पापा और कामला की राज़ भरी चुदाई

यह कहानी उस समय की है जब मैं 12वीं कक्षा में पढ़ती थी। घर में सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन एक दिन स्कूल से जल्दी लौटने पर मैंने पापा और घर की नौकरानी कामला के बीच जो ज़ोरदार और बेहद गर्म चुदाई का नज़ारा देखा, वो आज भी मेरी यादों में ताज़ा है। यह पूरी तरह सच्ची घटना है, कोई फेक नहीं। पापा का मोटा-लंबा लंड, कामला की साँवली जवानी, उनकी हिचकिचाहट और फिर पूरी मस्ती — सब कुछ विस्तार से। बहुत ही उत्तेजक और रोमांचक कहानी best indian sex stories sirf lustystories.fun par।

मेरा नाम अदिति है। उम्र 24 साल। मेरा फिगर 32-26-32 है। मैं हमेशा से आप लोगों के साथ अपनी सच्ची चुदाई वाली कहानियाँ शेयर करती आ रही हूँ। आज फिर से मन हुआ कि कुछ लिखूँ। अगर आपको ये कहानी पसंद आए तो कृपया मुझे ज़रूर बताइए। मैं और भी अपनी पर्सनल कहानियाँ शेयर करूँगी।

उस दिन की बात है जब मैं 12वीं में थी। घर में मम्मी-पापा, मैं, छोटी बहन और छोटा भाई थे। उस दिन सुबह से ही मम्मी बहुत जल्दी-जल्दी में थीं। उन्हें मार्केट जाना था और घर की नौकरानी कामला आज नहीं आई थी। मम्मी ने मुझे भी उठाकर काम में लगा दिया। मैं जल्दी से नहा-धोकर तैयार हुई और 9 बजे स्कूल चली गई। छोटी बहन का स्कूल 11 बजे था, वो अपने टाइम पर चली गई।

वो महीने का आखिरी दिन था, इसलिए स्कूल की छुट्टी जल्दी हो गई। मैं बहुत एक्साइटेड थी कि मम्मी मार्केट से मेरे लिए कुछ लाई होंगी। दिल में सोचती हुई मैं तेज़ी से घर की तरफ बढ़ रही थी। घर पहुँचकर मैंने गेट को धक्का दिया, वो खुल गया। अंदर घुसते ही घर में सन्नाटा छाया हुआ था। कोई आवाज़ नहीं आ रही थी। मैंने सोचा कि मम्मी अभी मार्केट से वापस नहीं आई होंगी।

लेकिन तभी एक शक ने मेरे दिल को पकड़ लिया — अगर घर में कोई नहीं है तो गेट कैसे खुला हुआ है? मेरा माथा थोड़ा गरम हो गया। मैं दबे पाँव, बिल्कुल चुपके-चुपके अंदर बढ़ी। हर कमरे में झाँकने लगी। पहले ड्रॉइंग रूम, फिर किचन — कोई नहीं। फिर मम्मी-पापा के बेडरूम की तरफ गई और दरवाज़े के पर्दे के बीच से धीरे से झाँका।

जो नज़ारा दिखा, उसने मेरी साँसें रोक दीं।

पापा बेड पर बैठे हुए थे और कामला उनके सामने खड़ी थी। पापा ने उसका हाथ पकड़ रखा था और कुछ समझा रहे थे। कामला अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी। उसकी पीठ मेरी तरफ थी। वो 30-32 साल की साँवली रंग की औरत थी — गरीब घर की, पास ही रहती थी। दो बच्चों की माँ, लेकिन उसका शरीर अब भी भरावदार और आकर्षक था।

मैं वहीं फ्रीज होकर देखने लगी। best indian sex stories on lustystories.fun par

पापा कह रहे थे, “कामला, अच्छा-बुरा क्या लगा रखा है? घर में कोई नहीं है। ऐसा मौका बहुत कम मिलता है। मैं कई दिनों से नोटिस कर रहा हूँ, तू पहले जैसी दुबली-पतली नहीं रही। शरीर भर गया है, स्तन और गांड दोनों बहुत टाइट और भारी हो गए हैं।”

कामला शर्माती हुई बोली, “साब, ऐसा मत बोलिए। बाई जी आ जाएंगी। काम करना है, वरना वो चिल्लाएंगी।”

पापा मुस्कुराए, “आज बाई जी खुद सब काम करके गई हैं। तू आराम से बैठ। थोड़ी देर बात करते हैं।”

कामला बेड के किनारे बैठ गई। पापा ने उसके कंधे पर हाथ रख दिया और धीरे से बोले, “तू गरीब घर की है, दूसरों के घर बर्तन मांजती है, झाड़ू-पोंछा करती है। कितना कमा लेती होगी? आजकल महंगाई में घर चलाना कितना मुश्किल है ना?”

कामला ने सर झुकाते हुए कहा, “हाँ साब, बिल्कुल सही कह रहे हो। बच्चों को पढ़ाना, खाना-पीना… सब मुश्किल है।”

पापा ने मुस्कुराते हुए जेब से 200 रुपये निकाले और उसके हाथ में थमा दिए, “ये ले। हर महीने अलग से दूँगा। बस बाई जी को मत बताना। और हाँ… एक छोटा सा काम कर देना मेरा।”

कामला ने पैसे देखे और थोड़ी देर सोचा। फिर धीरे से बोली, “साब, पैसे किसलिए दे रहे हैं? क्या काम है?”

पापा ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “मैं तुझे पैसे दूँगा, लेकिन तुझसे कुछ लूँगा भी। तेरी बुर मरूँगा। एक बार ट्राई करके देख।”

कामला की आँखें फैल गईं। वो कुछ बोलने की कोशिश कर रही थी लेकिन पापा ने तुरंत अपनी तहमत हटा दी और अंडरवीयर नीचे कर दिया। उनका मोटा, काला और लंबा लंड बिल्कुल खड़ा होकर बाहर आ गया।

कामला के मुँह से निकल गया, “अरे बाप रे… इतना बड़ा! इसलिए बाई जी कहती थीं कि बहुत बड़ा है और उन्हें दिक्कत होती है।”

पापा हँस पड़े, “अब तू खुद देख ले। तेरी शादी हो चुकी है, दो बच्चे हैं, फिर भी लंड देखकर डर रही है?”

कामला शर्माती हुई बोली, “साब, इतना बड़ा होगा तो डरना तो पड़ेगा ही। पर… थोड़ा दर्द होगा ना?”

पापा ने उसके ब्लाउज़ के ऊपर से स्तनों को पकड़ लिया और धीरे से दबाया, “दर्द के साथ मज़ा भी आएगा। तू तो रात को अपने घर वाले को देती ही होगी। दिन में मेरा ले ले।”

कामला ने आँखें बंद कर लीं और धीरे से सर हिला दिया।

पापा ने तुरंत उसका ब्लाउज़ खोल दिया। गंदी सी काली ब्रा बाहर आई। पापा ने वो भी उतार दी। कामला के साँवले, भारी और कड़े स्तन बाहर आ गए। पापा ने उन्हें ज़ोर से पकड़कर मसला और चूसा। कामला के मुँह से सिसकारी निकल गई, “आह्ह्ह… साब… धीरे… ज़ोर से मत दबाइए यार…”

पापा ने उसे लिटाते हुए कहा, “अब मत रोक। थोड़ी देर पेलने दे।”

उन्होंने कामला की साड़ी और पेटीकोट ऊपर कर दिया। उसकी काली जाँघें और काली, रसीली चूत बिल्कुल साफ दिखाई दे रही थी। पापा ने उंगली से चूत को सहलाया और बोले, “रोज़ लंड लेती है ना तू?”

कामला शर्मा कर बोली, “हाँ साब… लेकिन आपका तो बहुत बड़ा है…”

फिर पापा ने अपना लंड उसके मुँह के पास किया। कामला ने थोड़ा सा चूमा और बोली, “साब, मुँह में नहीं… उल्टी हो जाएगी।”

पापा ने हँसकर उसके चूत पर लंड रगड़ा। कामला ने कहा, “साब पूरा मत डालना… थोड़ा सा ही…”

पापा ने कंडोम चढ़ाया, थूक लगाया और धीरे से घुसा दिया।

कामला ने आँखें फाड़कर कहा, “स्स्स्स्स्स… आह्ह्ह… साब… धीरे… बहुत मोटा है…”

पापा ने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया। हर धक्के के साथ “चप… चप… थप… थप” की आवाज़ आ रही थी। कामला के मुँह से लगातार सिसकारियाँ निकल रही थीं — “आह्ह… आह्ह्ह… चोद दो साब… बहुत अच्छा लग रहा है… और ज़ोर से…”

पापा ने उसे घुमाकर कुतिया बना दिया। कामला का चेहरा बिस्तर में, गांड ऊपर। पापा ने पीछे से ज़ोर से धक्का मारा। कामला चिल्लाई, “आआह्ह्ह्ह्ह… पूरा घुस गया… बहुत गहराई तक जा रहा है साब…”

पापा तेज़ी से चोदने लगे। कामला की गांड हिल रही थी, स्तन लटक रहे थे। वो बार-बार बोल रही थी, “चोदो साब… और चोदो… मेरी चूत की मरम्मत कर दो आज… आपका लंड सच में ज़बरदस्त है…”

पापा ने उसकी कमर पकड़कर बहुत तेज़ी से धक्के मारे। कामला के मुँह से आवाज़ें निकल रही थीं, “आह… आह… हाँ… और ज़ोर से… जैसे कभी बुर न मिली हो…”

लगभग 15-20 मिनट तक ज़ोरदार चुदाई चली। पापा ने आखिर में ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारे और झड़ गए। दोनों थककर लेट गए। कामला ने मुस्कुराते हुए कहा, “साब, आज तो बहुत मज़ा आया। आपका लंड सच में बहुत पावरफुल है।”

पापा ने उसे 250 रुपये और दिए और दोनों नॉर्मल बातें करने लगे।

मैं दरवाज़े पर खड़ी यह सब देख रही थी। मेरी चूत पूरी गीली हो चुकी थी। दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। मैं चुपके से वापस भागी, बैग उठाया और गेट से अंदर आती हुई गाना गाती हुई गई ताकि उन्हें पता चल जाए कि मैं आ गई हूँ।

अंदर जाते ही पापा लेटे हुए थे और कामला जाने को तैयार हो रही थी। वो मुस्कुराकर बोली, “आ गई बिटिया?”

मैं भी मुस्कुराते हुए बोली, “हाँ मम्मी… आ गई।”

उस दिन के बाद मैंने कई बार उन्हें चुपके से देखा। कभी-कभी कामला को पापा के साथ और भी एडवेंचरस चीजें करते देखा — जैसे बाथरूम में, या रात को जब मम्मी सो जाती थीं। लेकिन यह पहली बार का नज़ारा सबसे ज़बरदस्त था।

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