माँ की ब्रूटल गुलामी

19 साल के अर्जुन ने अपनी 38 साल की सेक्सी माँ प्रिया को पड़ोसी राहुल और दोस्तों के साथ मिलकर इतनी बर्बरता से चोदा कि उनकी चूत और गाँड फट गई। गैंगबैंग, चाबुक, बंधन और रोजाना ब्रूटल चुदाई की अनगिनत रातें, जहाँ माँ खुद अपनी हवस की गुलाम बन गई mom sex stories app lustystories par padh rhe ho।

मेरा नाम अर्जुन है। उम्र 19 साल। मैं दिल्ली के पास गुरुग्राम की एक हाई-क्लास सोसाइटी में अपनी माँ प्रिया के साथ रहता हूँ। पापा सिंगापुर में एक मल्टीनेशनल कंपनी में हाई पोस्ट पर हैं, इसलिए साल में सिर्फ दो-तीन बार घर आ पाते हैं। माँ प्रिया की उम्र 38 साल है, लेकिन देखने में कोई 28-29 की लगती हैं। पिछले 12 साल से वो रोज योगा, जिम और डाइट करती हैं।

उनका फिगर किसी इंटरनेशनल पॉर्न स्टार जैसा है – 36-26-38। लंबे घने काले बाल कमर तक, गोरा चमकदार रंग, भरे-भरे 36 इंच के स्तन जो हर साँस के साथ हिलते हैं, और गोल-मटोल, ऊपर उठा हुआ 38 इंच का गाँड जो टाइट लोअर या साड़ी में फटने को तैयार रहता है। उनकी चूत हमेशा साफ शेव की हुई और गुलाबी होती है। सोसाइटी के हर मर्द की नजरें उनकी देह पर टिकी रहती हैं। वे उनके साथ बात करने के बहाने ढूंढते रहते हैं – कभी गाड़ी की चाबी, कभी पानी का कनेक्शन, कभी बच्चों की पढ़ाई।


हम पहले मेरठ के एक छोटे से कस्बे में रहते थे। वहाँ हमारे पड़ोसी थे राहुल भैया। राहुल की उम्र 28 साल थी, ऊंचा कद, मसल्स भरा शरीर, गहरी आवाज और एक ऐसा लंड जो 9 इंच लंबा और मोटा था – जैसे कोई जानवर का। बचपन से ही उसकी नजर माँ पर थी। हम गुरुग्राम शिफ्ट हो गए तो दो साल बाद राहुल की माँ का फोन आया। राहुल का एग्जाम था और वो बीमार था। माँ ने बिना सोचे उसे कुछ दिनों के लिए घर पर रखने को हाँ कर दिया।


हमारा फ्लैट 2 बीएचके था। मैं और माँ मास्टर बेडरूम में सोते थे, राहुल को हॉल में बिस्तर लगा दिया गया। वह हमारे वॉशरूम का इस्तेमाल करता। बस दो दिन में उसका असली रंग दिखने लगा। घर में वो शर्टलेस घूमता, सिर्फ लोअर पहनता जिसमें अंडरवियर नहीं होता। उसका मोटा लंड लोअर के कपड़े को फाड़ने की कोशिश करता दिखता। वॉशरूम में माँ के ब्रा-पैंटी को सूंघता, छूता। मैं सब देख रहा था। माँ भी समझ रही थीं, पर चुप रहतीं। शायद अंदर ही अंदर उनकी हवस भी जाग रही थी।


तीसरे दिन मेरा दोस्त समीर आया। समीर 21 साल का था, मुझसे दो साल बड़ा, तगड़ा शरीर, हमेशा गर्म खून। हम दोनों ने बाहर शराब पी। उसके घर वालों ने गेट नहीं खोला तो मैं उसे अपने घर ले आया। माँ थोड़ा नाराज हुईं, पर मान गईं। मैं चेंज करके आया तो देखा समीर पहले ही हमारे बेडरूम में घुस गया था। उसने जींस-शर्ट उतारकर सिर्फ काले टाइट कच्छे में लेट रखा था। उसका लंड आधा खड़ा होकर कच्छे को तान रहा था। माँ ने एक नजर डाली और फौरन नजरें फेर लीं।


माँ ने कहा, “अर्जुन, तुम दोनों यहीं सो जाओ, मैं हॉल में सो जाती हूँ।” लेकिन मुझे शक था कि राहुल माँ को अकेला पाकर कुछ न कर दे। मैंने जोर देकर कहा, “नहीं माँ, आप हमारे साथ ही सो जाओ। तीनों एक बेड पर सो लेंगे, मैं बीच में लेट जाऊंगा।”
हम लेटे। समीर ने करवट ली और बीच में आ गया। माँ चेंज करके आईं – व्हाइट टाइट टी-शर्ट और ग्रे लोअर। टी-शर्ट के अंदर ब्रा नहीं थी, उनके भारी स्तन उभरकर साफ दिख रहे थे, निप्पल्स हल्के से उभरे हुए। लोअर के नीचे पैंटी की लाइन साफ नजर आ रही थी। अंधेरा कमरे में सिर्फ हल्की नाइट लैंप जल रही थी।
करीब आधा घंटा बाद समीर ने हरकत शुरू की। उसने धीरे से माँ की तरफ करवट ली और हाथ उनकी कमर पर रख दिया। माँ ने तुरंत हाथ हटाया। लेकिन समीर हारा नहीं। पांच मिनट बाद फिर हाथ रखा। इस बार माँ ने विरोध नहीं किया। समीर ने अपना मोटा लंड माँ की नितंबों पर रगड़ना शुरू कर दिया। माँ ने पीछे हाथ बढ़ाकर हटाना चाहा, लेकिन उनका हाथ सीधा समीर के खड़े लंड पर पड़ गया।


समीर ने तुरंत माँ का हाथ पकड़कर अपने लंड पर जकड़ लिया। माँ ने कुछ सेकंड हिचकिचाहट के बाद उसकी मोटी छड़ को मुट्ठी में भर लिया और धीरे-धीरे हिलाने लगीं। उनकी चूड़ियों की खनक अंधेरे में गूंज रही थी। मैं सब कुछ आँखें खोलकर देख रहा था। मेरा अपना लंड पत्थर की तरह खड़ा हो गया था।


समीर ने हिम्मत बढ़ाई। उसने माँ के लोअर को नीचे सरकाया। माँ की गुलाबी पैंटी दिखी। उसने पैंटी भी खींची और अपनी दो उंगलियाँ माँ की चूत में डाल दीं। माँ कराह उठीं – “उम्म्म… समीर… नहीं…” लेकिन उनकी चूत पहले ही गीली हो चुकी थी। समीर ने माँ का मुँह एक हाथ से दबाया और अपना 8 इंच का मोटा लंड उनकी चूत पर रगड़ते हुए एक झटके में अंदर ठेल दिया।


“आआआह्ह्ह…!” माँ की चीख दबी हुई थी। समीर ने जोर-जोर से धक्के मारना शुरू किए। हर धक्के पर माँ का पूरा शरीर हिल रहा था। उनके भारी स्तन उछल-उछलकर टी-शर्ट को फाड़ने को तैयार थे। समीर माँ को कुत्ते की तरह पीछे से चोद रहा था – थप-थप-थप की आवाजें कमरे में भर गईं। 15 मिनट तक वह माँ को रगड़ता रहा। फिर उसने माँ के अंदर ही अपना गाढ़ा वीर्य उड़ेल दिया।


लेकिन माँ अभी नहीं रुकीं। उन्होंने पलटकर समीर को चूम लिया। लंबी, गहरी, जीभ वाली चुम्बन। फिर वे नीचे झुकीं और समीर के लंड को मुँह में ले लिया। चूसने लगीं – जैसे कोई भूखी शेरनी। समीर का लंड फिर खड़ा हो गया। इस बार उसने माँ को अपने ऊपर चढ़ाया।

माँ ने खुद ही उसका लंड पकड़कर अपनी चूत में बैठा लिया और उछल-उछलकर चुदने लगीं। उनके स्तन उछाल रहे थे। मैं और माँ की नजरें मिलीं। माँ मुझे देखकर और भी जोर से चुद रही थीं।


समीर ने फिर माँ को लिटाया और मिशनरी में जोरदार चोदाई की। आखिरकार वह दूसरी बार माँ की चूत में झड़ गया। माँ भी दो बार झड़ चुकी थीं। वे थककर लेट गईं, लेकिन शर्म की जगह अब हवस थी।


सुबह माँ बहुत खुश और संतुष्ट दिख रही थीं। उन्होंने सबके लिए ब्रेकफास्ट बनाया। राहुल भैया नंगे बदन ही किचन में आ गए। उनका 9 इंच का लंड लोअर में साफ उभरा हुआ था। मैंने समीर के जाने के बाद राहुल को रात की सारी कहानी बता दी। राहुल का लंड सुनते ही और खड़ा हो गया।
“अब हम दोनों भी लेंगे इस रानी को,” राहुल ने कहा। “तुम भी चोदोगे। देखो, तुम्हारा दोस्त तो पहले ही ले चुका है।”
मैंने हाँ कर दी। राहुल ने एक खास गोली निकाली और खाने में मिला दी। हम सबने खाया। दो घंटे बाद असर दिखने लगा। माँ की चाल में मदहोशी थी, उनकी आँखें चमक रही थीं, स्तन और भी उभरकर दिख रहे थे।


रात 8 बजे ही हम बेडरूम में लेट गए। राहुल ने कहा, “लाइट्स मत बंद करो।” माँ ने विरोध नहीं किया। इस बार माँ ने अंदर कुछ नहीं पहना था। सिर्फ शॉर्ट टी-शर्ट और लोअर। उनके निप्पल्स और चूत की आउटलाइन साफ दिख रही थी।


राहुल ने माँ को खींचा और जोरदार किसिंग शुरू कर दी। मैंने माँ की कमर सहलानी शुरू की। राहुल ने माँ की टी-शर्ट फाड़कर उतार दी। उनके भारी, दूध जैसे स्तन बाहर आ गए। राहुल ने एक स्तन मुंह में भर लिया और जोर से चूसने लगा। माँ कराह रही थीं – “आह्ह राहुल… धीरे…”


राहुल ने माँ का लोअर भी उतार दिया। माँ बिल्कुल नंगी। राहुल का 9 इंच का मोटा, नसों वाला लंड देखकर माँ डर गईं। “राहुल… ये तो बहुत बड़ा है… नहीं… ये फट जाएगी…”


लेकिन राहुल ने सुना नहीं। उसने माँ की टांगें चौड़ी कीं और अपना विशाल लंड माँ की चूत पर रखा। एक जोरदार धक्का। “आआआह्ह्ह्ह… मर गई!” माँ चीख उठीं। आधा लंड अंदर चला गया। राहुल ने रुककर फिर पूरा ठेल दिया। माँ की चूत फटने लगी। खून जैसा कुछ निकला, लेकिन हवस ने सब पी लिया।


राहुल ने जानवरों की तरह चोदना शुरू किया। हर धक्का इतना जोरदार कि बेड हिल रहा था। थप-थप-थप… चट-चट… माँ के कराहने की आवाजें पूरे फ्लैट में गूंज रही थीं – “फाड़ दो… और जोर से… राहुल… मार डालो अपनी भाभी की चूत… आह्ह्ह!”
मैंने भी माँ के स्तनों को मसलना शुरू किया। फिर माँ ने मुझे खींचकर अपना मुँह मेरे लंड पर रख दिया। मैंने पहली बार माँ के मुँह में अपना लंड डाला। वे उसे पूरा चूस रही थीं।


राहुल 20 मिनट तक माँ को पेलता रहा। फिर उसने माँ को घुटनों के बल खड़ा किया और गाँड में लंड घुसाने की कोशिश की। माँ ने विरोध किया, लेकिन राहुल ने एक झटके में गाँड फाड़ दी। माँ रो पड़ीं, लेकिन कुछ देर बाद आनंद लेने लगीं। राहुल उनकी गाँड में जोर-जोर से धकेल रहा था।


मैंने माँ की चूत में डाला। अब हम दोनों माँ को दोनों तरफ से चोद रहे थे। माँ पागल हो गई थीं – “दोनों बेटों से चुदवा रही हूँ… और जोर से… फाड़ दो मुझे…”
हम तीनों घंटों तक चुदाई करते रहे। राहुल ने माँ की चूत, गाँड और मुँह तीनों जगह अपना वीर्य भरा। मैं भी दो बार माँ के अंदर झड़ा। माँ चार बार झड़ चुकी थीं। पूरा बेड चुदाई के पानी और वीर्य से भीगा हुआ था।


सुबह हम तीनों बाथरूम गए। शावर के नीचे भी चुदाई जारी रही। राहुल ने माँ को दीवार से सटाकर खड़ा करके चोदा। मैंने उनके मुँह में डाला। फिर हमने माँ को दोनों तरफ से उठाकर एयरटाइट चोदा। पानी के साथ उनकी चीखें और हमारी थपाकी की आवाजें मिल रही थीं।
उस दिन के बाद माँ पूरी तरह हमारी हो गईं। राहुल दो हफ्ते और रुका।

हर रात हम माँ को नंगी करके, बाँधकर, थप्पड़ मारकर, बाल खींचकर, गाली देते हुए बर्बर तरीके से चोदते। माँ अब खुद माँगतीं – “बेटा, आज मेरी दोनों छेद फाड़ दो… मुझे कुत्ते की तरह चोदो…”


समीर भी कई बार आया और हम तीनों मिलकर माँ को गैंगबैंग करते। कभी सोफे पर, कभी किचन टेबल पर, कभी बालकनी में। माँ की चीखें अब खुशी की थीं। उनकी देह हमारी हवस का खिलौना बन गई थी।


यह हमारी नई जिंदगी थी – जहाँ माँ प्रिया अब सिर्फ एक गर्म, भूखी, बेशर्म चुदक्कड़ औरत बन चुकी थीं, जो अपने बेटे और उसके दोस्तों से रोज रात भर बर्बर चुदाई का आनंद लेतीं। राहुल भैया के दो हफ्ते पूरे होने वाले थे, लेकिन उनकी हवस ने उन्हें जाने नहीं दिया।

एक शाम उन्होंने माँ को अकेले में पकड़ा और बोला, “भाभी, मैं अब इतनी जल्दी नहीं जा रहा। कम से कम एक महीना और रुकूंगा। तुम्हारी यह रसीली चूत और फटती गाँड छोड़कर कहाँ जाऊं?”


माँ ने शर्माते हुए लेकिन आँखों में चमक के साथ जवाब दिया, “राहुल… तुम जितना चाहो रहो… लेकिन अर्जुन और समीर के साथ… मुझे रोज नया नया दर्द और मज़ा दो।”


उस रात से हमारे खेल और भी बर्बर हो गए। राहुल ने ऑनलाइन कुछ टॉयज मंगवाए – बड़े-बड़े डिल्डो, वाइब्रेटर, चेन, हैंडकफ और चाबुक। पहली रात उन्होंने माँ को बेड पर पूरी तरह नंगा करके बाँध दिया। माँ के हाथ सिरहाने से बंधे थे, टांगें चौड़ी करके घुटनों पर मोड़ी गई थीं। उनकी चूत और गाँड पूरी तरह खुली हुई थी।


राहुल ने माँ की चूत में 10 इंच का मोटा डिल्डो घोंप दिया और वाइब्रेटर ऑन कर दिया। माँ तड़पने लगीं – “आह्ह्ह… राहुल… ये बहुत तेज है… मेरी चूत फट जाएगी… आआआह्ह!” मैं उनके मुंह में अपना लंड ठेल रहा था। समीर, जो उस दिन आ गया था, माँ के स्तनों को जोर-जोर से थप्पड़ मार रहा था। उनके गोरे स्तन लाल हो गए थे, निप्पल्स सूजकर चेरी जैसे लाल।


राहुल ने डिल्डो को तेजी से अंदर-बाहर करना शुरू किया। माँ की चूत से पानी की फुहारें निकल रही थीं। “रंडी माँ… आज तुझे हम तीनों मिलकर इतना चोदेंगे कि तू चल भी नहीं पाएगी!” राहुल गरजा। फिर उसने अपना 9 इंच का विशाल लंड माँ की गाँड में एक झटके में उतार दिया। माँ की चीख पूरे फ्लैट में गूंज गई। “फाड़ डाला… मेरी गाँड फट गई… लेकिन मत रुको… और जोर से मारो!”


हम तीनों ने माँ को घंटों तक रगड़ा। राहुल गाँड में, मैं चूत में, समीर मुंह में। माँ का पूरा शरीर पसीने, वीर्य और अपनी चूत के रस से भीग गया था। वे बार-बार झड़ रही थीं – एक, दो, तीन… पांच बार। आखिर में राहुल ने माँ के चेहरे पर, स्तनों पर और चूत के अंदर अपना गाढ़ा वीर्य उड़ेल दिया। मैं और समीर ने भी उनके शरीर को वीर्य से नहला दिया।


अगले दिन राहुल ने नया प्लान बनाया। शाम को सोसाइटी की बालकनी में। रात के 11 बजे थे। माँ को सिर्फ एक ट्रांसपेरेंट नाइट गाउन पहनाया गया जिसमें अंदर कुछ नहीं था। हम तीनों बालकनी में ले गए। नीचे सोसाइटी के कुछ लोग घूम रहे थे। राहुल ने माँ को बालकनी की रेलिंग पर झुका दिया। उनकी गाँड बाहर निकली हुई थी।


“देख भाभी, अगर कोई ऊपर देख लिया तो क्या होगा?” समीर हंसा। राहुल ने पीछे से माँ की चूत में लंड घुसा दिया। माँ ने मुंह पर हाथ रख लिया लेकिन कराहना नहीं रोक पाईं। “उम्म्म… राहुल… कोई देख लेगा… आह्ह… गहरी मारो…”


मैंने माँ के बाल पकड़े और उनका सिर पीछे खींचा। समीर उनके स्तन चूस रहा था। राहुल ने माँ को कुत्ते की तरह बालकनी में चोदा। हर धक्के पर माँ की चीख दबी हुई थी। नीचे से किसी की आवाज आई तो हम रुके नहीं। बल्कि और तेज चोदने लगे। माँ उस रात बालकनी में दो बार झड़ीं। राहुल ने उनके मुंह में वीर्य भर दिया ताकि चीख न निकले।


इसके बाद हमारे सेशन रोज नई ऊंचाई छूने लगे। एक दिन समीर अपने दो और दोस्तों को लेकर आया – विक्रम और रोहन। दोनों 23-24 साल के तगड़े लड़के। माँ को देखते ही उनकी आँखें चमक उठीं। “भाई, ये तेरी माँ है? वाह… क्या माल है!”


माँ शुरू में शर्मा गईं लेकिन हवस ने उन्हें तैयार कर दिया। उस रात फ्लैट में पांच मर्द थे। हमने माँ को लिविंग रूम के बीच में गलीचे पर नंगा करके खड़ा किया। फिर एक-एक करके सबने माँ के शरीर को चाटा, चूमा, काटा। विक्रम ने माँ की चूत में अपना 7 इंच का लंड डाला तो रोहन ने गाँड में। मैं और समीर उनके मुंह और हाथों का इस्तेमाल कर रहे थे। राहुल माँ के स्तनों पर चाबुक चला रहा था।


“चुदक्कड़ रंडी… पांच लंडों से चुदवा रही है… बोल, मज़ा आ रहा है?” राहुल चिल्लाया। माँ पागलों की तरह चीख रही थीं – “हां… बहुत मज़ा आ रहा है… मुझे गैंगबैंग करो… मेरी चूत और गाँड फाड़ दो… सबके वीर्य से नहला दो मुझे!”


पूरा कमरा चुदाई की आवाजों से भर गया था – थप-थप-थप, चट-चट, कराहटें और गालियां। माँ को हर पोजिशन में चोदा गया – डोगी, मिशनरी, राइडिंग, स्टैंडिंग, एयरटाइट। वे चार घंटे तक लगातार चुदती रहीं। उनके शरीर पर थप्पड़ों के निशान, चूसने के लाल दाग और वीर्य की परत चढ़ गई थी। माँ उस रात सात बार झड़ीं। पांचों ने उनकी चूत, गाँड, मुंह और पूरे शरीर पर वीर्य उड़ेल दिया।


सुबह माँ उठीं तो चलने में भी दिक्कत हो रही थी। लेकिन उनकी आँखों में संतोष था। उन्होंने नहाते हुए हम सबको बुलाया। शावर के नीचे फिर एक राउंड हुआ। विक्रम और रोहन माँ को उठाकर दीवार पर चिपकाकर चोद रहे थे। मैं उनके मुंह में था।


राहुल के जाने के बाद भी सिलसिला नहीं रुका। अब समीर, विक्रम और रोहन नियमित आने लगे। कभी-कभी हम माँ को कार में ले जाकर हाईवे पर पार्क करके चोदते। एक बार तो हमने माँ को मॉल की पार्किंग में पीछे की सीट पर तीनों तरफ से चोदा। माँ की चीखें दबी हुई थीं लेकिन हवस अनियंत्रित थी।


एक खास रात हमने माँ को बेडरूम में ले जाकर उनके हाथ-पैर बांध दिए। फिर आंखों पर पट्टी बांध दी। “आज तुझे पता भी नहीं चलेगा कौन चोद रहा है,” मैंने कहा। चार लड़के बारी-बारी से माँ की चूत और गाँड में घुसते रहे। माँ सिर्फ कराह रही थीं – “और जोर से… फाड़ दो… मैं तुम सबकी रंडी हूँ…”


हमने माँ को इतना बर्बर चोदा कि उनकी चूत और गाँड सूज गईं। लेकिन वे हर बार और मांगतीं। “बेटा… मुझे और लाओ… ज्यादा मर्द… मुझे गैंगबैंग का दीवाना बना दो…”


धीरे-धीरे माँ की हवस बढ़ती गई। अब वे खुद प्लान बनाने लगीं। एक दिन उन्होंने सोसाइटी के जिम ट्रेनर को बुलाया। 30 साल का मसल्स वाला लड़का। उसके सामने माँ ने खुद को नंगा करके कहा, “आज से तुम भी मेरे शरीर का इस्तेमाल कर सकते हो… लेकिन मेरे बेटे और दोस्तों के साथ।”


उस रात जिम ट्रेनर, राहुल (जो वापस आ गया था), समीर, विक्रम, रोहन और मैं – कुल छह मर्द। माँ को हमने लिविंग रूम में घेर लिया। छह लंड माँ के चारों तरफ थे। वे घुटनों के बल बैठकर एक-एक करके चूस रही थीं। फिर हमने उन्हें टेबल पर लिटाकर हर तरफ से चोदा। कमरा गालियों, चीखों और थपाकियों से गूंज रहा था।


“फाड़ दो इस रंडी माँ की चूत… आज इसे प्रेग्नेंट कर दो…” कोई चिल्लाया। माँ हंस रही थीं – “हां… भर दो मेरी चूत वीर्य से… मैं तुम सबकी आम रंडी बन गई हूँ…”


उस सेशन में माँ का पूरा शरीर लाल निशानों और वीर्य से ढका हुआ था। वे लगातार झड़ रही थीं। आखिर में थककर बेहोश हो गईं। हमने उन्हें साफ करके बेड पर लिटाया।


इस तरह हमारी जिंदगी एक अनंत चुदाई के चक्र में बदल गई। माँ प्रिया अब दिन भर इंतजार करतीं कि कब रात होगी और कब उनके बेटे और उसके दोस्त उनके शरीर को बर्बर तरीके से इस्तेमाल करेंगे। कभी बाथरूम में, कभी किचन में, कभी छत पर, कभी कार में। उनकी देह अब सिर्फ हवस का खिलौना थी – फटी हुई चूत, सूजी गाँड, लाल स्तन, लेकिन खुशी से चमकती आँखें।


वे अक्सर कहतीं, “अर्जुन बेटा… तुमने मुझे नई जिंदगी दी है। अब मैं बिना रोज कम से कम तीन-चार लंडों के नहीं रह सकती।”
और हम सब मिलकर उनकी इस भूख को रोज नई-नई बर्बरता से पूरा करते। यह कहानी खत्म नहीं होती… बस हर रात नई शुरुआत होती है।

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