लॉकडाउन की बेरहम गुलाम: तीन सांडों की क्रूर रातें

लॉकडाउन में फँसी रिया की चूत पहले दो जवान लौंडों से चीर-फाड़ हुई, फिर तीसरा काला विशालकाय मर्द आया। तीनों ने मिलकर उसे रातभर पटक-पटककर, थप्पड़ मारकर, गले दबाकर बर्बर चुदाई दी – चीखें, आंसू, गाढ़ा रस!

दोस्तों, नमस्कार! आज मैं अपनी वो ज्वलंत सेक्स कहानी शेयर कर रही हूँ जो मेरे शरीर को आज भी याद करके काँप उठाती है। ये कहानी है उस भयंकर लॉकडाउन की, जब पूरी दुनिया ठहर गई थी और मैं दिल्ली के गुरुग्राम में एक छोटे से फ्लैट में फँस गई थी। नाम है मेरी – रिया। उम्र 25 साल। मैं वहाँ अकेली रहती थी, जॉब के सिलसिले में। लेकिन किस्मत ने ऐसा खेल खेला कि मैं दो जवान लौंडों के बीच फँसकर उनकी हवस की भूखी रानी बन गई।


लॉकडाउन शुरू होते ही सब कुछ बंद। घर जाने का कोई रास्ता नहीं। मेरा राशन खत्म, पैसे भी कम। ठीक बगल वाले कमरे में रहता था आर्यन – 20 साल का, मेरा गाँव का ही लड़का, मामा के यहाँ से। वो मुझे दीदी कहता था। छरहरा शरीर, लेकिन कसरत की वजह से उसका बदन ऐसा कि देखते ही चूत में आग लग जाए। छाती चौड़ी, बाजू फटे हुए, और वो बात तो बाद में पता चली कि उसका लंड… भगवान ने गजब का तोहफा दिया था – दस इंच लंबा, चार अंगुल मोटा, नसों वाला, सिरा जैसे लोहे का हथौड़ा। वो अभी तक वर्जिन था, लेकिन उसकी आँखों में वो जानवर छिपा था जो एक बार जाग गया तो तूफान बन जाता।


पहले दिन ही जब मेरा राशन खत्म हुआ, मैं उसके दरवाजे पर पहुँच गई। वो मुस्कुराया, “दीदी अंदर आओ, मेरे पास तो दो महीने का स्टॉक है।” मैंने उसकी मदद ली। रोज उसके कमरे में खाना बनाती, दोनों साथ खाते। वो मुझे दीदी कहकर छेड़ता, मैं हँसती। लेकिन अंदर ही अंदर मेरी चूत भीगने लगी थी उसकी उस जवान मस्कुलर बॉडी को देखकर।


तीसरे दिन मकान मालिक का बेटा समीर – 30 साल का, पुणे से लौटा – अचानक घर आ गया। क्वारंटाइन के नाम पर अंकल ने कहा, “रिया बेटा, तुम्हारा कमरा खाली कर दो, समीर को जगह चाहिए।” मैं मना नहीं कर सकी। मेरा सारा सामान आर्यन के कमरे में शिफ्ट हो गया। अब एक ही 6×6 फुट का कमरा, एक डबल गद्दा, एक चादर। बस।


रात हुई। गर्मी भयंकर। मैंने शॉर्ट्स और टॉप पहना, वो हाफ पैंट में। हम दोनों एक ही गद्दे पर लेटे। पहले तो दूरी रखी, लेकिन नींद में उसका मोटा पैर मेरी जाँघ पर आ गया। मैं हिली तो उसका सांस मेरे गले पर। अचानक मैंने महसूस किया – उसका लंड मेरी कूल्हों से टकरा रहा था। पूरा कड़ा, गर्म, जैसे लोहे का रॉड। मेरी साँसें तेज हो गईं। मैंने चुपके से अपना टॉप उतार दिया, ब्रा भी ढीली कर दी।


सुबह 3 बजे मेरी आँख खुली। आर्यन मेरे मम्मों पर मुँह रखे चूस रहा था। दोनों निप्पल उसके दाँतों के बीच। एक हाथ मेरी शॉर्ट्स के अंदर, उँगलियाँ चूत में घुसेड़ रहा था। मैंने काँपते स्वर में कहा, “आर्यन… क्या कर रहा है तू?” वो जागा, आँखें लाल, “दीदी… माफ कर दो… लेकिन मैं… मैं काबू नहीं कर पाया।” उसकी आवाज में भूख थी। मैंने नीचे देखा – उसकी हाफ पैंट से बाहर निकला वो विशाल लंड, सिरे से पानी टपक रहा था। मेरी चूत तो पहले से तर थी।


मैंने उसे रोका नहीं। बल्कि उसके बाल पकड़े और बोली, “आज तू मेरा हो गया… लेकिन याद रख, ये चूत तुझे फाड़ डालेगी।” वो मेरे ऊपर चढ़ गया। उसके दाँत मेरे गले पर, निप्पल काटे जा रहे थे। मैं चीखी, “जोर से… और जोर से काट रे हरामी!” वो पागल हो गया। मेरी शॉर्ट्स फाड़कर फेंक दी। मेरी चूत खुली, गीली, लाल। उसने अपना लंड पकड़ा – वो दस इंच का जानवर – और एक ही झटके में पूरा घुसा दिया।
“आआआहhhhh माँ मर गई!!!” मेरी चीख पूरे कमरे में गूँजी। चूत फट गई थी।

खून जैसा कुछ निकला, लेकिन वो रुका नहीं। जैसे सांड हो, धक्के मारने लगा – हर धक्का इतना जोर का कि गद्दा हिल रहा था। “ले दीदी… ले मेरी पहली चुदाई… तेरी चूत को मैं आज रंडी बना दूँगा!” मैं रो रही थी, लेकिन चूत ने उसका स्वागत किया। दर्द के साथ मजा ऐसा कि मैंने उसके कूल्हे पकड़े और चिल्लाई, “और तेज… फाड़ डाल मेरी चूत को… मार… मार मुझे!”


पाँच मिनट में उसने मुझे कुत्ते की तरह घोड़ी बनाया। पीछे से दोनों हाथ मेरे बालों में, घोड़े की तरह लगाम खींचता हुआ पेल रहा था। हर थप्पड़ मेरे नितंबों पर – “चटाक… चटाक…” मेरी चूत से आवाजें आ रही थीं – फच… फच… फच… वो वर्जिन था लेकिन जैसे सालों से चोद रहा हो। दस मिनट बाद उसने मुझे पलटा, मेरे पैर कंधों पर रखे और मिशनरी में इतने गहरे धक्के मारे कि मेरा गर्भाशय हिल गया। मैं झड़ गई – पहली बार इतनी जोर से कि पेशाब जैसा निकला। वो भी चिल्लाया और मेरे अंदर ही अपना गाढ़ा वीर्य उड़ेल दिया। पूरा भर गया।


हम दोनों हाँफ रहे थे। लेकिन वो रुका नहीं। चाय बनाई, पी, फिर मुझे नंगा करके दीवार से सटाकर खड़ा किया। इस बार मैं उसके लंड पर चढ़ी। कूद-कूदकर चोद रही थी। उसके हाथ मेरी गर्दन दबाए हुए, “चोद रे… मेरी रंडी दीदी… चोद!” दूसरी राउंड में उसने मुझे इतना पेला कि मेरी टाँगें काँपने लगीं। तीसरी बार सुबह 9 बजे – इस बार उसने मेरे मुँह में पूरा लंड ठूँस दिया। गला फाड़ता हुआ डीप थ्रोट। मैं गैग हो रही थी, आँसू बह रहे थे, लेकिन मैंने पूरा पिया।


दिन चढ़ा। समीर अंकल का बेटा – वो 30 साल का खूंखार मर्द – मेरे पास आया। मैं बस मैक्सी पहने आर्यन को दवाई देने गई थी। समीर ने दरवाजा खोला, नंगा खड़ा था, लंड 8 इंच का मोटा, लेकिन अनुभवी। उसने मुझे अंदर खींचा, एक हाथ मुँह पर, दूसरा मेरी मैक्सी ऊपर कर दी और पीछे से एक ही झटके में चूत में घुसेड़ दिया। “चुप… चुप रंडी… आज तुझे मैं सिखाऊँगा असली चुदाई!” मैं चीख भी नहीं पाई। वो पागलों की तरह पीछे से ठोक रहा था – हर धक्का मेरी कमर तोड़ने वाला। दस मिनट तक बिना रुके। फिर मुझे घुमाया, दीवार पर चिपकाकर खड़ा किया, मेरे पैर कमर पर लपेटे और खड़े-खड़े चोदा। मेरे निप्पल कुतरता हुआ, थप्पड़ मारता हुआ। “तेरी चूत अब मेरी है… समझी?” मैं बस आहें भर रही थी, “हाँ… हाँ बाबू… और मारो… फाड़ दो!”


उसने मुझे गोद में उठाकर चोदा, फिर बेड पर पटककर मिशनरी में इतना क्रूर धक्के दिए कि मैं बेहोश होने लगी। आखिर में मेरे मुँह में झड़ गया। मैं नंगी लौट आई।
अब मेरा जीवन बदल गया। दिन में आर्यन को चोदती, उसे सुलाती, फिर समीर के पास। समीर आर्यन को लैपटॉप, गेम्स देता, वो खेलता और समीर मुझे बाथरूम में घसीट ले जाता। नहाते वक्त मेरे बाल पकड़कर खड़ा चोदता, पानी के नीचे मेरी चूत फाड़ता। आर्यन को पता चल गया तो वो जल गया, लेकिन मैंने दोनों को संभाला। “तुम दोनों मेरे हो… आज से मैं तुम्हारी कॉमन रंडी हूँ।”


पंद्रह दिन बाद समीर ने आइडिया दिया – थ्रीसम। पहली रात तीनों नंगे। आर्यन और समीर दोनों मेरे शरीर पर टूट पड़े। आर्यन मेरे मम्मे चूसता, समीर चूत चाटता। फिर आर्यन नीचे लेटा, मैं उसके ऊपर चढ़ी, समीर पीछे। दोनों लंड एक साथ – एक चूत में, एक गुदा में। दर्द ऐसा कि मैं चीखी, लेकिन मजा स्वर्ग। “फाड़ दो… दोनों मिलकर फाड़ दो मेरी रंडी चूत-गांड!” वे दोनों पागल हो गए। आर्यन नीचे से ऊपर धक्के, समीर ऊपर से नीचे। मैं बीच में सैंडविच बनी, झड़ते-झड़ते बेहोश।


उस रात उन्होंने मुझे चार बार चोदा – कभी एक मेरे मुँह में, दूसरा चूत में। कभी दोनों मेरे मुँह में बारी-बारी। समीर ने मुझे स्लैपिंग करते हुए चोदा, आर्यन ने मेरे गले दबाते हुए। मैं उनकी हर हवस पूरी करती। चूत लाल हो गई, लेकिन मैं माँगती रही – “और… और… मुझे और चोदो… मैं तुम्हारी हवस की गुलाम हूँ!”


लॉकडाउन के उन 45 दिनों में मैंने वो सब किया जो कभी सपने में भी नहीं सोचा था। दोनों लंड रोज मेरे अंदर, मेरे मुँह में, मेरे शरीर पर। कभी किचन में, कभी बालकनी में छुपकर, कभी बाथरूम में। आर्यन अब अनाड़ी नहीं रहा – वो भी समीर जैसा क्रूर चोदने वाला बन गया। समीर ने मुझे प्रेग्नेंसी रोकने वाली दवाइयाँ दीं, कंडोम तो हमने कभी यूज ही नहीं किया।


लॉकडाउन खुलने के बाद भी मेरी जिंदगी वैसी ही रही – दो लंडों की गुलाम। आर्यन और समीर दोनों दिल्ली में ही नौकरी कर रहे थे, और मैं उनके बीच फँसी रही। हर वीकेंड उनका फ्लैट मेरी चूत का मैदान बन जाता।
एक शाम समीर ने कहा, “रिया, आज कुछ नया ट्राई करेंगे।” उसने मुझे आँखों पर पट्टी बाँधी और कमरे में ले गया। अचानक मैंने महसूस किया – चार हाथ मेरे शरीर पर। आर्यन और समीर के अलावा एक तीसरा आदमी! समीर का दोस्त रोहन – 28 साल का, जिम वाला, लंड 9 इंच का मोटा और काला। वो बोला, “समीर ने बताया था तेरी चूत कितनी भूखी है… आज तुझे तीनों मिलकर चोदेंगे।”


मेरी पट्टी खुली तो तीन नंगे मर्द मेरे सामने। रोहन ने मुझे घुटनों पर बैठाया और अपना काला लंड मुँह में ठूँस दिया। गला फाड़ता हुआ। आर्यन पीछे से मेरी चूत में उँगलियाँ घुसेड़ रहा था, समीर मेरे निप्पल कुतर रहा था। फिर तीनों ने मुझे बेड पर पटका। रोहन नीचे लेटा, मैं उसके लंड पर बैठी। समीर पीछे से गुदा में घुसा – दर्द से मैं चीखी, लेकिन मजा इतना कि आँसू बहते हुए भी चूत कस गई। आर्यन मेरे मुँह में अपना लंड ठेल रहा था।


तीनों एक साथ धक्के मार रहे थे – चूत, गांड और मुँह। मेरी चीखें दबी हुईं, शरीर काँप रहा था। रोहन नीचे से ऊपर पेलता, समीर पीछे से क्रूर थप्पड़ मारता, आर्यन बाल पकड़कर गले तक लंड घुसाता। मैं बार-बार झड़ रही थी – पेशाब जैसा निकल रहा था। आखिर में तीनों ने मेरे शरीर पर अपना गाढ़ा माल उड़ेल दिया – चेहरे पर, मम्मों पर, पेट पर। मैं लथपथ, थकी हुई लेकिन संतुष्ट।


उस रात के बाद मेरी जिंदगी और खुल गई। अब कभी-कभी चार-पाँच लड़के इकट्ठा होते। मैं उनकी रंडी बनकर रहती। चूत हमेशा गीली, शरीर हमेशा तैयार। लॉकडाउन ने मुझे वो औरत बना दिया जो हवस की कोई सीमा नहीं जानती।

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