उसका पूरा शरीर निशानों से भरा था—लाल थप्पड़ों के, दाँतों के, और चूसने के।


“यह रात मैं कभी नहीं भूलूंगी,” उसने फुसफुसाकर कहा। “तुमने मुझे वो दर्द और pleasure दिया जो विक्रम कभी नहीं दे सका।”
मैंने उसके बाल सहलाए और कहा, “जब तक तुम चाहो, यह सिलसिला चलेगा। लेकिन प्रिया को कुछ पता नहीं चलना चाहिए।”
अंजलि मुस्कुराई, “मैं तुम्हारी secret whore बनकर रहूंगी।”


प्रिया के वापस आने के बाद भी घर की रौनक सामान्य लग रही थी, लेकिन अंदर ही अंदर आग सुलग रही थी। अंजलि अब हर रोज ऑफिस से पहले मेरे पास एक मैसेज करती — “आज मालिक, मुझे याद है ना?” मैं बस एक इमोजी भेज देता और जानता था कि शाम को क्या होने वाला है।


पहले हफ्ते के आखिर में प्रिया को अचानक दो दिन के लिए पुणे जाना पड़ गया। कंपनी का अर्जेंट प्रोजेक्ट। जैसे ही उसकी गाड़ी बाहर निकली, मैंने अंजलि को फोन किया। “रात 8 बजे तक घर आ जा। आज तुझे पूरा ब्रेकडाउन दूँगा।”


अंजलि 7:45 पर पहुँच गई। उसने काली टाइट ड्रेस पहनी थी जो उसके 36-28-40 शरीर को और भी घातक बना रही थी। जैसे ही दरवाजा बंद हुआ, मैंने उसे दीवार से टक्कर मार दी। उसके बाल मुट्ठी में लपेटे और जोर से खींचे।


“आज कोई mercy नहीं, समझी रंडी?”
“जी मालिक… मुझे तोड़ दो आज,” उसकी साँसें पहले ही भारी हो चुकी थीं।


मैंने उसे ड्रॉइंग रूम के बीचोंबीच घुटनों पर बिठाया। अपनी बेल्ट खोली और उसके हाथ पीछे बाँध दिए। फिर मुंह में अपना 7 इंच का मोटा, नसों वाला लंड ठूँस दिया। गला फाड़ते हुए पूरा घुसा दिया। अंजलि की आँखों से आँसू बह रहे थे, लार की धार उसके चेहरे पर गिर रही थी, लेकिन वह पीछे नहीं हट रही थी। मैंने उसके सिर को पकड़कर face-fuck किया — तेज, बेरहम, गले तक।
“चूस, पूरी तरह निगल!” मैं गरजा।


जब मेरा लंड पूरी तरह चिकना और लार से तर हो गया, मैंने उसे उठाया और बेडरूम में घसीटते हुए ले गया। वहाँ मैंने पहले से तैयार किया था — प्रिया की साड़ियों के स्कार्फ से बने रस्से, बेल्ट, और एक छोटा वाइब्रेटर जो मैंने ऑनलाइन मँगवाया था।


अंजलि को बेड पर उल्टा लिटाया। हाथ-पैर चारों तरफ फैलाकर बाँध दिए। उसकी ड्रेस ऊपर खींची, पैंटी फाड़ दी। उसकी गोरी, मोटी गांड हवा में तनी हुई थी। मैंने पहला थप्पड़ जमाया — जोरदार। लाल निशान उभर आया। फिर दूसरा, तीसरा। दस थप्पड़ों के बाद उसकी गांड लाल हो चुकी थी।


“दर्द हो रहा है ना?” मैंने पूछा।
“हाँ मालिक… और दो,” वह रोते हुए बोली।


मैंने वाइब्रेटर उसके क्लिट पर रखा — highest speed पर। साथ में तीन उंगलियाँ उसकी चूत में घुसाईं। अंजलि पागल हो गई। शरीर तड़प रहा था, लेकिन बंधी होने की वजह से हिल भी नहीं पा रही थी। मैंने बेल्ट से उसके बूब्स पर हल्के-हल्के वार किए। निप्पल्स सूज गए थे।
फिर मैंने लंड उसकी चूत में एक झटके में पूरा धकेल दिया। बिना रुके, बिना थके, जानवरों जैसी रफ्तार से चोदा। हर ठोके पर बेड हिल रहा था। “मेरी चूत फाड़ दो… मुझे आपकी slut बना दो!” वह चीख रही थी।


मैंने उसे पोजीशन बदलकर doggy में किया। गांड पर थूक लगाया और लंड को गांड के छेद पर रखा। इस बार कोई धीरे-धीरे नहीं। पूरा का पूरा एक ही झटके में घुसा दिया। अंजलि की चीख पूरे फ्लैट में गूँज गई। दर्द और pleasure का मिश्रण था। मैंने उसके बाल खींचे, गरदन दबाई, और गांड मारता रहा। बीच-बीच में वाइब्रेटर उसकी चूत में चला जाता।


लगभग 40 मिनट तक इस brutal session के बाद मैंने पहली बार उसके अंदर झड़ा — गांड के अंदर। गर्म वीर्य जब उसकी गांड में भरा तो अंजलि काँप उठी। वह भी झड़ गई। लेकिन मैं रुका नहीं।


उसे नहलाने ले गया शावर में। गर्म पानी के नीचे उसे दीवार से चिपकाया। पीछे से फिर चोदा। उसके हाथ शावर के शीशे पर टिके थे। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “तू अब मेरी property है। प्रिया के बिस्तर पर तुझे चोदना मुझे और भी मजा देता है।”


रात के दूसरे राउंड में मैंने उसे नंगा करके बालकनी में ले गया। रात के 1 बजे थे। आसपास के फ्लैट्स के कुछ लाइट जल रही थीं। मैंने उसे रेलिंग पकड़वाया और पीछे से चोदा। कोई भी देख सकता था। अंजलि डर रही थी लेकिन हवस ने उसे पागल कर रखा था। “मुझे public में चोदो मालिक…”


मैंने उसके मुंह पर हाथ रखकर चुप कराया और तेजी से ठोके मारे। उसकी चूत और गांड दोनों बारी-बारी से इस्तेमाल की। अंत में उसके मुँह में झड़ा। वह सारा वीर्य निगल गई और बाकी अपने बूब्स पर मला।


अगले दिन सुबह फिर शुरू हुआ। मैंने उसे कॉलर (बेल्ट) पहनाया और पूरे घर में घुमाया। “Crawling कर!” वह घुटनों के बल चल रही थी। मैं उसके पीछे चलता हुआ बेल्ट से हल्के वार करता। किचन में ले जाकर काउंटर पर चढ़ाया और फिर चोदा।


तीन दिन तक प्रिया के आने से पहले हमने लगभग 8-9 बार सेक्स किया। हर बार नया तरीका — कभी ice और fire play, कभी choking till she almost passes out, कभी nipple clamps की तरह क्लिप्स लगाकर। अंजलि अब पूरी तरह addicted हो चुकी थी।


प्रिया वापस आई तो अंजलि भी अपने घर चली गई, लेकिन अब हमारा secret game और तेज हो गया। कभी ऑफिस की लंच ब्रेक में अंजलि मेरे ऑफिस आ जाती और बाथरूम में quick brutal blowjob देती। कभी मैं उसके घर जाकर उसे पति के बेड पर बाँधकर चोदता।
एक बार तो हमने थ्रीसम का प्लान किया, लेकिन प्रिया को शामिल करने की बजाय अंजलि ने अपनी एक और सहेली को शामिल करने की बात कही। लेकिन वह अलग कहानी है।


अब अंजलि हर हफ्ते कम से कम दो बार मेरे पास आती। उसकी गांड अब पूरी तरह trained हो चुकी है। वह खुद कहती है — “मालिक, आज मेरी गांड में दो-दो लंड जैसा feel कराओ।” मैं उसे double penetration toys से तैयार करता और फिर असली लंड से फाड़ता।
उसकी चीखें, उसके आँसू, उसके झड़ने के बाद भी “more please” कहना — यह सब मुझे दुनिया का सबसे powerful इंसान महसूस कराता। प्रिया को कुछ पता नहीं। वह सोचती है अंजलि अब ठीक हो गई है।


लेकिन असलियत यह है कि अंजलि अब मेरी personal hardcore slave बन चुकी है। और मैं उसका brutal master।
यह सिलसिला अभी भी जारी है। कभी-कभी सोचता हूँ कि इतनी हद तक जाना ठीक है या नहीं, लेकिन जब अंजलि मेरे सामने नंगी घुटनों पर बैठकर “मुझे तोड़ दो मालिक” कहती है, तो सारी सोच गायब हो जाती है।


दोस्तों, जिंदगी में कभी-कभी ऐसे राज छिपे होते हैं जो बाहर से बिल्कुल सामान्य दिखते हैं, लेकिन अंदर से आग की तरह जलते हैं। अगर आपको यह कहानी पसंद आई हो तो बताना। शायद आगे और भी खतरनाक किस्से सुनाऊँ।
समाप्त

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *